शनिवार, 14 सितंबर 2013

सिने पहेली – 80 - गीत अपने धुन पराई

सिने पहेली – 80

  
दोस्तों सिने पहेली के आठवें सेगमेंट की अंतिम कड़ी में सभी प्रतियोगियों का स्वागत है.  

हिन्दी संगीतकारों पर अकसर आरोप लगता है कि वो विदेशी गानों से धुनें चुरा कर संगीत रचते हैं. हिन्दी संगीतकार इसे प्रेरणा का नाम देते हैं. 

आज की  पहेली इसी पर आधारित है. हम आपको कुछ विदेशी गाने सुनाएँगे. आपको  इन विदेशी गानों को  पहचानना है और साथ ही वह हिन्दी फ़िल्मी गीत जो इन गानों  से प्रेरित है. 

विदेशी गाने के लिए 1 अंक और हिन्दी गाने के लिए 1 अंक.

हर सवाल के 2 अंक हैं और इस तरह यह अंक 20 अंको का है. 

इस बार के सरताज विजेता हैं प्रकाश गोविन्द जी. बहुत बहुत बधाई आपको.

अभी तक  प्रकाश जी बढ़त बनाये हुए हैं लेकिन पंकज मुकेश जी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं. अगले अंक में हमें इस सेगमेंट का विजेता मिल जायेगा. 

ज की पहेली के लिए आप सबको शुभकामनाएँ।

इस बार के प्रतियोगियों के अंक आप सवालों के बाद देख सकते हैं।

इस अंक से प्रतियोगिता में जुड़ने वाले नये खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए हम उन्हें यह भी बताना चाहेंगे कि अभी भी कुछ देर नहीं हुई है. आज से इस प्रतियोगिता में जुड़ कर भी आप महाविजेता बन सकते हैं. यही इस प्रतियोगिता की विशेषता है. इस प्रतियोगिता के नियमों का उल्लेख नीचे किया गया है, ध्यान दीजियेगा.

तो  आइए, आरम्भ करते हैं, आज की पहेली का सिलसिला.


आज की पहेली

सवाल-1



सवाल-2  


सवाल-3
यह गाना अक्टूबर में रिलीज होने वाली एक कॉमेडी फिल्म में इस्तेमाल हुआ है.


कुछ लोग ये गाना नहीं सुन पा रहे हैं. इसी को नीचे सुन सकते हैं


सवाल-4  

सवाल-5


सवाल-6  

सवाल-7


सवाल-8  

सवाल-9

सवाल-10  
अंतिम सवाल थोड़ा सा उल्टा है. अभी तक आपने विदेशी गाने सुने जिनको हिन्दी गानों में इस्तेमाल करा गया. 
यह गाना हिन्दी फिल्म के एक गाने से सीधा सीधा उठा लिया गया. आपको दोनों गानों को पहचानना है.



अगर आप इन गानों को सुन नहीं पा रहे हैं तो आप नीचे दी गयी लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं.
सवाल 3

सवाल 4

सवाल 5

सवाल 6

सवाल 7

सवाल 8

सवाल 9

सवाल 10

जवाब भेजने का तरीका


उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 80" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 19 सितम्बर, शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।


पिछली पहेली का हल
 
प्रश्न 1: तू तू है वो ही दिल ने जिसे अपना कहा, किशोर कुमार, राहुल देव बर्मन, कपिल कपूर
प्रश्न 2: सत्यशील देशपांडे, लेकिन, गुलज़ार  (गाना - झूठे नैना बोलें सांची बतियाँ)
प्रश्न 3: फ़िरोज़ खान और मुमताज़ ,किशोर कुमार, कल्याणजी आनन्दजी
प्रश्न 4: "कहाँ से आते हैं" (Escape From Taliban). यह फ़िल्म सुष्मिता बनर्जी की आत्मकथा 'Kabuliwala's Bengali Wife' पर बनी थी, जिनका 5 सितंबर को तालिबानी हमलावरों ने कत्ल कर दिया.
प्रश्न 5: इसके कई सारे उत्तर हो सकते हैं. कुछ नीचे दिए हैं:
i) मौसमी चटर्जीजया प्रदा 
(रेखा-मौसमी पर फ़िल्माया लता-आशा डुएट है "दीपक मेरे सुहाग का जलता रहे"; जया प्रदा - पद्मिनि पर फ़िल्माया लता-आशा डुएट है :"सुन री मेरी बहना सुन री मेरी सहेली")

