Showing posts with label love aajakal. Show all posts
Showing posts with label love aajakal. Show all posts

Monday, August 3, 2009

ये दूरियाँ ....मिटा रहा है कमियाबी से मोहित चौहान की दूरियाँ

ताजा सुर ताल (13)

ताजा सुर ताल की इस नयी कड़ी में आप सब का स्वागत है. आज से हम इस श्रृंखला के रूप रंग में में थोडा सा बदलाव कर रहे हैं. आज से मुझे यानी सजीव सारथी के साथ होंगें आपके प्रिय होस्ट सुजॉय चट्टर्जी भी. हम दोनों एक दिन पहले प्रस्तुत होने वाले गीत पर दूरभाष से चर्चा करेंगें और फिर उसी चर्चा को यहाँ गीत की भूमिका के रूप में प्रस्तुत करेंगें. उम्मीद है आप इस आयोजन अब और अधिक लुफ्त उठा पायेंगें. तो सुजोय स्वागत है आपका....

सुजॉय- नमस्कार सजीव और नमस्कार सभी दोस्तों को...तो सजीव आज हम कौन सा नया गीत सुनवाने जा रहे हैं ये बताएं...

सजीव - सुजॉय दरअसल योजना है कि श्रोताओं की एक के बाद एक दो गीत आज के बेहद तेजी से लोकप्रिय होते गायक मोहित चौहान के सुनवाये जाएँ...

सुजॉय - अरे वाह सजीव, हाँ आपने सही कहा....इन दिनों फ़िल्म सगीत जगत में नये नये पार्श्वगायकों की जो पौध उगी है, उसमें कई नाम ऐसे हैं जो धीरे धीरे कामयाबी की सीढ़ी पर पायदान दर पायदान उपर चढ़ते जा रहे हैं। वैसा ही एक ज़रूरी नाम है मोहित चौहान। अपनी आवाज़ और ख़ास अदायगी से मोहित चौहान आज एक व्यस्त पार्श्वगायक बन गये हैं जिनके गाने इन दिनों ख़ूब बज भी रहे हैं और लोग पसंद भी कर रहे हैं। जवाँ दिलों पर एक तरह से वो राज़ कर रहे हैं इन दिनों। हिमाचल की पहाड़ियों से उतर कर मोहित चौहान पहले दिल्ली आये जहाँ वे दस साल रहे। लेकिन सगीत की बीज उन सुरीले पहाड़ों में भी बोयी जा चुकी थी और कुछ उन्हे पारिवारिक तौर पे मिला। यह संयोग की बात ही कहिए कि दिल्ली के उन दस सालों को समर्पित करने का उन्हे मौका भी मिल गया। मेरा मतलब है 'दिल्ली ६' का वह मशहूर गीत "मसक्कली", जो कुछ दिन पहले हर 'काउंट-डाउन' पर नंबर-१ पर था।

सजीव - हाँ बिलकुल, दरअसल मैं भी समझता था कि मोहित केवल धीमे रोमांटिक गीतों में ही अच्छा कर सकते हैं, पर मसकली ने मुझे चौंका दिया. वाकई बहुत बढ़िया गाया है इसे मोहित ने, आप कुछ बता रहे थे उनके बारे में...

सुजॉय - ग़ैर फ़िल्म संगीत और पॉप अल्बम्स की जो लोग जानकारी रखते हैं, उन्हे पता होगा कि मोहित चौहान मशहूर बैंड 'सिल्क रूट' के 'लीड वोकलिस्ट' हुआ करते थे। याद है न वह हिट गीत "डूबा डूबा रहता है आँखों में तेरी", जो आयी थी 'बूँदें' अल्बम के तहत। यह अल्बम 'सिल्क रूट' की पहली अल्बम थी। यह अल्बम बेहद कामयाब रही और नयी पीढ़ी ने खुले दिल से इसे ग्रहण किया। इस बैंड का दूसरा अल्बम आया था 'पहचान', जिसे उतनी कामयाबी नहीं मिली। और दुर्भाग्यवश इसके बाद यह बैंड भी टूट गया। कहते हैं कि जो होता है अच्छे के लिए ही होता है, शायद मोहित चौहान के लिए ज़िंदगी ने कुछ और ही सोच रखा था! कुछ और भी बेहतर! अब तक के उनके म्युज़िकोग्राफ़ी को देख कर तो कुछ ऐसा ही लगता है दोस्तों कि मोहित भाई सही राह पर ही चल रहे हैं।

सजीव - उस मशहूर गीत "डूबा डूबा" को लिखा था प्रसून ने, वो भी आज एक बड़े गीतकार का दर्जा रखते हैं, पर आज हम श्रोताओं के लिए लाये हैं मोहित का गाया वो गीत जिसे एक और अच्छे गीतकार इरषद कामिल ने लिखा है. आप समझ गए होंगें मैं किस गीत की बात कर रहा हूँ...

