गुरुवार, 3 मार्च 2011

मुकाबला हमसे करोगे तो तुम हार जाओगे...देखिये चुनौती का एक रंग ये भी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 605/2010/305

स्ट्रेलिया, इंगलैण्ड, वेस्ट इंडीज़, पाकिस्तान, भारत, न्युज़ीलैण्ड, श्रीलंका और ईस्ट-अफ़्रीका; इन आठ देशों को लेकर १९७५ में पहला विश्वकप क्रिकेट आयोजित हुआ था। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों नमस्कार, और फिर एक बार विश्वकप क्रिकेट की कुछ बातें लेकर हम हाज़िर हैं इन दिनों चल रही लघु शृंखला 'खेल खेल में' में। पहले के तीन विश्वकप इंगलैण्ड में आयोजित की गई थी। १९८३ में भारत के विश्वकप जीतने के बाद १९८७ का विश्वकप आयोजित करने का अधिकार भारत ने प्राप्त कर लिया। इस बारे में विस्तार से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उस वक़्त के प्रेसिडेण्ट एन.के.पी. साल्वे ने अपनी किताब 'The Story of the Reliance Cup' में लिखा है। साल्वे साहब ने उस किताब में लिखा है कि १९८३ में लॊर्ड्स के उस ऐतिहासिक विश्वकप फ़ाइनल के लिए उन्हें दो टिकट दिए गये थे। और जब भारत ने फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाइ कर लिया तो उन्होंने MCC से दो और टिकटों के लिए आग्रह किया भारत से आये उनके दो दोस्तों के लिए। MCC ने उनकी माँग ठुकरा दी। यह बात साल्वे साहब को चुभ गई और वो जी जान से जुट गये अगला विश्वकप भारत में आयोजित करवाने के लिए। उनकी मेहनत रंग लायी और १९८७ मे भारत और पाकिस्तान ने युग्म रूप से इस प्रतियोगिता को आयोजित किया और इस तरह से विश्वकप क्रिकेट आयोजित करने वाले इंगलैण्ड के आधिपत्य को ख़त्म किया। और इसके बाद दूसरे देशों को भी मौका मिला मेज़बानी का। क्रिकेट विश्वकप अपने आप में एक बहुत बड़ा एवेण्ट है, ख़ुद ICC के वेबसाइट पर प्रकाशित शब्दों में "the Cricket World Cup is the showpiece event of the cricket calendar."

और अब आज के गीत की बारी। कल के गीत में ज़रा सा ओवर-कॊन्फ़िडेन्स था, और आज के गीत में तो ओवर-कॊन्फ़िडेन्स की सारी हदें ही पार कर दी हैं नायिका ने। "हम से मुक़ाबला करोगे हाये, हम से मुक़ाबला करोगे तो, तुम हार जाओगे, हम जीत जाएँगे..."। लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर की युगल आवाज़ों में यह है फ़िल्म 'बद और बदनाम' का गीत। यह सन् १९८४ में निर्मित फ़िल्म है जिसमें संजीव कुमार, शत्रुघ्न सिंहा, अनीता राज, परवीन बाबी ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई। फ़ीरोज़ शिनोय निर्देशित इस फ़िल्म का निर्माण किया था के. शोरे ने; फ़िल्म में संगीत दिया लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने और गीत लिखे आनंद बक्शी नें। आज का यह गीत फ़िल्माया गया है परवीन बाबी और संजीव कुमार पर एक पार्टी में। ८० के दशक के मध्य भाग तक आते आते फ़िल्म संगीत एक बुरे वक़्त में प्रवेश कर चुका था। फ़िल्मों की कहानियाँ कुछ ऐसी करवट ले चुकी थी कि गीतकार और संगीतकारों के लिए अच्छा स्तरीय काम दिखा पाना ज़रा मुश्किल सा हो रहा था। इसके बावजूद समय समय पर कुछ यादगार गानें भी आते गये। और जब फ़िल्मकार ने चाहा कि लता जी से गीत गवाया जाये, तो फिर कहानी या सिचुएशन जैसा भी हो, गाना उन्हीं को ध्यान में रखकर बनाया जाता था क्योंकि इंडस्ट्री में सब को यह बात मालूम थी कि लता जी ऐसा वैसा गीत कभी नहीं गातीं। इसलिए उस दौर की फ़िल्मों के बाक़ी गीत चाहे जैसा भी बनें, लता जी वाले गानें सुनने लायक ज़रूर होते थे, और आज का प्रस्तुत गीत भी कोई व्यतिक्रम नहीं है। और उस पर सुर साधक सुरेश वाडकर की आवाज़। पता नहीं क्यों, मुझे व्यक्तिगत रूप से हमेशा ऐसा लगता है कि सुरेश वाडकर ग़लत समय पर इंडस्ट्री में आये। फ़िल्मी गीतों का स्तर इतना गिर चुका था कि उनके स्तर के गानें ही बनने बंद हो गये, और वो एक बहुत ही अंडर-रेटेड गायक बन कर रह गये। तो आइए लता जी और सुरेश जी की आवाज़ों में सुनते हैं फ़िल्म 'बद और बदनाम' का यह गीत, और २०११ क्रिकेट विश्वकप के खिलाड़ियों से ओवर-कॊन्फ़िडेण्ट ना होने की सलाह देते हैं :-)



