मंगलवार, 3 जुलाई 2012

बिम्ब एक प्रतिबिम्ब अनेक


शब्दों की चाक पर - एपिसोड 05

शब्दों की चाक पर हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को संवारने  के लिए मौजूद होती है नयी संभावनाएँ और खुद को परखने और साबित करने के लिए तैयार मिलता है एक और रण का मैदान. यहाँ श्रोताओं के लिए भी हैं कवि मन की कोमल भावनाओं उमड़ता घुमड़ता मेघ समूह जो जब आवाज़ में ढलकर बरसता है तो ह्रदय की सूक्ष्म इन्द्रियों को ठडक से भर जाता है. तो दोस्तों, इससे पहले कि  हम पिछले हफ्ते की कविताओं को आत्मसात करें, आईये जान लें इस दिलचस्प खेल के नियम - 


1. कार्यक्रम की क्रिएटिव हेड रश्मि प्रभा के संचालन में शब्दों का एक दिलचस्प खेल खेला जायेगा. इसमें कवियों को कोई एक थीम शब्द या चित्र दिया जायेगा जिस पर उन्हें कविता रचनी होगी...ये सिलसिला सोमवार सुबह से शुरू होगा और गुरूवार शाम तक चलेगा, जो भी कवि इसमें हिस्सा लेना चाहें वो रश्मि जी से संपर्क कर उनके फेसबुक ग्रुप में जुड सकते हैं, रश्मि जी का प्रोफाईल यहाँ है.


2. सोमवार से गुरूवार तक आई कविताओं को संकलित कर हमारे पोडकास्ट टीम के हेड पिट्सबर्ग से अनुराग शर्मा जी अपने साथी पोडकास्टरों के साथ इन कविताओं में अपनी आवाज़ भरेंगें. और अपने दिलचस्प अंदाज़ में इसे पेश करेगें.

3. हमारी टीम अपने विवेक से सभी प्रतिभागी कवियों में से किसी एक कवि को उनकी किसी खास कविता के लिए सरताज कवि चुनेगें. आपने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से ये बताना है कि क्या आपको हमारा निर्णय सटीक लगा, अगर नहीं तो वो कौन सी कविता जिसके कवि को आप सरताज कवि चुनते. 

चलिए अब लौटते हैं अनुराग शर्मा और अभिषेक ओझा की तरफ जो आज आपके लिए लेकर आये हैं कुछ मार्मिक कवितायेँ जो ऊपर दी हुई तस्वीर को देखकर हमारे कवि मनों से उभरी हैं, आज का एपिसोड यक़ीनन आपको कुछ सोचने के लिए मजबूर करेगा. तो दोस्तों सुनिए सुनाईये और छा जाईये...

(नीचे दिए गए किसी भी प्लेयेर से सुनें)





या फिर यहाँ से डाउनलोड करें 

सोमवार, 2 जुलाई 2012

आपके नाम भी हो सकता है 5000 रुपये का इनाम, आज से ही भाग लीजिए 'सिने-पहेली' में


सिने-पहेली # 27 (2 जुलाई, 2012) 


'सिने पहेली' के सभी पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, हमारे कुछ प्रतियोगियों ने हमें यह सूचित किया है कि 'सिने पहेली' में सोमवार से शुक्रवार तक का समय होने की वजह से उन्हें जवाब भेजने में परेशानी हो रही है क्योंकि इनमें कोई छुट्टी का दिन शामिल नहीं है, इसलिए हमें 'सिने पहेली' का दिन इस तरह से निर्धारित करना चाहिए ताकि शनिवार और रविवार जवाब भेजने वाले दिनों में शामिल हो जाए। तो दोस्तों, इसके जवाब में हम फ़िलहाल यही कहना चाहेंगे कि ऐसा कर पाना अभी मुमकिन नहीं है क्योंकि 'सिने पहेली' पोस्ट करने के लिए हमें भी छुट्टी के दिन की ज़रूरत पड़ती है। हाँ, हम इतना ज़रूर कर सकते हैं कि शुक्रवार की जगह अब आप शनिवार शाम 5 बजे तक अपना जवाब भेज सकते हैं। इस तरह से अब आपको शनिवार का पूरा दिन मिल गया जवाबों को ढूंढ कर हमें भेजने के लिए। चलिए शुरू करते हैं आज की पहेली


आज की पहेली: गान पहचान 

दोस्तों, आज बहुत दिनों बाद हम रुख़ कर रहे हैं ऑडियो की तरफ़। हमने ख़ास आपके लिए तैयार किया है एक फ़िल्मी मेडली। सुनिए इस मेडली को और पहचानिए इस मेडली में शामिल गीतों को। हर सही गीत के पहचानने पर आपको मिलेंगे 1 अंक।





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और अब ये रहे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के कुछ आसान से नियम....