सुजॉय- हाँ सजीव बिलकुल....ये गीत है फिल्म "लव आजकल" का ये दूरियां....

सजीव - गीत शुरू होता है, एक सीटी की धुन से जो पूरे गीत में बजता ही रहता है. मोहित की आवाज़ शुरू होते ही गीत एक सम्मोहन से बांध देता है सुनने वालों को...प्रीतम का संगीत संयोजन उत्कृष्ट है....सीटी वाली धुन कई रूपों में बीच बीच में बजाने का प्रयोग तो कमाल ही है. पहले अंतरे से पहले संगीत का रुकना और फिर बोलों से शुरू करना भी गीत के स्तर को ऊंचा करता है. गीटार का तो बहुत ही सुंदर इस्तेमाल हुआ है गीत में. पर गीत के मुख्य आकर्षण तो मोहित के स्वर ही हैं. दरअसल इस तरह के धीमे रोंन्टिक गीतों में तो अब मोहित महारत ही हासिल कर चुके हैं. इरषद ने बोलों से बहुत बढ़िया निखारा है गीत को. सुजॉय मैं आपको बताऊँ कि कल ही मैंने ये फिल्म देखी है. और जिस तरह के रुझान मैंने देखे दर्शकों के उससे कह सकता हूँ कि ये फिल्म इस साल की बड़ी हिट साबित होने वाली है, और चूँकि फिल्म का संगीत फिल्म की जान है, तो अब फिल्म प्रदर्शन के बाद तो उसके गीत और अधिक मशहूर होंगे, खासकर ये गीत तो फिल्म की रीढ़ है, कई बार कई रूपों में ये गीत बजता है....और गीतकार ने शब्दों से हर सिचुअशन के साथ न्याय किया है. फिल्म में नायक नायिका जिस उहा पोह से गुजर रहे हैं, जिस समझदारी भरी नासमझी में उलझे हैं उनका बयां है ये गीत. कहते हैं फिल्म का शूट इसी गीत से आरंभ हुआ था और ख़तम भी इसी गीत पर...

सुजॉय- अच्छा यानी कुल मिलकार ये गीत भी मोहित के संगीत सफ़र में एक नया अध्याय बन कर जुड़ने वाला है...तो ये बताएं कि आवाज़ की टीम ने इस गीत को कितने अंक दिए हैं ५ में से.

सजीव - आवाज़ की टीम ने दिए ४ अंक ५ में से....पिछली बार स्वप्न जी ने एक सवाल किया था कि फिल्म कमीने के गीत को ४ अंक क्यों दिए क्या इसलिए कि इसे गुलज़ार साहब ने लिखा है ? मैं कहना चाहूँगा कि ऐसा बिलकुल नहीं है, आवाज़ की टीम के लिए सबसे जरूरी घटक है गीत की ओरिजनालिटी. नयापन जिस गीत में अधिक होगा उसे अच्छे अंक मिलेंगें पर हमारी रेटिंग तो बस एक पक्ष है, असल निर्णय तो आप सब के वोटिंग से ही होगा....सालाना संगीत चार्ट में हम आपकी रेटिंग को ही प्राथमिकता देंगें. निश्चिंत रहें...तो चलिए अब आप रेटिंग दीजिये आज के गीत को. शब्द कुछ यूं है -

ये दूरियां....ये दूरियां...
इन राहों की दूरियां,
निगाहों की दूरियां
हम राहों की दूरियां,
फ़ना हो सभी दूरियां,
क्यों कोई पास है,
दूर है क्यों कोई
जाने न कोई यहाँ पे...
आ रहा पास या,
दूर मैं जा रहा
जानूँ न मैं हूँ कहाँ पे......(वाह... कशमकश हो तो ऐसी)
ये दूरियां.....