क्या आप जानते हैं...
कि ८० के दशक में लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर की जोड़ी से सब से ज़्यादा युगल गीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने गवाये, जिनमें 'क्रोधी', 'प्रेम रोग', 'प्यासा सावन', 'बद और बदनाम', 'सिंदूर', 'नाचे मयूरी', 'सुर संगम', 'कभी अजनबी थे' जैसी फ़िल्में शामिल हैं।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 06/शृंखला 11
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - आसान है.

सवाल १ - किस अभिनेता निर्माता निर्देशक की आवाज़ है इस क्लिप्पिंग में - १ अंक
सवाल २ - गीत में उदित नारायण ने किस नवोदित अभिनेता (उन दिनों के) का प्लेबैक किया था - ३ अंक
सवाल ३ - गीतकार बताएं - २ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
ये मुकाबला तो अवध जी सही कहते हैं एक दम आखिरी दौर तक जाएगा....

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

बुधवार, 2 मार्च 2011

मुकाबला हमसे न करो....कभी कभी खिलाड़ी अपने जोश में इस तरह का दावा भी कर बैठते हैं

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 604/2010/304

'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों नमस्कार और स्वागत है आप सभी का इस स्तंभ में। तो कहिए दोस्तों, कैसा चल रहा है आपका क्रिकेट विश्वकप दर्शन? आपको क्या लगता है कौन है फ़ेवरीट इस बार? क्या भारत जीत पायेगा २०११ क्रिकेट विश्वकप? किन खिलाड़ियों से है ज़्यादा उम्मीदें? ये सब सवाल हम सब इन दिनों एक दूसरे से पूछ भी रहे हैं और ख़ुद भी अंदाज़ा लगाने की कोशिशें रहे हैं। लेकिन हक़ीक़त सामने आयेगी २ अप्रैल की रात जब विश्वकप पर किसी एक देश का आधिपत्य हो जायेगा। पर जैसा कि पहली कड़ी में ही हमने कहा था, जीत ज़रूरी है, लेकिन उससे भी जो बड़ी बात है, वह है पार्टिसिपेशन और स्पोर्ट्समैन-स्पिरिट। इसी बात पर आइए आज एक बार फिर कुछ रोचक तथ्य विश्वकप क्रिकेट से संबंधित हो जाए!

• पहला विश्वकप मैच जो जनता के असभ्य व्यवहार की वजह से बीच में ही रोक देना पड़ा था, वह था १९९६ में कलकत्ते का भारत-श्रीलंका सेमी-फ़ाइनल मैच।
• १९९६ में श्रीलंका पहली टीम थी जिसने बाद में बैटिंग कर विश्वकप फ़ाइनल मैच जीता।
• २००३ विश्वकप में पाकिस्तान के शोएब अख़्तर ने क्रिकेट इतिहास में पहली बार १०० माइल प्रति घण्टे की रफ़्तार से गेंद डाली इंगलैण्ड के निक नाइट के ख़िलाफ़।
• २००३ विश्वकप में कनाडा के जॊन डेविसन ने ६७ गेंदों में शतक लगाई वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़, जो विश्वकप इतिहास का 'फ़ास्टेस्ट' शतक था।
• सचिन तेन्दुलकर विश्वकप में कुल आठ बार 'मैन ऒफ़ दि मैच' बनें; उनके बाद विवियन रिचार्ड्स पाँच बार, ब्रायन लारा चार बार और गॊर्डन ग्रीनिज तीन बार इस ख़िताब को जीता।
• २००२/२००३ विश्वकप में केवल १७ वर्ष और ७ दिन की उम्र में खेलने वाले बंगलादेश के तल्हा ज़ुबैर विश्वकप क्रिकेट इतिहास के सब से कम उम्र के खिलाड़ी हुए।
• १९९५/१९९६ में नेदरलैण्ड्स के एन.ई. क्लार्क विश्वकप के इतिहास के सब से प्रवीण खिलाड़ी थे, उस वक़्त उनकी आयु थी ४७ वर्ष और २५७ दिन।

