रविवार, 30 जुलाई 2017

राग गौड़ मल्हार : SWARGOSHTHI – 328 : RAG GAUD MALHAR




स्वरगोष्ठी – 328 में आज

पावस ऋतु के राग – 3 : मनभावन राग गौड़ मल्हार

विदुषी मालिनी राजुरकर और लता मंगेशकर से सुनिए -“गरजत बरसत भीजत आई लो...”





मालिनी राजुरकर
लता मंगेशकर
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला – “पावस ऋतु के राग” की तीसरी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र अपनी सहयोगी संज्ञा टण्डन के साथ आप सभी संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। इस श्रृंखला में हम एक नया प्रयोग कर रहे हैं। गीतों का परिचयात्मक आलेख हम अपने सम्पादक-मण्डल की सदस्य संज्ञा टण्डन की रिकार्ड किये आवाज़ में प्रस्तुत कर रहे हैं। आपको हमारा यह प्रयोग कैसा लगा, अवश्य सूचित कीजिएगा। आपको स्वरों के माध्यम से बादलों की उमड़-घुमड़, बिजली की कड़क और रिमझिम फुहारों में भींगने के लिए आमंत्रित करता हूँ। यह श्रृंखला, वर्षा ऋतु के रस और गन्ध से पगे गीत-संगीत पर केन्द्रित है। इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपसे वर्षा ऋतु में गाये-बजाए जाने वाले रागों और उनमें निबद्ध कुछ चुनी हुई रचनाओं पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सम्बन्धित राग के आधार पर रचे गए फिल्मी गीत भी प्रस्तुत करेंगे। भारतीय संगीत के अन्तर्गत मल्हार अंग के सभी राग पावस ऋतु के परिवेश की सार्थक अनुभूति कराने में समर्थ हैं। आम तौर पर इन रागों का गायन-वादन वर्षा ऋतु में अधिक किया जाता है। इसके साथ ही कुछ ऐसे सार्वकालिक राग भी हैं जो स्वतंत्र रूप से अथवा मल्हार अंग के मेल से भी वर्षा ऋतु के अनुकूल परिवेश रचने में सक्षम होते हैं। इस श्रृंखला की तीसरी कड़ी में हम राग गौड़ मल्हार पर चर्चा करेंगे। राग गौड़ मल्हार, मल्हार अंग का एक ऐसा राग है जिसके गायन-वादन से सावन मास की प्रकृति का सजीव चित्रण तो किया ही जा सकता है, साथ ही ऐसे परिवेश में उपजने वाली मानवीय संवेदनाओं की सार्थक अभिव्यक्ति भी इस राग के माध्यम से की जा सकती है। आकाश पर कभी मेघ छा जाते हैं तो कभी आकाश मेघरहित हो जाता है। इस राग के स्वर-समूह उल्लास, प्रसन्नता, शान्ति और मिलन की लालसा का भाव जागृत करते हैं। मिलन की आतुरता को उत्प्रेरित करने में यह राग समर्थ होता है। इस राग में आज हम आपको सबसे पहले राग गौड़ मल्हार के स्वरों स्वरों में निबद्ध 1951 में प्रदर्शित फिल्म ‘मल्हार’ से सुविख्यात गायिका लता मंगेशकर की आवाज़ में गाया गीत प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके साथ ही राग का शास्त्रीय स्वरूप उपस्थित करने के लिए सुप्रसिद्ध गायिका मालिनी राजुरकर के स्वर में राग गौड़ मल्हार में प्रस्तुत एक खयाल रचना सुनवा रहे हैं।


राग गौड़ मल्हार : ‘गरजत बरसत भीजत आई लो...’ : लता मंगेशकर : फिल्म - मल्हार

राग गौड़ मल्हार : ‘गरजत बरसत भीजत आई लो...’ : विदुषी मालिनी राजुरकर



संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 328वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1967 में प्रदर्शित प्राचीन फिल्म से लिये गए एक राग आधारित गीत का एक अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 330वें अंक की पहेली के सम्पन्न होने के बाद जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस वर्ष के तीसरे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा।





1 – गीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह मल्हार अंग का कौन सा राग है?

2 – गीत में प्रयोग किये गए ताल का नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस पार्श्वगायिका की आवाज़ है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार 5 अगस्त, 2017 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 330वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 326वीं कड़ी की पहेली में हमने आपको 1998 में प्रदर्शित फिल्म ‘साज’ से एक राग आधारित गीत का एक अंश प्रस्तुत कर आपसे तीन में से दो प्रश्नों का उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है, राग – मियाँ मल्हार, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है, ताल – तीनताल और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है, स्वर – सुरेश वाडकर

इस अंक की पहेली में सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी हैं - चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, पेंसिलवेनिया, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। आशा है कि अन्य पाठक भी नियमित रूप से साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ का अवलोकन करते रहेंगे और पहेली में भाग लेंगे। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर हमारी नई श्रृंखला “पावस ऋतु के राग” जारी है। इस श्रृंखला ऋतु प्रधान गीतो को प्रस्तुत किया जा रहा है। आज की इस कड़ी में हमने आपके लिए राग गौड़ मल्हार पर चर्चा की। आगामी अंक में हम मल्हार अंग के किसी और राग पर चर्चा करेंगे और इस राग में निबद्ध कुछ रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। हमारी जारी श्रृंखला और आगामी श्रृंखलाओं के विषय, राग, रचना और कलाकार के बारे में यदि आपकी कोई फरमाइश हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 8 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


वाचक स्वर : संज्ञा टण्डन   
आलेख व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र   

रेडियो प्लेबैक इण्डि

शनिवार, 29 जुलाई 2017

चित्रकथा - 29: इस दशक के नवोदित नायक (भाग - 2)

अंक - 29

इस दशक के नवोदित नायक (भाग - 2)


"ये तेरा हीरो इधर है..." 



’रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। समूचे विश्व में मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम सिनेमा रहा है और भारत कोई व्यतिक्रम नहीं। बीसवीं सदी के चौथे दशक से सवाक् फ़िल्मों की जो परम्परा शुरु हुई थी, वह आज तक जारी है और इसकी लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती ही चली जा रही है। और हमारे यहाँ सिनेमा के साथ-साथ सिने-संगीत भी ताल से ताल मिला कर फलती-फूलती चली आई है। सिनेमा और सिने-संगीत, दोनो ही आज हमारी ज़िन्दगी के अभिन्न अंग बन चुके हैं। ’चित्रकथा’ एक ऐसा स्तंभ है जिसमें बातें होंगी चित्रपट की और चित्रपट-संगीत की। फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत से जुड़े विषयों से सुसज्जित इस पाठ्य स्तंभ में आपका हार्दिक स्वागत है। 



हर रोज़ देश के कोने कोने से न जाने कितने युवक युवतियाँ आँखों में सपने लिए माया नगरी मुंबई के रेल्वे स्टेशन पर उतरते हैं। फ़िल्मी दुनिया की चमक-दमक से प्रभावित होकर स्टार बनने का सपना लिए छोटे बड़े शहरों, कसबों और गाँवों से मुंबई की धरती पर क़दम रखते हैं। और फिर शुरु होता है संघर्ष। मेहनत, बुद्धि, प्रतिभा और क़िस्मत, इन सभी के सही मेल-जोल से इन लाखों युवक युवतियों में से कुछ गिने चुने लोग ही ग्लैमर की इस दुनिया में मुकाम बना पाते हैं। और कुछ फ़िल्मी घरानों से ताल्लुख रखते हैं जिनके लिए फ़िल्मों में क़दम रखना तो कुछ आसान होता है लेकिन आगे वही बढ़ता है जिसमें कुछ बात होती है। हर दशक की तरह वर्तमान दशक में भी ऐसे कई युवक फ़िल्मी दुनिया में क़दम जमाए हैं जिनमें से कुछ बेहद कामयाब हुए तो कुछ कामयाबी की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। कुल मिला कर फ़िल्मी दुनिया में आने के बाद भी उनका संघर्ष जारी है यहाँ टिके रहने के लिए। ’चित्रकथा’ में आज से हम शुरु कर रहे हैं इस दशक के नवोदित नायकों पर केन्द्रित एक लघु श्रॄंखला जिसमें हम बातें करेंगे वर्तमान दशक में अपना करीअर शुरु करने वाले शताधिक नायकों की। प्रस्तुत है ’इस दशक के नवोदित नायक’ श्रॄंखला की दूसरी कड़ी।



मिमो और बिलाल
र दौर की तरह इस दशक में भी फ़िल्म जगत की कई बड़ी-बड़ी हस्तियों के बेटे-बेटियों या पोते-पोतियों, नाती-नातिनों ने फ़िल्म जगत में क़दम रखे। आज के इस अंक में हम ऐसे ही कुछ नौजवानों की बातें करने जा रहे हैं। फ़िल्मकार कमल अमरोही को कौन नहीं जानता! ’महल’, ’मुग़ल-ए-आज़म’, ’दिल अपना और प्रीत पराई’, ’पाक़ीज़ा’ और ’रज़िआ सुल्तान’ जैसी यादगार फ़िल्मों के जनक कमल अमरोही के पोते बिलाल अमरोही ने 2014 में ’ओ तेरी’ फ़िल्म से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु किया। कमल अमरोही की पत्नी महमूदी की तीन संतान थे जिनमें दो बेटे शानदार और ताजदार तथा बेटी रुख़सार। कमल अमरोही के दो पोते हैं - मशहूर अमरोही और बिलाल अमरोही। मशहूर ने 2008 में फ़िल्म ’हमसे है जहाँ’ से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु तो किया था, पर फ़िल्म के बुरी तरह पिट जाने से वो गुमनाम ही रह गए। इस फ़िल्म को उनके वालिद ताजदार अमरोही ने प्रोड्युस किया था। बड़े भाई के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हुए बिलाल ने भी 2014 में ’ओ तेरी’ में पुल्कित सम्राट के साथ सह-नायक की भूमिका में नज़र आए। अतुल अग्निहोत्री की इस हास्य फ़िल्म को दर्शकों ने पसन्द किया, लेकिन बिलाल की तरफ़ लोगों का ध्यान बहुत ज़्यादा आकर्षित नहीं हो पाया। इस फ़िल्म में बिलाल के किरदार का नाम था AIDS (आनन्द इशवराम देवदत्त सुब्रह्मण्यम)। बिलाल की अभिनय क्षमता अच्छी है, इसलिए हम यही उम्मीद करेंगे कि उनका फ़िल्मी सफ़र आगे भी जारी रहेगा। बॉलीवूड सुपरस्टार मिथुन चक्रबर्ती के बेटे मिमो ने भी फ़िल्मों में क़िस्मत आज़मायी, लेकिन वो भी बिलाल की तरह एक हिट फ़िल्म के इन्तज़ार में हैं। मिमो का असली नाम है महाक्षय चक्रबर्ती। मिमो ने अपना डेब्यु 2008 की फ़िल्म ’जिम्मी’ में किया था जिसमें उन्होंने एक DJ का रोल निभाया था जिसे ख़ून के झूठे केस में फँसाया जाता है। उनके अभिनय के लिए उस वर्ष फ़िल्मफ़ेअर के बेस्ट मेल डेब्यु के लिए उनका नामांकन भी हुआ था। फिर 2011 में उन्होंने अभिनय किया ’द मर्डरर’ फ़िल्म में जो अभी तक रिलीज़ नहीं हो पायी है। इसी वर्ष उनकी फ़िल्म आयी ’Haunted - 3D' जो भारत की पहली "stereo-scopic 3D horror film" थी। इस फ़िल्म को समीक्षकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली और फ़िल्म हिट साबित हुई। लेकिन इसके बाद इसी साल की फ़िल्म ’लूट’, 2013 की दो फ़िल्में - ’रॉकी’ और ’एनिमी’, और 2015 की फ़िल्म ’इश्क़ेदारियाँ’ फ़्लॉप रही जिस वजह से मिमो धीरे धीरे पीछे होते चले गए। लेकिन मिमो की अभिनय क्षमता को देखते हुए यही कहेंगे कि उनकी क़िस्मत ने उनका साथ नहीं दिया, पर अब भी देर नहीं हुई है। आशा करेंगे कि उनके सितारे बुलन्द हों और वो कम बैक करें।


