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Tuesday, August 13, 2019

चित्रों की ज़ुबान (संतोष श्रीवास्तव)

रेडियो प्लेबैक इंडिया के साप्ताहिक स्तम्भ 'बोलती कहानियाँ' के अंतर्गत हम आपको सुनवाते हैं हिन्दी की नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने शीतल माहेश्वरी की आवाज़ में हरिशंकर परसाई का व्यंग्य 'पुराना खिलाड़ी" (उर्फ़ अपनी अपनी बीमारी)' का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं संतोष श्रीवास्तव की कथा 'चित्रों की ज़ुबान', शीतल माहेश्वरी के स्वर में।

कथा "चित्रों की ज़ुबान" का कुल प्रसारण समय 27 मिनट 17 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। इस कथा का गद्य अंतरराष्ट्रीय द्वैभाषिक मासिक सेतु पर उपलब्ध है।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिकों, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


जबलपुर में जन्मी संतोष श्रीवास्तव हिंदी साहित्य का एक पहचाना हस्ताक्षर हैं। वे कालिदास पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य शिरोमणि पुरस्कार, प्रियदर्शनी अकादमी पुरस्कार, महाराष्ट्र दलित साहित्य अकादमी पुरस्कार, बसंतराव नाईक लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड, कथाबिंब पुरस्कार, तथा कामलेश्वर स्मृति पुरस्कार सम्मान पा चुकी हैं।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

फूल बनकर हम महकना जानते हैं। मुस्कुरा के ग़म भुलाना जानते हैं ...
(संतोष श्रीवास्तव की कथा 'चित्रों की ज़ुबान' से एक अंश)

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चित्रों की ज़ुबान MP3

#Eighteenth Story, Chitron Ki Zubaan: Santosh Shrivastav /Hindi Audio Book /2019/18. Voice: Sheetal Maheshwari

Tuesday, May 14, 2019

संतोष श्रीवास्तव: बैराग के खाते में

रेडियो प्लेबैक इंडिया के साप्ताहिक स्तम्भ 'बोलती कहानियाँ' के अंतर्गत हम आपको सुनवाते हैं हिन्दी की नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में अनुराग शर्मा की ही लघुकथा 'नाम का चमत्कार' का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं संतोष श्रीवास्तव की कथा 'बैराग के खाते में', अनुराग शर्मा के स्वर में।

कथा "बैराग के खाते में" का कुल प्रसारण समय 20 मिनट 26 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिकों, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



जबलपुर में जन्मी संतोष श्रीवास्तव हिंदी साहित्य का एक पहचाना हस्ताक्षर हैं। वे कालिदास पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य शिरोमणि पुरस्कार, प्रियदर्शनी अकादमी पुरस्कार, महाराष्ट्र दलित साहित्य अकादमी पुरस्कार, बसंतराव नाईक लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड, कथाबिंब पुरस्कार, तथा कामलेश्वर स्मृति पुरस्कार सम्मान पा चुकी हैं।

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अतीत खुद को दोहराता है... सिद्धार्थ ने भी तो राजमहल का, पत्नी का, बच्चे का मोह, लोभ त्यागा था... कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो पड़ता है न...
(संतोष श्रीवास्तव की कथा "बैराग के खाते में" से एक अंश)


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बैराग के खाते में MP3

#Eleventh Story, Bairaag Ke Khaate Mein: Santosh Shrivastav /Hindi Audio Book /2019/11. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, September 6, 2016

बोलती कहानियाँ: शहतूत पक गये हैं

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में अजय नावरिया की सामाजिक परिवर्तन को दर्शाती कथा "इतिहास" का वाचन सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं, संतोष श्रीवास्तव की मर्मस्पर्शी कथा शहतूत पक गये हैं, पूजा अनिल के मधुर स्वर में।

इस कहानी शहतूत पक गये हैं का मूल गद्य द्वैभाषिक मासिक पत्रिका सेतु पर उपलब्ध है। कथा का कुल प्रसारण समय 25 मिनट 47 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



जबलपुर में जन्मी संतोष श्रीवास्तव हिंदी साहित्य का एक पहचाना हस्ताक्षर हैं। वे कालिदास पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य शिरोमणि पुरस्कार, प्रियदर्शनी अकादमी पुरस्कार, महाराष्ट्र दलित साहित्य अकादमी पुरस्कार, बसंतराव नाईक लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड, कथाबिंब पुरस्कार, तथा कामलेश्वर स्मृति पुरस्कार सम्मान पा चुकी हैं।

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‘‘मैंने उनके बर्फ से ठंडे हाथ पकड़कर उन्हें झँझोड़ डाला था, लेकिन ...’’
 (संतोष श्रीवास्तव की कथा "शहतूत पक गये हैं" से एक अंश)


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शहतूत पक गये हैं MP3

#Seventeenth Story, Shahtoot Pak Gaye Hain: Santosh Srivastav /Hindi Audio Book/2016/17. Voice: Pooja Anil

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