इस 'खेल खेल में' शृंखला की कल की कड़ी में आपने सुना था "आ देखें ज़रा, किसमें कितना है हम", यानी कि चैलेंज से लवरेज़ एक जोशिला गीत। किसी को चैलेंज करने में कोई बुराई नहीं जब तक इंसान में आत्मविश्वास है, साहस है, कॊन्फ़िडेन्स है। लेकिन जब कॊन्फ़िडेन्स ओवर-कॊन्फ़िडेन्स में बदल जाता है, और साहस दुस्साहस में, तो ज़रा मुश्किल वाली बात हो सकती है, मंज़िल करीब आते आते दूर ही रह जाती है। आज हम जिस गीत को सुनवाने के लिए ले आये हैं, उससे भी ओवर-कॊन्फ़िडेन्स की थोड़ी सी बू जैसी आ रही है। १९६९ की फ़िल्म 'प्रिंस' का यह गीत है "मुक़ाबला हमसे ना करो, मुक़ाबला हमसे ना करो, हम तुम्हे अपने रंग में रंग डालेंगे एक ही पल में"। पर्दे पर तीन ज़बरदस्त डान्सर्स - शम्मी कपूर, वैजयंतीमाला और हेलेन, और उनके प्लेबैक के लिए तीन लेजेंडरी आवाज़ें - मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर और आशा भोसले। शंकर जयकिशन का धमाकेदार संगीत और सिचुएशन के मुताबिक पुर-असर अल्फ़ाज़ हसरत जयपुरी साहब के। कुल मिलाकर प्रतियोगितामूलक गीतों के जौनर का एक मीलस्तंभ गीत। तो आइए २०११ विश्वकप क्रिकेट के उत्साह और जोश को थोड़ा सा और बढ़ावा देते हैं इस जोशीले नग़मे के ज़रिए।



क्या आप जानते हैं...
कि लता मंगेशकर और आशा भोसले के किसी तीसरे गायक के साथ गाये गीतों की फ़ेहरिस्त में आख़िरी गाना था फ़िल्म 'आइना' का शीर्षक गीत "आइना है मेरा चेहरा" जिसे मंगेशकर बहनों ने सुरेश वाडकर के साथ मिलकर गाया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 05/शृंखला 11
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - एक आवाज़ है लता जी की.

सवाल १ - फिल्म के निर्देशक कौन है - ३ अंक
सवाल २ - सह गायक कौन हैं - २ अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
क्या बात है तीन नाम लगभग एक मिनट से भी पहले बता दिए गए, दोनों योद्धाओं के द्वारा....कमाल है...बधाई