मुस्तफ़ा और प्रतीक
फ़िल्मकार अब्बास-मस्तान और उनकी ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों को कौन नहीं जानता! अब्बास बर्मावाला के बेटे मुस्तफ़ा बर्मावाला ने 2017 में फ़िल्म जगत में बतौर नायक क़दम रखा। अब्बास-मस्तान ने उन्हें लौंच किया ’मशीन’ फ़िल्म में। इस थ्रिलर फ़िल्म में मुस्तफ़ा की नायिका रहीं किआरा अडवानी। स्टार किड होने पर जितना लाभ होता है, उतना ही दबाव भी होता है सबकी आशाओं पर खरे उतरने का। मुस्तफ़ा को यह फ़िल्म बस इसलिए नहीं मिली कि वो अब्बास साहब के बेटे हैं। उनका भी ऑडिशन लिया गया था। दरसल इस फ़िल्म में वो सहयक निर्देशक के रूप में काम करने वाले थे। लेकिन मुस्तफ़ा ने 15 मिनट की एक शो-रील बनाई जिसे देख कर अब्बास-मस्तान को उन्हें बतौर नायक लेने का भरोसा मिल गया। इसके बाद वो NSD में गए जहाँ एन. के. शर्मा ने उनके अभिनय क्षमता को और निखारा। अभिनय के अलावा इस फ़िल्म के लिए मुस्तफ़ा ने नृत्य, जिमनास्टिक्स और मार्शल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग् हासिल की। मुस्तफ़ा ने एक साक्षात्कार में बताया कि फ़िल्म के सेट पर अब्बास साहब और वो पिता-पुत्र के रिश्ते से नहीं बल्कि निर्देशक-अभिनेता के रिश्ते से काम करते थे। उन्हें भी सेट पर दूसरे अभिनेताओं जैसा ही ट्रीटमेण्ट मिलता। मुस्तफ़ा ने बताया कि अब्बास साहब उनसे सख़्ती से पेश आते थे ताकि वो कम्फ़ोर्ट ज़ोन में न चले जाएँ। ’मशीन’ फ़िल्म कुछ ख़ास नहीं चली। लेकिन मुस्तफ़ा के अभिनय को काफ़ी सराहना मिली। निस्संदेह वो आने वाली फ़िल्मों में इससे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। स्मिता पाटिल और राज बब्बर के बेटे प्रतीक बब्बर ने ऐड फ़िल्म मेकर प्रहलाद कक्कर के सहायक के रूप में काम करना शुरु किया और इसी दौरान उन्हें ऐड फ़िल्मों में अभिनय करने के भी मौके मिलने लगे। एक फ़िल्म अभिनेता के रूप में उनका पदार्पण हुआ 2008 की आमिर ख़ान प्रोडक्शन की फ़िल्म ’जाने तू या जाने ना’ में जिसमें इमरान ख़ान और जेनेलिया का भी पदार्पण हुआ था। जेनेलिया के चिड़चिड़े भाई के किरदार में प्रतीक के अभिनय को काफ़ी सराहना मिली और कई पुरस्कार भी मिले, लेकिन अगले तीन साल तक उन्हें दूसरी कोई फ़िल्म नहीं मिली। लेकिन नए दशक में उनकी एक के बाद एक कई फ़िल्में आईं। 2011 में वो चार फ़िल्मों में नज़र आए - किरण राव की ’धोबी घाट’ जिसे दुनिया भर के फ़िल्म उत्सवों में सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ मिली, ऐक्शन थ्रिलर ’दम मारो दम’ जिसमें उन्होंने अभिषेक बच्चन और राना डग्गुबाती के साथ अभिनय किया, प्रकाश झा निर्देशित ’आरक्षण’ में अमिताभ बच्चन, सैफ़ अली ख़ान और दीपिका पडुकोणे के साथ, और ’माइ फ़्रेन्ड पिन्टो’ में काल्की कोएचलिन के साथ उन्होंने अभिनय किया। इसके बाद ’एक दीवाना था’ और ’इस्सक’ जैसी फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस में टिक नहीं पायी। इन दिनों वो सौरभ चक्रवर्ती की बांग्ला फ़िल्म ’ऑरोनि तॉखोन’ में अभिनय कर रहे हैं। 2013 में प्रतीक ड्रग्स के नशे के शिकार हो गए थे और तीन सालों के चिकित्सा के बाद 2015 में वो एक बार फिर नज़र आए हास्य फ़िल्म ’उमरिका’ में जो 2015 के Sundance Film Festival में प्रदर्शित हुई। प्रतीक ने 2016 में Jeff Goldberg Studio से अभिनय का प्रशिक्षण लिया और लघु फ़िल्म ’The Guitar' में नज़र आए। प्रतीक अपने करीअर को सुदृढ़ करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं।


रुसलान और शिव
अभिनेत्री अंजना मुमताज़ को कौन नहीं जानता। उनके बेटे रुसलान मुमताज़ भी आज टेलीविज़न का जाना पहचाना चेहरा हैं। लेकिन रुसलान ने अपना अभिनय सफ़र टेलीविज़न से नहीं बल्कि फ़िल्मों से शुरु किया था। आम तौर पर उल्टा होता है कि अभिनेता छोटे परदे से बड़े परदे पर जाता है, लेकिन रुसलान के साथ ऐसा नहीं था। 25 वर्ष की आयु में रुसलान ने फ़िल्म जगत में क़दम रखा, फ़िल्म थी ’MP3 - मेरा पहला पहला प्यार’। 2009 में उनकी दूसरी फ़िल्म आई ’तेरे संग’। ये दोनों ही फ़िल्में नहीं चली। रुसलान ने हार नहीं मानी और नए दशक में भी उन्होंने कुछ और फ़िल्मों में अभिनय किया जैसे कि ’जाने कहाँ से आयी है’ (2010), ’डेन्जरस इश्क़’ (2012), ’I Don't Luv U’ (2013), 'मस्तांग मामा’ (2013) और ’रोमियो इडियट जटनी जुलियट’ (2014)। इन सभी फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर कोई कमाल नहीं दिखा पाया। इसी दौरान रुस्लान ने टेलीविज़न में अपनी क़िस्मत आज़मानी चाही। 2013 में उन्होंने छोटे परदे पर अपनी नई पारी की शुरुआत की। ध्रुव के चरित्र में वो नज़र आए ’कहता दिल जी ले ज़रा’ में जो काफ़ी पसन्द की गई। ’बालिका वधु’ में कृष की भूमिका में और ’एक विवाह ऐसा भी’ में रवि परमार की भूमिका में वो छाए हुए हैं। अब देखना यह है कि क्या वो फ़िल्मों में धमाकेदार वापसी कर पाते हैं या नहीं। 2014 में अपने बेटे शिव दर्शन को लौंच करने के लिए निर्माता सुनील दर्शन ने फ़िल्म ’कर ले प्यार कर ले’ की योजना बनाई। शिव दर्शन केवल सुनील दर्शन के बेटे ही नहीं बल्कि फ़िल्म जगत के कई जानेमाने हस्तियों से उनका पारिवारिक संबंध भी है। शिव नानाभाई भट्ट के परपोते हैं। शिव मशहूर निर्देशक धर्मेश दर्शन के भतीजे और महेश भट्ट के परपोते-भतीजे भी हैं (सुनील दर्शन के पिता दर्शन सभरवाल ने महेश भट्ट की बड़ी बहन शीला से विवाह किया था)। इस तरह से पूजा भट्ट और आलिया भट्ट से भी शिव का रिश्ता है। अभिनेता इमरान हाश्मी के दूर के रिश्तेदार भी लगते हैं शिव। यही नहीं वो 30 के दशक की अदाकारा शिरिन के पोते भी हैं (शिव के दादा के साथ शिरिन की बड़ी बेटी शीला का विवाह हुआ था)। फ़िल्म ’कर ले प्यार कर ले’ की बात करें तो यह फ़िल्म बुरी तरह से असफल रही। हाँ, शिव दर्शन और हसलीन कौर के अंग प्रदर्शन और कामुक दृश्यों की कुछ समय तक चर्चा ज़रूर हुई थी। 2017 में सुनील दर्शन ने एक बार फिर शिव को लौंच करने की कोशिश की ’एक हसीना थी एक दीवाना था’ फ़िल्म के ज़रिए। हाल ही में प्रदर्शित हुई इस फ़िल्म को समीक्षकों से 5 में केवल 1 रेटिंग् मिली। इस तरह से शिव का करीयर अभी भी डगमगा रहा है।


