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Saturday, December 27, 2008

रफ़िक़ शेख की ग़ज़ल ने ली जबरदस्त बढ़त, छोडा खुशमिजाज़ मिटटी को पीछे

अक्तूबर के अजय वीर गीत हैं फ़िर एक बार आमने सामने, और पहले चरण के तीसरे और अन्तिम समीक्षक की पैनी नज़र है उन पर. देखते हैं कि क्या फैसला उनका-

डरना झुकना छोड़ दे

गीत बेहद प्रभावी है । बोल बढिया हैं । अच्‍छी बात ये है कि ये गीत एक संदेश देता है । संयोजन और गायकी में भी ये गीत एकदम युवा है । क्‍लब मिक्‍स में जो टेक्‍नो इफेक्‍ट्स हैं वो अच्‍छे लगते हैं । लेकिन मुझे लगता है कि पंजाबी तड़का मिक्‍स ज्‍यादा अच्‍छा बन पड़ा है । इसे हम सूफी मिक्‍स कहते तो ज्‍यादा अच्‍छा लगता । अब तक का सर्वश्रेष्‍ठ गीत ।
गीत—पूरे पांच. धुन और संगीत संयोजन-पूरे पॉँच, गायकी और आवाज़-पूरे पांच, ओवारोल प्रस्तुति-पूरे पांच
कुल- २०/२०: १०/१०, कुल अंक (पहले चरण की समीक्षा के बाद) - 20.5 / 30

ऐसा नहीं कि आज मुझे चांद चाहिए---

इस ग़ज़ल की शायरी ज़रा कमज़ोर लगी । गायकी और संगीत संयोजन उत्‍तम ।

गीत—४, धुन और संगीत संयोजन-५, गायकी और आवाज़-५, ओवारोल प्रस्तुति-४
कुल- १८/२०: ९/१०, कुल अंक (पहले चरण की समीक्षा के बाद) - 24 / 30


सूरज चांद और सितारे

ये ठीक है कि ये हिंद युग्‍म पर अब तक का सबसे बड़ा ग्रुप है । लेकिन दिक्‍कत ये है कि जिस गीत को चुना गया है वो काफी कमज़ोर है । बोलों और भावों में गहराई नहीं है । गायकी और संगीत-संयोजन अच्‍छा है । मुझे लगता है कि अगर ये बैंड उत्‍कृष्‍ट बोलों वाले गीतों को लेकर प्रस्‍तुत हो तो बहुत संभावनाएं खुल सकती हैं ।

गीत—४, धुन और संगीत संयोजन-४, गायकी और आवाज़-३, ओवारोल प्रस्तुति-४
कुल- १५/२०: ७.५/१०, कुल अंक (पहले चरण की समीक्षा के बाद) - 22.5 / 30


तेरा दीवाना हूं
आवाज़ अच्‍छी है । पर नज़्म कमज़ोर है । नज़्म के कुछ हिस्‍से अच्‍छे बन पड़े हैं । संगीत संयोजन उम्‍दा ।

गीत—४, धुन और संगीत संयोजन-५, गायकी और आवाज़-५, ओवारोल प्रस्तुति-५
कुल- १९ /२०: ९.५/१०, कुल अंक (पहले चरण की समीक्षा के बाद) - 27 / 30


ओ साहिबां

गीत को सुनते ही पहली पंक्ति में ही एक बात खटकती है । गायक को नुक्‍तों का अंदाज़ा नहीं है । ख़ामख़ां को ‘खामखां’ और ‘ख़ुमारी’ को ‘खुमारी’ गाने से गीत का मज़ा बिगड़ गया है । संगीत औसत है ।

गीत—४, धुन और संगीत संयोजन-३, गायकी और आवाज़-३, गायकी और आवाज़-३
कुल- १३ /२०: ६.५ /१०, कुल अंक (पहले चरण की समीक्षा के बाद) - 24 / 30

अक्तूबर के गीतों का पहले चरण की परीक्षा को पार करने का बाद अब तक का समीकरण इस प्रकार है -

