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Sunday, July 12, 2009

रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत (९)

जून २५, २००९ को संगीत दुनिया का एक आफताबी सितारा हमेशा के लिए रुखसत हो गया. माइकल जोसफ जैक्सन जिन्हें लोग प्यार से "जैको" भी कहते थे, आधुनिक संगीत के एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्तम्भ थे, जिन्हें "किंग ऑफ़ पॉप" की उपाधि से भी नवाजा गया. एक संगीतमय परिवार में जन्में जैक्सन ने १९६८ में अपने पूरे परिवार के सम्मिलित प्रयासों से बने एल्बम "जैक्सन ५" से अपना सफ़र शुरू किया. १९८२ में आई उनकी एल्बम "थ्रिलर" विश्व भर में सबसे अधिक बिकने वाली एल्बम का रिकॉर्ड रखती है. "बेड", "डेंजरस" और "हिस्ट्री" जैसी अल्बम्स और उनके हिट गीतों पर उनके अद्भुत और अनूठे नृत्य संयोजन, उच्चतम श्रेणी के संगीत विडियो, संगीत के माध्यम से सामाजिक सरोकारों की तरफ दुनिया का ध्यान खीचना, अपने लाइव कार्यक्रमों के माध्यम से अनूठे प्रयोग कर दर्शकों का अधिकतम मनोरंजन करना आदि जैको की कुछ ऐसी उपलब्धियां हैं, जिन्हें छू पाना अब शायद किसी और के बस की बात न हो. जैको का प्रभाव पूरे विश्व संगीत पर पड़ा तो जाहिर है एशियाई देशों में भी उनका असर देखा गया. उनके नृत्य की नक़ल ढेरों कलाकारों ने की, हिंदी फिल्मों में तो नृत्य संयोजन का नक्शा ही बदल गया. सरोज खान और प्रभु देवा जैसे नृत्य निर्देशकों ने अपने फन पर उनके असर के होने की बात कबूली है. पॉप संगीत की ऐसी आंधी चली कि ढेरों नए कलाकारों ने हिंदी पॉप के इस नए जेनर में कदम रखा और कमियाबी भी पायी. अलीशा चुनोय, सुनीता राव, आदि तो चले ही, सरहद पार पाकिस्तान से आई आवाजों ने भी अपना जादू खूब चलाया भारतीय श्रोताओं पर. नाजिया हसन का जिक्र हमें पिछले एक एपिसोड में किया था. आज बात करते हैं है एक और ऐसी ही आवाज़ जो सरहद पार से आई एक "हवा" के झोंके की तरह और सालों तक दोनों मुल्कों के संगीत प्रेमियों पर अपना जादू चला कर फिर किसी खला में में ऐसे खो गयी कि फिर किसी को उनकी कोई खबर न मिल सकी.

"हवा हवा ऐ हवा, खुशबू लुटा दे..." गीत कुछ यूं आया कि उसकी भीनी खुशबू में सब जैसे बह चले. हसन जहाँगीर घर घर में पहचाने जाने लगे. बच्चे बूढे और जवान सब उनके संगीत के दीवाने से होने लगे. पाकिस्तान विभाजन के बाद बंगलादेश से पाकिस्तान आ बसे हसन जहाँगीर ने पाकिस्तान की विश्व विजेता टीम के कप्तान इमरान खान के लिए गीत लिखा "इमरान खान सुपरमैन है" और चर्चा में आये. उनकी एल्बम "हवा हवा" की कई लाखों में प्रतियाँ बिकी. चलिए इस रविवार हम सब भी MJ को श्रद्धाजंली देते हैं हसन जहाँगीर के इसी सुपर डुपर हिट एल्बम को सुनकर क्योंकि ८० के दशक में इस और ऐसी अन्य अल्बम्स की आपार लोकप्रियता का काफी श्रेय विश्व संगीत पर माइकल का प्रभाव भी था. दक्षिण एशिया के इस पहले पॉप सनसनी रहे हसन जहाँगीर ने हवा हवा के बाद भी कुछ अल्बम्स की पर हवा हवा की कामियाबी को फिर दोहरा न सके. हिंदी फिल्मों के लिए भी हसन ने कुछ गीत गाये जिसमें से अनु मालिक के लिया गाया "अपुन का तो दिल है आवारा" लोकप्रिय हुआ था, पर इसके बाद अचानक हसन कहीं पार्श्व में खो गए. धीरे धीरे लोग भी भूलने लगे. हालाँकि हसन ने कभी भी अपने इस मशहूर गीत के अधिकार किसी को नहीं बेचे पर इस गीत के बहुत से फूहड़ संस्करण कई रूपों में बाज़ार में आता रहा, पर उस दौर के संगीत प्रेमी मेरा दावा है आज तक उस जूनून के असर को नहीं भूल पाए होंगें जो उन दिनों हसन की गायिकी ने हर किसी के दिल में पैदा कर दिया था.

