शनिवार, 30 नवंबर 2013

'सिने पहेली' का 90% सफ़र होता है आज पूरा, बने रहिये अगले 10% सफ़र में भी...

सिने पहेली –90


'सिने पहेली' के सभी प्रतियोगियों औ़र पाठकों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार। दोस्तों, देखते ही देखते 'सिने पहेली' के सफ़र का एक और पड़ाव आ गया है। आज दस में से नौ सेगमेण्ट्स की समाप्ति हो रही है, यानी कि इस प्रतियोगिता का 90% हिस्सा पूरा हो रहा है आज। अब बस एक सेगमेण्ट शेष है जो अगले सप्ताह से शुरु हो जाएगा। ख़ैर, वापस आते हैं आज की पहेली पर। दोस्तों, सच पूछिये तो आज मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा है कि आप से किस तरह की पहेली पूछूँ, इसलिए आज कुछ मिले-जुले सवाल ही पूछ लेता हूँ। पर इन्हें सुलझाने में आपको दिमाग ज़रूर लगाना पड़ेगा। देखते हैं कितने प्रतियोगी आज के सवालों का सही सही जवाब दे पाते हैं!



आज की पहेली : कुछ और सवाल


1. एक गीत है जिसमें गायक किशोर कुमार फ़िल्म के निर्माता जे. ओम. प्रकाश की चुटकी लेते हुए गीत के अन्त में गाते हैं "पचास हज़ार खर्चा कर दिये", जो मूल गीत में नहीं था, पर रेकॉर्डिंग्‍ के समय किशोर दा गा गये, जैसा कि हमने बताया निर्माता की टाँग खींचते हुए। बताइये कौन सा गीत है यह? बहुत ही मशहूर मस्ती भरा गीत है। (4 अंक)

2. "इन्ही लोगों ने ले ली ना दुपट्टा मेरा", फ़िल्म 'पाक़ीज़ा' का यह मशहूर गीत, हर किसी को पता है, हर कोई सुन चुका है। बताइये कुमार सानु और अलका याज्ञ्निक का गाया वह कौन सा शीर्षक गीत है जिसकी धुन "इन्ही लोगों..." से प्रेरित है। (3.5 अंक)

3. इस तस्वीर को देख कर गीत पहचानिये।
 सूत्र: यह लता और सुरेश वाडकर का गाया डुएट है। (2.5 अंक)




उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 90" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 5 दिसंबर शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।




पिछली पहेली का हल

1. जिस देश में गंगा बहती है
2. सौदागर
3. बाजार
4. दो बीघा जमीन
5. गूंज उठी शहनाई
6. देवदास
7. पुकार
8. दीवार
9. जिस्‍म
10. किस्‍मत


पिछली पहेली के विजेता

इस बार 'सिने पहेली' में आनन्द अकेला जी एक लम्बे अरसे के बाद नज़र आये और सभी सवालों के सही जवाब दिये। आपका बहुत बहुत स्वागत है आनन्द जी। उधर इन्दु जी भी बहुत दिनों बाद प्रतियोगिता की हिस्सा बनीं, आपका भी धन्यवाद। सबसे पहले सभी प्रश्नों के सही जवाब देकर इस बार 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं लखनऊ के श्री चन्द्रकान्त दीक्षित। बहुत बहुत बधाई चन्द्रकान्त जी, आपको। और अब इस सेगमेण्ट के सम्मिलित स्कोर-कार्ड पर एक नज़र...




कौन बनेगा 'सिने पहेली' महाविजेता?


1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स। 

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जोड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेता के रूप में चुन लिया जाएगा। 

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। आठवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा-



4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

तो आज बस इतना ही, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

नए साल पर टी सीरीस का एक संगीतमय तोहफा : "आई लव न्यू ईयर"

टी सीरीस के भूषण कुमार संगीतमयी रोमांटिक फिल्मों के सफल निर्माता रहे हैं. चूँकि इन फिल्मों का संगीत भी दमदार रहता है तो उनके लिए दोहरे फायदे का सौदा साबित होता है. इस साल आशिकी २ और नौटंकी साला की जबरदस्त सफलता के बाद वो हैट्रिक लगाने की तैयारी में थे आई लव न्यू ईयर के साथ. मगर फिल्म की प्रदर्शन तिथि, एक के बाद एक कारणों से टलती चली गयी. पहले यमला पगला दीवाना २ के प्रमोशन के चलते फिल्म का प्रदर्शन अप्रैल-मई से टल कर सितम्बर कर दिया गया. फिर भूषण और फिल्म के नायक सन्नी देओल के बीच कुछ धन राशि के भुगतान को लेकर मामला छिड़ गया. अब जाकर फिल्म को दिसंबर के अंतिम सप्ताह में जारी करने की सहमती बनी है. फिल्म के शीर्षक के लिहाज से भी ये एक सही कदम है. पर अभी तक फिल्म का प्रचार ठंडा ही दिखाई दे रहा है. बहरहाल हम फिल्म के संगीत की चर्चा तो कर ही सकते हैं. 