तेरा दीवाना हूँ - २७ / ३०.
खुशमिजाज़ मिटटी - २५ / ३०.
जीत के गीत - २४.५ / ३०.
सच बोलता है - २४.५ / ३०.
संगीत दिलों का उत्सव है - २४ / ३०.
आवारा दिल - २४ / ३०.
ओ साहिबा - २४ / ३०
ऐसा नही - २४ / ३०.
सूरज चाँद और सितारे - २२.५ / ३०.
चले जाना - २१.५ / ३०.
तेरे चहरे पे - २१ / ३०.
डरना झुकना - २०.५ / ३०.
बेइंतेहा प्यार - २०.५ / ३०.
बढे चलो - २० / ३०.
ओ मुनिया - १९.५ / ३०.
मैं नदी - १९ / ३०.
राहतें सारी - १८ / ३०.
मेरे सरकार - १६.५ / ३०.



Wednesday, November 12, 2008

आधे सत्र के गीतों ने पार किया समीक्षा का पहला चरण

सितम्बर के सिकंदरों की पहले चरण की अन्तिम समीक्षा, और तीन महीनों में प्रकाशित १३ गीतों की पहले चरण की समीक्षा के बाद का स्कोरकार्ड

समीक्षक की व्यस्तता के चलते हम सितम्बर के गीतों की पहले चरण की अन्तिम समीक्षा को प्रस्तुत करने में कुछ विलंब हुआ. तो लीजिये पहले इस समीक्षा का ही अवलोकन कर लें.


खुशमिजाज़ मिटटी
बढ़िया गीत होते हुए पर भी पता नहीं क्या कमी है, गीत दिल को छू नहीं पाता। ठीक संगीत, गीत बढ़िया और गायकी भी ठीकठाक। गायक को अभिजीत की शैली अपनाने की बजाय खुद की शैली विकसित करनी चाहिये।
गीत: ३, संगीत 3, गायकी ३, प्रस्तुति ३, कुल १२/२०, पहले चरण में कुल अंक २५ / ३०.

राहतें सारी
एक बार सुन लेने लायक गीत, बोल सुंदर परन्तु संगीत ठीक है। वैसे संगीतकार की उम्र बहुत कम है उस हिसाब से बढ़िया कहा जायेगा, क्यों कि बड़े बड़े संगीतकार भी इस उम्र में इतने बढ़िया संगीत नहीं रच पाये हैं।
गीत ३.५, संगीत ३.५ गायकी ३ प्रस्तुति 3 कुल १३/२०, पहले चरण में कुल अंक १८ / ३०.

ओ मुनिया
बढ़िया गीत को संगीत और प्रस्तुति के जरिये कैसे बिगाड़ा जाता है उसका बेहद शानदार नमूना, एक पंक्ति भी सुनने लायक नहीं, जबरन एक दो लाइनें सुनी। हिन्द युग्म पर प्रकाशित गीतों में अब तक का सबसे सामान्य गीत। हिन्द युग्म को ऐसे गीतों से बचना चाहिये। सिर्फ वर्चूअल स्पेस भरने के लिये ऐसी रचनायें प्रकाशित करने का कोई फायदा नहीं।
गीत 5, संगीत ०, गायकी ०, प्रस्तुति ० कुल ५/२०, पहले चरण में कुल अंक १९.५ / ३०.

सच बोलता हैएक बार फिर सुन्दर गज़ल, गायकी और संगीत प्रस्तुति एकदम बढ़िया होते हुए भी गीत को एक बार सुन लेने के बाद सुनने का मन नहीं होता। कुछ चीजों में कमी दिखाई नहीं देती, उसको वर्णित नहीं किय़ा जा सकता कि इस गीत में यह कमी है पर वो कमी अखरती रहती है, मन में कसक सी रहती है। इस गीत को सुनने के बाद भी सिसा ही महसूस होता है।
गायक की आवाज में मो. रफी साहब की आवाज की झलक दिखती (सुनाई देती) है।
गीत ४, संगीत ४.५, गायकी ३, प्रस्तुति ४.५ कुल १६/२०, पहले चरण में कुल अंक २४.५ / ३०.

