Showing posts with label s p balasubramanium. Show all posts
Showing posts with label s p balasubramanium. Show all posts

Tuesday, May 17, 2011

मेरे जीवन साथी, प्यार किये जा.....एक अनूठा गीत जिसे लिखना वाकई बेहद मुश्किल रहा होगा आनंद बख्शी साहब के लिए भी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 658/2011/98

लिफ़्ट के अंदर का सीन है। नायक और नायिका अंदर हैं। बीच राह पर ही नायक लिफ़्ट की बटन दबा कर लिफ़्ट रोक देता है। नायिका कहती है कि उसे हिंदी की कक्षा में जाना है, हिंदी की क्लास है। लेकिन नायक कहता है कि हिंदी की क्लास वो ख़ुद लेगा और वो ही उसे हिंदी सिखायेगा। लेकिन मज़े की बात तो यह है कि नायक दक्षिण भारतीय है जिसे हिंदी बिल्कुल भी नहीं आती। तो साहब यह था सीन और इसमे एक गीत लिखना था गीतकार आनंद बख्शी साहब को। अब आप ही बताइए कि इस सिचुएशन पर किस तरह का गीत लिखे कोई? नायक को हिंदी नही आती और उसे हिंदी में ही गीत गाना है। इस मज़ेदार सिचुएशन पर बख्शी साहब नें एक कमाल का गाना लिखा है जिसे सुनते हुए आप भी मुस्कुरा उठेंगे, और गीत में नायिका तो हँस हँस कर लोट पोट हो रही हैं। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों, आज 'गान और मुस्कान' की आठवीं कड़ी में प्रस्तुत है कमाल हासन और रति अग्निहोत्री पर फ़िल्माये १९८१ की फ़िल्म 'एक दूजे के लिए' से एस. पी. बालसुब्रह्मण्यम और अनुराधा पौडवाल का गाया "मेरे जीवन साथी प्यार किये जा"। जी हाँ, बक्शी साहब नें केवल फ़िल्मों के शीर्षकों को बेहद बुद्धिमत्ता और ख़ूबसूरती के साथ एक दूसरे से जोड़ते हुए पूरा गीत लिख डाला है और क्या कमाल का लिखा है! एक शीर्षक से दूसरे शीर्षक, दूसरे से तीसरे पर, कितनी सुंदरता से अवतरण हुआ है। और इस शृंखला के मुताबिक इस गीत में हँसी आप सुनेंगे अनुराधा पौडवाल की। वैसे तो पूरा गीत एस.पी साहब नें ही गाया है, लेकिन बीच बीच में कुछ शीर्षक अनुराधा नें भी कही हैं और मुख्यत: उनकी हँसी ही गीत में उनका योगदान है। इस फ़िल्म के बाकी गीतों में गायिका के तौर पर लता जी की आवाज़ ली गई है, बस एक इस गीत मे अनुराधा की आवाज़ ली गई है। इसके पीछे कारण तो यही लगता है कि इसमें एक कम उम्र की चुलबुली लड़की की आवाज़ चाहिए होगी, और गीत का अंदाज़ ज़रा मॉडर्ण भी है, इसलिए शायद लता जी नें परहेज़ किया होगा। ख़ैर, ये सब अनुमान मात्र ही है। हक़ीक़त यह है कि फ़िल्म के अन्य गीतों की तरह इस गीत की भी अपनी अलग पहचान है, अपना अलग वजूद है।