बरसों तक हसन क्यों खामोश रहे, ये तो हम नहीं जानते पर आज एक बार फिर वो चर्चा में हैं, अभिनेत्री से निर्देशक बनी रेवती ने अब पहली बार उनके उसी हिट गीत को अधिकारिक रूप से अपनी नयी फिल्म "आप के लिए हम" में इस्तेमाल करने की योजना बनायीं है. इसके लिए उन्होंने बाकायदा हसन की इजाज़त ली है और ये भी संभव हो सकता है कि खुद हसन जहाँगीर इस गीत पर अभिनय भी करते हुए दिखें. इसी फिल्म से रवीना टंडन अपनी वापसी कर रही है. बहरहाल हवा हवा गीत के इस नए संस्करण का तो हम इंतज़ार करेंगे, पर फिलहाल इस रविवार सुबह की कॉफी के साथ आनंद लीजिये उस लाजवाब अल्बम के बाकी गीतों का. यकीन मानिये जैसे जैसे आप इन गीतों को सुनते जायेंगें, आपके भी मन में यादों के झरोखे खुलते जायेंगें, आज भी हसन की आवाज़ में वही ताजगी और उनके संगीत में वही सादापन नज़र आता है. यदि आप उस दौर के नहीं हैं तब तो अवश्य ही सुनियेगा, क्योंकि हमें पूरा विश्वास है कि आज भी इन गीतों को सुनकर आपको भी हसन जहाँगीर की उस नशीली आवाज़ से प्यार हो जायेगा. तो पेश है अल्बम "हवा हवा" के ये जोरदार गीत -

आजा न दिल है दीवाना ...


दिल जो तुझपे आया है...


जिंदगी है प्यार....


मेघा जैसे रोये साथी.....(मेरा सबसे पसंदीदा गीत)


ले भी ले दिल तू मेरा ओ जानेमन....


शावा ये नखरा गोरी का...


न जाओ ज़रा मेहंदी लगाओ....


ये फैशन के नए रंग है....


जी जी ओ पारा डिस्को...


किस नाम से पुकारूं...




"रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत" एक शृंखला है कुछ बेहद दुर्लभ गीतों के संकलन की. कुछ ऐसे गीत जो अमूमन कहीं सुनने को नहीं मिलते, या फिर ऐसे गीत जिन्हें पर्याप्त प्रचार नहीं मिल पाया और अच्छे होने के बावजूद एक बड़े श्रोता वर्ग तक वो नहीं पहुँच पाया. ये गीत नए भी हो सकते हैं और पुराने भी. आवाज़ के बहुत से ऐसे नियमित श्रोता हैं जो न सिर्फ संगीत प्रेमी हैं बल्कि उनके पास अपने पसंदीदा संगीत का एक विशाल खजाना भी उपलब्ध है. इस स्तम्भ के माध्यम से हम उनका परिचय आप सब से करवाते रहेंगें. और सुनवाते रहेंगें उनके संकलन के वो अनूठे गीत. यदि आपके पास भी हैं कुछ ऐसे अनमोल गीत और उन्हें आप अपने जैसे अन्य संगीत प्रेमियों के साथ बाँटना चाहते हैं, तो हमें लिखिए. यदि कोई ख़ास गीत ऐसा है जिसे आप ढूंढ रहे हैं तो उनकी फरमाईश भी यहाँ रख सकते हैं. हो सकता है किसी रसिक के पास वो गीत हो जिसे आप खोज रहे हों.

