मंगलवार, 21 अगस्त 2012

प्लेबैक इंडिया वाणी (१२) जोकर

संगीत समीक्षा - जोकर




अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा के अभिनय से सजी है फिल्म ‘जोकर’, जो आने वाले दिनों में प्रदर्शित होने वाली है.

इस फिल्म का संगीत दिया है जी.वी.प्रकाश कुमार और गौरव दागावंकर ने. जी.वी.प्रकाश कुमार ए.आर.रहमान के भांजे हैं जिनकी बतौर संगीत निर्देशक यह पहली फिल्म है.सभी श्रोताओं को उनसे मधुरता की उम्मीद रहेगी. देखिये आपकी और हमारी अपेक्षाओं पर वः कितने खरे उतर पाते हैं. इस फिल्म के ६ गानों में से ५ का संगीत निर्देशन जी.वी.प्रकाश कुमार का है और एक गाना आया है गौरव के हिस्से में.

अल्बम की शुरुआत होती है काफिराना गाने से. इस गाने का संगीत गौरव का है और आवाजें हैं सुनिधी चौहान और आदर्श शिंदे की.गाने के बोलों में हिन्दी , अंग्रेजी और मराठी का इस्तेमाल हुआ है. यह गाना पूरी मस्ती में सराबोर गाना है जिसमे ढोल का जमकर इस्तेमाल हुआ है. इस गाने को सुनकर महाराष्ट्र में गणपति महोत्सव के समय होने वाले डांस की याद आ जाती है.

अगला गाना है जुगनू. इस गाने को गाया है उदित नारायण ने. गाना साधारण है पर उदित ने अपनी आवाज के द्वारा इसमें मिठास लाने की कोशिश करी है. गाना एक बार सुनने लायक है. उससे ज्यादा इसे पचाने की तो मेरी हिम्मत नही हुई.


सिंग राजा गाने में लोक संगीत का इलेक्ट्रोनिक साउंड के साथ अच्छा इस्तेमाल किया गया है. दलेर मेहंदी और सोनू कक्कड़ की आवाज इस गाने में जोश भर देती है. नच ले शब्द को कई भाषाओं में बोला गया है. गाने के बोल कोइ खास नहीं है पर गाने का संगीत निःसंदेह बहुत अच्छा है. इस गाने को सुनने के बाद आपको शब्द शायद याद न रहें पर इसका संगीत याद रहेगा.

अगला गाना इस अल्बम में ये जोकर है जो काफी कुछ पहले गाने काफिराना के द्वारा छेड़ी धुन को कंटीन्यू करता है. सोनू निगम की आवाज जानदार है मगर काफिराना गाने को टक्कर देने में काफी पीछे है.

इस अल्बम में दो इंस्ट्रुमेंटल हैं. पहला Tears of Joker है. जो बहुत ही मधुर है. इसको आप आँखे बंद करके सुनिए और इसमें डूब जाइए. थोड़ा सा मन में उदासी ला देता है ये. मुझे अल्बम का यह सबसे अच्छा ट्रेक लगा.

दूसरा इंस्ट्रुमेंटल है अल्बम के अंत में Alien arrival. इसमें कुछ अच्छी बीट्स इस्तेमाल हुई हैं. इसको सुनकर आपको  ७० के दशक के कुछ गानों की याद आ सकती है.


कुल मिलाकर पूरी अल्बम में संगीत अच्छा है केवल कमी है lyrics की. रेडिओ प्लेबैक इंडिया इसे ३.६ के रेटिंग देता है.

रविवार, 19 अगस्त 2012

वर्षा ऋतु के रंग : मल्हार अंग के रागों के संग – समापन कड़ी

    
    
स्वरगोष्ठी – ८४ में आज

‘चतुर्भुज झूलत श्याम हिंडोला...’ : मल्हार अंग के कुछ अप्रचलित राग

र्षा ऋतु के संगीत पर केन्द्रित ‘स्वरगोष्ठी’ की यह श्रृंखला विगत सात सप्ताह से जारी है। परन्तु ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब इस ऋतु ने भी विराम लेने का मन बना लिया है। अतः हम भी इस श्रृंखला को आज के अंक से विराम देने जा रहे हैं। पिछले अंकों में आपने मल्हार अंग के विविध रागों और वर्षा ऋतु की मनभावन कजरी गीतों का रसास्वादन किया था। आज इस श्रृंखला के समापन अंक में मल्हार अंग के कुछ अप्रचलित रागों पर चर्चा करेंगे और संगीत-जगत के कुछ शीर्षस्थ कलासाधकों से इन रागों में निबद्ध रचनाओं का रसास्वादन भी करेंगे।
पण्डित सवाई गन्धर्व 