फिल्म में प्रीतम प्रमुख संगीतकार हैं, मगर एक एक गीत फलक शबीर (नौटंकी साला वाले), और अनुपम अमोद के हिस्से भी आया है, साथ ही पंचम द के एक पुराने हिट गीत को भी एल्बम में जोड़ा गया है. गीत मयूर पुरी, सईद कादरी और फलक शबीर ने लिखे हैं. फिल्म के निर्देशक राधिका राव और विनय सप्रू हैं जिनकी पहली फिल्म लकी - नो टाईम फॉर लव बॉक्स ऑफिस पर भी लकी साबित हुई थी, जिसमें सलमान खान की लोकप्रियता और अदनान सामी के संगीत का बड़ा योगदान था. यानी इस निर्देशक जोड़ी को अच्छे संगीत की पहचान निश्चित ही है और जब साथ हो टी सीरीस जैसे बैनर का तो उम्मीदें बढ़ ही जाती है, आईये देखें कि कैसा है आई लव न्यू ईयर  के संगीत एल्बम का हाल.

गुड नाल इश्क मीठा एक पारंपरिक पंजाबी गीत है जो शादी ब्याह और संगीत के मौकों पर अक्सर गाया बजाया जाता है. इसी पारंपरिक धुन को संगीतकार अनुपम अमोद ने बेहद अच्छे टेक्नो रिदम में डाल कर पेश किया है एल्बम के पहले गीत में, और उतने ही मस्त मौजी अंदाज़ में गाया है बेहद प्रतिभाशाली तोचि रैना ने जिनकी आवाज़ को अलग से पहचाना जा सकता है. आज के दौर में जहाँ नए गायकों की भरमार है ये एक बड़ी उपलब्धि है. गीत निश्चित ही कदम थिरकाने वाला है. मयूर पुरी ने 'पंच' को वैसा ही रखा है और उसके आप पास अच्छे शब्द रचे हैं.

तुलसी कुमार और सोनू निगम साथ आये हैं अगले गीत जाने न क्यों/आओ न में. धीमी शुरुआत के बाद गीत अच्छी उड़ान भरता है और एक बार श्रोताओं को अपनी जद में लेने के बाद अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने देता. रिदम में तबले का सुन्दर प्रयोग है अंतरे से पहले सेक्सोफोन का पीस भी शानदार है. सोनू पूरे फॉर्म में हैं और तुलसी की आवाज़ भी उनका साथ बखूबी देती है. सैयद कादरी के शब्द बेहद अच्छे हैं. बहुत ही खूबसूरत युगल गीत है जो कहीं कहीं प्रीतम के जब वी मेट दिनों की यादें ताज़ा कर देती हैं.

फलक शबीर के बारे में हम पहले भी काफी कुछ कह चुके हैं. उनका लिखा, स्वरबद्ध किया और बहतरीन अंदाज़ में गाया गीत जुदाई एल्बम का खास आकर्षण है. धुन में कुछ खास नयेपन के अभाव में भी गीत टीस से भर देता है. इसे एक ब्रेक अप गीत माना जा सकता है. और शायद एक ब्रेक अप सिचुएशन पर पहली बार कोई गीत बना है. गीत सुनते हुए आप महसूस कर सकते हैं दो छूटते हुए हाथ, चार नम ऑंखें और बहुत सा दर्द. गीत का एक अनप्लग्ड संस्करण भी है जो सुनने लायक है.

तुलसी कुमार एक बार फिर सुनाई देती है, इस बार शान के साथ गीत हल्की हल्की में. ये एक हंसी मजाक वाला गीत है. वास्तव में इस एल्बम के सभी गीत मेरे लिए एक सुखद आश्चर्य ही हैं. हर गीत को सुनने से पहले मेरी उम्मीदें बिलकुल शून्य थी, मगर हर गीत को सुनना एक हैरान करने वाला अनुभव साबित हुआ हर बार. ये भी एक बेहद सुरीला गीत है, जहाँ संयोजन में सधी हुई सटीकता है. दोनों गायकों की परफेक्ट ट्यूनिंग जानदार है और मयूर पुरी के शब्द भी ठीक ठाक है.

