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धीरे से एक नगमा कोई सुना रहा है...

कोई ख़्वाबों पे आकर छा जाए और नींद आकर आखों के दरों से वापस मुड जाए तो याद कीजिये गीता दत्त के इस सुरीले नग्में को श्वेता पाण्डेय के साथ, कुछ ऐसे ही जज़्बात बयाँ हो रहे हैं.…

खरा सोना गीत
ऐ दि‍ल मुझे बता दे .....
फि‍ल्‍म-भाई भाई 


आलेख - सुजॉय चटर्जी
स्‍वर-श्‍वेता पाण्‍डेय
प्रस्‍तुति-संज्ञा टंडन


Comments

pcpatnaik said…
BAHUT HI ACHHE GAANE...KUCHHA PURANE STYLE MEIN...MAZA AA GAYA...