ii)अनुराधा पटेल,
फ़िल्म 'उत्सव' में रेखा और अनुराधा पटेल द्वारा अभिनीत गीत - 'मन क्यूँ बहका रे बहका …' को क्रमशः लता मंगेशकर और आशा भोसले जी नी गाया था

iii) रेखा : राधा / विज्यासमुन्दीस्वरी = तेजस्वनी कोल्हापुरे  : पद्मिनि कोल्हापुरी (बहनों की जोड़ी)


पिछली पहेली के विजेता

सिने पहेली – 79 के विजेताओं के नाम और उनके प्राप्तांक निम्नवत हैं।


1प्रकाश गोविन्द, लखनऊ - 18 अंक 

2- पंकज मुकेश, बैंगलुरु – 18 अंक

3- क्षिती तिवारी , जबलपुर - 16 अंक 

4- विजय कुमार व्यास, बीकानेर - 10 अंक

5- चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ  – 6 अंक

6 - इन्दू  पुरी, चित्तोडगढ - 4 अंक 



आठवें  सेगमेण्ट का  स्कोरकार्ड












नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।


कैसे बना जाए ‘सिने पहेली महाविजेता'

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। सातवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...

4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम।


'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी cine.paheli@yahoo.com पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार।
  


प्रस्तुति : अमित तिवारी 


शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

भरपूर नाच गाना और धमाल है 'फटा पोस्टर निकला हीरो' में

राज कुमार संतोषी के निर्देशन में आ रहे हैं शहीद कपूर और इलियाना डी'क्रूस लेकर फिल्म फटा पोस्टर निकला हीरो . फिल्म में संगीत का जिम्मा संभाला है प्रीतम और अमिताभ भट्टाचार्य की सफल जोड़ी ने जिनके हौसले ये जवानी है दीवानी  के बाद बुलंदी पर होंगें.

आईये तफ्तीश करें इस ताज़ा एल्बम के संगीत की और देखें कि क्या कुछ है नया इस पेशकश में. 

मिका कभी भी प्रीतम के साथ दगा नहीं करते, जब भी प्रीतम ऐसे गीत बनाते हैं जहाँ सब कुछ गायक की क्षमता पर निर्भर हो वो मिका को चुनते हैं और हर बार की तरह मिका ने पहले गीत तू मेरे अगल बगल है में अपना चिर परिचित मस्तानगी भरी है, धुन बहुत ही कैची है. शब्द भी उपयुक्त ही हैं, पर अंगेजी शब्दों की भरमार है. 

मैं रंग शरबतों का  प्रीतम मार्का गीत है. जिसके दो संस्करण हैं. एक आतिफ असलम तो एक अरिजीत की आवाज़ में. मधुर रोमांटिक गीत है. कोरस का इस्तेमाल सुन्दर है. 

बेनी दयाल और और शेफाली की आवाजों में हे मिस्टर डी जे  एक ताज़ा हवा के झोंके जैसा है, जहाँ शेफाली की आवाज़ कमाल का समां रचती है. प्रीतम दा यहाँ पूरी तरह फॉर्म में है. नई ऊर्जा, नई ध्वनियाँ इस गीत को खास बना देती है. 

एक और डांसिंग गीत है दत्तिंग नाच , ऊर्जा से भरपूर कदम थिरकाने में पूरी तरह से सक्षम है ये गीत. देसी बीट्स का तडका और अमिताभ के रचनात्मक शब्द इसे और भी दिलचस्प बना देते हैं. 

माँ बेटे के प्यार भरे रिश्ते को स्वर देता गीत है जनम जनम , सुरीला और भावप्रधान इस गीत के भी दो मुक्तलिफ़ संस्करणों में हमें सुनिधि और आतिफ की आवाजें सुनने को मिलती है. आतिफ ने डूब कर गाया है इसे. सुनिधि ने अपनी आवाज़ देकर इसे बेटियों के लिए भी स्वर दे दिया. 