पंचम ने फिल्म सागर में जो थीम पीस रचा था, टी सीरिस ने उसी धुन को लेकर एस पी बालासुब्रमण्यम से गवाया था बरसों पहले आज मेरी जान का नाद. इसी रचना को एक बार फिर से जिंदा किया गया है एल्बम में. मौली दवे की नशीली आवाज़ में इस रचना को सुनना पंचम की सुर गंगा में एक बार फिर उतरने जैसा है. खुशी की बात है कि गीत की मूल सरंचना से अधिक छेड छाड नहीं की गयी है.

आई लव न्यू ईयर एक अच्छी एल्बम है जहाँ कोई भी गीत निराश नहीं करता. ये गीत धीरे धीरे आपके दिल में उतर जायगें और लंबे समय तक वहीँ घर बना लेंगें.

एल्बम के बहतरीन गीत - गुड नाल इश्क, जुदाई, आओ न, आजा मेरी जान 
हमारी रेटिंग - ४.४  .   

  

बुधवार, 27 नवंबर 2013

लफ़्ज़ों की गुज़ारिश को परवान देता एक गीतकार


राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित गीतकार प्रसून जोशी एक सफल स्क्रीन लेखक और मशहूर कॉपीराईटर भी हैं. दिल से कवि, प्रसून ने अपनी कलम के जादू से इंडस्ट्री में आज अपना एक खास मुकाम बना लिया है. प्रसून पर सुनील चिपडे की विशेष प्रस्तुति आज सुनें सिर्फ और सिर्फ रेडियो प्लेबैक इंडिया पर 


  

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

काजल कुमार का व्यंग्य ड्राइवर

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको हिन्दी में मौलिक और अनूदित, नई और पुरानी, प्रसिद्ध कहानियाँ और छिपी हुई रोचक खोजें सुनवाते रहे हैं। पिछली बार आपने माधवी चारुदत्ता के स्वर में शोभना चौरे की लघुकथा "करवा चौथ" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट काजल कुमार की व्यंग्यात्मक लघुकथा ड्राइवर जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी "ड्राइवर" का गद्य कथा कहानी ब्लॉग पर उपलब्ध है। इस कथा का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 4 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

कवि, कथाकार और कार्टूनिस्ट काजल कुमार के बनाए चरित्र तो आपने देखे ही हैं। उनकी एक व्यंग्यात्मक लघुकथा एक था गधा भी आप पहले सुन चुके हैं। काजल कुमार दिल्ली में रहते हैं।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

सरकार में इस तरह से एडवांस देने का कोई सिस्टम नहीं है।
 (काजल कुमार रचित "ड्राइवर" से एक अंश)





नीचे के प्लेयर से सुनें.


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 यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
ड्राइवर MP3

#36th Story, Driver: Kajal Kumar/Hindi Audio Book/2013/36. Voice: Anurag Sharma

सोमवार, 25 नवंबर 2013

भरत व्यास और वंसत देसाई की अनूठी जुगलबंदी

1959 में बनी सफल फिल्म थी गूँज उठी शहनाई, जिसके निर्देशक थे विजय भट्ट. भरत व्यास के गीतों को शानदार संगीत से संवारा वसंत देसाई ने. इस फिल्म का हर गीत आज भी श्रोताओं के जेहन में एकदम ताज़ा है. आईये खरा सोना गीत के अंतर्गत आज रचेता टंडन के साथ सुनते हैं इसी फिल्म का ये यादगार युगल गीत.

स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टर्जी

स्वर - रचेता टंडन 

प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 

शनिवार, 23 नवंबर 2013

फटा पोस्टर निकली पहेली

सिने पहेली – 89


'सिने पहेली' के सभी प्रतियोगियों औ़र पाठकों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार। दोस्तों, फ़िल्म निर्माण के तमाम पहलुओं में एक महत्वपूर्ण पहलु होता है फ़िल्म के पोस्टर्स। जी हाँ, किसी भी फ़िल्म के प्रचार-प्रसार में उसके पोस्टर्स का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आज के ज़माने में भले इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से फ़िल्म का प्रचार किया जाता है, पर पुराने ज़माने में ये पोस्टर्स ही फ़िल्म के प्रचार-प्रसार के मुख्य ज़रिये हुआ करते थे। और बहुत सी फ़िल्मों के पोस्टर्स तो फ़िल्म की पहचान ही बन गये थे। आज की 'सिने पहेली' में हमने कुछ लोकप्रिय फ़िल्मों के पोस्टर्स पेश करने की कोशिश की है, और आपको ये फ़िल्में पहचाननी हैं। देखते हैं आप कितने फ़िल्मी हैं!