१. जवाब भेजने के लिए आपको करना होगा एक ई-मेल cine.paheli@yahoo.com के ईमेल पते पर। 'टिप्पणी' में जवाब न कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे।

२. ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 27" अवश्य लिखें, और जवाबों के नीचे अपना नाम व स्थान लिखें।

३. आपका ईमेल हमें शनिवार 7 जुलाई शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद की प्रविष्टियों को शामिल कर पाना हमारे लिए संभव न होगा।

४. आप अपने जवाब एक ही ईमेल में लिखें। किसी प्रतियोगी का पहला ईमेल ही मान्य होगा। इसलिए सारे जवाब प्राप्त हो जाने के बाद ही अपना ईमेल भेजें।

है न बेहद आसान! तो अब देर किस बात की, लगाइए अपने दिमाग़ पे ज़ोर और जल्द से जल्द लिख भेजिए अपने जवाब। जैसा कि हमने शुरु में ही कहा है कि हर सप्ताह हम सही जवाब भेजने वालों के नाम घोषित किया करेंगे, और 100 एपिसोड्स (10 सेगमेण्ट्स) के बाद "महाविजेता" का नाम घोषित किया जाएगा जिन्हे दिया जाएगा 5000 रुपये का नगद इनाम। 


और अब पिछले सप्ताह पूछे गए सवालों के सही जवाब...

'सिने पहेली - 26' के सही जवाब 




१) सलेटी (GREY) - छम छमा छम, आसमान और बाज़ - तीनों फिल्मों में ओ पी नैयर का संगीत था। ये तीनों नय्यर साहब की पहली तीन फ़िल्में थीं।

२) नारंगी (ORANGE) - काला पत्थर, क़ानून और अचानक - तीनों फ़िल्मों का पार्श्व संगीत सलिल चौधरी ने तैयार किया था। तीनों फिल्मों के मुख्य पात्र पर हत्या/ अपराध का आरोप है। तीनों फ़िल्मों के लिए फ़िल्म के निर्देशक को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का नामांकन मिला था फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार में।

३) लाल (RED) - "दीवाना मुझसा नहीं" जुमले वाला गीत शम्मी कपूर पर 'तीसरी मंज़िल' फ़िल्म में फ़िल्माया गया था, और आमिर ख़ान पर भी 'दीवाना मुझसा नहीं' फ़िल्म का शीर्षक गीत फ़िल्माया गया था जिसे उदित नारायण ने गाया था।

४) भूरा (BROWN) - शंकर राव, अविनाश और भरत - तीनों का पारिवारिक नाम व्यास है। 

५) गुलाबी (PINK) - सुधा मल्होत्रा, मुकेश और तलत महमूद - इन तीनों गायकों को हिन्दी फ़िल्म में प्लेबैक करने का पहला मौका संगीतकार अनिल बिस्वास ने दिया था।

६) नीला (BLUE) - कुदरत, मधुमती और नील कमल - तीनों फिल्मों की कहानी पुनर्जन्म पर आधारित है। 

७) आसमानी (SKY) - आतिफ़ असलम, ज़ेबा बख्तियार और राहत फ़तेह अली खां - तीनों पाकिस्तान से आये कलाकार हैं।

८) पीला (YELLOW) - रफू चक्कर, क़िस्मत और बाज़ी- तीनों फिल्मों के नायक स्त्री वेश में गाना गाते हैं। 

९) प्याजी (ONION)- तुम मिले, आप तो ऐसे न थे और साया - तीनों फिल्मों में एक गीत ऐसा है जिसके तीन संस्करण है - 'आप तो ऐसे न थे' में "तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है" को रफ़ी, हेमलता और मनहर ने गाया है। 'तुम मिले' का शीर्षक गीत जावेद अली, नीरज श्रीधर और शफ़कत अमानत अली ने गाया है। 'साया' का "दिल चुरा लिया" गीत सोनू निगम, श्रेया घोषाल और उदित-अलका ने गाया है।