दोस्तों, आइए इस गीत के पूरे बोल यहाँ पर लिखें, और ज़रा हिसाब लगा कर देखें कि कुल कितने फ़िल्मों के नाम इस गीत में आये हैं। चलिए शुरु करते हैं - मेरे जीवन साथी, प्यार किये जा, जवानी-दीवानी, ख़ूबसूरत, ज़िद्दी, पड़ोसन, सत्यम शिवम सुंदरम। झूठा कहीं का, हरे रामा हरे कृष्णा, ४२० (श्री ४२०), आवारा, दिल ही तो है, आशिक़ हूँ बहारों का, तेरे मेरे सपने, तेरे घर के सामने, आमने-सामने, शादी के बाद, ओ बाप रे (बाप रे बाप), हमारे-तुम्हारे, मुन्ना (मेरा मुन्ना), गुड्डी, टीकू, मिली, शिन शिना की बबला बू, खेल खेल में, शोर, जॉनी मेरा नाम, चोरी मेरा काम, राम और श्याम, बंडलबाज़, लड़की, मिलन, गीत गाता चल, प्यार का मौसम, बेशरम। नॉटी बॉय, इश्क़ इश्क़ इश्क़, ब्लफ़ मास्टर, ये रास्ते हैं प्यार के, चलते चलते, मेरे हमसफ़र, दिल तेरा दीवाना, दीवाना-मस्ताना, छलिया, अंजाना, आशिक़, बेगाना, लोफ़र, अनाड़ी, बढ़ती का नाम दाढ़ी, चलती का नाम गाड़ी, जब प्यार किसी से होता है, सनम, जब याद किसी की आती है, जानेमन, बंधन, कंगन, चंदन, झूला, दिल दिया दर्द लिया, झनक झनक पायल बाजे, छम छमा छम, गीत गाया पत्थरों नें, सरगम। हाँ तो दोस्तों, कितने नाम हुए। कहीं मुझसे कोई नाम छूट तो नहीं गया? या कोई ग़लत नाम तो नहीं लिख गया? चलिए इसकी गिनती तो मैं आप पर ही छोड़ता हूँ, मैं तो लगा इस गीत को सुनने। फ़िल्म में संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का है।



क्या आप जानते हैं...
कि गायक एस. पी. बाल्सुब्रह्मण्यम को 'एक दूजे के लिये' फ़िल्म में गायन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 09/शृंखला 16
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - बेहद आसान.
सवाल १ - किस गायिका की हँसी है इस गीत में - २ अंक
सवाल २ - फिल्म की नायिका कौन है - ३ अंक
सवाल ३ - गीतकार बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
अविनाश जी आपने शुक्रवार को जो जवाब दिया उसके जवाब सब पहले से आ चुके थे आपको नहीं दिखे क्योंकि ब्लोग्गर में कुछ गडबड के चलते वो सब डिलीट हो गए थे, खैर स्वागत है आपका, बात तो तब बने जब आप अमित जी और अनजाना जी को कुछ टक्कर दे सकें, हम कब से चाह रहे हैं कि इनके मुकाबले में कोई तो आये :)

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Wednesday, December 29, 2010

हम बने तुम बनें एक दूजे के लिए....और एक दूजे के लिए ही तो हैं आवाज़ और उसके संगीत प्रेमी श्रोता

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 559/2010/259

फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर के चुने हुए युगल गीतों को सुनते हुए आज हम क़दम रख रहे हैं ८० के दशक में। कल के गीत से ही आप ने अंदाज़ा लगाया होगा कि ७० के दशक के मध्य भाग के आते आते युगल गीतों का मिज़ाज किस तरह से बदलने लगा था। उससे पहले फ़िल्म के नायक नायिका की उम्र थोड़ी ज़्यादा दिखाई जाती थी, लेकिन धीरे धीरे फ़िल्मी कहानियाँ स्कूल-कालेजों में भी समाने लगी और इस तरह से कॊलेज स्टुडेण्ट्स के चरित्रों के लिए गीत लिखना ज़रूरी हो गया। नतीजा, वज़नदार शायराना अंदाज़ को छोड़ कर फ़िल्मी गीतकार ज़्यादा से ज़्यादा हल्के फुल्के और आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करने लगे। कुछ लोगों ने इस पर फ़िल्मी गीतों के स्तर के गिरने का आरोप भी लगाया, लेकिन क्या किया जाए, जैसा समाज, जैसा दौर, फ़िल्म और फ़िल्म संगीत भी उसी मिज़ाज के बनेंगे। ख़ैर, आज हम बात करते हैं ८० के दशक की। इस दशक के शुरुआती दो तीन सालों तक तो अच्छे गानें बनते रहे और लता और आशा सक्रीय रहीं। ८० के इस शुरुआती दौर में जो सब से चर्चित प्रेम कहानी पर बनी फ़िल्म आई, वह थी 'एक दूजे के लिए'। यह फ़िल्म तो जैसे एक ट्रेण्डसेटर सिद्ध हुई। सब कुछ नया नया सा था इस फ़िल्म में। नई अभिनेत्री रति अग्निहोत्री रातों रात छा गईं और दक्षिण के कमल हासन ने बम्बई में अपना सिक्का जमा लिया। और साथ ही गायक एस. पी. बालसुब्रह्मण्यम ने भी तो अपना जादू चलाया था इस फ़िल्म में। आनंद बक्शी के लिखे गीत, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के सुपरडुपर हिट संगीत ने ऐसी धूम मचाई जिसकी गूँज आज तक सुनाई देती है। वैसे एल.पी को इस फ़िल्म के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार तो नहीं मिला था, लेकिन सब से बड़ा पुरस्कार इनके लिए तो यही है कि आज भी आये दिन इस फ़िल्म के गीत कहीं ना कहीं से सुनाई दे जाते हैं। चाहे "तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन हो" या "हम तुम दोनों जब मिल जाएँगे", "मेरे जीवन साथी प्यार किए जा" हो या "सोलह बरस की बाली उमर को सलाम", या फिर फ़िल्म का सब से लोकप्रिय शीर्षक गीत "हम बने तुम बने एक दूजे के लिए"। तो आइए दोस्तों, ८० के दशक को सलाम करते हुए आज इसी गीत को सुना जाए लता और एस.पी की युगल आवाज़ों में।