आज की पहेली : फटा पोस्टर निकली पहेली


नीचे दिये हुए फ़िल्मी पोस्टरों को ध्यान से देखिये और फ़िल्में पहचानिये।













उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 89" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 28 नवंबर शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।




पिछली पहेली का हल

Answer 1- 

यह सवल ग़लत था, जिस वजह से इसे निरस्त करते हुए सभी प्रतिभागियों को हम अंक दे रहे हैं।

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Answer 2- 
Film - Dil Bole Hadippa (2009)
Starring - Shahid Kapoor, Rani Mukergi
Directed by Anurag Singh
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Answer 3- 
Film - Meerabai Not Out (2008)
Starring - Mahesh Manjrekar, Mandira, Eijaz, Anupam Kher. 
Directed by Chandrakant Kulkarni
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Answer 4- 
Film - Victory (2009)
Starring - Harman Baweja, Amrita Rao, Anupam Kher
Directred by Ajit Pal Mangat
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Answer 5- 
Film - Patiala House (2011)
Starring - Akshay Kumar, Anushka Sharma, Rishi Kapoor
Directred by Nikhil Advani
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Answer 6- 
Film - Iqbal (2005)
Starring - Shreyas Talpade, Naseeruddin Shah, Girish Karnad
Directred by Nagesh Kukunoor 
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Answer 7- 
Film - Say Salaam India (2007)
Starring - Sanjay Suri, Milind Soman, Sandhya Mridul
Directred by Subhash Kapoor
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Answer 8- 
Film - Awwal Number (1990)
Starring - Aamir Khan, Dev Anand, Aditya Pancholi
Directred by Dev Anand
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Answer 9- 
Film - All Rounder (1984)
Starring - Kumar Gaurav, Rati Agnihotri, Shakti Kapoor
Directred by Mohan Kumar
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Answer 10- 
Film - Say Salaam India (2007)
Starring - Sanjay Suri, Milind Soman, Sandhya Mridul
Directred by Subhash Kapoor 
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पिछली पहेली के विजेता

सभी प्रश्नों के सही जवाब देकर इस बार 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं बीकानेर के श्री विजय कुमार व्यास। बहुत बहुत बधाई विजय जी, आपको। आपके अलावा प्रकाश गोविंद, चन्द्रकान्त दीक्षित और पंकज मुकेश ने इस बार प्रतियोगिता में भाग लिया है। आप सभी का धन्यवाद, और अब इस सेगमेण्ट के सम्मिलित स्कोर-कार्ड पर एक नज़र...




कौन बनेगा 'सिने पहेली' महाविजेता?


1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स। 

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जोड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेता के रूप में चुन लिया जाएगा। 

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। आठवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा-



4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

तो आज बस इतना ही, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

'गन्दी बात' में भी बहुत कुछ अच्छा है प्रीतम दा के साथ


बॉलीवुड में दक्षिण की सफल फिल्मों का रिमेक जोरों पे जारी है. सभी बड़े सुपर स्टार जैसे सलमान, अजय देवगन, अक्षय कुमार आदि इन फिल्मों से सफलता का स्वाद चख चुके हैं, अब शाहिद कपूर भी आ रहे हैं रेम्बो राजकुमार बनकर....ओह माफ कीजियेगा आर...राजकुमार बनकर. फिल्म के नाम में रेम्बो का इस्तेमाल वर्जित (कोपीराईट कारणों से) होने के कारण फिल्म के नाम में ये बदलाव करना पड़ा. फिल्म में संगीत है हिट मशीन प्रीतम का, आईये नज़र डालें इस फिल्म के एल्बम पर, और जानें कि संगीत प्रेमियों के लिए क्या है इस एक्शन कोमेडी फिल्म के गीतों में. 

एल्बम के पहले तीन गीत पूरी तरह से दक्षिण के तेज रिदम वालों गीतों से प्रेरित हैं. इनमें प्रीतम की झलक कम और दक्षिण के संगीतकारों की छवि अधिक झलकती है. पहला गीत गन्दी बात एक मस्त मलंग गीत है जिसकी ताल और धुन इतनी जबरदस्त है कि सुनकर कोई भी खुद को कदम थिरकाने से नहीं रोक पायेगा. अनुपम अमोद के शब्द चटपटे हैं और कुछ पारंपरिक श्रोताओं को आपत्तिजनक भी लग सकते हैं. मिका की आवाज़ इस गीत के लिए एकदम सही चुनाव है पर गीत का सुखद आश्चर्य है कल्पना पटोवरी की जोशीली आवाज़ जिसने मिका को जबरदस्त टक्कर दी है. निश्चित ही एक हिट गीत. 

नए गायक नक्श अज़ीज़ ने खुल कर गाया है अगला गीत साडी के फाल से गायिका अन्तरा मित्रा के साथ. गीत की सरंचना बहुत खूब है, जहाँ गायक के हिस्से में मुखड़े की धुन और अंतरा पूरा का पूरा गायिका ने निभाया है. धुन मधुर है और रिदम भी बहुत ही कैची है. शब्द अच्छे हो सकते थे, पर शायद ही इसकी कमी गीत की लोकप्रियता पर असर डालेगी. हाँ मगर बेहतर शब्द इसे एक यादगार गीत में तब्दील अवश्य कर देते. गीत के अंत में नक्श की हंसी खूब जची है. 