मल्हार अंग का एक मधुर राग है- नट मल्हार। आजकल यह राग बहुत कम सुनाई देता है। यह राग नट और मल्हार अंग के मेल से बना है। इसे विलावल थाट का राग माना जाता है। इस राग में दोनों निषाद का प्रयोग होता है, शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी मध्यम और संवादी षडज होता है। इसराज और मयूर वीणा-वादक पं. श्रीकुमार मिश्र के अनुसार इस राग के गायन-वादन में नट अंग की स्वर-संगति, सा रे s रे ग s ग म रे... मियाँ की मल्हार की, म रे प नि(कोमल) ध नि सां ध नि(कोमल) म प... तथा गौड़ मल्हार की स्वर संगति, म प ध नि सां s ध प म... की जाती है। इस राग के माध्यम से नायिका की विकल मनःस्थिति का सम्प्रेषण भावपूर्ण ढंग से की जा सकती है। प्रायः मध्य लय की रचनाएँ इस राग में बड़ी भली लगती है।

आइए अब आपको राग नट मल्हार की एक दुर्लभ रिकार्डिंग सुनवाते है। इसे बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों के सुविख्यात विद्वान पण्डित सवाई गन्धर्व अर्थात पण्डित रामचन्द्र गणेश कुण्डगोलकर ने स्वर दिया है। पण्डित गन्धर्व किराना घराना के संवाहक उस्ताद अब्दुल करीम खाँ के शिष्य और पण्डित भीमसेन जोशी, विदुषी गंगुबाई हंगल, पण्डित फिरोज दस्तूर, पण्डित वासवराज राजगुरु आदि महान संगीतज्ञों के गुरु थे। राग नट मल्हार की मध्य लय, तीनताल में यह मोहक रचना आप भी सुनिए।

राग नट मल्हार : ‘बनरा बन आया...’ : पण्डित सवाई गन्धर्व



मल्हार का ही एक प्रकार है, राग जयन्त या जयन्ती मल्हार। इसके नाम से आभास हो जाता है कि यह राग
पण्डित विनायकराव पटवर्धन
जैजैवन्ती और मियाँ की मल्हार का मिश्रण है। यह काफी थाट का राग माना जाता है। इसमें दोनों गांधार और दोनों निषाद का प्रयोग होता है। इसका वादी ऋषभ और संवादी स्वर पंचम होता है। राग के आरोह के स्वर हैं- सा, रे प, म प नि(कोमल) ध नि सां, तथा अवरोह के स्वर हैं- सां ध नि(कोमल) म प, प म ग रे ग(कोमल) रे सा। पं. श्रीकुमार मिश्र के अनुसार राग जयन्त मल्हार के दोनों रागों का कलात्मक और भावात्मक मिश्रण क्लिष्ट व विशिष्ट प्रक्रिया है। पूर्वाङ्ग में जैजैवन्ती का करुण व विनयपूर्ण भक्तिभाव परिलक्षित होता है, जबकि उत्तराङ्ग में मियाँ की मल्हार, वर्षा के तरल भावों के साथ समर्पित, पुकारयुक्त व आनन्द से परिपूर्ण भावों का सृजन करने में सक्षम होता है। इस राग में भी मध्यलय की रचनाएँ अच्छी लगती हैं।

आपको सुनवाने के लिए हमने राग जयन्त मल्हार की एक प्राचीन किन्तु मोहक बन्दिश का चयन किया है। अपने समय के बहुआयामी संगीतज्ञ पण्डित विनायकराव पटवर्धन ने इस रचना को स्वर दिया है। पण्डित पटवर्धन ने न केवल रागदारी संगीत के क्षेत्र में, बल्कि सवाक फिल्मों के प्रारम्भिक दौर में भी अपना अनमोल योगदान किया था। लीजिए, राग जयन्त मल्हार की तीनताल में निबद्ध यह रचना आप भी सुनिए।

