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Thursday, March 12, 2009

भीग गया मन- हरिहर झा की संगीतबद्ध कविता

नये गीतों, नई संगीतबद्ध कविताओं को सुनवाने का सिलसिला हमने बंद नहीं किया है। अभी ३ दिन पहले ही आपने शिशिर पारखी की आवाज़ में जिगर मुरादाबादी का क़लाम सुना। कल होली के दिन सबने लीपिका भारद्वाज के होरी-गीत का खूब आनंद लिया। आज हम फिर से कुछ नये कलाकारों की प्रतिभा को आपके समक्ष प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बार सुनिए हिन्द-युग्म के अप्रवासी कवि हरिहर झा की कविता 'भीग गया मन' का संगीतबद्ध संस्करण। कविता में संगीत और आवाज़ है संदीप नागर की। तबला पर संगत कर रहे हैं नयन। ये दोनों कलाकार हरिहर झा की जन्मभूमि बांसवाडा (राजस्थान) के उभरते हुये कलाकार हैं। जब इनकी कला को हरिहर झा ने देखा, तो वे प्रभावित हुये बिना न रह सके। इनकी प्रतिभा के विषय में कहने की अपेक्षा यह गीत सुनना उपयुक्त होगा। भविष्य में आप इन कलाकारों के सहयोग से कविताओं का पूरा एल्बम ही सुन सकेंगे। उसके लिए थोड़ा इंतज़ार करना होगा।



हरिहर झा ने हमारे पहले एल्बम 'पहला सुर' के लिए भी कुछ गीत भेजे थे, लेकिन उनकी रिकॉर्डिंग-गुणवत्ता बढ़िया न होने के कारण हम सम्मिलित नहीं कर सके थे।



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