Sunday, February 1, 2009

फरहान और कोंकणा के सपनों से भरे नैना

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (10)
"सांवरिया" मोंटी से है उम्मीदें संगीत जगत को
१६ साल की उम्र में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के की -बोर्ड वादक के रूप में फ़िल्म "मिस्टर इंडिया" से अपने संगीत कैरियर की शुरुआत करने वाले मोंटी शर्मा आजकल एक टी वी चैनल पर नए गायक/गायिकाओं के हुनर की समीक्षा करते हुए दिखाई देते हैं. फ़िल्म "देवदास" में उन्होंने इस्माईल दरबार को सहयोग दिया था. इसी फ़िल्म के दौरान दरबार और निर्देशक संजय लीला बंसाली के रिश्ते बिगड़ गए, तो संजय ने मोंटी से फ़िल्म का थीम म्यूजिक बनवाया और बकायादा क्रडिट भी दिया. संजय की फ़िल्म "ब्लैक" के बाद मोंटी को अपना जलवा दिखने का भरपूर मौका मिला फ़िल्म "सांवरिया" से. इस फ़िल्म के बाद मोंटी ने इंडस्ट्री में अपने कदम जोरदार तरीके से जमा लिए. पिछले साल उनकी फ़िल्म "हीरो" का गीत हमारे टॉप ५० में स्थान बनने में सफल हुआ था. अभी हाल ही में फ़िल्म "चमकू" में अपने काम के लिए उन्हें कलाकार सम्मान के लिए नामांकन मिला है. मोंटी की आने वाली फिल्में हैं दीपक तिजोरी निर्देशित "फॉक्स", सुभाष घई की "राइट और रोंग", अनुज शर्मा की "नौटी अट फोर्टी", और इसके आलावा "आज फ़िर जीने की तम्मना है" और "खुदा हाफिज़" (जिसमें उनका संगीत सूफियाना होगा) जैसी कुछ लीक से हटकर फिल्में भी हैं. जावेद अख्तर के साथ उनका गठबंधन होगा फ़िल्म "मिर्च" में. तो कहने का तात्पर्य है कि मोंटी अब इंडस्ट्री के व्यस्तम संगीतकारों में से एक हैं, और संगीत प्रेमी उनसे कुछ अलग, कुछ ख़ास किस्म के संगीत की, यकीनन उम्मीद कर सकते हैं. उनके संगीत में शास्त्रीय वाध्यों और आधुनिक संगीत का सुंदर मिश्रण सुनने को मिलता है, रियलिटी शोस में आए प्रतिभागियों से भी वे बेहद संतुष्ट नज़र आए. उनका वादा है कि वो जल्दी ही इन नए गायकों को अपनी फिल्मों में मौका देंगें. हम तो यही उम्मीद करेंगें कि उनके संगीत के माध्यम से हमें कुछ और नए और युवा कलाकारों की आवाजें भी सुनने को मिले. शुभकामनायें मोंटी को.