१०) हरा (GREEN) - संगम, साजन और हम दिल दे चुके सनम - तीनों फ़िल्में प्रेम-त्रिकोण की कहानी पर आधारित है और एक नायक को अपने प्यार की कुर्बानी देनी पड़ती है।

चलिए अब 'सिने पहेली # 26' के विजेयताओं के नाम ये रहे -----

'सिने पहेली - 26' के विजेता 


1. शुभ्रा शर्मा, नयी दिल्ली --- 10 अंक 
2. सलमन ख़ान, अलीगढ़ --- 10 अंक 
3. अल्पना वर्मा, अल आइन, यू.ए.ई --- 10 अंक 
4. प्रकाश गोविन्द, लखनऊ --- 10 अंक 
5. गौतम केवलिया, बीकानेर --- 10 अंक 
6. क्षिति तिवारी, इंदौर --- 10 अंक 
7. विजय कुमार व्यास, बीकानेर --- 10 अंक 
8. रीतेश खरे, मुंबई --- 10 अंक 
9. अमित चावला, दिल्ली --- 10 अंक 
10. चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ --- 5 अंक 
11. पंकज मुकेश, बेंगलुरू --- 1 अंक 

पंकज मुकेश ने हमें सूचित किया है  वो पूरा सप्ताह थे, फिर भी 'सिने पहेली' के समय-सीमा समाप्त होने से थोड़ी देर पहली जितना हो सका उतने का जवाब भेज दिया। पंकज जी, हम आपके स्पोर्ट्समैनशिप की दाद देते हैं कि इस तरह की खेल भावना से इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। चाहे प्रतियोगिता में जीत किसी की भी हो, असली जीत उसी की होती है जो एक सच्चे खिलाड़ी की मनोभावना से प्रतियोगिता में भाग लेता है। आपके जल्द कुशलता की हम कामना करते हैं।

'सिने पहेली' प्रतियोगिता के तीसरे सेगमेण्ट में अब तक का सम्मिलित स्कोर-कार्ड यह रहा...


इस तरह से हम देखते हैं कि अब तक की लड़ाई में प्रकाश गोविंद, सलमन ख़ान और क्षिति तिवारी सबसे उपर चल रहे हैं, और उनके बिल्कुल कंधे पर सांसें डाल रहे हैं शुभ्रा शर्मा और रीतेश खरे।गौतम केवलिया, पंकज मुकेश और शरद तैलंग ने भी अच्छी लड़ाई लड़ी है अब तक। देखते हैं तीसरे सेगमेण्ट का विनर कौन बनता है। बड़ा दिलचस्प मोड़ ले चुका है यह सेगमेण्ट!

सभी प्रतियोगियों को हार्दिक बधाई। अंक सम्बंधित अगर आपको किसी तरह की कोई शिकायत हो, तो cine.paheli@yahoo.com के पते पर हमें अवश्य सूचित करें। 

'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी cine.paheli@yahoo.com पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी १००% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, और अनुमति दीजिए अपने इस ई-दोस्त सुजॉय चटर्जी को, आपकी और मेरी दोबारा मुलाक़ात होगी अगले सोमवार इसी स्तंभ में, नमस्कार!

रविवार, 1 जुलाई 2012

७५वें वर्ष में प्रवेश पर अभिनन्दन, पं . चौरसिया जी


स्वरगोष्ठी – ७७ में आज
बाँस की बाँसुरी और पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया

ज ‘स्वरगोष्ठी’ का यह ७७ वाँ अंक है और आज की इस बैठक में मैं कृष्णमोहन मिश्र अपने सभी संगीत-प्रेमी पाठकों/श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हुए बाँसुरी के अनन्य साधक पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया का ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से, अपनी ओर से और आप सब संगीत-प्रेमियों की ओर से अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, आज जुलाई की पहली तारीख है। आज ही के दिन १९३८ में इस महान संगीतज्ञ का जन्म हुआ था। एक साधारण सी दिखने वाली बाँस की बाँसुरी लेकर पूरे विश्व में भारतीय संगीत की विजय-पताका फहराने वाले पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया का आज ७५वाँ जन्म-दिवस अर्थात अमृत महोत्सव मनाने का दिवस है। आज ही वे अपने जीवन के सुरीले ७४ वर्ष पूर्ण कर ७५वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। आइए, ‘स्वरगोष्ठी’ में आज हम सब उन्हीं की कुछ रचनाओं से उनका अभिनन्दन करते हैं।