सितम्बर माह की समाप्ति के साथ ही हमारे वर्तमान सत्र का आधा सफर पूरा हो गया. हालाँकि बीते शुक्रवार तक हम १९ नए गीत प्रकाशित कर चुके हैं, पर सितम्बर तक प्रकाशित सभी १३ गीत अपनी पहले चरण की समीक्षा का समर पार चुके हैं. आईये देखते हैं इन १३ गीतों में कौन है अब तक सबसे आगे. अब तक का स्कोर कार्ड इस प्रकार है.

खुशमिजाज़ मिटटी - २५ / ३०.
जीत के गीत - २४.५ / ३०.
सच बोलता है - २४.५ / ३०.
संगीत दिलों का उत्सव है - २४ / ३०.
आवारा दिल - २४ / ३०.
चले जाना - २१.५ / ३०.
तेरे चहरे पे - २१ / ३०.
बेइंतेहा प्यार - २०.५ / ३०.
बढे चलो - २० / ३०.
ओ मुनिया - १९.५ / ३०.
मैं नदी - १९ / ३०.
राहतें सारी - १८ / ३०.
मेरे सरकार - १६.५ / ३०.

हम आपको याद दिला दें कि कुल अंक ५० में से दिए जायेंगे, यानी अन्तिम दो निर्णायकों के पास २० अंक हैं, अन्तिम चरण की रेंकिंग जनवरी में होगी, जिसके बाद ही अन्तिम फैसला होगा, सरताज गीत का और टॉप १० का भी, फिलहाल हम मिलेंगे आने वाले रविवार को, अक्टूबर के अजयवीर गीतों की पहली समीक्षा लेकर.

हिंद युग्म, आवाज़ द्वारा संगीत के क्षेत्र में हो रहे इस महाप्रयास के लिए अपना बेशकीमती समय निकल कर, युवा कलाकारों को प्रोत्साहन/ मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से आगे आए हमारे समीक्षकों के प्रति हिंद युग्म की पूरी टीम अपना आभार व्यक्त करती है.


Monday, September 29, 2008

तीसरी बार हुई अगस्त के अश्वारोही गीतों की परख

पहले चरण की तीसरी और अन्तिम समीक्षा को प्रस्तुत करने में कुछ विलंब हुआ, दरअसल हमारे माननीय समीक्षक जब पहले दो गीतों की समीक्षा हमें भेज चुकें थे तब उन्हें किसी व्यक्तिगत कारणों के चलते समयाभाव का सामना करना पड़ा. इसी कारण अन्तिम तीन गीतों की समीक्षा उन्होंने काफ़ी संक्षिप्त की है पहले दो गीतों की तुलना में. लेकिन अंक समीकरण हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं सरताज गीत चुनने की प्रक्रिया में. तो प्रस्तुत है पहले चरण के अन्तिम समीक्षक के विचार हमारे ऑगस्त के अश्वारोही गीतों पर.