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

मंगलवार, 1 मार्च 2011

आ देखे जरा, किस में कितना है दम....अब जब मैदान में आ ही गए हैं तो हो जाए मुकाबला

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 603/2010/303

'खेल खेल में' - इन दिनों विश्वकप क्रिकेट के नाम हम कर रहे हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की महफ़िल इसी लघु शृंखला के ज़रिए। आज है इस शृंखला की तीसरी कड़ी। कल की कड़ी में हमने विश्वकप क्रिकेट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य आपको दिए, आइए आज उसी को आगे बढ़ाया जाये!
• विश्वकप के इतिहास में दो देशों के लिए खेलने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं केप्लर वेसेल्स। वेसेल्स ने १९८३ का विश्वकप ऒस्ट्रेलिया के लिए खेला, और १९९२ में साउथ अफ़्रीका के कैप्टन बनें।
• इंगलैण्ड तीन बार विश्वकप फ़ाइनल तक पहूँचे (१९७९, १९८७, १९९२), लेकिन कभी जीत नहीं सके।
• वेस्ट इंडीज़ और ऒस्ट्रेलिया दो ऐसे देश हैं जिन्होंने विश्वकप पर एकाधिक बार अधिकार जमाया है।
• लंदन वह शहर है जिसने सब से ज़्यादा विश्वकप फ़ाइनल होस्ट किये है (४ बार)।
• तीसरे अम्पायर का कॊन्सेप्ट १९९६ के विश्वकप से लागू हुआ था।
• पहले एक-दिवसीय मैच ६० ओवर्स के होते थे। १९८७ के विश्वकप में इसे ६० से ५० ओवर का कर दिया गया और उस साल विश्वकप भारत और पाकिस्तान ने होस्ट किया था।
• "पिंच-हिटर" उस बल्लेबाज़ को कहा जाता है जिसे मैदान पर उतारा जाता है पहली ही गेंद से शॊट्स लगाने के लिए। विश्व का पहला पिंच-हिटर न्युज़ीलैण्ड के मार्क ग्रेटबैच हैं जिन्होंने १९९२ में कुल ७ मैचों में ३५६ गेंदों में ३१३ रन बनाये, जिसमें ३२ चौके और १३ छक्के शामिल थे।

दोस्तों, २०११ का विश्वकप ज़ोर पकड़ने लगा है और लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। सिर्फ़ घरों तक ही अब ये मैचेस सीमित नहीं है, बल्कि दफ़्तरों, स्कूल-कालेजों, सार्वजनिक जगहों में भी आजकल इसी के चर्चे हैं। टीवी के दुकानों के सामने भीड़ जमने लगी हैं, और ग़रीब से लेकर अमीर तक, सभी इस क्रिकेट-बुखार की चपेट में हैं। आज के और अगले दो अंकों में हम जिन गीतों को बजाने जा रहे हैं, उनमें है प्रतियोगिता और प्रतिस्पर्धा के भाव। पिछले दो गीतों में हमने प्रतिस्पर्धा से उपर उठकर अपने आप पर जीत हासिल करने और हार-जीत को सहजता से लेने की बात कही थी, लेकिन अब अगले तीन गीतों में थोड़ा सा जोश है, कम्पीटिशन है, थोड़ी सी मस्ती भी है, थोड़ा शरारत भी। लेकिन जो भी है, है तो एक हेल्दी-कम्पीटिशन ही। फ़िल्म 'रॊकी' में आशा भोसले, किशोर कुमार, और राहुल देव बर्मन का गाया एक बड़ा ही ज़बरदस्त गीत था "आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम, जम के रखना क़दम, मेरे साथिया"। फ़िल्म में यह गीत एक प्रतियोगितामूलक गीत था और दो टीमें थीं संजय दत्त-रीना रॊय तथा शक्ति कपूर-टीना मुनिम की। एक बार फिर बक्शी साहब के बोल और पंचम दा का संगीत। फ़िल्म में इस प्रतियोगिता के जज के रूप में शम्मी कपूर नज़र आये जिन्होंने अपना ही, यानी शम्मी कपूर का ही किरदार निभाया। तो आइए, इस गीत के बोलों का ही सहारा लेकर हम २०११ विश्वकप क्रिकेट के सभी खिलाड़ियों से यही दोहराएँ कि "जम के रखना क़दम, all the best!"



क्या आप जानते हैं...
कि १९८१ की फ़िल्म 'रॊकी' सुनिल दत्त निर्मित व निर्देशित फ़िल्म थी, जिसका निर्माण उन्होंने अपने बेटे संजय दत्त को लौंच करने के लिए किया था। फ़िल्म के रिलीज़ के चंद हफ़्ते पहले सुनिल दत्त की पत्नी और संजय की माँ नरगिस जी का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया और वो अपने पुत्र की इस फ़िल्म में कामयाबी देख नहीं पायीं।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 04/शृंखला 11
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र -तीन आवाजों में है ये गीत.

सवाल १ - किन तीन कलाकारों पर फिल्माया गया है ये गीत - ३ अंक
सवाल २ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक
सवाल ३ - गीतकार बताएं - २ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
अमित जी ने एक अंक की बढ़त ली है, कल अंजाना जी और विजय जी का टाई हुआ, लगता है एक अंक वाला सवाल किसी को नहीं चाहिए :)

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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