सिड और तनुज
अब बात करते हैं सिड माल्या की। बिज़नेसमैन और इन दिनों चर्चा के केन्द्रबिन्दु में रहने वाले विजय माल्या के बेटे सिद्धार्थ माल्या का जन्म कैलिफ़ोर्णिया में हुआ और पले बढ़े इंगलैण्ड में। क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी से बिज़नेस मैनेजमेण्ट की स्नातक डिग्री प्राप्त करने के बाद सिड बिज़नेस में ही रुचि लेने लगे और बिज़नेस के साथ-साथ मॉडलिंग् भी करने लगे। नायक जैसी कदकाठी और सुन्दर चेहरे की वजह से उन्होंने फ़िल्मों में अपनी क़िस्मत आज़मानी चाही। इस क्षेत्र में उनका पदार्पण हुआ स्टीव बैरन निर्मित फ़िल्म ’ब्राह्मण नमन’ में जो एक सेक्स कॉमेडी फ़िल्म थी। इसमें उन्होंने अपनी शख़्सियत ही की तरह रॉनी का किरदार निभाया जो एक अमीर और हैन्डसम क्रिकेट खिलाड़ी है और जो लड़कियों में बेहद मशहूर है। सेक्स कॉमेडी होने की वजह से सिड माल्या घर-घर तो नहीं पहुँच पाए, लेकिन उनका अभिनय समीक्षकों ने सराहा। ’ब्राह्मण नमन’ 2016 की फ़िल्म थी, लेकिन 2015 में उन्हें लेकर ’होम कमिंग्’ नामक फ़िल्म की योजना बनी थी जो अब तक बन कर तैयार नहीं हो पायी है। अपनी स्टाइल और सुपर मॉडल लूक्स की वजह से उन्हें देश-विदेश के कई पुरस्कार मिले और 2012 में उन्हें India's Sexiest Bachelor घोषित किया गया था। अभिनेत्री रति अग्निहोत्री के बेटे तनुज विरवानी ने 2013 में फ़िल्म जगत में क़दम रखा ’लव यू सोनियो’ फ़िल्म से। यह फ़िल्म नहीं चली। फिर उसके अगले ही साल तनुश्री चटर्जी निर्देशित फ़िल्म ’पुरानी जीन्स’ में वो नज़र आए इज़ाबेल लेइते और आदित्य सील के साथ। इसी फ़िल्म में रति अग्निहोत्री ने तनुज की माँ का किरदार भी निभाया था। लेकिन जिस फ़िल्म के लिए तनुज की चर्चा हुई, वह फ़िल्म थी 2016 की ’वन नाइट स्टैण्ड’ जिसमें उनकी नायिका थीं सनी लियोन। कहा जाता है कि शुरु में इस फ़िल्म के लिए राना दग्गुबाती का चयन हुआ था, लेकिन वो समय ना दे पाने की वजह से यह रोल तनुज को ऑफ़र किया गया। ’वन नाइट स्टैण्ड’ अपनी शीर्षक और विषय वस्तु की वजह से प्रदर्शित होने से पहले ही सनसनी पैदा कर चुके थे। उपर से सनी लियोन के नायिका होने से भी यह चर्चा में रही। लेकिन कोई भी फ़िल्म सनसनी के ज़रिए टिक नहीं सकती जब तक उसमें कोई ठोस बात ना हो। इस फ़िल्म के साथ भी यही हुआ, फ़िल्म ख़ास नहीं चली। अगर लोगों ने कुछ देखा तो बस बन्द कमरे में बैठ कर यू-ट्युब पर तनुज और सनी लियोन के कामुक दृश्यों को देखा। तनुज को इस इन्डस्ट्री में अपनी छाप छोड़ने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।


टाइगर
अभिनेता जैकी श्रॉफ़ और निर्माता आयेशा दत्त के बेटे टाइगर श्रॉफ़ आज फ़िल्म जगत का एक जाना पहचाना नाम है। पिता ने ’हीरो’ से शुरुआत की थी, बेटे ने की ’हीरोपन्ती’ से। टाइगर का असली नाम था जय हेमन्त जो उन्होंने फ़िल्मों में उतरने के समय बदल दी। अमेरिकन स्कूल ऑफ़ बॉम्बे से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वो शरीर चर्चा मे जुट गए। मार्शल आर्ट्स और ताएक्वोन्दो में पाँचवे डिग्री के ब्लैक बेल्ट का ख़िताब हासिल करने वाले टाइगर ने ’धूम 3’ फ़िल्म से पहले आमिर ख़ान को उनकी बॉडी बनाने में प्रशिक्षण दी थी। जून 2012 में साजिद नडियाडवाला ने टाइगर को साइन किया ’हीरोपन्ती’ के लिए। ’हीरोपन्ती’ फ़िल्म एक बॉक्स ऑफ़िस हिट साबित हुई और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ मिली। इस फ़िल्म में टाइगर के स्टण्ट्स और डान्स की काफ़ी प्रशंसा हुई। दूसरी तरफ़ उनके अभिनय क्षमता पर उंगली भी उठी। फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोग टाइगर का मज़ाक भी उड़ाते हैं। उनके शरीर में बाल ना होने और उनकी दाढ़ी-मूंछ ना उगने के लिए उन्हें कई बार मज़ाक का विषय बनना पड़ा। एक अवार्ड सेरिमनी में अर्जुन कपूर ने उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहा था - "उसकी आती नहीं और मेरी जाती नहीं"। ख़ैर, टाइगर श्रॉफ़ की दूसरी फ़िल्म 2016 में आई - ’बाग़ी’। यह फ़िल्म भी व्यावसायिक रूप से कामयाब रही और दुनिया भर में इसने अच्छा कारोबार किया। इस फ़िल्म में टाइगर के अभिनय की भी प्रशंसा हुई। तमाम ऐक्शन दृश्यों के लिए उन्होंने डबल का इस्तमाल नहीं किया, हर स्टण्ट को ख़ुद निभाया। इस साल उनकी एक और फ़िल्म ’फ़्लाइंग् जट’ भी आई, जो एक सुपरहीरो फ़िल्म थी, लेकिन यह ज़्यादा नहीं चली। 2017 में टाइगर नज़र आएँगे ’मुन्ना माइकल’ में जो निर्माणाधीन है। कहा जा रहा है कि 2018 में ’बाग़ी 2’, ’रैम्बो’ और ’अधूरा’ जैसी फ़िल्मों के लिए टाइगर को साइन किया गया है। ’हीरोपन्ती’ फ़िल्म के लिए उन्हें ’बेस्ट मेल डेब्यु’ के कई पुरस्कार मिले जैसे कि ’स्टारडस्ट अवार्ड्स’, ’स्टार गिल्ड अवार्ड्स’, ’IIFA अवार्ड्स’ और ’लाइफ़ ओके स्क्रीन अवार्ड्स’। केवल ’फ़िल्मफ़ेयर’ उन्हें नहीं मिल पाया जो उस साल धनुष को ’रांझना’ के लिए दिया गया। टाइगर श्रॉफ़ कई म्युज़िक विडियोज़ में भी नज़र आ चुके हैं जैसे कि आतिफ़ असलम के ’ज़िंदगी आ रहा हूँ मैं’, अरिजीत सिंह के ’चल वहाँ जाते हैं’ तथा मीत ब्रदर्स के ’बेफ़िक्रा’ में। कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि टाइगर श्रॉफ़ सही राह पर चल रहे हैं। उनके सामने एक उज्वल भविष्य है इसमें कोई संदेह नहीं।


वरुण
वर्तमान दशक में फ़िल्म जगत में क़दम रखने वाले नायकों में अब तक के सबसे सफल नायक हैं वरुण धवन जो फ़िल्मकार डेविड धवन के सुपुत्र हैं। इंगलैण्ड के नोटिंघम ट्रेन्ट यूनिवर्सिटी से बिज़नेस मैनेजमेण्ट की डिग्री प्राप्त करने के बाद वरुण ने 2010 में करण जोहर की फ़िल्म ’माइ नेम इज़ ख़ान’ में सहयक निर्देशक के रूप में काम किया। उसी दौरान करण अपनी अगली फ़िल्म ’स्टुडेन्ट ऑफ़ दि यीअर’ की कहानी पर काम शुरु करने जा रहे थे और इस फ़िल्म के लिए उन्हें दो नौजवान नए नायकों की ज़रूरत थी। ऐसे में वरुण के लूक्स, अंदाज़ और शारीरिक गठन को देख कर उन्हें उनमें संभावना नज़र आई। इस तरह से सिद्धार्थ मल्होत्रा और आलिया भट्ट के साथ वरुण भी चुने गए इस फ़िल्म के लिए। फ़िल्म सुपर-डुपर हिट हुई और तीनों अभिनेता रातों रात फ़िल्म इंडस्ट्री में छा गए। इस फ़िल्म के पाँच साल बीत चुके हैं, और ये तीनों अभिनेता एक के बाद एक हिट फ़िल्में देते चले जा रहे हैं। वरुण धवन की 2014 में दो फ़िल्में आईं। पहली फ़िल्म थी ’मैं तेरा हीरो’ जिसे उनके पिता डेविड धवन ने निर्देशित किया। इस फ़िल्म में उनके अभिनय, नृत्य और कॉमिक टाइमिंग् को देखते हुए समीक्षकों ने उनकी तुलना गोविन्दा से की जो उनके लिए सम्मान का विषय थी। दूसरी फ़िल्म थी ’हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ जो ’दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे - पार्ट 2’ कहलाया गया। करण जोहर निर्मित इस फ़िल्म में भी वरुण-आलिया की जोड़ी की ख़ूब तारीफ़ें हुईं। वरुण धवन के स्टार बन चुके थे; उनका स्क्रीन प्रेज़ेन्स, उनकी पर्सोनलिटी, कुल मिला कर एओ एक सफल हीरो बन चुके थे। इन दोनों फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर झंडे गाढ़ दिए। अपनी इमेज को तोड़ते हुए वरुण ने 2015 में ’बदलापुर’ में एक ऐसा रोल निभाया जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी। इस क्राइन थ्रिलर में वरुण एक ऐसे आदमी का किरदार निभाता है जो पन्द्रह साल के समयकाल में अपनी पत्नी और बेटे के कत्ल का बदला लेता है। इस चरित्र को निभाते हुए वरुण मानसिक अवसाद में चले गए थे और उन्हें लग रहा था जैसे कि यह एक हक़ीक़त है फ़िल्म नहीं। इस फ़िल्म के लिए उन्हे फ़िल्मफ़ेअर के तहत ’श्रेष्ठ अभिनेता’ के पुरस्कार का नामांकन मिला था। 2015 की दो और फ़िल्में थीं ’ABCD 2' और ’दिलवाले’। इन दोनों फ़िल्मों को कुछ ख़ास प्रशंसा ना मिली हो, लेकिन व्यावसायिक रूप से ये फ़िल्में सफ़ल मानी गईं और वरुण के काम को भी सराहा गया। 2016 में वरुण नज़र आए जॉन एब्रहम के साथ ’डिशूम’ में जो एक ऐशन ड्रामा फ़िल्म थी। इस फ़िल्म का निर्देशन वरुण के बड़े भाई रोहित धवन ने किया। दो जेनरेशन के सेक्स सिम्बॉल, जॉन और वरुण, की जोड़ी सफ़ल रही। ’हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया’ की सीक्वील ’बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ आई 2017 में जिसमें वरुण और आलिया ने एक बार फिर सिद्ध किया कि उनकी जोड़ी हिट है। इस वर्ष डेविड धवन की फ़िल्म ’जुड़वा 2’ में वरुण नज़र आएँगे। गोविन्दा, शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान जैसे सुपरस्टार्स की फ़िल्मों के सीक्वील में वरुण हर बार कामयाब सिद्ध हो रहे हैं। इसमें कोई शक़ नहीं कि वरुण आज के समय के सफलतम नायकों में से एक हैं, बिल्कुल वैसा जैसा कि उन्हीं के एक गीत में कहा गया है, "तेरा ध्यान किधर है, ये तेरा हीरो इधर है"।


आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!





शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र  



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

गीत अतीत 23 || हर गीत की एक कहानी होती है || बुरी बुरी || डिअर माया || राशि मल || संदीप पाटिल (सैंडमैंन) || इरशाद कामिल

Geet Ateet 23
Har Geet Kii Ek Kahaani Hoti Hai...
Buri Buri
Dear माया 
Rashi Mal
Also featuring Sandman & Irshad Kamil


"उन्होंने मेरे से पूछा कि क्या मैं रैप गा सकती हूँ, और मैंने इससे पहले कभी रैप गाया नहीं था... " -    राशि मल 

मिलिए अभिनेत्री गायिका राशि मल से और सुनिए उन्ही के गाये फिल्म डिअर माया के कदम थिरकाते गीत "बुरी बुरी" के बनने की कहानी, जानिये कि क्यों संगीतकार संदीप पाटिल उर्फ़ सैंड मैंन ने राशि को चुना इस पेप्पी गीत के लिए, गीत के बोल है खुद राशि और इरशाद कामिल साहब के, प्ले पर क्लिक करें और सुने गीत अतीत :हर गीत की एक कहानी होती है में आज "बुरी बुरी" गीत की कहानी...




डाउनलोड कर के सुनें यहाँ से....

सुनिए इन गीतों की कहानियां भी -
हौले हौले (गैर फ़िल्मी सिंगल)
कागज़ सी है ज़िन्दगी (जीना इसी का नाम है) 
बेखुद (गैर फ़िल्मी सिंगल)
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रेज़ा रेज़ा (सलाम मुंबई)

रविवार, 23 जुलाई 2017

राग मियाँ मल्हार : SWARGOSHTHI – 327 : RAG MIYAN MALHAR




स्वरगोष्ठी – 327 में आज

पावस ऋतु के राग – 2 : तानसेन की अमर कृति – मियाँ मल्हार

“बिजुरी चमके बरसे मेहरवा...”






उस्ताद राशिद  खाँ
सुरेश वाडकर
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला – “पावस ऋतु के राग” की दूसरी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र अपनी सहयोगी संज्ञा टण्डन के साथ आप सभी संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। इस श्रृंखला में हम एक नया प्रयोग कर रहे हैं। गीतों का परिचयात्मक आलेख हम अपने सम्पादक-मण्डल की सदस्य संज्ञा टण्डन की रिकार्ड किये आवाज़ में प्रस्तुत कर रहे हैं। आपको हमारा यह प्रयोग कैसा लगा, अवश्य सूचित कीजिएगा। आपको स्वरों के माध्यम से बादलों की उमड़-घुमड़, बिजली की कड़क और रिमझिम फुहारों में भींगने के लिए आमंत्रित करता हूँ। यह श्रृंखला, वर्षा ऋतु के रस और गन्ध से पगे गीत-संगीत पर केन्द्रित है। इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपसे वर्षा ऋतु में गाये-बजाए जाने वाले रागों और उनमें निबद्ध कुछ चुनी हुई रचनाओं पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सम्बन्धित राग के आधार पर रचे गए फिल्मी गीत भी प्रस्तुत करेंगे। भारतीय संगीत के अन्तर्गत मल्हार अंग के सभी राग पावस ऋतु के परिवेश की सार्थक अनुभूति कराने में समर्थ हैं। आम तौर पर इन रागों का गायन-वादन वर्षा ऋतु में अधिक किया जाता है। इसके साथ ही कुछ ऐसे सार्वकालिक राग भी हैं जो स्वतंत्र रूप से अथवा मल्हार अंग के मेल से भी वर्षा ऋतु के अनुकूल परिवेश रचने में सक्षम होते हैं। इस श्रृंखला की दूसरी कड़ी में हम राग मियाँ की मल्हार पर चर्चा करेंगे। राग मियाँ मल्हार मल्हार अंग का सबसे लोकप्रिय राग है, जिसके गायन-वादन से संगीतज्ञ वर्षा ऋतु का यथार्थ परिवेश का सृजन किया जा सकता है। इस राग में आज हम आपको सबसे पहले राग मियाँ की मल्हार के स्वरों पर आधारित 1998 में प्रदर्शित फिल्म ‘साज’ से गायक सुरेश वाडकर की आवाज़ में गाया गीत प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके साथ ही राग का शास्त्रीय स्वरूप उपस्थित करने के लिए सुप्रसिद्ध गायक उस्ताद राशिद खाँ के स्वर में राग मियाँ की मल्हार में प्रस्तुत एक खयाल रचना सुनवा रहे हैं।

राग मियाँ की मल्हार : “बादल घुमड़ बढ़ आए...” : सुरेश वाडकर : फिल्म – साज

राग मियाँ की मल्हार : ‘बिजुरी चमके बरसे मेहरवा...’ : उस्ताद राशिद खाँ



संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 327वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको लगभग साढ़े छः दशक पूर्व प्रदर्शित प्राचीन फिल्म से लिये गए एक राग आधारित गीत का एक अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 330वें अंक की पहेली के सम्पन्न होने के बाद जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस वर्ष के तीसरे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा।




1 – गीत के इस अंश को सुन कर आपको किस राग का अनुभव हो रहा है?

2 – गीत में प्रयोग किये गए ताल का नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस पार्श्वगायिका की आवाज़ है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार 29 जुलाई, 2017 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 329वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 325वीं कड़ी की पहेली में हमने आपको 1942 में प्रदर्शित फिल्म ‘तानसेन’ से एक राग आधारित गीत का एक अंश प्रस्तुत कर आपसे तीन में से दो प्रश्नों का उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है, राग – मेघ मल्हार, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है, ताल – तीनताल / तिलवाड़ा और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है, तालवाद्य – पखावज

इस अंक की पहेली में सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी हैं - चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, पेंसिलवेनिया, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। आशा है कि अन्य पाठक भी नियमित रूप से ‘स्वरगोष्ठी’ देखते रहेंगे और पहेली में भाग लेते रहेंगे। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर हमारी नई श्रृंखला “पावस ऋतु के राग” जारी है। इस श्रृंखला ऋतु प्रधान गीतो को प्रस्तुत किया जा रहा है। आज की इस कड़ी में हमने आपके लिए राग मियाँ मल्हार पर चर्चा की। हमारे पिछले अंक पर Anuya Ahire ने टिप्पणी की है –“सादर प्रणाम। नई श्रृंखला का और साथ ही नये प्रयोग का हार्दिक स्वागत है। श्रृंखला की लोकप्रियता बढती जाये, ये शुभकामना है। इस प्रयास से परिपूर्ण जानकारी मिलती है”।

आगामी अंक में हम मल्हार अंग के एक और राग पर चर्चा करेंगे और इस राग में निबद्ध कुछ रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। हमारी जारी श्रृंखला और आगामी श्रृंखलाओं के विषय, राग, रचना और कलाकार के बारे में यदि आपकी कोई फरमाइश हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 8 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


वाचक स्वर : संज्ञा टण्डन   
आलेख व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र   


रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

शनिवार, 22 जुलाई 2017

चित्रकथा - 28: दो गायकों की आत्महत्या - चेस्टर बेनिंग्टन और क्रिस कॉरनेल - श्रद्धांजलि

अंक - 28

दो गायकों की आत्महत्या


श्रद्धांजलि: चेस्टर बेनिंग्टन और क्रिस कॉरनेल


Chris Cornell (20 July 1964 - 18 May 2017) & Chester Bennington (20 March 1976 - 20 July 2017)


मात्र दो महीने के व्यावधान में दो सुप्रसिद्ध गायकों की आत्महत्या की ख़बर से दुनिया भर के संगीत रसिक काँप उठे हैं। 18 मई 2017 को क्रिस कॉरनेल और 20 जुलाई 2017 को चेस्टर बेनिंग्टन ने ख़ुदकुशी कर ली। सबसे दुखद बात यह है कि चेस्टर ने क्रिस की मृत्यु से शोकाहत होकर अपनी ज़िन्दगी भी समाप्त कर दी। इन दो दिग्गज गायकों का एक साथ बिना किसी कारण दुनिया से चले जाना संगीत जगत के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। क्रिस और चेस्टर, दोनों रॉक बैण्ड्स के लीड सिंगर थे। क्रिस ’साउन्ड गार्डन’ और ’ऑडियो स्लेव’ बैण्ड्स के लिए गाते थे तो चेस्टर ’लिविन पार्क’ ग्रूप के लिए। एक शैली के गायक होने के बावजूद उनमें एक दूसरे के लिए कोई प्रतियोगिता मूलक भावना नहीं थी, बल्कि दोनों एक दूसरे को अपना अच्छा मित्र मानते थे। तभी तो क्रिस के चले जाने को चेस्टर बरदाश्त नहीं कर सके और ख़ुद को क्रिस के पास पहुँचाने के लिए चेस्टर ने क्रिस के जनमदिन को चुना। 20 जुलाई क्रिस के जनमदिन पर चेस्टर चल पड़े क्रिस से मिलने, अपनी अनन्त यात्रा पर।

क्रिस्टोफ़र जॉन बोयेल उर्फ़ क्रिस कॉरनेल का जन्म 20 जुलाई 1964 को अमरीका में हुआ था। ’साउन्ड गार्डन’ और ’ऑडियो स्लेव’ बैण्ड्स के मुख्य गायक होने के अलावा उन्होंने एकल रूप से भी बहुत से गीत गाये और 1991 से लेकर अब तक बहुत से गीतों में अपना मूल्यवान योगदान दिया। क्रिस को 90 के दशक के grunge movement का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है और गीतकार के रूप में उनके कामों की व्यापक सूची के लिए भी वो जाने जाते हैं। उनकी वोकल रेंज लगभग चार ऑक्टेव की थी और उनकी शक्तिशाली वोकल बेल्टिंग् तकनीक के सभी कायल थे। उनके चार सोलो स्टुडियो ऐल्बम्स बने - Euphoria Morning (1999), Carry On (2007), Scream (2009), Higher Truth (2015), और लाइव ऐल्बम Songbook (2011)। क्रिस को अपने गीत "The Keeper" के लिए Golden Globe Award का नामांकन मिला था। इस गीत को 2011 की फ़िल्म ’Machine Gun Preacher’ में शामिल किया गया। जेम्स बॉन्ड की 2006 की मशहूर फ़िल्म ’Casino Royale’ के थीम सॉंग् "You Know My Name" को उन्होंने सह-गीतकार के रूप में लिखा व परफ़ॉर्म किया। क्रिस का अन्तिम एकल गीत था "The Promise" जिसे उन्होंने इसी शीर्षक की फ़िल्म के आख़िर की नामावली के लिए लिखा था। ’गीटार वर्ल्ड’ के पाठकों ने क्रिस कॉरनेल को "Rock's Greatest Singer" चुना। क्रिस को हिट पैरेडर द्वारा "Heavy Metal's All-Time Top 100 Vocalists" में चौथा स्थान दिया गया है, रोलिंग् स्टोन द्वारा "Best Lead Singers of All Time" में नौ वा स्थान तथा MTV के "22 Greatest Voices in Music" में 12-वाँ स्थान दिया गया है। इन सब से उनकी लोकप्रियता और सफलता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। अपने पूरे करीयर में कॉरनेल के अमरीका में ही 14.8 मिलियन ऐल्बम बिके, 8.8 मिलियन डिगिटल गीत तथा 300 मिलियन ऑन-डिमाण्ड ऑडियो स्ट्रीम्स। और पूरे विश्व भर में उनके 30 मिलियन से उपर रेकॉर्ड्स अब तक बिक चुके हैं। ऑस्कर पुरस्कारों के अन्तर्गत क्रिस कॉरनेल 14 बार ग्रैमी अवार्ड्स के लिए नामांकित हुए और दो बार उन्हें यह ख़िताब प्राप्त हुआ। 53 वर्ष की आयु तक पहुँचते पहुँचते क्रिस मानसिक अवसाद का शिकार हो चुके थे। दो बार शादी से उनके कुल तीन सन्तान हैं। घर परिवार के होते हुए और एक सफल करीयर के होते हुए भी मानसिक अवसाद ने उनके मन में क्यों घर कर लिया यह कहना संभव नहीं। डिप्रेशन के चलते उन्होंने ड्रग्स का सहारा लेना शुरु कर दिया और 18 मई की सुबह डेट्रॉयट में ’साउन्ड गार्डन’ का एक कॉनसर्ट से होटल के कमरे में वापस लौटने के बाद फाँसी लगा कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी।