मैं नदी
गाना शुरू हुआ और सिग्‍नेचर मूजिक शुरू हुआ तो बहुत उम्मीदें बंधी ।
सुंदर सिग्‍नेचर तैयार किया है । और जब मानसी पिंपले की आवाज़ की आमद होती है तो एक तरह की ताज़गी का अहसास होता है । गाने का मुखड़ा बेहतरीन है । रिदम बेहतरीन तरीक़े से रखा गया है । पर पता नहीं क्‍यों मुझे हिंदी सिनेमा संसार के किसी गाने की झलक लगी इस गाने की ट्यून में ।
जब हम पहले अंतरे पर पहुंचे तो ये सुनकर कष्ट हुआ कि मिक्सिंग में कमी रह गयी है और गायिका मानसी की आवाज़ डूब गयी है । वाद्यों की आवाज़ ने बोलों की स्पष्ट कर ली है । पहले अंतरे के बाद का इंटरल्‍यूड बढिया है ।
दूसरे अंतरे में भी गायिका की आवाज़ स्पष्ट नहीं है । जहां तक लिरिक्‍स का सवाल है तो मुझे ऐसा महसूस होता है कि संगीतकार के लिए इस गाने को ट्यून में उतारना मुश्किल काम रहा होगा । गीत के विन्‍यास में ‘गेय तत्व’ की कमी है । पर गाने की भावभूमि सुंदर है ।
इसके अलावा एक बात और कहना चाहता हूं । मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि गाने की रिकॉर्डिंग साफ़ नहीं है । मैं आवाज़ की नहीं ऑरकेस्‍ट्रा की बात कर रहा हूं । बहुत ही दबा-दबा सा संगीत लग रहा है । चमक क्यों नहीं आ रही है ।
मेरी राय है कि इस गाने की धुन एक बार और बनाई जाये ।
गीत सुंदर है । गायिका में भी संभावनाएं हैं और संगीतकार में भी ।
तो फिर इतनी अच्‍छी रचना को क्यों ना फिर से सजाएं ।
गीत ४/५ । धुन और संगीत संयोजन ३/५ । गायकी और आवाज़ पर ३/5 और ओवर ऑल २/५ । कुल १२/२० यानी
6/10

कुल अंक अब तक - १९ / ३०

बेंतेहा प्यार
इस शानदार गाने के लिए मैं सुदीप यशराज को बधाई देता हूं । सुदीप कितने बरस हैं पता नहीं । तस्वीर से इनका बचपना साफ़ नज़र आता है ।
पर संगीत के मामले में सुदीप बचपने की बजाय परिपक्वता से पेश होते लगते हैं ।
शायद सुदीप जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए । उन्हें क्या करना है ।
पिछले जितने भी गीतों की समीक्षा मैंने की है उनमें से ये गाना मुझे बेहद सधा हुआ लगा । कहूं कि सबसे ज्यादा सधा हुआ ।
जिस तरह वे अंतरे पर जाकर 'सम' लगाते हैं और फिर 'वो हो हो ' शुरू करते हैं वो भी कमाल है ।
गीत सुंदर है । गायकी बढि़या है । गीत रचना में एक जगह 'मैंने बूंद बूंद भरी है अपने आंसू से' की बजाय 'अपने आंसुओं से- होना चाहिए था ।
पर इस बात को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है ।
गिटार का इसा गाने में सुंदर प्रयोग किया है ।
सुदीप इंडीपॉप सर्किट पर सक्रिय कई नामी कलाकारों को मात देने की हैसियत रखते हैं । चाहे रिदम हो । म्यूजिक का बाकी अरेन्जमेन्ट या फिर गायकी और लेखन ।
सभी पक्ष सुंदर । गाने को दस में से दस नंबर ।

कुल अंक अब तक - २०.५ / ३०


जीत के गीत
इस गाने के नंबर इस तरह हैं ।
१. गीत- 4
२. धुन और संगीत संयोजन—4
३. गायकी और आवाज़—4
४. ओवारोल प्रस्तुति—5
ये गाना बिना भारी भरकम शब्दों के बड़ी सरलता के साथ जोश और उमंग की बात करता है । गायकी और संगीत संयोजन भी कमाल का है । कुल मिलाकर 17/ 20 अंक । यानी ८.५/१०

कुल अंक अब तक - २४.५ / ३०

चले जाना
१. गीत--- 4/5
२. धुन और संगीत संयोजन 4/5
३. गायकी और आवाज़—5/5
४. ओवारोल प्रस्तुति—5/5
एक रचना के स्‍तर पर ग़ज़ल औसत है । लेकिन रूपेश की आवाज़ में एक ग़ज़ल गायक का पूरा संयम है । और जब धुन भी खुद उन्‍होंने बनाई तो ये ग़ज़ल निखर आई है ।
कुल 18 / 20 यानी ९/१०

