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Wednesday, August 22, 2012

मैं और मेरा देश....कविताओं में देश प्रेम का उबाल


शब्दों की चाक पर - एपिसोड 12


शब्दों की चाक पर आज हमारे कवि मित्र लेकर आये हैं "मैं और मेरा देश" विषय पर कुछ लाजवाब कवितायेँ. आवाजें हैं अभिषेक ओझा और शैफाली गुप्ता की. आज की स्क्रिप्ट है अनुराग शर्मा की. प्रस्तुति सहयोग है विश्व दीपक, रश्मि प्रभा और सजीव सारथी का. तो सुनिए देश प्रेम से सराबोर कुछ काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ...

(नीचे दिए गए किसी भी प्लेयेर से सुनें)

  या फिर यहाँ से डाउनलोड करें 


शब्दों की चाक पर हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को संवारने  के लिए मौजूद होती है नयी संभावनाएँ और खुद को परखने और साबित करने के लिए तैयार मिलता है एक और रण का मैदान. यहाँ श्रोताओं के लिए भी हैं कवि मन की कोमल भावनाओं उमड़ता घुमड़ता मेघ समूह जो जब आवाज़ में ढलकर बरसता है तो ह्रदय की सूक्ष्म इन्द्रियों को ठडक से भर जाता है. तो दोस्तों, इससे पहले कि  हम पिछले हफ्ते की कविताओं को आत्मसात करें, आईये जान लें इस दिलचस्प खेल के नियम - 


1. कार्यक्रम की क्रिएटिव हेड रश्मि प्रभा के संचालन में शब्दों का एक दिलचस्प खेल खेला जायेगा. इसमें कवियों को कोई एक थीम शब्द या चित्र दिया जायेगा जिस पर उन्हें कविता रचनी होगी...ये सिलसिला सोमवार सुबह से शुरू होगा और गुरूवार शाम तक चलेगा, जो भी कवि इसमें हिस्सा लेना चाहें वो रश्मि जी से संपर्क कर उनके फेसबुक ग्रुप में जुड सकते हैं, रश्मि जी का प्रोफाईल यहाँ है.

2. सोमवार से गुरूवार तक आई कविताओं को संकलित कर हमारे पोडकास्ट टीम के हेड पिट्सबर्ग से अनुराग शर्मा जी अपने साथी पोडकास्टरों के साथ इन कविताओं में अपनी आवाज़ भरेंगें. और अपने दिलचस्प अंदाज़ में इसे पेश करेगें.

3. हमारी टीम अपने विवेक से सभी प्रतिभागी कवियों में से किसी एक कवि को उनकी किसी खास कविता के लिए सरताज कवि चुनेगें. आपने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से ये बताना है कि क्या आपको हमारा निर्णय सटीक लगा, अगर नहीं तो वो कौन सी कविता जिसके कवि को आप सरताज कवि चुनते. 

सूचना - इस हफ्ते हम कवितायेँ स्वीकार करेंगें "एक अधूरी हसरत" विषय पर. अपनी रचनाएँ आप उपर दिए रश्मि जी के पते पर भेज सकते हैं. शुक्रवार शाम तक प्राप्त कवितायेँ ही स्वीकार की जायेंगीं.

Tuesday, June 5, 2012

शब्द और आवाज़ की जुगलबंदी

शब्दों की चाक पर - एपिसोड 01

दोस्तों, इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म. ब्लोग्गर चोईस के बाद रश्मि प्रभा जी जिस नए कार्यक्रम को लेकर उपस्तिथ होने वालीं थी उसका शुभारंभ आज यानी ५ जून से आपके इस प्रिय जाल स्थल प्लेबैक इंडिया में हो रहा है. इस अनूठे कार्यक्रम का नाम है - शब्दों की चाक पर. इस कार्यक्रम के निम्न चरण होंगें, कृपया समझ लें -


1. कार्यक्रम की क्रिएटिव हेड रश्मि प्रभा के संचालन में शब्दों का एक दिलचस्प खेल खेला जायेगा. इसमें एक कवि किसी एक खास शब्द से शुरुआत करेगा और अपनी रची कविता में से कोई एक शब्द चुनौती के रूप में आगे रखेगा जिस पर उस चुनती को स्वीकार करने वाले कवि को कविता रचनी होगी...ये सिलसिला सोमवार सुबह से शुरू होगा और गुरूवार शाम तक चलेगा, जो भी कवि इसमें हिस्सा लेना चाहें वो रश्मि जी से संपर्क कर उनके फेसबुक ग्रुप में जुड सकते हैं, रश्मि जी का प्रोफाईल यहाँ है.


2. सोमवार से गुरूवार तक आई कविताओं को संकलित कर हमारे पोडकास्ट टीम के हेड पिट्सबर्ग से अनुराग शर्मा जी अपने साथी पोडकास्टरों के साथ इन कविताओं में अपनी आवाज़ भरेंगें. और अपने दिलचस्प अंदाज़ में इसे पेश करेगें.

3. हर मंगलवार सुबह ९ से १० के बीच हम इसे अपलोड करेंगें आपके इस प्रिय जाल स्थल पर. अब शुरू होता है कार्यक्रम का दूसरा चरण. मंगलवार को इस पोडकास्ट के प्रसारण के तुरंत बाद से हमारे प्रिय श्रोता सुनी हुई कविताओं में से अपनी पसंद की कविता को वोट दे सकेंगें. सिर्फ कवियों का नाम न लिखें बल्कि ये भी बताएं कि अमुख कविता आपको क्यों सबसे बेहतर लगी. आपके वोट फैसला करेंगें इस बात का कि कौन है हमारे सप्ताह का सरताज कवि. यही सरताज कवि आने वाले सप्ताह में शब्द की नींव रखेगा पुरस्कार स्वरुप.

तो ये थी कार्यक्रम की रूपरेखा. पिछले सोमवार से गुरूवार के बीच जन्मी कविताओं का गुलदस्ता लेकर आज आपके सामने उपस्थित हैं अनुराग शर्मा और अभिषेक ओझा. कवियों से अनुरोध है कि इस सप्ताह यानी सोमवार से शुरू हुए खेल को खेलने के लिए रश्मि जी के मंच पर जाएँ तो हमारे प्रिय श्रोतागणों से निवेदन है कि अपना बहुमूल्य वोट दें और चुने इस सप्ताह का सरताज कवि. उमीद है हमारा ये नया कार्यक्रम आपको पसंद आएगा. सुनिए सुनाईये और छा जाईये...

(नीचे दिए गए किसी भी प्लेयेर से सुनें)  



आप इस प्रसारण को यहाँ से डाउनलोड कर भी सुन सकते हैं

एक गुजारिश - चूँकि ये हमारा पहला प्रयास था, हो सकता है कि इसमें कुछ कमियां रह गयी हों, हम खुद को बेहतर से बेहतर करते जायेगें ये वादा है, समय के अभाव और कुछ तकनीकी कारणों से कुछ कवियों की कवितायेँ छूट गयीं है, कृपया निराश न होयें..अगले प्रयास में आप अवश्य शामिल रहेगें 

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