अनु मालिक बिंदास हैं - कैलाश खेर

"अल्लाह के बन्दे" ये गीत आज भी सुनने में उतना ही तारो ताज़ा, उतना ही जादू भरा लगता है, जितना तब था जब कैलाश खेर नाम के इस युवा गायक ने इसे गाकर सुनने वालों के दिलों में अपनी स्थायी जगह बना ली थी. बहुत थोड़े समय में ही कैलाश ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया है. हाल ही में आई "दसविदानिया" से उनके दो गीत हमारे सालाना काउंट डाउन का हिस्सा बने थे, उनकी एल्बम "कैलाशा" भी खासी मशहूर हुई थी. अपने सूफियाना अंदाज़ से मंत्रमुग्ध करने वाले कैलाश सूफीवाद को एक रहस्य से भरा प्रेम मानते हैं जो आत्मा और परमात्मा का मिलन करवाता है. और अपनी आने वाली सूफी एल्बम को लेकर बहुत उत्साहित भी हैं, जिसके लिए हर बार की तरफ़ उन्होंने ख़ुद गीत रचे और संगीतबद्ध किए हैं. मोंटी की ही तरह वो भी एक अन्य चैनल में रियलिटी शो में समीक्षक हैं जहाँ उनके साथ हैं संगीतकार अनु मालिक, जिनके साथ अक्सर उनका वैचारिक मतभेद होते दर्शक देखते ही रहते हैं. अनु मालिक के बारे में पूछने पर कैलाश कहते हैं -"शुरू में मैं अनु मालिक को पसंद नही करता था यह सोचकर कि ये आदमी बहुत ज्यादा बोलता है. पर अब मुझे महसूस होता है कि वो एक बेहद गुणी संगीतकार हैं जो बहुत कम समय में धुन बनने में माहिर हैं, और इंसान भी दिलचस्प और बिंदास हैं.", अब हम क्या कहें कैलाश...आप ख़ुद समझदार हैं...


माइकल जैक्सन अब अधिक नही जी पायेंगें

पश्चिमी संगीत के महारथी कहे जाने वाले माइकल जेक्सन इन दिनों बुरी तरह बीमार हैं और यदि एक वेबसाइट की बात पर यकीन करें तो वो ५ या ६ महीनों से अधिक जीवित नही रह पायेंगें. अश्वेत समुदाय से आकर भी रंग भेदी अमेरिका वासियों के दिलो पर बरसों बरस राज करने वाले माइकल का जीवन विवादों से भरपूर रहा. पर उनका संगीत आज भी पाश्चात्य संगीत की रीड है. इस बेहद अमीर संगीतकार की इस बिगड़ती हालत से दुनिया भर में फैले उनके चाहने वाले उदास और दुखी हैं. उनके प्रशंसक भारत में भी कम नही. मुंबई में हुआ उनका मशहूर शो आज तक याद किया जाता है. आवाज़ उम्मीद करता है कि वो जल्दी ही स्वास्थलाभ करें और फ़िर से संगीत के क्षेत्र में सक्रिय काम करें.


सपनों से भरे नैना

पिछले सप्ताह से हम इस कड़ी में आपको सुनवा रहे हैं एक गीत जिसे "सप्ताह का गीत" चुना जाता है. आज सुनिए जावेद अख्तर साहब का लिखा एक बहुत ही खूबसूरत गीत. इस गीत के लाजवाब बोल ही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. फरहान अख्तर और कोंकणा सेन शर्मा की प्रमुख भूमिका वाली इस नई फ़िल्म का नाम है "लक बाई चांस". पर इस फ़िल्म में सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है पुरानी जोड़ी ऋषि कपूर और डिम्पल कपाडिया का काम. जावेद अख्तर की बेटी जोया अख्तर ने इस फ़िल्म से निर्देशन की दुनिया में अपना सशक्त कदम रखा है. यूँ तो फ़िल्म में जावेद साहब के लिखे सभी गीत बहुत सुंदर हैं और शंकर एहसान लोय की तिकडी ने पिछली फ़िल्म "रॉक ऑन" से एकदम अलग किस्म का संगीत रचा है इस फ़िल्म के लिए. सुनिए "सपनों से भरे नैना...", और जावेद साहब के शब्दों में छुपे रहस्यों को महसूस कीजिये शंकर महादेवन की गहरी आवाज़ में.




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