कुल अंक अब तक - २१.५ / ३०


इस बार
1. गीत—2/5
2. धुन और संगीत संयोजन—3/5
3. गायकी और आवाज़—3/5
4. ओवारोल प्रस्तुति- 3/5
बेहद औसत गीत । बेहद आसान गायकी । बेहद औसत प्रस्‍तुति ।
इस गीत को बेहद शोख़ और चमकीला रूप दिया जा सकता था ।
कुल मिलाकर ११ /२० यानी ५.५/१०

कुल अंक अब तक - १६.५ / ३०.

चलते चलते -
तो इस तरह अब तक सभी गीतों में सबसे आगे है "जीत के गीत" और ठीक पीछे है "संगीत दिलों का ..." और "आवारा दिल". वहीँ "मैं नदी" और "मेरे सरकार" " बढे चलो" और "बेंतेहा प्यार" सभी समीक्षकों की उम्मीदों पर एक से खरे नही उतर पाये. " चले जाना" और "तेरे चहरे पर" कभी भी बाज़ी पलट सकते हैं. अगले सप्ताह मिलेंगे आपसे सितम्बर के सिकंदर गीतों कि पहली समीक्षा लेकर. तब तक इजाज़त.

Sunday, August 17, 2008

समीक्षा के महासंग्राम में, पहले चरण की आखिरी टक्कर

आज हम समीक्षा के पहले चरण के अन्तिम पड़ाव पर हैं, तीसरे समीक्षक की रेटिंग के साथ जुलाई के जादूगरों को प्राप्त अब तक के कुल अंकों को लेकर ये गीत आगे बढेंगें अन्तिम चरण की समीक्षा के लिए, जो होगा सत्र के अंत में यानी जनवरी २००९ में, जिसके बाद हमें मिलेगा, हमारे इस सत्र का सरताज गीत. तो दोस्तों चलते हैं पहले चरण की समीक्षा में, अपने तीसरे और अन्तिम समीक्षक के पास और जानते हैं उनसे, कि उन्होंने कैसे आँका हमारे जुलाई के जादूगर गीतों को -
(पहले दो समीक्षकों के राय आप यहाँ और यहाँ पढ़ सकते हैं)

गीत समीक्षा Stage 01, Third review

संगीत दिलों का उत्सव है ....

पहला गीत है - संगीत दिलों का उत्सव है...
इस गाने की उपलब्धि है मुखड़ा --'संगीत दिलों का उत्सव है-
बहुत सुंदर है ये गीत ।
हालांकि मुझे लगता है कि इस गीत में भी गेय तत्व मुश्किल हो गए हैं । रचना के दौरान कई पंक्तियां लंबी और कठिन
बन गयी हैं । पर कुल मिलाकर इन कमियों को इसकी धुन और गायकी में ढक लिया गया है ।
गायकों की आवाज़ें बढि़या लगीं । और धुन भी ।
आलाप सुंदर जगह पर रखे गए हैं ।
गाने का इंट्रोडक्‍शन म्यूजिक बहुत लंबा है पर मधुर है । गिटार और ग्रुप वायलिन की तरंगें बारिश का असर देती हैं ।
ये प्रयोग वाकई शाबाशी के लायक़ है ।
लगता है कि संगीतकारों ने सलिल चौधरी से खूब प्रेरणा ली है ।
इंट्रो में गायक की आमद से पहले का सिग्‍नेचर बहुत शानदार है ।
बस एक ही कमी लगी और वो थी मिक्सिंग ।
कई जगहों पर आवाज़ डूब गयी है ।
गायकी में जो समस्याएं हैं उन पर एक नज़र 'सुर खनकते हैं' में 'ते' को डुबा दिया गया है । ऐसा लगता है कि
इसे धुन पर फिट करने के लिए 'खनक हैं' की ध्‍वनि रखी गयी है । खनकते हैं पूरा सुनाई नहीं देता ।
आलाप में जिस तरह मॉडर्न बीट्स हटकर तबला आ जाता है वो कमाल का है ।
इस गाने में संगीतकारों की प्रतिभा की बहुत झलक नज़र आती है ।
बेहद संभावनाशील कलाकार हैं संगीतकार । कहना ना होगा कि इन तमाम गानों में संगीत के मामले में ये गाना
सबसे ज्यादा परिपक्व है ।
दस में से दस अंक ।