चेस्टर चार्ल्स बेनिंग्टन क्रिस कॉरनेल से 12 वर्ष छोटे थे। इनका जन्म 20 मार्च 1976 में अमरीका में हुआ और आगे चल कर रॉक बैण्ड ’लिंकिन पार्क’ के मुख्य गायक के रूप में ख़ूब ख्याति अर्जन की। 2013 से 2015 के बीच वो Dead by Sunrise और Stone Temple Pilots के भी लीड सिंगर रहे। चेस्टर को पहली बार बड़ी सफलता मिली थी 2000 के ’लिंकिन पार्क’ के पहले ऐल्बम ’हाइब्रिड थिओरी’ से। इस ऐल्बम को व्यावसायिक सफलता अपार मिली और इस ऐल्बम को Recording Industry Association of America ने वर्ष 2005 में ’डायमण्ड’ का सर्तिफ़िकेशन दिया। इसका अर्थ था यह उस दशक का सर्वाधिक बिकने वाला ऐल्बम था। फिर इसके बाद ’लिंकिन पार्क’ के एक के बाद एक ऐल्बम्स आते गए और हर एक में चेस्टर बेनिंग्टन अपनी आवाज़ का जादू बिखेरते चले गए। इनमें शामिल हैं Meteora (2003), Minutes to Midnight (2007), A Thousand Suns (2010), Living Things (2012), The Hunting Party (2014), और One More Light (2017)। 2005 में ही चेस्टर ने अपनी ख़ुद की बैण्ड ’Dead by Sunrise’ का गठन किया, लेकिन ’Livin Park' से भी जुड़े रहे। ’Dead by Sunrise’ का पहला ऐल्बम 2009 में जारी हुआ ’Out of Ashes’ के शीर्षक से। बेनिंग्टन को हिट पैरेडर ने Top 100 Heavy Metal Vocalists में 46-वाँ स्थान दिया है। 2013 में वो ’Stone Temple Pilots’ से जुड़े। चेस्टर मात्र 41 वर्ष की आयु में इस दुनिया को छोड़ गए। अभी तो न जाने सफलता की कितनी ही मंज़िलें उन्हें तय करनी थी। 18 मई को जब क्रिस कॉरनेल चल बसे, तभी से चेस्टर टूटने लगे थे। ’लिविन पार्क’ का "One More Light" ऐल्बम 19 मई को जारी हुआ था। क्रिस की निधन के बाद जब भी चेस्टर इस गीत को गाते, हर बार वो रो पड़ते और एक बार भी गीत को वो पूरा अन्त तक नहीं गा सके। अपने प्रिय दोस्त क्रिस के अन्तिम संस्कार के समय चेस्टर ने लिओनार्द कोहेन के गीत "हल्लेलुजाह" गा रहे थे और रो रहे थे। चेस्टर क्रिस के बेटे क्रिस्टोफ़र के गॉडफ़ादर भी थे। और उनके ख़ुद के भी पाँच संताने हैं। अपने प्रिय मित्र को खोने का दर्द चेस्टर बेनिंग्टन सह्य नहीं कर सके और 20 जुलाई 2017 को अपने मित्र की ही तरह झूल गए।

क्रिस कॉरनेल की मृत्यु के बाद चेस्टर बेनिंग्टन ने अपने प्रिय मित्र को एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने लिखा - "I can't imagine a life without you in it. I pray you find peace in the next life." ट्विटर पर पोस्ट किए उनके इस संदेश को पढ़ कर किसने अंदाज़ा लगाया होगा कि वो सचमुच ऐसी दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते थे जिस दुनिया में उनका दोस्त क्रिस ना हो। 




चेस्टर बेनिंग्टन के गाए गीतों में से दो गीत ऐसे हैं जिनसे प्रेरणा लेकर तेलुगू और तमिल के एक एक गीत बने हैं। 2015 की तेलुगू फ़िल्म ’गयाकुडु’ में एक गीत है "ओटमे ओका पातम रा..." जिसकी धुन ’लिविन पार्क’ के "Castle of glass" की धुन से प्रेरित है। यह गीत 2012 की ऐल्बम ’Living Things’ में शामिल हुआ था और इसे Billboard Top 200 of the Year 2012 में जगह मिली थी। तेलुगू गीत के संगीतकार हैं रोशन सालुर और गीत लिखा है चन्द्र बोस ने। सुप्रसिद्ध गायक येसुदास के बेटे विजय येसुदास ने इस गीत को गाया है। मूल गीत की बात करें तो उसे समालोचकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। बिलबोर्ड ने अपनी समीक्षा में लिखा - "Castle of Glass" uses compelling songwriting, extended metaphors and a simple but radical (for Linkin Park) arrangement to offer one of the album's most intriguing tracks." लेकिन कुछ आलोचकों ने लिखा कि यह गीत इसी बैण्ड के "Powerless" गीत से मिलता जुलता है और इसलिए मौलिकता में कमी है। लेकिन यह भी सच है कि इस गीत को ’2012 Spike Video Game Awards' में "Best Song in a Game" पुरस्कार के लिए नामांकन मिला था। 'लिविन पार्क’ का दूसरा गीत जिस पर एक तमिल गीत बना है, वह है "Points of authority" जो ’Hybrid Theory’ ऐल्बम का चौथा गीत था। सन् 2000 में जारी होने वाले इस गीत को माइक शिनोदा और चेस्टर बेनिंग्टन ने गाया। इस गीत के दो रीमिक्स वर्ज़न भी जारी हुए। इस गीत को 2000 की ऐडम सैन्डलर की फ़िल्म ’Little Nicky’ में शामिल किया गया। इस गीत की धुन पर आधारित तमिल गीत है "मनमथ लीलई" जिसे संगीतकार देवा ने कम्पोज़ किया था 2013 की सुपरहिट हास्य फ़िल्म ’पंचतनतिरम’ के लिए। इस गीत को लिखा वैरमुथु ने और गाया देवन, मतंगी और टिम्मी ने। 

चले गए क्रिस कॉरनेल (53) और चेस्टर बेनिंग्टन (41)। और पीछे छोड़ गए अपने हिट गीतों और ऐल्बम्स का कारवाँ अपने चाहने वालों के लिए। ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से इन दो अज़ीम गायकों को श्रद्धांजलि!




आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!




शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र  



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

गीत अतीत 22 || हर गीत की एक कहानी होती है || इश्क ने ऐसा शंख बजाया || लव यू फॅमिली || रोब्बी बादल || सोनू निगम || मधुश्री || तनवीर गाज़ी

Geet Ateet 22
Har Geet Kii Ek Kahaani Hoti Hai...
Ishq ne aisa shunkh bajaya
Love U Family
Robby Badal (Music Composer)
Also featuring Tanvir Ghazi, Sonu Nigam & Madhushree 


"जहाँ तक मेरी जानकारी है आज तक बॉलीवुड के किसी गीत में शंख को इश्क से जोड़कर नहीं लिखा गया " -    रोब्बी बादल 

पारिवारिक रोमांटिक फिल्म लव यू फॅमिली का मधुरतम गीत "इश्क ने ऐसा शंख बजाया" के बनने की कहानी आज हमारे साथ बांटने आये हैं संगीतकार रोब्बी बादल, जानिये क्यों मुश्किल में डाल दिया गायक सोनू निगम ने इस गीत के दौरान रोब्बी भाई को. प्ले के बटन पर क्लिक करें और गीत अतीत के इस ताज़ा एपिसोड में सुनें इस मधुर गीत की कहानी, जिसे लिखा है तनवीर गाजी ने और गाया है सोनू निगम और मधुश्री ने...




डाउनलोड कर के सुनें यहाँ से....

सुनिए इन गीतों की कहानियां भी -
हौले हौले (गैर फ़िल्मी सिंगल)
कागज़ सी है ज़िन्दगी (जीना इसी का नाम है) 
बेखुद (गैर फ़िल्मी सिंगल)
इतना तुम्हें (मशीन) 
आ गया हीरो (आ गया हीरो)
ये मैकदा (गैर फ़िल्मी ग़ज़ल)
पूरी कायनात (पूर्णा)
दम दम (फिल्लौरी)
धीमी (ट्रैपड) 
कारे कारे बदरा (ब्लू माउंटेन्स)
रेज़ा रेज़ा (सलाम मुंबई)

रविवार, 16 जुलाई 2017

राग मेघ मल्हार : SWARGOSHTHI – 326 : RAG MEGH MALHAR




स्वरगोष्ठी – 326 में आज

पावस ऋतु के राग – 1 : आषाढ़ के पहले मेघ का स्वागत

“गरजे घटा घन कारे कारे, पावस रुत आई...”





पं. अजय चक्रवर्ती
खुर्शीद बानो
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर आज से हमारी नई श्रृंखला – “पावस ऋतु के राग” आरम्भ हो रही है। श्रृंखला की पहली कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र अपनी सहयोगी संज्ञा टण्डन के साथ आप सभी संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। इस श्रृंखला में हम एक नया प्रयोग कर रहे हैं। गीतों का परिचयात्मक आलेख हम अपने सम्पादक-मण्डल की सदस्य संज्ञा टण्डन की रिकार्ड किये आवाज़ में प्रस्तुत कर रहे हैं। आपको हमारा यह प्रयोग कैसा लगा, अवश्य सूचित कीजिएगा। आपको स्वरों के माध्यम से बादलों की उमड़-घुमड़, बिजली की कड़क और रिमझिम फुहारों में भींगने के लिए आमंत्रित करता हूँ। यह श्रृंखला, वर्षा ऋतु के रस और गन्ध से पगे गीत-संगीत पर केन्द्रित है। इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपसे वर्षा ऋतु में गाये-बजाए जाने वाले रागों और उनमें निबद्ध कुछ चुनी हुई रचनाओं पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सम्बन्धित राग के आधार पर रचे गए फिल्मी गीत भी प्रस्तुत करेंगे। भारतीय संगीत के अन्तर्गत मल्हार अंग के सभी राग पावस ऋतु के परिवेश की सार्थक अनुभूति कराने में समर्थ हैं। आम तौर पर इन रागों का गायन-वादन वर्षा ऋतु में अधिक किया जाता है। इसके साथ ही कुछ ऐसे सार्वकालिक राग भी हैं जो स्वतंत्र रूप से अथवा मल्हार अंग के मेल से भी वर्षा ऋतु के अनुकूल परिवेश रचने में सक्षम होते हैं। इस श्रृंखला की पहली कड़ी में हम राग मेघ मल्हार की चर्चा कर रहे हैं। राग मेघ मल्हार एक प्राचीन राग है, जिसके गायन-वादन से संगीतज्ञ वर्षा ऋतु के प्रारम्भिक परिवेश का सृजन करते हैं। इस राग में आज हम आपको सबसे पहले राग मेघ मल्हार के स्वरों पर आधारित 1942 में प्रदर्शित फिल्म ‘तानसेन’ से खुर्शीद बानो का गाया गीत भी सुनवा रहे हैं। इसके साथ ही राग का शास्त्रीय स्वरूप उपस्थित करने के लिए सुप्रसिद्ध गायक पण्डित अजय चक्रवर्ती द्वारा प्रस्तुत एक खयाल रचना प्रस्तुत कर रहे हैं।



राग मेघ मल्हार : ‘बरसो रे कारे बादरवा...’ : स्वर – खुर्शीद बानो : फिल्म – तानसेन
राग मेघ मल्हार : ‘गरजे घटा घन कारे कारे, पावस रुत आई...’ : पण्डित अजय चक्रवर्ती




संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 326वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको लगभग सात दशक पूर्व प्रदर्शित पुरानी फिल्म से लिये गए एक राग आधारित गीत का एक अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 330वें अंक की पहेली के सम्पन्न होने के बाद जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस वर्ष के तीसरे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा।




1 – गीत के इस अंश को सुन कर आपको किस राग का अनुभव हो रहा है?