दक्षिण की धुनों से प्रेरित तीसरा गीत मत मारी में कुणाल गांजावाला की आवाज़ सुनाई दी है बहुत समय के बाद, अगर कहें कि ये गीत अगर इतना मस्त बन पाया है तो इसकी सबसे बड़ी वजह कुणाल और गायिका सुनिधि की आवाजें हैं तो गलत नहीं होगा. खास तौर पर सुनिधि ने अपना हिस्सा इतनी खूबी से गाया है कि क्या कहने. कहीं कहीं तो वो हुबहू फिल्म की नायिका सोनाक्षी की ही आवाज़ में ढल गयीं हैं. वाकई जैसे कि गीत में कहा गया है कि मुझे तेरी गाली भी लगती है ताली...सुनिधि ने गलियां भी सुरीले अंदाज़ में गायीं हैं. वैसे गीत के अंत में सोनाक्षी अपने खास अंदाज़ में खामोश भी कहती है, जो गीत का एक और खास आकर्षण बन गया है. इस गीत की भी सफलता तय है. 

अरिजीत सिंह का रोमांटिक अंदाज़ सुनाई देता है अगले गीत धोखा धड़ी में. ये एल्बम का पहला और एकमात्र गीत है जहाँ लगता है कि ये प्रीतम की एल्बम है. गीत में प्रीतम की छाप है, निलेश मिश्रा के शब्द बेहद अच्छे हैं. एल्बम के तेज तड़क गीतों में ये गीत कुछ कम सुना रह जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. 

अंतरा मित्रा का एक अलग अंदाज़ नज़र आता है कद्दू कटेगा गीत में. एकबार तो लगेगा कि ये ममता शर्मा हैं मायिक के पीछे. आशीष पंडित का लिखा ये गीत फिर एक बार दक्षिणी गीतों से प्रेरित है, पर एल्बम में शामिल इस श्रेणी के अन्य गीतों के मुकाबले ये गीत बेहद कमजोर है. हाँ इसका फिल्मांकन जरूर धमाल होने वाला है. 

एल्बम के गीत लंबे समय तक बेशक लोगों को याद न रहें, पर इनका हिट फ्लेवर फिल्म को सफलता की राह अवश्य दिखा सकता है. संक्षेप में कहें तो आर...राजकुमार एक मास अपील एल्बम है जो क्लब पार्टियों में तो शूम मचायेगा ही, गली मोहल्लों के उत्सवों में भी जमकर बजेगा. 

एल्बम के सर्वश्रेष्ठ गीत - गन्दी बात, साडी के फाल से, मत मारी, धोखा धड़ी 
हमारी रेटींग - ४.२      

रविवार, 17 नवंबर 2013

‘दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे...’ : राग केदार में भक्तिरस

 

स्वरगोष्ठी – 144 में आज

रागों में भक्तिरस – 12

राग केदार के स्वरों से अभिसिंचित एक कालजयी भक्तिगीत


‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ की बारहवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीतानुरागियों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, जारी श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपसे भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और उनमें निबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उस राग पर आधारित फिल्म संगीत के उदाहरण भी आपको सुनवा रहे हैं। श्रृंखला की आज की कड़ी में हम आपसे राग केदार में उपस्थित भक्तिरस पर चर्चा करेंगे। आपके समक्ष इस राग के भक्तिरस-पक्ष को स्पष्ट करने के लिए हम तीन भक्तिरस से पगी रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले हम 1957 में प्रदर्शित फिल्म ‘नरसी भगत’ का राग केदार पर आधारित एक प्रार्थना गीत और इसके बाद पण्डित जसराज के गायन और पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया के बाँसुरी वादन की आकर्षक जुगलबन्दी में एक भजन भी आप सुनेगे। 


न्द्रहवीं शताब्दी के वैष्णव भक्त कवि नरसी मेहता के जीवन पर हिन्दी में दो फिल्मों का निर्माण हुआ था। पहली फिल्म 1940 में बनी थी, जिसमें गायक-अभिनेता विष्णुपन्त पगणीस और अभिनेत्री दुर्गा खोटे ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थी। इस फिल्म के संगीत निर्देशक शंकरराव व्यास थे। दूसरी फिल्म 1957 में बनी थी। राग केदार पर आधारित जो भजन हम आज आपको सुनवा रहे हैं वह इसी फिल्म से है। गीत के बोल हैं- ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे...’। इस गीत का एक उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इसके गीतकार सुप्रसिद्ध कवि और साहित्यकार गोपाल सिंह नेपाली थे।