कभी हुआ ये भी,
खाली राहों मैं भी,
तू था मेरे साथ,
कभी तुझे मिलके,
लौटा मेरा दिल ये,
खाली खाली हाथ...
ये भी हुआ कभी,
जैसे हुआ अभी,
तुझको सभी में पा लिया....
हैराँ मुझे कर जाती है दूरियां,
सताती है दूरियां,
तरसाती है दूरियां,
फ़ना हो सभी दूरियां...

कहा भी न मैंने,
नहीं जीना मैंने
तू जो न मिला
तुझे भूले से भी,
बोला न मैं ये भी
चाहूं फासला...
बस फासला रहे,
बन के कसक जो कहे,
हो और चाहत ये जवाँ
तेरी मेरी मिट जानी है दूरियां,
बेगानी है दूरियां,
हट जानी है दूरियां,
फ़ना हो सभी दूरियां...

ये दूरियां.....


तो सुजॉय सुन लिया जाए ये गीत

सुजॉय - हाँ तो लीजिये श्रोताओं सुनिए..."ये दूरियां..." फिल्म लव आजकल से ....



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 4 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं. मोहित का गाया सबसे पहला फ़िल्मी गीत कौन सा था ? बताईये और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब था गीत "ओ साथी रे" फिल्म ओमकारा का और सबसे पहले सही जवाब दिया दिशा जी ने...बधाई....और सबसे अच्छी बात कि आप सब ने जम कर रेटिंग दी. वाह मोगेम्बो खुश हुआ...:) उम्मीद है आज भी ये सिलसिला जारी रहेगा...


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Thursday, July 16, 2009

तू न बदली मैं न बदला, दिल्ली सारी देख बदल गयी....जी हाँ बदल रहा है "लव आजकल"

ताजा सुर ताल (10)

तारुफ़ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर,
ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा ...

साहिर साहब ने ये शब्द बहुत दुःख के साथ कहे होंगे, अक्सर हमारी फिल्मों में नायक नायिका को जब किसी कारणवश अलग होना पड़ता है तो अमूमन वो बहुत दुःख की घडी होती है, मन की पीडा "वक़्त ने किया क्या हसीं सितम" जैसे किसी दर्द से भरे गीत के माध्यम से परदे पर जाहिर होती रही है, शायद ही कभी हमारे नायक-नायिका ने उस बात पर गौर किया हो जो साहिर ने उपरोक्त शेर की अगली पंक्तियों में कहा है -

वो अफ़साना जिसे अन्जाम तक लाना न हो मुमकिन,
उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा...

अब जब रिश्ता ऐसी अवस्था में आ गया है कि साथ चल कर कोई मंजिल नहीं पायी जा सकेगी, और बिछड़ना लाजमी हो जाए तो क्यों न इस बिछड़ने के पलों को भी खुल कर जी लिया जाए. घुटन भरे रिश्ते से मिली आजादी को खुल कर आत्मसात कर लिया जाए...कुछ ऐसा ही तय किया होगा आने वाली फिल्म "लव आजकल" के युवा जोड़ी ने. तभी तो बना ये अनूठा गीत, याद नहीं कभी किसी अन्य फिल्म में कोई इस तरह का गीत आया हो जहाँ नायक नायिका बिछड़ने के इन पलों इस तरह आनंद के साथ जी रहे हों. तो इस मामले में गीतकार के उपर अतिरिक्त भार आ जाता है कि वो इस नयी सिचुअशन के लिए अपनी कलम चलाये और एक मिसाल कायम करे और गीतकार इरशाद कामिल ने इस काम को बाखूबी अंजाम दिया है, "जब वी मेट" की हिट जोड़ी प्रीतम और इरशाद कामिल ने "लव आजकल" में भी अपेक्षाओं पर खरा काम किया है. इस फिल्म का एक मस्ती भरा गीत "ट्विस्ट" आप पहले ही इस शृंखला में सुन चुके हैं, आज का ये गीत भी हमें यकीन है आपको खूब भायेगा खास कर इसके शब्दों का नयापन और संगीत की तेजी आपका दिल चुरा लेगी.

