Showing posts with label bangla songs. Show all posts
Showing posts with label bangla songs. Show all posts

Saturday, December 4, 2010

ई मेल के बहाने यादों के खजाने (१९) - ई मेल तो नहीं पर आज बात एक खत की जो किशोर दा ने लिखा था लता को

'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों, नमस्कार, और बहुत बहुत स्वागत है इस साप्ताहिक विशेषांक में। युं तो हम इसमें 'ईमेल के बहाने यादों के ख़ज़ाने' पेश किया करते हैं, लेकिन आज इसमें हम आपके लिए कुछ अलग चीज़ लेकर आये हैं। यह ईमेल तो नहीं है, लेकिन ख़त ज़रूर है। वही ख़त, जिसे हम काग़ज़ पर लिखा करते हैं। और पता है आज जिस ख़त को यहाँ हम शामिल करने वाले हैं, उसे किसने लिखा है और किसको लिखा है? यकीन करेंगे आप अगर हम कहें कि किशोर कुमार ने यह ख़त लिखा है लता मंगेशकर को? दिल थाम के बैठिए दोस्तों, पिछले दिनों लता जी ने किशोर दा के एक ख़त को स्कैन कर ट्विटर पर अपलोड किया था, तो मैंने सोचा कि क्यों ना उसे डाउनलोड करके अपनी उंगलियों से टंकित कर आपके लिए इस स्तंभ में पेश करूँ। तो चलिए अब मैं बीच में से हट जाता हूँ, ये रहा किशोर दा का ख़त लता जी के नाम...

***************************************

28.11.65

बहन लता,

अच्छी तो हो! अचानक एक मुसीबत में आ फंसा हूँ। तुम ही मेरी जीवन नैय्या पार लगा सकती हो। घबराने की बात नहीं पर घबराने की बात भी है!!! सुनो, ज़िंदगी में पहली मर्तबा फ़ौजी भाइयों की सेवा करने जा रहा हूँ। तुम तो जानती हो कि मैं कभी किसी समारोह या गैदरिंग् में भाग नहीं लेता, लेकिन यह एक ऐसा अवसर है जिसे मैं टाल नहीं पा रहा हूँ ... हाँ, तो मैं कह रहा था कि अगर आज का गाना तुम अपनी मर्ज़ी से किसी दूसरी तारीख़ पे रखवा दो तो मैं तुम्हारा उपकार ज़िंदगी भर नहीं भूलूँगा... यह एक भाई की विनती है अपनी बहिन से। आशा है तुम मेरी बात को समझ गई होगी। महाराज कल्याणजी आनंदजी के साथ मुझे गाने का बेहद शौक है और साथ में तुम हो तो सोने पे सुहागा। कैसा अच्छा है ये प्रेम का धागा... टूटने ना पाए.. अंग्रेज़ी में लिखना चाहता था मगर एक हिंदुस्तानी होने के नाते मैंने हिंदी में ही लिखना उचित समझा। मैं जानता हूँ तुम्हे कठिनाई होगी, लेकिन मेरे लिए किसी प्रकार बात को बना दो। और क्या लिखूँ, बस तुम सब सम्भाल लेना। दिसंबर दो, तीन, चार, पाँच तक किसी भी दिन, किसी भी वक़्त रिकार्डिंग् रखवा दो। मैंने रात को फ़ोन किया था लेकिन तुम निद्रा में मग्न थी। मैंने जगाना उचित नहीं समझा।

अच्छा बहन, लौटने के बाद फिर भेंट होगी। मेरा प्यार, बड़ों को प्रणाम, छोटों को स्नेहाशीष,

तुम्हारा ही भाई,

किशोर दा
"गड़बड़ी"


**************************************

दोस्तों, देखा आपने लता जी और किशोर दा के बीच किस तरह का भाई-बहन का रिश्ता था! आइए इसी रिश्ते को सलाम करते हुए आज आपको दो ऐसे गीत सुनवाए जाएँ जो अपने आप में बेहद अनूठे हैं। अनूठे इसलिए कि पहले गीत के संगीतकार हैं लता मंगेशकर और गायक हैं किशोर कुमार, और दूसरे गीत के संगीतकार हैं किशोर कुमार और गायिका हैं लता मंगेशकर। क्यों, एक बार फिर से चौंक गए ना आप? हिंदी में तो नहीं, लेकिन बंगला के दो ऐसे गीत ज़रूर हैं। तो लीजिए एक के बाद एक इन दोनों गीतों को सुनिए, हमें पूरी उम्मीद है कि अलग ही अनुभूति आपको मिलेगी।

पहले ये रहा लता जी के संगीत निर्देशन में किशोर दा की आवाज़...

गीत - तारे आमि चोखे देखिनी, तार ऒनेक गॊल्पो शुनेछी


इस गीत के मुखड़े का तरजुमा कुछ इस तरह का है - "उसे मैंने अपनी आँखों से तो नहीं देखा, पर उसकी बहुत सारी बातें लोगों से सुनी है, और इन बातों को सुनने के बाद मैं उससे थोड़ा थोड़ा प्यार करने लगा हूँ"।

और ये है किशोर दा के संगीत में लता जी की आवाज़...

गीत - की लिखी तोमाये, तुमि छाड़ा आर कोनो किछु भालो लागेना आमार


गीत के मुखड़े का भाव यह था कि "क्या लिखूँ तुम्हे, तुम्हारे बिना और कुछ भी मुझे अच्छा नहीं लगता, क्या लिखूँ तुम्हे"। देखिए दोस्तों, हमने किशोर दा के लिखे ख़त से शुरुआत की थी, और अब इस अंक का समापन भी एक ऐसे गीत से हुआ जिसमें भी ख़त में कुछ लिखने की बात कही गई है। आप भी हमें ज़रूर लिख भेजिएगा कि कैसा लगा आपको 'ओल्ड इज़ गोल्ड' का आज का यह साप्ताहिक विशेषांक। हमारी कोशिश हमेशा यही रहती है कि अच्छे से अच्छा और मनोरंजक प्रस्तुति हम आपके लिए तैयार कर सकें। इसमें आप भी अपना अमूल्य योगदान हमें दे सकते हैं बस एक ईमेल के बहाने। तो लिख भेजिएगा अपनी यादों के ख़ज़ाने oig@hindyugm.com के पते पर। अगले शनिवार आपसे फिर मुलाक़ात होगी इस साप्ताहिक विशेषांक में, लेकिन 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की नियमित कड़ी के साथ कल शाम को ही हम हाज़िर होंगे, तब तक के लिए इजाज़त दीजिए, नमस्कार!

सुजॉय चट्टर्जी

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