राग जयन्त मल्हार : ‘ऋतु आई सावन की...’ : पण्डित विनायकराव पटवर्धन



राग जयन्त मल्हार का उपयोग फिल्म-संगीत में एकमात्र संगीतकार बसन्त देसाई ने ही किया था। उन्हें मल्हार अंग के राग अत्यन्त प्रिय थे। उनके द्वारा स्वरबद्ध गीतों की सूची में मल्हार की विविधता के स्पष्ट दर्शन होते हैं। १९७५ में बसन्त देसाई की संगीतबद्ध फिल्म ‘शक’ प्रदर्शित हुई थी। यह उनकी संगीतबद्ध अन्तिम फिल्म थी। फिल्म के प्रदर्शन से पहले ही एक लिफ्ट दुर्घटना में उनका निधन हो गया था। फिल्म ‘शक’ में श्री देसाई ने गुलजार के लिखे एक गीत- ‘मेहा बरसने लगा है...’ को राग जयन्त मल्हार के स्वरों में ढाल कर कर्णप्रिय रूप दिया है। आशा भोसले के स्वरों में आप भी यह गीत सुनिए-

फिल्म शक : ‘मेहा बरसने लगा है आज की रात...’ : संगीत – बसन्त देसाई



पं. भीमसेन जोशी
मल्हार अंग के विभिन्न रागों के क्रम में अब हम आपसे कुछ ऐसे रागों की चर्चा करते हैं, जिन्हें आजकल शायद ही गाया-बजाया जाता है। इन रागों में निबद्ध रचनाएँ हम आपको सुनवाएँगे, किन्तु इनके बारे में जानकारी देने का दायित्व हम संगीत के जानकार और प्रयोक्ता पाठकों को सौंपते हैं। इन रागों के बारे में जानकारी आप नीचे दिए गए पते पर मेल कीजिए। आपके भेजे विवरण आगामी अंकों में आपके परिचय के साथ प्रकाशित करेंगे। तो आइए अब सुनते हैं, मल्हार अंग के कुछ अप्रचलित रागों की रचनाएँ। सबसे पहले हम आपको सुनवाते है, पण्डित भीमसेन जोशी के स्वर में राग छाया मल्हार की एक मोहक बन्दिश-

राग छाया मल्हार : ‘सखी श्याम नहीं आए...’ : पण्डित भीमसेन जोशी


पण्डित जसराज

मल्हार का एक और अप्रचलित प्रकार है, राग चरजू की मल्हार। इस राग के बारे में भी आपसे जानकारी पाने की हमें प्रतीक्षा रहेगी। अब हम आपको राग चरजू की मल्हार में निबद्ध एक मोहक रचना सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पण्डित जसराज के स्वरों में सुनवाते है।

राग चरजू की मल्हार : ‘चतुर्भुज झूलत श्याम हिंडोला...’ : पण्डित जसराज



और अब अन्त में हम आपको १९७९ में प्रदर्शित फिल्म ‘मीरा’ का एक गीत सुनवाते हैं। गीतकार गुलजार द्वारा निर्देशित इस फिल्म में भक्त कवयित्री मीराबाई का जीवन-दर्शन रेखांकित किया गया था। मीराबाई की जीवनगाथा में उन्हीं के पदों को विश्वविख्यात सितार-वादक पण्डित रविशंकर ने संगीतबद्ध किया था। मीरा के इन पदों में एक पद है- ‘बादल देख डरी मैं...’, जिसे पण्डित रविशंकर ने राग मीराबाई की मल्हार में स्वरबद्ध किया है और इसे स्वर दिया है, गायिका वाणी जयराम ने।

राग मीराबाई की मल्हार : ‘बादल देख डरी हो श्याम...’ : वाणी जयराम 



फिल्म ‘मीरा’ के इस गीत की रिकार्डिंग सुप्रसिद्ध लेखिका और रेडियो प्लेबैक इण्डिया की शुभचिन्तक श्रीमती इन्दु पुरी गोस्वामी ने भेजी थी। उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए अब हम आज के इस अंक को यहीं विराम देते हैं।

आज की पहेली

आज की ‘संगीत-पहेली’ में हम आपको एक सुविख्यात वादक कलाकार की आवाज़ में गायन का एक अंश सुनवा रहे हैं। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ९०वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला का विजेता घोषित किया जाएगा।



१_ संगीत के इस अंश में गायन स्वर किस विख्यात भारतीय वादक कलाकार का है?

