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Tuesday, May 24, 2011

लव यू मिस्टर कलाकार है सुरीले प्रेम गीतों से सजी अल्बम

Taaza Sur Taal (TST) - 14/2011 - Love U Mr Kalakaar

राजश्री प्रोडक्शन ने हमेशा ही साफ़ सुथरी संगीतमयी फिल्मों की परंपरा को निभाया है. पर मुझे लगता है कि वो अपनी फिल्मों के संगीत को सही रूप से प्रोमोट नहीं करते यही वजह है कि उनकी फिल्मों का संगीत अच्छा होने के बावजूद बहुत अधिक लोगों तक नहीं पहुँच पाता, हमेशा माउथ टू माउथ पब्लिसिटी काम नहीं करती है ये बात अब उन्हें समझनी चाहिए. तुषार कपूर और अमृता राव अभिनीत उनकी नयी फिल्म "लव यू मिस्टर कलाकार" एक और प्रेम कहानी है, जाहिर है संगीत में माधुर्य जरूरी है, संगीतकार के रूप में चुने गए हैं बेहद प्रतिभाशाली सन्देश शान्दलिया और गीत लिखे हैं नवोदित गीतकार मनोज मुन्तशिर ने. चलिए जरा सी चर्चा करें इस अल्बम में सजे गीतों की आज.

अंग्रेजी शब्दों क इस्तेमाल अब राजश्री वालों को भी रास आ रहा है. "सरफिरा सा है दिल" में श्रेया की अधुर आवाज़ है, खूबसूरत बोल हैं और मधुर धुन है सन्देश की, पर मैं समझ नहीं पाता हूँ, नीरज श्रीधर से ये गीत क्यों गवाया गया. आज जब इंडस्ट्री में इतने नए पुराने गायक मौजूद हैं संगीतकार नीरज से ऐसे गीत गवाते हैं जो उनका फोर्टे नहीं है ये अजीब लगता है. मुझे लगता है कि ये गीत और भी बढ़िया बन सकता था अगर सही गायक से इसे गवाया जाता.

विजय प्रकाश और गायत्री गांजावाला की आवाजों में अगला गीत "तेरा इंतज़ार", यहाँ भी एक बार फिर अंग्रेजी शब्दों से शुरुआत है. गाने का पेस बहुत बढ़िया है, विजय की आवाज़ में कशिश है, मनोज के शब्द परफेक्ट हैं. कुल मिलाकर एक खूबसूरत गीत है. गायत्री की आवाज़ दूसरे अंतरे से शुरू होती है जिसके बाद गीत और भी दिलचस्प हो जाता है. हमारी तरफ से पूरे अंक इस गीत को

"भूरे भूरे बादल, भीगा भीगा जंगल, नीला नीला पानी, शामें हैं सुहानी"....मुझे ये अगला गीत बेहद पसंद आया. श्रेया ने गायिकी में जो अदाएं उठायी है उसे मैच किया है बहुत अच्छे से कुणाल गांजावाला ने. बांसुरी की सुन्दर तानें पहाड़ों में वादियों में ले जाती है. एक बोन फायर में कैम्पिंग करते जोड़े की फीलिंग्स को बहुत अच्छे से मनोज ने अपने शब्दों से उभारा है और सन्देश ने जान फूंक दी है इस गीत में, अंत तक बांसुरी साथ चलती है और मन को मोहे रखती हैं.

शीर्षक गीत कुणाल और गायत्री की युगल आवाजों में है. कुणाल के स्वाभाविक अंदाज़ के अनुरूप है ये गीत. एक कलाकार जो अपने रंगों में दुनिया को रंगता है उसको समर्पित है ये गीत. अच्छा फिल्मांकन इस गीत को परदे पर बढ़िया बना देगा इसमें कोई शक नहीं. याद आया मुझे कि जीतेन्द्र ने एक मूर्तिकार की भूमिका की थी "गीत गया पत्थरों ने" में और अब एक तुषार पेंटर बने हैं इस सदी के. वेल वी टू लव ऑल अवर कलाकार.

अब बारी उस गायक की जिसकी आवाज़ का टिम्बर कहीं दूर ही उड़ा ले जाता है, जी हाँ मेरे पसंदीदा मोहित चौहान जिनके साथ है शिवांगी कश्यप (क्या शिवांगी, शिबानी कश्यप से सम्बंधित है, अगर आपको पता हो तो बताएं) जिनकी आवाज़ में ताजगी है. "वक्त ये रूठ के हाथ से छूट के जाने फिर आये न आये, कहीं से चली आ...", सबसे अच्छी बात है कि गीत सामान्य अंतरा मुखडा फोर्मेट में नहीं है. एक बहाव है जहाँ दोनों गायक आपको बहा ले जाते हैं. बहुत बढ़िया गीत है और हम दे रहे हैं एक और थम्प्स अप.

जेनिस सोबित और विन्नी हट्टन की आवाजों में एक अंग्रेजी गीत भी है "रीचिंग फॉर थे द रेनबो" और कुछ रीमिक्स भी हैं. कुल मिलाकर मुझे उम्मीद से अधिक मिला इस अल्बम से, संगीत के ऐसे दौर में जहाँ मेलोडी लगभग गायब सी हो चली है, फिल्म का संगीत एक ताज़ा झोंके जैसा है पर आपकी संगीत पिपासा को पूरी तरह से संतुष्ट कर पाता हो ऐसा भी नहीं है. इस दौर में लगता है कि एक झोंका नहीं आंधी चाहिए. बहरहाल सन्देश और मनोज मुन्तशिर की ये जोड़ी उम्मीद जगाती है. और आने वाले समय में हम इनसे और भी अच्छे संगीत प्रयासों की निश्चित ही उम्मीद रख सकते हैं.

श्रेष्ठ गीत – कहीं से चली आ, भूरे भूरे बादल, तेरा इन्तेज़ार
आवाज़ रेटिंग – ८/१०


और अब सुनिए इन गीतों को - सौजन्य रागा डॉट कॉम



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं। "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है। आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रूरत है उन्हें ज़रा खंगालने की। हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं।

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