मेरे बिना तू  में राहत साहब और हर्षदीप की आवाजें हैं. कुछ अधिक प्रभावी नहीं बन पाया ये गीत हालाँकि शब्द अच्छे हैं 

प्रीतम ने अपनी तरकश के सभी तीर आजमाए हैं एल्बम में. और हर बार की तरह वो इस बार भी आम श्रोताओं को मनोरंजन देने में कामियाब हुए हैं. एक और हिट एल्बम उनकी फेहरिश्त में जुड़ती हुई प्रतीत हो रही है. 

सबसे बेहतरीन  गीत - दत्तिंग नाच, हे मिस्टर डी जे, तू मेरे अगल बगल है

हमारी रेटिंग - ४.३/५ 

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी

        

रविवार, 8 सितंबर 2013

आशा भोसले की 81वीं जयन्ती पर विशेष


स्वरगोष्ठी – 136 में आज
रागों में भक्तिरस – 4

राग दरबारी और भक्तिगीत : 'तोरा मन दर्पण कहलाए...'

 
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ की चौथी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, एक बार पुनः आप सब संगीत-प्रेमियों का स्वागत करता हूँ। इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपके लिए संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान रागों और उनमें निबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। श्रृंखला के आज के अंक में हम आपसे एक ऐसे राग पर चर्चा करेंगे जो भक्तिरस के साथ-साथ श्रृंगाररस का सृजन करने में भी समर्थ है। आज हम आपसे राग दरबारी कान्हड़ा के भक्ति-पक्ष पर चर्चा करेंगे और इसके साथ ही सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका आशा भोसले की आवाज़ में, राग दरबारी पर आधारित, फिल्म ‘काजल’ से एक बेहद लोकप्रिय भक्तिगीत प्रस्तुत करेंगे। यह भी संयोग है कि आज ही आशा भोसले का 81वाँ जन्मदिवस है। इसके अलावा आज की कड़ी में आप विश्वविख्यात संगीतज्ञ पण्डित जसराज से राग दरबारी कान्हड़ा में निबद्ध एक भक्तिगीत सुनेंगे। 



संगीत के क्षेत्र में ऐसा उदाहरण बहुत कम मिलता है, जब किसी कलाकार ने मात्र अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लीक से अलग हट कर एक ऐसा मार्ग चुना हो, जो तत्कालीन देश, काल और परिवेश से कुछ भिन्न प्रतीत होता है। परन्तु आगे चल कर वही कार्य एक मानक के रूप में स्थापित हो जाता है। फिल्म संगीत के क्षेत्र में आशा भोसले इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। आज की चर्चित पार्श्वगायिका आशा भोसले का जन्म 8सितम्बर, 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में मराठी रंगमंच के सुप्रसिद्ध अभिनेता और गायक दीनानाथ मंगेशकर के घर दूसरी पुत्री के रूप में हुआ था। दीनानाथ जी की बड़ी पुत्री और आशा भोसले की बड़ी बहन विश्वविख्यात लता मंगेशकर हैं, जिनका जन्म 28सितम्बर, 1929 को हुआ था। दोनों बहनों की प्रारम्भिक संगीत-शिक्षा अपने पिता से ही प्राप्त हुई। अभी लता की आयु मात्र 13 और आशा की 9 वर्ष थी, तभी इनके पिता का देहान्त हो गया। अब परिवार के भरण-पोषण का दायित्व इन दोनों बहनों पर आ गया। अपनी बड़ी बहन लता के साथ आशा भी फिल्मों में अभिनय और गायन करने लगीं। आशा भोसले (तब मंगेशकर) को 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा वाल’ में संगीतकार दत्ता डावजेकर ने गायन का अवसर दिया। इस फिल्म के एक गीत- ‘चला चला नव बाला...’ को उन्होने अकेले आशा से ही नहीं, बल्कि चारो मंगेशकर बहनों से गवाया। भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में यह गीत चारो मंगेशकर बहनों द्वारा गाये जाने के कारण तो दर्ज़ है ही, आशा भोसले के गाये पहले गीत के रूप में भी हमेशा याद रखा जाएगा। मात्र दस वर्ष की आयु में फिल्मों में पदार्पण तो हो गया, किन्तु आगे का मार्ग इतना सरल नहीं था। उन्हें अपने अस्तित्व-रक्षा में काफी संघर्ष करना पड़ा, जिसकी चर्चा हम फिर किसी अवसर पर करेंगे। आज हम आपको उनके गाये हजारों मनमोहक गीतों में से एक बेहद लोकप्रिय भक्तिगीत सुनवाते हैं।आइए, आशा जी का गाया, फिल्म काजल का भक्तिगीत- ‘तोरा मन दर्पण कहलाए...’ सुनते हैं। 1965 में प्रदर्शित इस फिल्म के संगीतकार रवि ने साहिर लुधियानवी के शब्दों को राग दरबारी कान्हड़ा पर आधारित स्वरों में पिरोया था। कहरवा ताल में निबद्ध इस गीत के भक्तिरस का आप आस्वादन कीजिए और आशा जी को उनके 81वें जन्मदिवस पर शुभकामनाएँ दीजिए।