2 – गीत में प्रयोग किये गए ताल का नाम बताइए।

3 – यह गीत किस पार्श्वगायक की आवाज़ में है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार 22 जुलाई, 2017 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 328वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘‘स्वरगोष्ठी’ की 324 वीं कड़ी की पहेली में हमने आपको 1966 में प्रदर्शित फिल्म ‘दादी माँ’ से एक राग आधारित गीत का एक अंश प्रस्तुत कर आपसे तीन में से दो प्रश्नों का उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है, राग – पहाड़ी, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है, ताल – कहरवा और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है, स्वर – मन्ना डे और महेन्द्र कपूर।

इस अंक की पहेली में तीनों प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी हैं - चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। तीन में से दो प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी हैं - पेंसिलवेनिया, अमेरिका से विजया राजकोटिया और जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी तथा तीन में से एक प्रश्न का सही उत्तर दिया है - छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश से नन्दलाल सिंह रघुवंशी ने। आशा है कि अन्य पाठक भी नियमित रूप से ‘स्वरगोष्ठी’ देखते रहेंगे और पहेली में भाग लेते रहेंगे। उपरोक्त सभी छः प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर आज से नई श्रृंखला “पावस ऋतु के राग” का शुभारम्भ हो रहा है। इस श्रृंखला ऋतु प्रधान गीतो को प्रस्तुत किया जाएगा। आज की इस कड़ी में हमने आपके लिए राग मेघ मल्हार पर चर्चा की। हमारी पिछली श्रृंखला ‘संगीतकार रोशन के गीतों में राग-दर्शन’ पर हमारे कुछ पाठकों ने टिप्पणी की है। यहाँ मैं इन टिप्पणियों का उल्लेख कर रहा हूँ।

दूरदर्शन की सुपरिचित समाचार वाचिका निर्मला कुमारी लिखती हैं – “कृष्णमोहनजी नमस्कार। संगीतकार रोशन के बारे में रोचक जानकारियों से परिपूर्ण आपके इस सुन्दर आलेख के लिये आपको बहुत-बहुत बधाई। आज के युग में संगीत की जानकारी रखने वाले सच्चे समीक्षक शायद उँगलियों पर गिनाये जा सकते हैं। भविष्य में भी आपके आलेखों की प्रतीक्षा रहेगी।" 

इसी प्रकार अनुभवी नाटककार और रंगकर्मी सुल्तान अहमद रिजवी ने लिखा है – “मिश्र जी बहुत ज़िम्मेदारी से आप यह पुनीत कार्य कर रहे हैं। मैने अपनॆ परिवार में यह पाया कि आप की पोस्ट पढ़ कर बच्चे आलोच्य गानो को सुन रहे है। यह उपकार है नयी पीढी पर आपका। आपको साधुवाद।“

आगामी अंक में हम मल्हार अंग के प्रमुख राग ‘मियाँ मल्हार’ पर चर्चा करेंगे और इस राग में निबद्ध कुछ रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। हमारी जारी श्रृंखला और आगामी श्रृंखलाओं के विषय, राग, रचना और कलाकार के बारे में यदि आपकी कोई फरमाइश हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 8 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


वाचक स्वर : संज्ञा टण्डन  
आलेख व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  


रेडियो प्लेबैक इण्डिया 


शनिवार, 15 जुलाई 2017

चित्रकथा - 27: इस दशक के नवोदित नायक (भाग - 1)

अंक - 27

इस दशक के नवोदित नायक (भाग - 1)


"मैं हूँ हीरो तेरा..." 



’रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। समूचे विश्व में मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम सिनेमा रहा है और भारत कोई व्यतिक्रम नहीं। बीसवीं सदी के चौथे दशक से सवाक् फ़िल्मों की जो परम्परा शुरु हुई थी, वह आज तक जारी है और इसकी लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती ही चली जा रही है। और हमारे यहाँ सिनेमा के साथ-साथ सिने-संगीत भी ताल से ताल मिला कर फलती-फूलती चली आई है। सिनेमा और सिने-संगीत, दोनो ही आज हमारी ज़िन्दगी के अभिन्न अंग बन चुके हैं। ’चित्रकथा’ एक ऐसा स्तंभ है जिसमें बातें होंगी चित्रपट की और चित्रपट-संगीत की। फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत से जुड़े विषयों से सुसज्जित इस पाठ्य स्तंभ में आपका हार्दिक स्वागत है। 



हर रोज़ देश के कोने कोने से न जाने कितने युवक युवतियाँ आँखों में सपने लिए माया नगरी मुंबई के रेल्वे स्टेशन पर उतरते हैं। फ़िल्मी दुनिया की चमक-दमक से प्रभावित होकर स्टार बनने का सपना लिए छोटे बड़े शहरों, कसबों और गाँवों से मुंबई की धरती पर क़दम रखते हैं। और फिर शुरु होता है संघर्ष। मेहनत, बुद्धि, प्रतिभा और क़िस्मत, इन सभी के सही मेल-जोल से इन लाखों युवक युवतियों में से कुछ गिने चुने लोग ही ग्लैमर की इस दुनिया में मुकाम बना पाते हैं। और कुछ फ़िल्मी घरानों से ताल्लुख रखते हैं जिनके लिए फ़िल्मों में क़दम रखना तो कुछ आसान होता है लेकिन आगे वही बढ़ता है जिसमें कुछ बात होती है। हर दशक की तरह वर्तमान दशक में भी ऐसे कई युवक फ़िल्मी दुनिया में क़दम जमाए हैं जिनमें से कुछ बेहद कामयाब हुए तो कुछ कामयाबी की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। कुल मिला कर फ़िल्मी दुनिया में आने के बाद भी उनका संघर्ष जारी है यहाँ टिके रहने के लिए। ’चित्रकथा’ में आज से हम शुरु कर रहे हैं इस दशक के नवोदित नायकों पर केन्द्रित एक लघु श्रॄंखला जिसमें हम बातें करेंगे वर्तमान दशक में अपना करीअर शुरु करने वाले शताधिक नायकों की। प्रस्तुत है ’इस दशक के नवोदित नायक’ श्रॄंखला की पहली कड़ी। 



आदर और अरमान जैन
हिन्दी फ़िल्मी परिवारों में कपूर परिवार का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर आज तक इस परिवार ने एक से एक सितारे फ़िल्म जगत के आकाश को जगमगाते चले आए हैं। करिश्मा कपूर, करीना कपूर और रणबीर कपूर के बाद राज कपूर की बेटी रीमा जैन के दो बेटे भी फ़िल्म जगत में हाल में उतर चुके हैं - अरमान जैन और आदर जैन। 25 नवंबर 1990 को मुंबई में जन्मे अरमान ने अपनी फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत की शकुन बत्रा की फ़िल्म ’एक मैं और एक तू’ मे सहकारी निर्देशक के रूप में। यहाँ उन्होंने फ़िल्म निर्माण की बारीकियों को क़रीब से देखा और सीखा। करण जोहर की फ़िल्म ’स्टुडेन्ट ऑफ़ दि यीअर’ में भी उन्होंने सहकारी निर्देशक की भूमिका निभाई। इसी फ़िल्म में अरमान और अभिषेक वर्मन की दोस्ती हो गई और अभिषेक ने अरमान का नाम ’लेकर हम दीवाना दिल’ फ़िल्म के लिए सजेस्ट किया फ़िल्म के निर्माता सैफ़ अली ख़ान को। आरिफ़ अली निर्देशित इस फ़िल्म से अरमान जैन का अभिनय सफ़र शुरु हुआ। फ़िल्म तो बॉक्स ऑफ़िस पर असफल रही पर अरमान की अदाकारी दुनिया के सामने आ गई। आगे चल कर अरमान अभिनय करे या निर्देशक बने, या दोनों करें, देखना यह है कि क्या वो कपूर ख़ानदान के नाम को और भी उपर ले जा पाते हैं या नहीं। अरमान के भाई आदर जैन भी इस वर्ष बतौर नायक लौंच होने जा रहे हैं आदित्य चोपड़ा की फ़िल्म में। ’ली स्ट्रॉसबर्ग थिएटर ऐण्ड फ़िल्म इन्स्टिट्युट’ से पढ़े आदर ने पिछले साल करण जोहर की फ़िल्म ’ऐ दिल है मुश्किल’ में सहकारी निर्देशक के रूप में काम किया जहाँ उन्हें फ़िल्म निर्माण की बहुत सी बातें सीखने का मौका मिला। कास्टिंग् डिरेक्टर शानू शर्मा, जिन्होंने ’इशक़ज़ादे’ के लिए अर्जुन कपूर और परिनीति चोपड़ा का आविष्कार किया था, ने ही अरमान का भी आविष्कार किया था। शानू का कहना है कि फ़िल्म इंडस्ट्री में बड़े फ़िल्मी परिवार से आए लड़के भी रिजेक्ट हो जाते हैं जबकि गुमनाम किसी पर आम परिवार से आने वाला भी स्टार बन जाता है। आदर को इस फ़िल्म में इसलिए नहीं लिया जा रहा है कि वो राज कपूर के नाती हैं, बल्कि इसलिए कि उनमें कुछ ऐसी बात है जो इस फ़िल्म की कहानी के नायक में होनी चाहिए। यह वक़्त ही बताएगा कि शोमैन राज कपूर की बेटी रीमा कपूर जैन के ये दो बेटे - अरमान और आदर - किस मुकाम तक पहुँच पाते हैं।