संगीत दिलों का उत्सव है... को तीसरे निर्णायक द्वारा मिले 10 /10 अंक, कुल अंक अब तक 24 /30

बढे चलो.

दूसरा गीत है "बढ़े चलो…", मुझे ये गीत बाकी तमाम गीतों से ज्यादा भव्य लगा ।
संवाद के साथ ओपनिंग और ढोल ढमाका कमाल का है ।
पर जैसे ही गाना एस्‍टेब्लिश होता है । गाने की मिक्सिंग की पोल खुलने लगती है ।
मुझे बार बार लग रहा है कि इस गाने की मिक्सिंग दोबारा करनी चाहिए ।
ताकि आवाज़ें प्रॉपर तरीक़े से उभर कर आएं ।
महिला स्वर ओपनिंग में तो एकदम साफ़ है ।
पर पुरूष स्वर काफी खोखला/ हॉलो लग रहा है ।
'बदल रहा है हिंद' के बाद जब 'बढ़े चलो' आता है तब भी महिला स्वर चमकदार है पर पुरूष स्वर गड़बड़ है । डूबा डूबा
सा लग रहा है । फिर महिला स्वर का आलाप संभवत: रीवर्ब/ प्रतिध्‍वनि डालने की वजह से पूरी तरह अस्पष्ट हो गया है ।
हम आज फ़लक पर बिछी हुई से लेकर सूरज पिघलाने वाले हैं तक आवाजें हॉलो लगती हैं ।
'बदल रहा है हिंद' से गाना फिर से चमक जाता है ।
गाने की बीट्स बढिया हैं । पर दूसरे अंतरे के बाद बीट्स इतनी प्रोमिनेन्‍ट हो गयी हैं
कि आवाजें दब रही हैं । अगर आप वाकई इस गाने को दोबारा मिक्‍स करें और इसे चमका दें तो
इस रचना के साथ न्याय हो जायेगा ।
पुरूष गायकों को उच्चारण पर मेहनत करनी होगी । 'भावना' को 'बावना' गाया गया है ।
इसे सुधारा जा सकता है ।
लेकिन इस गाने को इन तमाम बातों के बावजूद मैं दस में से सात अंक दे रहा हूं । तो इसकी वजह है गाने की रचनाशीलता और
धुन की प्रयोगधर्मिता ।
इस गाने में अपार संभावनाएं हैं । रचना का पक्ष तो वाक़ई कमाल है । इसे आप हिंद युग्म का परिचय गीत
कहते हैं । ये भारत के तमाम युवाओं का परिचय गीत बनने का हक़ रखता है ।
बढे चलो, को तीसरे निर्णयक से अंक मिले 7 /10, कुल अंक अब तक 20 /30.

आवारा दिल.

तीसरा गीत है, “आवारा दिल…”। इस गाने को पॉप गाने की शैली में बनाया गया है ।
गायक की आवाज़ में थोड़ी नर्मी है । पर एक लोच भी है । सुबोध ने इस गाने को बहुत बढिया गाया है ।
धुन बढिया है ।
मुझे लगता है कि इस गाने को थोड़े और जोश के साथ गाया जाना चाहिए था । धुन में एक उछाल होता तो अच्‍छा लगता ।
इस गाने में हर बार इंटरल्‍यूड म्‍यूजिक को 'सम' पर ठहराकर फिर गायक की आवाज़ को इंट्रोड्यूस करना अच्छा लगता है ।
दूसरा अंतरा मुझे सबसे अच्छा लगा ।
आवारा दिल को मैं दस में से नौ नंबर दूंगा ।
सुंदर काम किया है ।
आवारा दिल, को तीसरे निर्णायक से मिले 9 / 10, कुल अंक अब तक 24 /30.