राग दरबारी कान्हड़ा : फिल्म काजल : ‘तोरा मन दर्पण कहलाए...’ : आशा भोसले



मध्यरात्रि के परिवेश को संवेदनशील बनाने और विनयपूर्ण पुकार की अभिव्यक्ति के लिए दरबारी कान्हड़ा एक उपयुक्त राग है। प्राचीन काल में कर्णाट नामक एक राग प्रचलित था। 1550 की राजस्थानी पेंटिंग में इस राग का नाम आया है। बाद में यह राग कानडा या कान्हड़ा नाम से प्रचलित हुआ। यह मान्यता है कि अकबर के दरबारी संगीतज्ञ तानसेन ने कान्हड़ा के स्वरों में आंशिक परिवर्तन कर दरबार में गुणिजनों के बीच प्रस्तुत किया था, जो बादशाह अकबर को बहुत पसन्द आया और उन्होने ही इसका नाम 'दरबारी' रख दिया था। आसावरी थाट के अन्तर्गत माना जाने वाला यह राग मध्यरात्रि और उसके बाद की अवधि में ही गाया-बजाया जाता है। इस राग का वादी स्वर ऋषभ और संवादी स्वर पंचम होता है। अति कोमल गान्धार स्वर का आन्दोलन करते हुए प्रयोग इस राग की प्रमुख विशेषता होती है। यह अतिकोमल गान्धार अन्य रागों के गान्धार से भिन्न है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। अवरोह के स्वर वक्रगति से लगाए जाते हैं। राग दरबारी के भक्तिरस के पक्ष को रेखांकित करने के लिए अब हम आपको विश्वविख्यात संगीतज्ञ पण्डित जसराज के स्वरों में शक्ति और बुद्धि की प्रतीक देवी दुर्गा की स्तुति सुनवाते हैं। स्तुति से पूर्व जसराज जी ने 'ओम् श्री अनन्त हरि नारायण...' का समृद्ध आलाप भी प्रस्तुत किया है। 


राग दरबारी : ‘जय जय श्री दुर्गे...’ : पण्डित जसराज




आज की पहेली 


‘स्वरगोष्ठी’ के 136वें अंक की पहेली में आज हम आपको संगीत की एक विशेष शैली में एक रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। 140वें अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – कण्ठ संगीत की यह रचना किस राग में निबद्ध है?

2 – संगीत की इस रचना में किस ताल का प्रयोग किया गया है?

आप अपने उत्तर केवल radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 138वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ के 134वें अंक की पहेली में हमने आपको विदुषी डॉ. एन. राजम् की वायलिन पर पूरब अंग के दादरा का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग भैरवी और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- ताल दादरा। दोनों प्रश्नो के सही उत्तर जबलपुर से क्षिति तिवारी, लखनऊ से प्रकाश गोविन्द और जौनपुर के डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने दिया है। तीनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का


मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ के अन्तर्गत आज के अंक में हमने आपसे राग दरबारी के भक्तिरस के पक्ष पर चर्चा की। आगामी अंक में हम एक और भक्तिरस प्रधान राग में गूँथी रचनाएँ लेकर उपस्थित होंगे। अगले अंक में इस लघु श्रृंखला की पाँचवीं कड़ी के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की प्रतीक्षा करेंगे।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 

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