गोपाल सिंह नेपाली का जितना योगदान साहित्य जगत में रहा है, फिल्मों के गीतकार के रूप में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा है। पाँचवें से सातवें दशक तक वे फिल्मों में सफल गीतकार के रूप में सक्रिय रहे। नेपाली जी ने फिल्मों में लगभग 400 गीतों की रचना की थी। उन्होने अधिकतर धार्मिक और सामाजिक फिल्मों में गीत लिखे। अपने फिल्मी गीतों में भी उन्होने साहित्यिक स्तर में कभी समझौता नहीं किया। 1946 में सचिनदेव बर्मन के संगीत निर्देशन में बनी फिल्म 'आठ दिन', 1953 में प्रदर्शित फिल्म 'नाग पंचमी', 1955 की फिल्म 'शिवभक्त', 1959 की फिल्म 'नई राह' तथा 1961 में प्रदर्शित फिल्म 'जय भवानी' के गीत गोपाल सिंह नेपाली की बहुआयामी प्रतिभा के उदाहरण हैं। फिल्म के इन गीतों के बीच 1957 में श्री नेपाली रचित एक ऐसा गीत फिल्म 'नरसी भगत' में शामिल हुआ जिसने लोकप्रियता के सारे कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया। संगीतकार रवि द्वारा स्वरबद्ध तथा हेमन्त कुमार, मन्ना डे और सुधा मल्होत्रा के स्वरों में वह गीत है। इस गीत से जुड़ा एक उल्लेखनीय प्रसंग श्री नेपाली के निधन के चार दशक बाद सामने आया। ब्रिटिश फिल्म निर्माता डेनी बोयेल ने 'स्लमडॉग मिलियोनर' का निर्माण किया था। आस्कर पुरस्कार प्राप्त इस फिल्म में नेपाली जी के गीत का इस्तेमाल किया गया था, किन्तु फिल्म में इस गीत का श्रेय भक्तकवि सूरदास को दिया गया था। गोपाल सिंह नेपाली के सुपुत्र नकुल सिंह ने मुम्बई उच्च न्यायालय में फिल्म के निर्माता के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का दावा भी पेश किया था। कैसा दुर्भाग्य है कि एक स्वाभिमानी गीतकार को मृत्यु के बाद भी अन्याय का शिकार होना पड़ा। संगीतकार रवि का स्वरबद्ध किया और हेमन्त कुमार, मन्ना डे और सुधा मल्होत्रा की आवाज़ में अब आप यही गीत सुनिए।



राग केदार : ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ...’ : हेमन्त कुमार, मन्ना डे और सुधा मल्होत्रा : फिल्म नरसी भगत




भक्तिरस की अभिव्यक्ति के लिए केदार एक समर्थ राग है। कर्नाटक संगीत पद्यति में राग हमीर कल्याणी, राग केदार के समतुल्य है। षाड़व-षाड़व जाति, अर्थात आरोह और अवरोह दोनों में छह-छह स्वरों का प्रयोग होने वाला यह राग कल्याण थाट के अन्तर्गत माना जाता है। प्राचीन ग्रन्थकार राग केदार को बिलावल थाट के अन्तर्गत मानते थे, आजकल अधिकतर गुणिजन इसे कल्याण थाट के अन्तर्गत मानते हैं। इस राग में दोनों मध्यम का प्रयोग होता है। शुद्ध मध्यम का प्रयोग आरोह और अवरोह दोनों में तथा तीव्र मध्यम का प्रयोग केवल आरोह में किया जाता है। आरोह में ऋषभ स्वर और अवरोह में गान्धार स्वर वर्जित होता है। राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। इस राग का गायन-वादन रात्रि के पहले प्रहर में किया जाता है। राग केदार में भक्तिरस के तत्त्व का अनुभव करने के लिए अब हम आपको इस राग के स्वरों से अभिसिंचित एक भक्तिपूर्ण रचना जुगलबन्दी रूप में सुनवाते हैं। गायन और बाँसुरी वादन की यह जुगलबन्दी प्रस्तुत कर रहे हैं, विश्वविख्यात संगीतज्ञ, पण्डित जसराज और पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया। इस भक्ति-रचना के बोल हैं, ‘गोकुल में बाजत कहाँ बधाई...’। आप राग केदार की इस भक्ति-रचना का रसास्वादन करें और मुझे इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।



राग केदार : भजन जुगलबन्दी : ‘गोकुल में बाजत कहाँ बधाई...’ : पं. जसराज और पं. हरिप्रसाद चौरसिया




आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 144वें अंक की पहेली में आज हम आपको वाद्य संगीत की एक रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। यह पाँचवें सेगमेंट की चौथी पहेली है। 150वें अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – इस संगीत रचना के अंश को सुन कर राग पहचानिए और हमे राग का नाम लिख भेजिए।

2 – यह कौन सा संगीत वाद्य है? वाद्य का नाम बताइए।

आप अपने उत्तर केवल radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 146वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ की 142वीं कड़ी में हमने आपको पण्डित विश्वमोहन भट्ट द्वारा तंत्रवाद्य मोहन वीणा पर बजाए राग मियाँ की मल्हार का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग मियाँ की मल्हार और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- तंत्र वाद्य मोहन वीणा। इस अंक के दोनों प्रश्नो के सही उत्तर हमारे एकमात्र प्रतिभागी जौनपुर से डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने ही दिया है। डॉ. त्रिपाठी को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का


मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ के अन्तर्गत आज के अंक में हमने आपसे राग केदार के भक्तिरस के पक्ष पर चर्चा की। आगामी अंक में हम एक और भक्तिरस प्रधान राग में गूँथी रचनाएँ लेकर उपस्थित होंगे। अगले अंक में इस लघु श्रृंखला की तेरहवीं कड़ी के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों की प्रतीक्षा करेंगे।

प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र

शनिवार, 16 नवंबर 2013

मास्टर ब्लास्टर सचिन को सलाम करती है आज की 'सिने पहेली'

सिने पहेली – 88


'सिने पहेली' के सभी प्रतियोगियों औ़र पाठकों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार। दोस्तों, कल सचिन तेन्दुलकर ने अपने जीवन के अन्तिम टेस्ट मैच में बल्लेबाज़ी करते हुए हमेशा के लिए पारी समाप्ति की घोषणा कर दी। इस मास्टर-ब्लास्टर के बारे में और क्या कहें, बस यही कह सकते हैं कि सचिन भारत का गर्व है। 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की तरफ़ से सचिन को ढेरों शुभकामनायें हम देते हैं और आज की 'सिने पहेली' का यह एपिसोड उनके नाम करते हैं। सीधे-सीधे सचिन पर सिनेमा संबंधित सवाल तो नहीं उपलब्ध करा सकते, पर हाँ, क्रिकेट संबंधित फ़िल्मी सवाल ज़रूर पूछ सकते हैं, और हम यह मानते हैं और आप भी यह मानेंगे कि क्रिकेट का ज़िक्र और सचिन का ज़िक्र, एक ही बात है, क्योंकि सचिन ही क्रिकेट है, और क्रिकेट ही सचिन है। तो आइए शुरू करें आज की 'सिने पहेली'।



आज की पहेली : खेल खेल में


नीचे दिये हुए फ़िल्मी दृश्यों को ध्यान से देखिये और फ़िल्म पहचानिये।













उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 88" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 21 नवंबर शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।




पिछली पहेली का हल

गीत-१: न तुमने किया न मैंने किया (नाचे मयूरी)
गीत-२: हम तुम दोनो जब मिल जायेंगे (एक दूजे के लिए)



पिछली पहेली के विजेता

पिछली पहेली लगता है आप पर भारी पड़ गई क्योंकि केवल दो प्रतियोगी ही इसे हल कर पाये। सबसे पहले सही जवाब भेज कर लगातार दूसरी बार 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं लखनऊ के श्री प्रकाश गोविंद। बहुत बहुत बधाई गोविंद जी, आपको। इनके अलावा विजय कुमार व्यास जी ने सही जवाब दिया है। चन्द्रकान्त दीक्षित जी सही जवाब तो न दे सके पर इस पहेली के लिए हमें बधाई दी है। आप तीनों का धन्यवाद!

और अब इस सेगमेण्ट के सम्मिलित स्कोर-कार्ड पर एक नज़र...





कौन बनेगा 'सिने पहेली' महाविजेता?


1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स। 

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जोड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेता के रूप में चुन लिया जाएगा। 

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। आठवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा-