बाँस से बनी बाँसुरी सम्भवतः सबसे प्राचीन स्वर-वाद्य है। महाभारत काल से पहले भी बाँसुरी का उल्लेख मिलता है। विष्णु के कृष्णावतार को तो ‘मुरलीधर’, ‘बंशीधर’, ‘वेणु के बजइया’ आदि नामों से सम्बोधित किया गया है। श्रीकृष्ण से जुड़ी तमाम पौराणिक कथाएँ बाँसुरी के गुणगान से भरी पड़ी हैं। यह एक ऐसा सुषिर वाद्य है जो लोक, सुगम से लेकर शास्त्रीय मंचों पर भी सुशोभित है। भारतीय संगीत के क्षेत्र में बाँसुरी के अनेक साधक हुए हैं, जिन्होने इस साधारण से दिखने वाले सुषिर वाद्य को असाधारन गरिमा प्रदान की है। वर्तमान में पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया बाँसुरी के ऐसे साधक हैं जिन्होने देश-विदेश में इस वाद्य को प्रतिष्ठित किया है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा को आगे बढ़ाने से पहले आइए, बाँसुरी पर उनके बजाये राग जैजैवन्ती का आनन्द लेते हैं। सुविख्यात तबला वादक पण्डित समर साहा संगति की है।

राग – जैजैवन्ती : पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया



हरिप्रसाद चौरसिया का जन्म १ जुलाई, १९३८ को इलाहाबाद के एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ सभी सदस्यों को कुश्ती का शौक था। उनके पिता भी जाने-माने पहलवान थे और चाहते थे कि उनका पुत्र भी कुश्ती के दाँव-पेंच सीखे। बालक हरिप्रसाद पिता के साथ अखाड़ा जाते तो थे किन्तु उनका मन इस कार्य में कभी नहीं लगा। उनका बाल-मन तो सुरीली ध्वनियों की ओर आकर्षित होता था। किशोरावस्था में हरिप्रसाद की भेंट बनारस (अब वाराणसी) के पण्डित राजाराम से हुई। उन्होने इस किशोर की छिपी प्रतिभा को पहचाना और संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा उन्होने ही दी। एक बार हरिप्रसाद ने पण्डित भोलानाथ प्रसन्ना का बाँसुरी-वादन सुना और इसी वाद्य को अपनाने का निश्चय कर लिया। १५ वर्ष की आयु में वे प्रसन्ना जी के शिष्य हुए और १९ की आयु के होने तक बाँसुरी-वादन में इतने कुशल हो गए कि उनकी नियुक्ति आकाशवाणी में हो गई। उनकी पहली तैनाती ओडिसा स्थित कटक केन्द्र पर बाँसुरी-वादक के रूप में हुई। यहाँ वे लगभग पाँच वर्ष तक रहे। इस दौरान उन्होने अनेक संगीतज्ञों को सुना और क्षेत्रीय सगीत का अध्ययन भी किया।

आइए, यहाँ थोड़ा विराम लेकर पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया का बजाया राग हंसध्वनि में दो रचनाएँ सुनवाते हैं। राग हंसध्वनि अत्यन्त मधुर राग है, जो उत्तर और दक्षिण, दोनों संगीत पद्यतियों में समान रूप से लोकप्रिय है। इस राग में पण्डित जी द्वारा प्रस्तुत पहली मध्य लय की रचना सितारखानी में और दूसरी द्रुत तीनताल में निबद्ध है।

