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श्याम कोरी उदय ने कड़वे सच में घोले कुछ मीठे गीत, आज ब्लोग्गर्स चोईस में

श्याम कोरी उदय जी अपने ब्लॉग से मुड़े और कहा -

वैसे तो फ़िल्में बहुत ही कम देखना होता है और न ही गाने सुनने का कोई स्पेशल शौक है ... आपके आदेश पर कुछ पसंदीदा गाने भेज रहा हूँ लेकिन इन्हें सुने हुए भी एक अर्सा-सा हो गया है ...

पसंद की वजह - गानों में प्रयोग किये गए शब्द व उनके भाव ...

१ जिंदगी का सफ़र, है ये कैसा सफ़र, कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं है, जिंदगी को बहुत प्यार हमने किया...(किशोर/सफर)



२ होंठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो / बन जाओ प्रीत मेरी, मेरी जीत अमर कर दो...(प्रेम गीत/जगजीत)


३ कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे...(तुम बिन/ जगजीत सिंह)


४ कहीं दूर जब दिन ढल जाए, सांझ की दुल्हन ... मेरे ख्यालों के आँगन में, कोई सपनों के दीप जलाए...(मुकेश/आनंद)


५ जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, तुम देना साथ मेरा, ओ मेरे हमनवा ... ( कुमार सानु/जुर्म )

Comments

vandana gupta said…
बहुत बढिया पसन्द है।

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महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

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