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जयशंकर प्रसाद की लघुकथा खंडहर की लिपि

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको हिन्दी में मौलिक व अनुवादित नई पुरानी, रोचक कहानियाँ सुनवा रहे हैं। पिछली बार आपने भावों के अनूठे चित्रकार गिरिजेश राव की मार्मिक लघुकथा "... एक सुख ऐसा भी" का पॉडकास्ट अनुराग शर्मा के स्वर में सुना था। आज हम लेकर आये हैं हिन्दी के प्राख्यात साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की मर्मस्पर्शी लघुकथा "खंडहर की लिपि", वाचन अर्चना चावजी द्वारा।

कहानी "खंडहर की लिपि" का आलेख प्रतिलिपि पर उपलब्ध है। इस प्रस्तुति का कुल प्रसारण समय 5 मिनट 33 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो देर न करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमें admin@radioplaybackindia.com पर संपर्क करें।


मिला कहाँ वह सुख जिसका मै स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुस्काकर जो भाग गया।
~ जयशंकर प्रसाद



"बोलती कहानियाँ" में हर सप्ताह सुनें एक नयी कहानी


‘‘तो प्रभु, क्या मैं यही उत्तर दे दूँ? ‘‘दासी ने कहा।
(जयशंकर प्रसाद की लघुकथा "खंडहर की लिपि" से एक अंश)



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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
खंडहर की लिपि MP3

#Twelfth Story, Khandahar Ki Lipi; Jaishankar Prasad/Hindi Audio Book/2014/12. Voice: Archana Chaoji

Comments

अच्छे से सुनाया आपने।

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