२_ संगीत का यह अंश किस राग की ओर संकेत करता है?

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के ८६वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं। हमसे सीधे सम्पर्क के लिए swargoshthi@gmail.com पर अपना सन्देश भेज सकते हैं।

पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ के ८२वें अंक की पहेली में हमने आपको एक बेहद लोकप्रिय कजरी गीत का अंतरा सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- “कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरि आइल ननदी...” और दूसरे का सही उत्तर है- ताल कहरवा। दोनों प्रश्नों के सही उत्तर लखनऊ के प्रकाश गोविन्द, जबलपुर की क्षिति तिवारी और मीरजापुर (उ.प्र.) के डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने दिया है। इन्हें मिलते हैं २-२ अंक। तीनों प्रतिभागियों को रेडियो प्लेबैक इण्डिया की ओर से हार्दिक बधाई।

झरोखा अगले अंक का

मित्रों, ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में हमने वर्षा ऋतु के प्रचलित गीत, संगीत और रागों की श्रृंखला को विराम दिया है। अगले अंक में तंत्र वाद्य के राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलासाधक का स्मरण करेंगे। आगामी २८ अगस्त को इनकी जयन्ती भी मनाई जाएगी। इस अवसर पर हम उन्हें स्मरण करेंगे और भावभीनी संगीतांजलि अर्पित करेंगे। अगले रविवार को प्रातः ९-३० पर आयोजित अपनी इस गोष्ठी में आप हमारे सहभागी बनिए। हमें आपकी प्रतीक्षा रहेगी।

कृष्णमोहन मिश्र

शनिवार, 18 अगस्त 2012

जुड़िये 'सिने पहेली' से, और जीतिये 5000 रुपये का नकद इनाम...


सिने-पहेली # 33 (18 अगस्त, 2012) 


'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों और श्रोताओं को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार, और स्वागत है आप सभी का 'सिने पहेली' स्तंभ में। दोस्तों, एक और सप्ताह का समापन हुआ चाहता है। आजकल अधिकतर दफ़्तरों में शनिवार को छुट्टी होती है, पिछले पाँच दिनों की भागादौड़ी के बाद दो दिन मिलता है अपने लिए, अपने शौक पूरे करने के लिए, मनोरंजन के लिए। और तभी तो हम शनिवार की सुबह आपके लिए लेकर आते हैं 'सिने पहेली' का यह मज़ेदार खेल। हाँ, यह सच है कि इसमें ज़रा दिमाग़ पे ज़ोर डालना पड़ता है, पर इसमें भी एक मज़ा है और यकीनन इन पहेलियों को सुलझाते हुए आप रोज़-मर्रा के तनाव को थोड़ा कम कर पाते होंगे, ऐसा मेरा अनुमान है। 'सिने पहेली' का चौथा सेगमेण्ट जारी है, और इस सेगमेण्ट की तीसरी कड़ी है, अर्थात् 'सिने पहेली' की 33-वीं कड़ी। आज की पहेलियों को फेंकने से पहले हम दोहरा देते हैं कि किस तरह से आप बन सकते हैं 'सिने पहेली' के महाविजेता।

कैसे बना जाए 'सिने पहेली महाविजेता?


1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्‍, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा। 

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। तीसरे सेगमेण्ट की समाप्ति पर अब तक का 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...




4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांतवना पुरस्कार।

और अब आज की पहेली...

आज की पहेली : तोल मोल के बोल


आज हम आप से पूछ रहे हैं पाँच सवाल। हर सवाल के साथ हम दे रहे हैं चार विकल्प, जिनमें से केवल एक विकल्प 100% सही है। आपको हर सवाल के लिए सही जवाब चुनना है। हर सही जवाब के लिए आपको मिलेंगे 2 अंक, यानी आज की कड़ी के कुल अंक हैं 10। तो ये रहे आज के सवाल...

