Showing posts with label sankar jaykishan. Show all posts
Showing posts with label sankar jaykishan. Show all posts

Saturday, June 4, 2016

"हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गाएगा...", क्यों राज कपूर ने किया था महेन्द्र कपूर से गीत गवाने का वादा?


एक गीत सौ कहानियाँ - 83
 

'हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गाएगा...' 



रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना
रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'।इसकी 83-वीं कड़ी में आज जानिए 1964 की मशहूर फ़िल्म ’संगम’ के गीत "हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा..." के बारे में जिसे लता मंगेशकर, मुकेश और महेन्द्र कपूर ने गाया था। बोल शैलेन्द्र के और संगीत शंकर जयकिशन का। 


बात 60 के दशक के शुरुआत की होगी, एक स्टेज शो के लिए राज कपूर ताशकन्द गए और अपने साथ महेन्द्र कपूर जी को भी ले गए। ताशकन्द उस समय USSR का हिस्सा हुआ करता था। और रूस में राज कपूर बहुत लोकप्रिय थे। राज कपूर का शो ज़बरदस्त हिट शो, इस शो में राज कपूर ने भी कुछ गाने गाए, उन गानों पर महेन्द्र कपूर ने हारमोनियम बजा कर राज कपूर का साथ दिया। इस शो के लिए महेन्द्र कपूर ने ख़ास तौर से हिन्दी गानों का रूसी भाषा में अनुवाद करके तैयार कर रखा था। जब उनके गाने की बारी आई तब उन्होंने फ़िल्म ’हमराज़’ का गीत "नीले गगन के तले..." को रूसी भाषा में जो गाया तो लोग झूम उठे। और महेन्द्र कपूर का नाम लेकर "once more, once more" का शोर मचाने लगे। जनता का यह रेस्पॉन्स देख कर राज कपूर ने महेन्द्र कपूर से कहा कि "देखा, एक कपूर ही दूसरे कपूर को मात दे सकता है!" शायद इसलिए कहा होगा कि राज कपूर की परफ़ॉरमैन्स के बाद महेन्द्र कपूर को रूसी जनता से उनके गीत का जो रेसपॉन्स मिला वो राज कपूर उम्मीद नहीं कर रहे थे। ज़ाहिर है कि राज कपूर के रेसपॉन्स से महेन्द्र कपूर को रेसपॉन्स ज़्यादा मिला। राज कपूर महेन्द्र कपूर से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने महेन्द्र से कहा कि मैं चाह कर भी मेरे गाने तुमसे नहीं गवा सकता क्योंकि तुम तो जानते ही हो कि मेरी आवाज़ मुकेश है, मेरे सारे गाने मुकेश ही गाते हैं। महेन्द्र जी बोले, "मुकेश जी मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं, इसलिए मैं चाहता भी नहीं कि उनके गाने मैं गाऊँ"। इस पर राज साहब बोले कि लेकिन मैं एक वादा करता हूँ कि मेरी अगली फ़िल्म में जो दूसरा हीरो होगा, उसके लिए तुम ही गाना गाओगे। महेन्द्र कपूर ने मज़ाक में राज कपूर से कहा कि "राज जी, आप बहुत बड़े आदमी हैं, भारत लौट कर आपको यह वादा कहाँ याद रहेगा?" उस वक़्त राज कपूर सिगरेट पी रहे थे, सिगरेट की एक कश लेकर मुंह से निकाली सिगरेट और जलती हुई सिगरेट से अपने हाथ पे एक निशान दाग़ दिया और बोले, "तुम फ़िकर मत करो, यह जला निशान मुझे अपना वादा भूलने नहीं देगा।"

इस घटना के बाद जब राज कपूर और महेन्द्र कपूर हिन्दुस्तान लौट कर आए तो राज कपूर ने अपने वादे के अनुसार अगली ही फ़िल्म ’संगम’ में दूसरे नायक राजेन्द्र कुमार के लिए महेन्द्र कपूर की आवाज़ में गाना रेकॉर्ड किया और ताशकन्द में किए अपने वादे को निभाया। गाना था "हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गाएगा, दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जाएगा..."। इस गीत के साथ महेन्द्र कपूर की कुछ यादें मुकेश की भी जुड़ी हुई हैं। विविध भारती के ’उजाले उनकी यादों में’ कार्यक्रम में इस बारे में महेन्द्र जी ने कहा था, "मुझे जब "नीले गगन के तले..." के लिए फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड मिला, तो किसी भी दूसरे सिंगर ने मुझे फ़ोन करके बधाई नहीं दी। एक रात मेरा नौकर आकर मुझसे कहा कि बाहर मुकेश जी आए हैं, आप से मिलना चाहते हैं। मैं तो हैरान रह गया कि मुकेश जी आए हैं मेरे घर। मैं भागता हुआ बाहर गया तो बोले, आओ यार, मेरी पत्नी से कहा कि भौजी, लड्डू शड्डू बाँटों। फिर मुझसे कहा कि ऐसे ही काम करते रहो, बहुत अच्छा होगा तुम्हारा। उन्हें कोई कॉम्प्लेक्स नहीं था कि कौन छोटा है कौन बड़ा है। एक बार मेरे बेटे के स्कूल के प्रिन्सिपल ने मुझसे अनुरोध किया कि आप मुकेश जी से अनुरोध करें कि हमारे स्कूल के फ़ंक्शन में आएँ। मैंने कहा कि ठीक है मैं उनसे कहूँगा। उस समय हम ’संगम’ के गीत की रेकॉर्डिंग् पर मिल रहे थे। मैंने उनसे कहा कि ऐसा है, मेरे बेटे के स्कूल फ़ंक्शन में आप गाएँगे? उन्होंने कहा कि हाँ, गा दूँगा। तो मैंने उनसे पूछा कि आप पैसे कितने लेंगे? उन्होंने कहा कि वो 3000 लेते हैं। मुकेश जी ने यह भी कहा कि वो वहाँ पर ज़्यादा देर नहीं ठहरेंगे, गाना गा कर आ जाएँगे। तो मैंने स्कूल के प्रिन्सिपल से कह दिया कि मुकेश जी गाएँगे और गाना हो जाने के बाद उन्हें 3000 रुपये उसी वक़्त दे दिया जाए। तो मुकेश जी वहाँ गए, सात-आठ गाने गाए, लेकिन पैसे लिए बिना ही वापस चले गए। अगले दिन जब वो मुझसे मिले तो कहा कि कल बड़ा मज़ा आया स्कूल में बच्चों के साथ। मैंने पूछा कि मुकेश जी, आपने पैसे तो ले लिए थे ना? वो बोले, कैसे पैसे? मैंने कहा कि आप ने जो कहा था कि 3000 रुपये? बोले, मैंने कहा था कि मैं 3000 लेता हूँ, पर यह नहीं कहा था कि मैं 3000 लूँगा। महेन्द्र, एक बात बताओ, अगर कल नितिन उसके महेन्द्र अंकल से कहेगा कि चाचाजी, आप मेरे स्कूल में गाना गाओ तो क्या आप उसके लिए पैसे लोगे?" लीजिए अब अप फिल्म 'संगम' का वही गीत सुनिए। 




अब आप भी 'एक गीत सौ कहानियाँ' स्तंभ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें ईमेल भेजें soojoi_india@yahoo.co.in के पते पर। 



आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 




The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