प्रीतम के पसंदीदा गायक नीरज श्रीधर हैं इस गीत में भी गायक और उनका साथ दिया है सुनिधि चौहान ने. गीतकार इरशाद कामिल की खासियत ये है कि उनका हिंदी और उर्दू के साथ साथ पंजाबी डिक्शन भी बेहद मजबूत है जिस कारण उनके पास शब्दों की कभी कमी नहीं पड़ती. लीक से हटकर बनी फिल्म "चमेली" में उन्होंने सन्देश सान्दालिया के साथ मिलकर "भागे रे मन कहीं..." जैसा नर्मो-नाज़ुक गीत लिखा. "अहिस्ता अहिस्ता" में हिमेश रेशमिया के लिए भी उन्होंने बेहद मधुर गीतों को शब्दबद्ध किया पर सही मायनों में आम आदमी तक उनका नाम पहुंचाया फिल्म "जब वी मेट" ने. "ये इश्क हाय..", मौजा ही मौजा", "ना है ये पाना", "आओगे जब तुम साजना..." और "नगाडा" जैसे गीतों ने मजबूर कर दिया संगीत प्रेमियों को वो पहुंचे इन गीतों के गीतकार के नाम तक भी. इरशाद कम लेकिन अच्छा काम करना चाहते हैं, किरदार को भले से समझकर गीत रचना चाहते हैं ताकि ढर्रे से चली आ रही फ़िल्मी सिचुअशनों पर भी नए शब्दों के गीत रचे जा सकें. खुद उन्हीं के शब्दों में -

मैं वो हूँ जिसके खून में खुद्दारी और जिद्द भी है,
मेरे साथ चल मेरी शर्त पर, चल न सके तो न सही...

इरशाद अब गीतकारी के आलावा फिल्म लेखन में भी हाथ आजमा रहे हैं, उनकी लिखी फिल्म "a wednesday" दर्शकों और समीक्षकों द्वारा बेहद सराही गयी थी. इरशाद को शुभकामनाएं देते हुए आज सुनें फिल्म "लव आजकल" से ये जबरदस्त नया गीत. बोल कुछ यूं है -

चोर बाजारी दो नैनों की,
पहले थी आदत जो हट गयी,
प्यार की जो तेरी मेरी,
उम्र आई थी वो कट गयी,
दुनिया की तो फ़िक्र कहाँ थी,
तेरी भी अब चिंता मिट गयी...

तू भी तू है मैं भी मैं हूँ
दुनिया सारी देख उलट गयी,
तू न जाने मैं न जानूं,
कैसे सारी बात पलट गयी,
घटनी ही थी ये भी घटना,
घटते घटते ये भी घट गयी...

चोर बाजारी...

तारीफ तेरी करना, तुझे खोने से डरना ,
हाँ भूल गया अब तुझपे दिन में चार दफा मरना...
प्यार खुमारी उतारी सारी,
बातों की बदली भी छट गयी,
हम से मैं पे आये ऐसे,
मुझको तो मैं ही मैं जच गयी...
एक हुए थे दो से दोनों,
दोनों की अब राहें पट गयी...

अब कोई फ़िक्र नहीं, गम का भी जिक्र नहीं,
हाँ होता हूँ मैं जिस रस्ते पे आये ख़ुशी वहीँ...
आज़ाद हूँ मैं तुझसे, अज़स्द है तू मुझसे,
हाँ जो जी चाहे जैसे चाहे करले आज यहीं...
लाज शर्म की छोटी मोटी,
जो थी डोरी वो भी कट गयी,
चौक चौबारे, गली मौहल्ले,
खोल के मैं सारे घूंघट गयी...
तू न बदली मैं न बदला ,
दिल्ली सारी देख बदल गयी...
एक घूँट में दुनिया सारी,
की भी सारी समझ निकल गयी,
रंग बिरंगा पानी पीके,
सीधी साधी कुडी बिगड़ गयी...
देख के मुझको हँसता गाता,
जल गयी ये दुनिया जल गयी....



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 4 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं. उपर हमने फिल्म "जब वी मेट" के कुछ गीतों का जिक्र किया है, इसी फिल्म का एक और हिट गीत जिसका नाम जान बूझ कर हमने छोडा है, आप बतायें शहीद कपूर और करीना पर फिल्माया वो गीत कौन सा है जो हमसे छूट गया, और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब दिया सिर्फ मनु जी ने, जिनका मानना है कि नए संगीत में उनका ज्ञान कम है, फिर भी जवाब एकदम सही है मनू जी, बधाई आपको. पर हमें शिकायत है कि आप श्रोता इन नए गीतों पर अपनी रेटिंग नहीं दे रहे हैं. दिशा जी, मंजू जी, विनोद जी और मनु जी आप सब कृपया रेटिंग अवश्य दें.



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