राग – हंसध्वनि : पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया



लगभग पाँच वर्ष तक कटक केन्द्र पर कार्यरत रहने के बाद हरिप्रसाद जी का स्थानान्तरण कटक से आकाशवाणी के मुम्बई केन्द्र पर हो गया। मुम्बई आ जाने के बाद संगीत के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को एक नई पहचान मिली। अब उन्हें प्रतिष्ठित संगीत सभाओं में मंच-प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया जाने लगा था। यहीं रह कर उनका सम्पर्क मैहर घराने के संस्थापक और सन्त-संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खाँ की सुपुत्री विदुषी अन्नपूर्णा देवी से हुआ। उन दिनों अन्नपूर्णा जी एकान्तवास कर रहीं थी। परन्तु हरिप्रसाद जी की प्रतिभा से प्रभावित होकर इनका मार्गदर्शन करना स्वीकार किया। अन्नपूर्णा जी से मार्गदर्शन पाकर हरिप्रसाद जी के वादन में भरपूर निखार आया। उन्होने रागों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोक-संगीत का भी गहन अध्ययन किया था। आज भी विभिन्न संगीत-समारोहों में अपने बाँसुरी-वादन को विराम देने से पहले वे कोई लोकधुन अवश्य प्रस्तुत करते हैं। आइए, अब हम आपको बाँसुरी पर प्रस्तुत भटियाली धुन सुनवाते हैं। पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया द्वारा प्रस्तुत इस भटियाली धुन के साथ तबला संगति पण्डित योगेश समसी ने की है।

भटियाली धुन : पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया






देश-विदेश के अनेकानेक सम्मान और पुरस्कारों से अलंकृत पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया ने सुप्रसिद्ध संतूर-वादक पण्डित शिवकुमार शर्मा के साथ जोड़ी बना कर वर्ष १९८९ से फिल्मों में भी संगीत देना आरम्भ किया। शिव-हरि के नाम से इन दिग्गज संगीतज्ञों ने चाँदनी, विजय, सिलसिला, लम्हे, डर आदि फिल्मों में अनेक लोकप्रिय गीत दिये हैं। आज के इस अंक को विराम देने से पहले आपके लिए प्रस्तुत है फिल्म ‘चाँदनी’ का एक प्यारा सा गीत।

फिल्म – चाँदनी : ‘तेरे मेरे होठों पे मीठे मीठे गीत सजना...’ : लता मंगेशकर और बावला



आज की पहेली

आज की संगीत-पहेली में हम आपको सुनवा रहे हैं, फिल्मी गीत का एक अंश। इसे सुन कर आपको हमारे दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ८०वें अंक तक सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाले पाठक/श्रोता हमारी तीसरी पहेली श्रृंखला के ‘विजेता’ होंगे।



१ - संगीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह गीत किस राग पर आधारित है?

२ – इस गीत में दो गायक कलाकारों के स्वर हैं। एक स्वर सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक येशुदास का हैं। गायिका की आवाज़ पहचानिए।

आप अपने उत्तर हमें तत्काल swargoshthi@gmail.com पर भेजें। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के ७९वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।

पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ के ७५ वें अंक में हमने आपको संगीत-मार्तण्ड ओमकारनाथ ठाकुर के स्वर में स्वतंत्र भारत के प्रथम सूर्योदय पर रेडियो से सजीव रूप से प्रसारित ‘वन्देमातरम’ गीत का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग देस और दूसरे का उत्तर है- बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय। दोनों प्रश्नों के सही उत्तर मीरजापुर (उ.प्र.) के डॉ. पी.के. त्रिपाठी, जबलपुर की क्षिति तिवारी, लखनऊ की अरुंधति चौधरी तथा पटना की अर्चना टण्डन ने दिया है। चारो प्रतिभागियों को रेडियो प्लेबैक इण्डिया की ओर से हार्दिक बधाई।

झरोखा अगले अंक का

मित्रों, इन दिनों देश के कई भागों में वर्षा ऋतु ने दस्तक दे दी है और कुछ भागों में अभी भी कजरारे बादलों की प्रतीक्षा हो रही है। अगले अंक से हम मल्हार शीर्षक से एक लघु श्रृंखला प्रस्तुत करेंगे। इस श्रृंखला में हम आपसे वर्षा ऋतु के प्रचलित संगीत शैलियों और रागों पर चर्चा करेंगे। इस विषय पर यदि आपकी कोई फरमाइश हो तो हमें तुरन्त लिखें। रविवार को प्रातः ९-३० बजे आप और हम ‘स्वरगोष्ठी’ के अगले अंक में पुनः मिलेंगे। तब तक के लिए हमें विराम लेने की अनुमति दीजिए।

कृष्णमोहन मिश्र

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