हर्षवर्धन और अर्जुन कपूर
अभी अर्जुन कपूर का ज़िक्र आया था तो याद आया कि उन्होंने भी इसी दशक में फ़िल्म इंडस्ट्री में क़दम रखा था 2012 की फ़िल्म ’इशक़ज़ादे’ से। एक और कपूर परिवार से ताल्लुख़ रखने वाले अर्जुन फ़िल्मकार बोनी कपूर के सुपुत्र हैं। चाचा अनिल कपूर और संजय कपूर से अभिनय के नुस्खे, और पिता से फ़िल्म निर्माण की बातों का असर अर्जुन पर बचपन से ही पड़ा। अर्जुन बारहवीं फ़ेल हो गया और पढ़ाई छोड़ दी। 27 साल की उम्र तक कुछ ना करने के बाद शानू शर्मा ने उन्हें ’इशक़ज़ादे’ में कास्ट किया। फ़िल्म सुपरहिट रही और अर्जुन कपूर रातों रात स्टार बन गए। उस वर्ष के बेस्ट डेब्यु के तमाम इनाम उन्हीं को मिले। वैसे इससे दस साल पहले ही वो ’कल हो ना हो’ और ’सलाम-ए-इश्क़’ में बतौर सहकारी निर्देशक तथा ’नो एन्ट्री’ और ’वान्टेड’ में बतौर सहकारी निर्माता काम कर चुके थे। ’इशक़ज़ादे’ की अपार सफलता के बाद उन्हें एक के बाद एक फ़िल्में मिलती चली गईं जिनमें शामिल हैं ’औरंगज़ेब’, ’गुंडे’, ’टू स्टेट्स’, ’फ़ाइन्डिंग् फ़ैनी’, ’तेवर’, ’की ऐण्ड का’ और हाल में प्रदर्शित हुई फ़िल्म ’हाफ़ गर्लफ़्रेन्ड’। इस साल उनके अभिनय से सजकर ’मुबारकाँ’ आने वाली है और 2018 में आएगी ’कनेडा’। आज अर्जुन कपूर एक सफल अभिनेता हैं और इस दौर के शीर्ष नायकों में उनका शुमार हो रहा है। अपने दादा और फ़िल्मकार सुरिन्दर कपूर के ख़ानदान का नाम वो यकीनन यूंही रोशन करते रहेंगे आने वाले समय में। अर्जुन कपूर और अपने पिता अनिल कपूर के नक्श-ए-क़दम पर चलते हुए हर्षवर्धन कपूर ने भी फ़िल्म जगत में क़दम रखा 2015 में बतौर सहायक निर्देशक अनुराग कश्यप की फ़िल्म ’बॉम्बे वेल्वेट’ से। 2016 में राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने हर्षवर्धन को बतौर नायक लौंच किया अपनी फ़िल्म ’मिर्ज़्या’ में। इस फ़िल्म में हर्ष के अभिनय की काफ़ी चर्चा हुई और समीक्षकों के अच्छी राय मिली। उनके जानदार अभिनय के लिए उस वर्ष स्टार स्क्रीन अवार्ड्स और स्टारडस्ट अवार्ड्स का ’बेस्ट मेल डेब्यु’ का पुरस्कार हर्ष को मिला। फ़िल्मफ़ेअर का बेस्ट मेल डेब्यु का पुरस्कार गया सूरज पंचोली को फ़िल्म ’हीरो’ के लिए। 2017 में हर्षवर्धन की दूसरी फ़िल्म आ रही है ’भावेश जोश”। विक्रमादित्य मोतवाने की इस फ़िल्म पर सबकी निगाहें टिकी हुईं है। हर्षवर्धन का फ़िल्मी सफ़र अभी बस शुरु ही हुआ है। देखना है कि क्या अपने पिता के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हुए उन्हीं जैसा शोहरत हासिल कर पाते हैं या नहीं।


अहान शेट्टी, सूरज पंचोली
अभी अभी पुरस्कारों के संदर्भ में सूरज पंचोली का ज़िक्र आया था। सूरज पंचोली अभिनेता आदित्य पंचोली और अभिनेत्री ज़रीन वहाब के साहबज़ादे हैं। 2015 में सुपरस्टार सलमान ख़ान ने उन्हें अपनी फ़िल्म ’हीरो’ में ब्रेक दिया। इस फ़िल्म के आने से पहले ही वो सुर्ख़ियों पर आ गए थे जब उनकी दोस्त जिया ख़ान ने ख़ुदकुशी कर ली थी। उन्हें गिरफ़्तार भी होना पड़ा और अब भी वह केस चल रहा है। इन सब के बीच ’हीरो’ रिलीज़ हुई और फ़िल्म ऐवरेज चली। सही या ग़लत कारणों से ही सही, सूरज चर्चा में बने रहे। सूरज के अभिनय को सराहा गया है और कई समीक्षकों ने यह भी कहा है कि उनमें वह बात है जो उन्हें चोटी तक पहुँचा सकती है, बस सही समय और सही फ़िल्म की प्रतीक्षा है। सुनने में आया है कि सलमान ख़ान फिर एक बार सूरज को लेकर फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जो एक तेलुगू फ़िल्म का रीमेक है। दूसरी तरफ़ 'ABCD-2’ के निर्देशक व नृत्य निर्देशक रेमो डी’सूज़ा भी सूरज को लेकर अपनी अगली फ़िल्म बना रहे हैं जो एक ऐक्शन लव स्टोरी है। इस तरह से सूरज आजकल काफ़ी व्यस्त हैं और एक उज्वल भविष्य की राह देख रहे हैं। फ़िल्म ’हीरो’ में ही सलमान ने सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी को भी लौंच किया था। इस वर्ष 2017 में सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी भी फ़िल्मों में क़दम रखने जा रहे हैं। जानेमाने फ़िल्मकार साजिद नडियाडवाला की फ़िल्म में नज़र आएँगे अहान बहुत जल्द। बीस वर्षीय अहान ने अपने शरीर पर बहुत मेहनत की है और एक आकर्षक शरीर का गठन किया है जो एक ऐक्शन हीरो की होनी चाहिए। अहान सलमान ख़ान को अपना रोल मॉडल मानते हैं और उन्हीं की पुरानी फ़िल्मों को देख देख कर अपने आप को तैयार कर रहे हैं। अहान लंदन में अभिनय की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और साथ ही साथ अपनी फ़िल्म पर भी काम कर रहे हैं। फ़िल्म के नायक के चरित्र के अनुसार अहान को लंदन में ही मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग् भी दी जा रही है। सुनने में आया है कि साजिद ने उनसे एक नहीं बल्कि तीन फ़िल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया है। साजिद जैसे मंझे हुए फ़िल्मकार अगर एक नवान्तुक के एक साथ तीन फ़िल्मों में काम करने के लिए राज़ी हो जाए, इसका अर्थ सिर्फ़ एक ही हो सकता है कि सामने वाले बन्दे में दम है। यानी कि अहान में ख़ास बात ज़रूर होगी। अहान साजिद के इस भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं यह तो वक़्त ही बताएगा।


आशिम गुलाटी, अर्श सेहरावत
अब बातें दिल्ली के दो नायकों की। दिल्ली में जन्में और पले बढ़े आशिम गुलाटी का बचपन से ही ग्लैमर की दुनिया में क़दम जमाने का सपना था। इसलिए पढ़ाई पूरी होते ही वो मुंबई चले आए। उनकी क़िस्मत अच्छी थी कि उन्हें शुरुआती संघर्ष नहीं करना पड़ा। मॉडल वाली कदकाठी के होने की वजह से उन्हें जल्दी ही मॉडलिंग् का काम मिल गया और टेलीविज़न में भी जल्दी ही वो उतर गए। क़िस्मत ने फिर एक बार उनका साथ दिया जब निर्माता भूषण कुमार और निर्देशक अनुभव सिंहा ने ’तुम बिन 2’ के लिए उन्हें ऑडिशन पर बुलाया। ’तुम बिन’ की अपार सफलता के बाद ’तुम बिन 2’ में मौका पाना अपने आप में एक सफलता थी। हालाँकि इस फ़िल्म को वह सफलता नहीं मिली जो ’तुम बिन’ को मिली थी, पर एक अभिनेता के रूप में आशिम के अभिनय को सराहा गया। आशिम के चेहरे की तुलना लोग अक्सर आदित्य रॉय कपूर से करते हैं जिसका उन पर कोई असर नहीं है। आशिम की दिली ख़्वाहिश है कि वो लंगड़ा त्यागी और ’बरफ़ी’ में रणबीर कपूर द्वारा निभाए किरदारों जैसा अभिनय करें अपनी आने वाली फ़िल्मों में। दिल्ली में पले-बढ़े अर्श सेहरावत ने फ़िल्म जगत में क़दम रखा 2013 की फ़िल्म ’से इट’ से। पूर्णिमा देशपांडे निर्देशित इस फ़िल्म में अर्श नज़र आए अभिनेत्री जेसिक कौर ढुग्गा के विपरीत। बदक़िस्मती से यह फ़िल्म नहीं चली और अर्श को भी किसी ने याद नहीं रखा। इस असफलता से अर्श ने हार नहीं माना और जुटे रहे अपने संघर्ष में। हाल ही में उनकी दूसरी फ़िल्म ’थोड़ी थोड़ी सी मनमानियाँ’ प्रदर्शित हुई है जिसने ’से इट’ से बेहतर प्रदर्शन किया है। अर्श ने ’व्हिस्लिंग् वूड्स’ में ऐक्टिंग् का कोर्स किया है जहाँ पर उनके दोस्त थे अजिंक्य किशोर जो स्क्रिप्ट-राइटिंग् का कोर्स कर रहे थे। और वो ही इस फ़िल्म के स्क्रीनप्ले व संवाद लेखक हैं। और अजिंक्य के ज़रिए ही अर्श की मुलाक़ात हुई इस फ़िल्म के निर्देशक आदित्य सरपोतदार से। आदित्य को अर्श की लघु फ़िल्में पसन्द आई और उन्हें लगा कि ’थोड़ी थोड़ी सी मनमानियाँ’ के नायक के किरदार में अर्श सटीक बैठते हैं। 26 मई 2017 को यह फ़िल्म प्रदर्शित हुई है और आगे वक़्त ही बताएगा कि अर्श फ़िल्म जगत में किस तरह से आगे बढ़ते हैं।