यह गीत अपने आप में एक रोमांटिक कॊमेडी है, एक बड़ा ही अनूठा और एकमात्र गीत है कि जिसमें नायक और नायिका दो अलग अलग प्रदेशों से होने की वजह से एक दूसरे की भाषा समझ नहीं पाते हैं, जिसकी वजह से गीत में हास्य रस समा जाता है। हिंदी तो है ही, अंग्रेज़ी और तमिल के शब्दों का भी इस्तेमाल है इस गीत में। यहाँ तक की बक्शी साहब ग़ालिब के नाम को भी ले आये हैं जब वो लिखते हैं कि "इश्क़ पर ज़ोर नहीं ग़ालिब ने कहा है इसीलिए..."। और सोने पे सुहागा इस गीत को तब लगती है जब आख़िर में लता जी हँसती हुई सुनाई देती है। सचमुच, लता जी की गाती हुई आवाज़ जितनी मधुर है, शायद उससे भी मीठी है उनकी हँसी। बहुत से गीतों में उनकी इस तरह की हँसी और मुस्कुराहट का संगीतकारों ने समय समय पर इस्तेमाल किया है, मसलन, "भँवरे ने खिलाया फूल", "सुन बाल ब्रह्मचारी मैं हूँ कन्याकुमारी", "थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमाँ", आदि। आप भी कुछ और गीतों की याद दिलाइए ना! ख़ैर, वापस आते हैं 'एक दूजे के लिए' पर, यह १९८१ की फ़िल्म थी। १९७८ से १९८१ तक एल.पी ने लगातार चार बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता था, और इस कड़ी को ख़य्याम साहब ने तोड़ा 'उमरावजान' के ज़रिए। पंकज राग के शब्दों में "व्यावसायिक्ता और लोकप्रियता के पायदान पर नम्बर एक पर स्थापित लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को ख़य्याम के अतिरिक्त आर. डी. बर्मन की 'कुदरत', 'याराना', 'साथी', और 'लवस्टोरी', शिव-हरि की 'सिलसिला', वार्षिक बिनाका गीतमाला में चोटी के गीत "मेरे अंगने में" वाले कल्याणजी-आनंदजी की 'लावारिस' और बप्पी लाहिड़ी की 'अरमान' ने कड़ी चुनौती दी और मिश्र शिवरंजनी में "तेरे मेरे बीच में", अहीर भरवी में "सोलह बरस की" और "हम बने तुम बने" जैसे गीतों के साथ 'एक दूजे के लिए' ही उनका उत्तर बनी।" तो आइए दोस्तों, ८० के दशक के इस महत्वपूर्ण फ़िल्म का यह सदाबहार युगल गीत सुनते हैं।



क्या आप जानते हैं...
कि एस. पी. बालसुब्रहमण्यम को 'एक दूजे के लिए' फ़िल्म के गायन के लिए १९८२ का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 10/शृंखला 06
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - ८० के दशक का एक और हिट गीत.

सवाल १ - पुरुष गायक बताएं - २ अंक
सवाल २ - गीतकार बताएं - १ अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
श्याम जी कुछ दिनों से गायब हैं, वैसे शरद जी ने इस शृंखला में अजय बढ़त बना ली है, इंदु जी एक दम सही कहा आपने और देखिये आज के गीत का शीर्षक भी यही है. अमित जी ओल्ड इस गोल्ड लेकर हम भारतीय समानुसार शाम 6.30 पर हाज़िर होते हैं. अगर आप ठीक समय पर आ सकें तो, हमारे दिग्गजों को टक्कर दे सकते हैं

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