तेरे चेहरे पे ...

आखिरी गीत एक गज़ल है “तेरे चेहरे पे…”। जैसे ही मैंने इस ग़ज़ल को सुनना शुरू किया तो सबसे पहले ‘आवाज़’ के पन्ने पर दोबारा जाना पड़ा और देखना पड़ा कि ये गायक कौन है । निशांत अक्षर एक अनूठा नाम लगा । आवाज़ के अनुरूप अनूठा । संगीतकार अनुरूप में मुझे संभावनाएं नज़र आ रही हैं । मेरा मानना है कि गजल कंपोज़ करना आसान काम नहीं है । संगीतकार को इस ‘झमाझम’ दौर में खुद को बहुत संयत और संवेदनशील रखना पड़ता है । और ‘अनुरूप’ को इस मामले में सौ में से दो सौ नंबर देने चाहिए ।
अनुरूप में वाक़ई समझदारी है । गजल की धुन बहुत प्यारी है । सादा है । जिस तरह से ‘और’ को लहराके गवाया है वो मन को लुभा जाता है । रिदम सेक्‍शन बढिया है । अच्छी बात ये है कि गजल के सुनहरे दौर के किसी भी कंपोजर की छाया नहीं है कंपोजीशन में । इसमें आधुनिकता भी है और परंपरा भी ।
तकनीकी द़ृष्टि से भी मैं इस मिक्सिंग से पूरी तरह संतुष्ट हूं । मुझे नहीं पता कि इसे भी आप सभी ने अपने अपने शहरों में अलग अलग रहकर तैयार किया या सिटिंग कर सके । पर कुल मिलाकर जो रचना तैयार हुई वो अच्छी है । बल्कि उत्कृष्ट है ।
अब एक तल्ख़ बात कहूंगा । शायर के लिए । ये जरूरी भी है । मनुज मेहता की शायरी बहुत साधारण है । बेहतर होता कि इतने अच्छे गायक और संगीतकार की तरह शायर से कुछ बेहतर लिखवाया जाता । ग़ज़ल सचमुच बहुत ही साधारण है । अगर इस छोटी सी गजल के हर शेर में गहराई होती तो यकीन मानिए ये रचना डाउनलोड होकर कई दिनों तक मेरे कंप्‍यूटर पर बज रही होती । गायक और संगीतकार को बधाईयां, लटके झटकों से बचने के लिए ।
8/10
तेरे चेहरे पे..., को तीसरे निर्णायक ने मिले 8 /10, कुल अंक अब तक 21 /30

चलते चलते...

पहले चरण के बाद जुलाई के जादूगर ४ गीतों की पोजीशन इस प्रकार है -

आवारा दिल २४ / ३०
संगीत दिलों का उत्सव है २४ / ३०
तेरे चेहरे पे २१ / ३०
बढे चलो २० / ३०


हम आपको याद दिला दें कि कुल अंक ५० में से दिए जायेंगे, यानी अन्तिम दो निर्णायकों के पास २० अंक हैं, अन्तिम चरण की रेंकिंग जनवरी में होगी, जिसके बाद ही अन्तिम फैसला होगा, सरताज गीत का और टॉप १० का भी, फिलहाल हम मिलेंगे अगले महीने के पहले रविवार को, अगस्त के अश्वरोही गीतों की पहली समीक्षा लेकर.

हिंद युग्म, आवाज़ द्वारा संगीत के क्षेत्र में हो रहे इस महाप्रयास के लिए अपना बेशकीमती समय निकल कर, युवा कलाकारों को प्रोत्साहन/ मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से आगे आए हमारे समीक्षकों के प्रति हिंद युग्म की पूरी टीम अपना आभार व्यक्त करती है.

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