1. इनमें से किस गायक के साथ मोहम्मद रफ़ी ने फ़िल्मी गीत नहीं गाया है?

a) कविता कृष्णमूर्ती
b) अलका याग्निक
c) उदित नारायण
d) इनमें से किसी के साथ भी नहीं

2. इनमें से किस अभिनेता के लिए मोहम्मद रफ़ी ने पार्श्वगायन किया है?

a) अनिल कपूर
b) गोविंदा
c) चंकी पाण्डेय
d) राजीव कपूर

3. इनमें से किस गायक ने किशोर कुमार के साथ फ़िल्मी गीत गाया है?

a) अभिजीत
b) कुमार सानू
c) उदित नारायण
d) सोनू निगम

4. फ़िल्म 'अभिमान' में जया भादुड़ी के इन्ट्रोडक्शन सीन में जो श्लोक सुनाई देता है, उसे किन्होंने गाया है?

a) लता मंगेशकर
b) हेमलता
c) जया भादुड़ी
d) अनुराधा पौडवाल

5. फ़िल्म 'नमक हलाल' के मशहूर गीत "के पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी" गीत के बीच में जो आलाप गाया गया है, उसे किस गायक ने गाया है?

a) किशोर कुमार
b) पंडित सत्यनारयण मिश्र
c) लक्ष्मीकांत
d) पंडित भीमसेन जोशी

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और अब ये रहे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के कुछ आसान से नियम....

1. उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब न कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे।

2. ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 33" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान अवश्य लिखें।

3. आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 23 अगस्त शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।

4. सभी प्रतियोगियों ने निवेदन है कि सूत्र या हिंट के लिए 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के किसी भी संचालक या 'सिने पहेली' के किसी भी प्रतियोगी से फ़ोन पर या ईमेल के ज़रिए सम्पर्क न करे। हिंट माँगना और हिंट देना, दोनों इस प्रतियोगिता के खिलाफ़ हैं। अगर आपको हिंट चाहिए तो अपने दोस्तों, सहयोगियों या परिवार के सदस्यों से मदद ले सकते हैं जो 'सिने पहेली' के प्रतियोगी न हों।


पिछली पहेली के सही जवाब


'सिने पहेली - 32' के वर्ग पहेली का हल यह रहा...




पिछली पहेली के परिणाम


'सिने पहेली - 32' के परिणाम इस प्रकार हैं...

1. प्रकाश गोविन्द, लखनऊ --- 10 अंक

2. अल्पना वर्मा, अल-आइन, यू.ए.ई --- 10 अंक

3. विजय कुमार व्यास, बीकानेर --- 10 अंक

4. महेश बसंतनी, पिट्सबर्ग, यू.एस.ए --- 10 अंक

5. गौतम केवलिया, बीकानेर --- 10 अंक

6. सलमन ख़ान, अलीगढ़ --- 10 अंक

7. क्षिति तिवारी, इंदौर --- 10 अंक

8. मनु बेतख़ल्लुस, नई दिल्ली --- 9.5 अंक

9. चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ --- 9.5 अंक

10. रीतेश खरे, मुंबई --- 9.5 अंक

11. शरद तैलंग, कोटा --- 9 अंक

12. तरुशिखा सुरजन, नई दिल्ली ---9 अंक

13. अमित चावला, दिल्ली --- 8 अंक

14. निशान्त अहलावत, गुड़गाँव --- 8 अंक

15. राजेश प्रिया, पटना ---7.5 अंक

16. अदिति चौहान, देहरादून --- 7 अंक

17. पंकज मुकेश, बेंगलुरू --- 4 अंक


और यह रहा चौथे सेगमेण्ट का सम्मिलित स्कोर-कार्ड...



सभी प्रतियोगियों को हार्दिक बधाई। अंक सम्बंधित अगर आपको किसी तरह की कोई शिकायत हो, तो cine.paheli@yahoo.com के पते पर हमें अवश्य सूचित करें। 

'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, और अनुमति दीजिए अपने इस ई-दोस्त सुजॉय चटर्जी को, नमस्कार!

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