आरन चौधरी, अभिनव शुक्ला, प्रणय दीक्षित
अब ज़िक्र चार अभिनेताओं की जिनका फ़िल्मी सफ़र इसी दशक में शुरु हुआ है। वैसे तो अलग अलग फ़िल्म या टीवी धारावाहिक से इनकी शुरुआत हुई है, लेकिन एक फ़िल्म जो इन चारों को आपस में एक दूसरे से जोड़ती है, वह है ’रोर- टाइगर्स ऑफ़ द सुन्दरबन्स’। इस फ़िल्म में आरन चौधरी, अभिनव शुक्ला, प्रणय दीक्षित और पुल्कित जवाहर एक साथ नज़र आए। अबीस रिज़्वी निर्मित तथा कमल सदानाह निर्देशित यह फ़िल्म चर्चा का विषय बन गया था क्योंकि इसमें VFX पद्धति का प्रयोग कर कमाल के स्पेशल इफ़ेक्ट्स दिखाए गए थे। लुधियाना में जन्में और वहीं पले बढ़े अभिनव शुक्ला ने 2004 में इंजिनीयरिंग् की डिग्री प्राप्त की। लेकिन इसी साल वो बने ग्लैडरैग्ज़ मिस्टर इंडिया कॉन्टेस्ट में मिस्टर बेस्ट पोटेन्शियल। इस ख़िताब की वजह से उन्हें टेलीविज़न के ऑफ़र्स आने लगे और अभिनव चले आए ग्लैमर की दुनिया में। दस साल बाद 2014 में अबीस रिज़्वी ने उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म ’रोर’ में पहले नायक का किरदार ऑफ़र किया और इस तरह से इंजिनीयर, मॉडल व टीवी कलाकार अभिनव शुक्ला बन गए फ़िल्म नायक। आने वाले समय में हमारे नज़रें उन पर टिकी होंगी। आरन चौधरी भी एक मशहूर मॉडल हैं जिन्होंने 2010 में ग्लैडरैग्स मैनहन्ट मिस्टर इंडिया ख़िताब जीते और उसी साल उन्हें भारत का बेस्ट रैम्प मॉडल चुना गया तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ’मैनहन्ट इन्टरनैशनल कॉनटेस्ट’ में उन्हें सातवाँ स्थान मिला। इससे वो ग्लैमर की दुनिया में एक नामचीन मॉडल बन गए। फ़िल्मों में उनका आना हुआ 2012 की फ़िल्म ’एक था टैगर’ में। 2014 में ’रोर’ में जानदार अभिनय प्रतिभा दिखाने के बाद आरन ने 2015 में ’सिंह इज़ ब्लिंग्’ और तेलुगू फ़िल्म ’वलियवान’ में अभिनय किया। प्रणय दीक्षित टेलीविज़न के हास्य धारावाहिकों में एक जाना माना चेहरा हैं और उनके कॉमिक सेन्स और टाइमिंग् के तो कहने ही क्या! ’जुगाड़ूलाल’, ’लापतागंज’, ’FIR’, ’चिड़ियाघर’, ’हम आपके हैं इन-लॉज़’, ’बचन पाण्डे की टोली’, ’गिलि गिलि गप्पा’ जैसे बहुत से लोकप्रिय धारावाहिकों में प्रणय नज़र आते रहे हैं। प्रणय दीक्षित से एक बार हमारी लम्बी बातचीत हुई थी, जिसमें उन्होंने इस फ़िल्म में उनका चयन किस तरह से हुआ था, विस्तार से बताया था। "मैं फ़िल्में एक संक्रमण की तरह देखा करता था। साथ-साथ ऑबज़र्वेशन और लर्निंग्‍ भी जारी था। जब भी मुझे समय मिलता मैं जाकर ऑडिशन दे आता अपना आँकलन करने के लिए। और एक समय जाकर मैंने यह महसूस किया कि टीवी में अभिनय और फ़िल्मों में अभिनय दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। फ़िल्मों में अभिनय करना बच्चों का खेल नहीं, यह बात समझ में आ गई और इसलिए मैंने सोचा कि अब समय आ गया है कि और मेहनत से अपने अभिनय को अगले स्तर तक पहुँचाया जाए। इसलिए ऑडिशन जारी रखा, और करीब करीब 1500 ऑडिशन्स मैंने दिए, और 2.6 साल बाद मुझे 'Roar' के ऑडिशन के लिए बुलावा आया। कास्टिंग्‍ डिरेक्टर का कॉल आया और उन्होंने मुझे बताया कि इस फ़िल्म में एक चरित्र के लिए वो एक ऐसे अभिनेता की तलाश कर रहे हैं जो काफ़ी डायनामिक हो। तो क्या आप इस चरित्र को निभाने के लिए ऑडिशन दोगे? मैं वहाँ गया, उन्होंने मुझे उस किरदार के बारे में विस्तार में बताया। ऑडिशन टेक से पहले मैंने अपने बालों को भिगोया और अलग ही स्टाइल में कंघी की (जो 'Roar' में मेरी हेअर स्टाइल बनी)। और फ़ाइनल टेक के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि परिणाम वो मुझे बाद में सूचित करेंगे। अगले दिन मुझे उनका फ़ोन आया और उन्होंने मुझसे पूछा कि ये तुमने क्या किया? उन्होंने बताया कि निर्देशक महोदय मुझसे कल मिलना चाहते हैं। अगले दिन जब मैं कमल सदानह जी के दफ़्तर पहुँचा तो उन्होंने मुझे देखते ही कहा, "वेलकम मधु!" उनके बाद निर्माता अबीस रिज़्वी साहब आए और कहा, "अरे मधु, कैसे हैं आप?" फिर प्रोडक्शन हेड अंदर आए और कहने लगे कि क्या आप ही मधु हैं? मेरी समझ में आ गया कि ऑडिशन सुपरहिट रहा है। मुझे दो और सीन अदा करने को कहा गया, और उसके बाद निर्देशक साहब आए और कहा कि "you are IN"।" और इस तरह से ’रोर’ फ़िल्म से उनके क़दम फ़िल्म जगत पर पड़े हैं। आगे भी वो टेलीविज़न के साथ-साथ फ़िल्मों में भी नज़र आते रहेंगे, ऐसी हम उम्मीद करते हैं। और चौथे अभिनेता पुल्कित जवाहर ने भी अपना फ़िल्मी करीअर इसी फ़िल्म से शुरु किया। अफ़सोस की बात है कि पुल्कित जवाहर से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी, लेकिन हम उम्मीद करेंगे कि वो जल्द ही अपनी दूसरी फ़िल्म में नज़र आएँगे।


कपिल शर्मा, युवराज पराशर, राहुल चौधरी
युवराज पराशर और कपिल शर्मा दो ऐसे अभिनेता हैं जिनके साहस की दाद देनी चाहिए। जिस देश में समलैंगिक होना एक अपराध जैसा है, वहाँ इन दोनों ने समलैंगिक प्रेम पर बोल्ड फ़िल्में बना कर एक उदाहरण रचा है। ये दो फ़िल्में हैं ’डोन्नो व्हाइ न जाने क्यों’ (2010) और ’डोन्नो व्हाई 2 - लव इज़ अ मोमेण्ट’ (2015)। ये दोनों फ़िल्में इन्डो-नॉर्वेजियन कोलाअबोरेशन से बनाई गई है और इन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। इस फ़िल्म के बारे में युवराज ने हमें बताया - "'डोन्नो व्हाई...' एक कहानी है रिश्तों की, कुछ ऐसे रिश्ते जिन्हें हमारा समाज स्वीकार नहीं करता। यह कहानी तीन रिश्तों की है, पहला रिश्ता एक 'सिन्गल मदर' की है जो अपने परिवार और अपने पति के परिवार के देखभाल के लिए कुछ भी कर सकती है; दूसरा रिश्ता है है एक जवान लड़की की जो अपने जीजाजी से प्यार करने लगती है; और तीसरा रिश्ता है एक शादीशुदा लड़के का एक सम्लैंगिक रिश्ता।" इस तरह के किरदार निभाने के बारे में जब उनसे पूछा गया तब उन्होंने बताया - "मैं समझता हूँ कि यह केवल एक चरित्र था जिसे मैंने निभाया और हर अभिनेता को हर किस्म का किरदार निभाना आना चाहिए। क्या मुझसे यही सवाल करते अगर मैंने किसी डॉन या बदमाश गुंडे का रोल निभाया होता? फ़िल्में और कुछ नहीं हमारे समाज का ही आईना हैं। मुझे फ़िल्म की कहानी बहुत पसन्द आई और मुझे लगा कि मेरा रोल अच्छा है, इसलिए मैंने किया। जब मेरे पापा नें मेरे निभाये गये रोल के बारे में सुना तो वो बहुत बिगड़ गए थे। मैंने उन्हें समझाने की बहुत कोशिशें की पर उस वक़्त वो कुछ भी सुनना नहीं चाहते थे। पर अब सबकुछ ठीक है। ज़ीनत जी का भी एक बड़ा हाथा था उन्हें समझाने में कि यह केवल एक फ़िल्म मात्र है, हक़ीक़त नहीं। मैं सदा ज़ीनत जी का आभारी रहूंगा।" युवराज ने इससे पहले 2008 की फ़िल्म ’फ़ैशन’ में एक छोटे से रोल में नज़र आए थे। ’डोन्नो व्हाई’ में समलैंगिक चरित्र निभाने के लिए उनके परिवार ने उनसे सारे रिश्ते तोड़ दिए। उधर कपिल शर्मा बचपन में 1981 की फ़िल्म ’श्रद्धांजलि’ में बालकलाकार की भूमिका और 2004 की फ़िल्म ’अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ में एक छोटा किरदार निभा चुके थे। ’डोन्नो व्हाइ’ के अलावा कपिल ने 2013 की फ़िल्म ’ब्लैक करेन्सी’ में भी अभिनय किया है। युवराज और कपिल अच्छे अदाकार हैं लेकिन समलैंगिक्ता विषय पर अत्यधिक काम करने की वजह से शायद वो टाइपकास्ट हो गए हैं और उन्हें साधारण फ़िल्में नहीं मिल रही हैं। यह तो वक़्त ही बताएगा कि क्या ये दोनों अपने इस इमेज से बाहर निकल पाते हैं या नहीं। इसी फ़िल्म में एक तीसरे अभिनेता ने भी अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु किया था जिनका नाम है राहुल चौधरी। ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश से एक अभिनेता बनने का सपना लेकर राहुल मुंबई आ गए और मॉडलिंग् करने लगे। धीरे धीरे उन्हें टेलीविज़न पर काम मिलने लगा और कई धारावाहिकों में उन्होंने चरित्र अभिनेता की भूमिकाएँ निभाईं जैसे कि ’महाराणा प्रताप’, ’CID', 'सावधान - India Fights Back' और ’Code Red'। और फिर एक दिन उन्हें मिला पहली फ़िल्म का ऑफ़र। फ़िल्म थी ’डोन्नो व्हाई 2’। रोल तो छोटा सा था पर बड़े परदे में उनकी एन्ट्री हो गई। "जब इस फ़िल्म की कास्टिंग् चल रही थी तो मुझे इसकी ख़बर मिली किसी सूत्र से और मैं ऑडिशन देने के लिए पहुँच गया। संजय सर (फ़िल्म के निर्देशक) को मेरा ऑडिशन पसन्द आया और मुझे एक किरदार के लिए फ़ाइनल कर लिया गया।", राहुल ने हमें बताया। राहुल की अगली फ़िल्म ’दोस्ती ज़िंदाबाद’ इस वर्ष प्रदर्शित होने जा रही है। हम उम्मीद करते हैं कि वो बड़े पर कामयाब सिद्ध होंगे।

यहाँ आकर समाप्त होती है ’इस दशक के नवोदित नायक’ श्रॄंखला की पहली कड़ी। अगले सप्ताह कुछ और नवोदित नायकों के पदार्पण की बातें लेकर फिर उपस्थित होंगे। तब तक के लिए अपने दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार।



आख़िरी बात

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शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र  



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