4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

तो आज बस इतना ही, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

सोनू निगम ने सुर जोड़े 'सिंह साहेब' की ललकार में

न्नी देओल निर्देशक अनिल शर्मा के साथ जोड़ीबद्ध होकर लौटे हैं एक बार फिर, जिनके साथ वो ग़दर -एक प्रेम कथा, और अपने जैसी हिट संगीतमयी फ़िल्में दे चुके हैं. सिंह साहेब द ग्रेट में अनिल ने चुना है सोनू निगम को जो इस फिल्म के साथ बतौर संगीतकार फिल्मों में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं, पार्श्वगायन में अपने लिए एक खास मुकाम बना लेने के बाद सोनू ने हालाँकि अपनी एल्बम क्लासीकली माईल्ड में संगीत निर्देशन का जिम्मा उठाया था पर सिंह साहेब उनकी पहली फिल्म है इस नए जिम्मे के साथ.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोनू ने फिल्म जगत में कदम रखा था बतौर बाल कलाकार फिल्म बेताब से, जो कि सन्नी देओल की भी पहली फिल्म थी बतौर नायक. अब इसे नियति ही कहेंगें कि सोनू की इस नई कोशिश में भी उन्हें साथ मिला है सन्नी पाजी का. एल्बम में कुल ५ गीत हैं जिसमें एक गीत अतिथि संगीतकार आदेश श्रीवास्तव का रचा हुआ है, आईये एक नज़र डालें इस ताज़ा एल्बम में संकलित गीतों पर. 

शीर्षक गीत में सोनू ने अपने 'कम्फर्ट ज़ोन' से बाहर आकर पंजाबी लोक गीतों के गायकों के भांति ऊंची पिच पर लेकर गाया है और उनका ये प्रयास बहुत ही कामियाब और सुरीला रहा है. सोनू की बहन तीशा निगम ने अपना हिस्सा बहुत ही खूबी से निभाया है. दोनों की गायकों का विरोधाभासी अंदाज़, लोक सुरों से उपजी धुन और सटीक शब्द इस गीत को बेहद खास मुकाम दे देते हैं. 

पंजाबी फ्लेवर की बात हो और जिक्र न हो दारु का तो बात कुछ अधूरी लगती है. दारु बंद कल से एक ऐसा फ्रेस है जो हर शराबी अपने अंतिम जाम के साथ बोलता है और अलगी महफ़िल के सजने तक वो इस वादे को निभाता भी है....खैर वापस आते गईं गीत पर, जहाँ गीतकार ने इस फ्रेस को हुक बनाकर अच्छा खाका रचा है. एक बार फिर सोनू गायकी में ऊर्जा से भरपूर रहे हैं, वास्तव में पूरी एल्बम में उन्होंने खुद को नए पिचों पर आजमाया है, कहा जा सकता है संगीत निर्देशन में उनकी प्रेरणा अपने भीतर के गायक को विविध आयामों में देखना ही है.

पान और पनवाडी का जिक्र लाकर उत्तर पूर्व के दर्शकों /श्रोताओं को रिझाने के लिए बना है आईटम गीत पलंग तोड़ जिसे आदेश श्रीवास्तव ने स्वरबद्ध किया है और गाया भी है प्रमुख गायिका सुनिधि चौहान के साथ मिलकर. गीत इन दिनों चल रहे आईटम गीतों सरीखा ही है. बहुत दिनों तक इसका स्वाद टिका रहेगा, कहना मुश्किल है. 

जब मेहंदी लग लग जाए में सोनू और श्रेया की सदाबहार जोड़ी एक साथ आई है एक सुरीले शादी गीत के साथ. गीत में पंजाबी शादियों की महक भी है और पर्याप्त मस्ती का इंतजाम भी. कदम थिरकाते बीट्स और शब्द भी सार्थक हैं. निश्चित ही एल्बम के बेहतर गीतों में से एक. सोनू ने एल्बम में एक हीर भी गाई है, पारंपरिक हीर का सुन्दर प्रयोग श्रोता सुन चुके हैं फिल्म प्रतिज्ञा के सदाबहार उठ नींद से मिर्ज़ा गीत में. प्रस्तुत हीर को सुनकर उस यादगार गीत की यादें अवश्य ताज़ी हो जाती है पर यहाँ अच्छे शब्दों के अभाव में वो माहौल नहीं बन पाया है जिसकी अपेक्षा थी. 

सिंह साहेब द ग्रेट का संगीत सुरीला अवश्य है पर नयेपन का अभाव है. एक दो गीतों को छोड़ दिया जाए तो बाकी गीतों में श्रोताओं को बाँध के रखने का माद्दा नहीं है. फिर भी सोनू की संगीतकार और गायक की दोहरी भूमिका को सराहा जा सकता है. उम्मीद करेंगें कि वो आने वाले दिनों में कुछ और बेहतर गीतों का तोहफा अपने श्रोताओं को देंगें. 

एल्बम के बहतरीन गीत - सिंह साहेब द ग्रेट, जब मेहंदी लग लग जाए, दारू बंद कल से
हमारी रेटिंग - ३.४      

  

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

शोभना चौरे की लघुकथा करवा चौथ

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने हरिकृष्ण देवसरे की कहानी "बकरी दो गाँव खा गई" का पॉडकास्ट अर्चना चावजी की आवाज़ में सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं इंदौर निवासी कवयित्री व लेखिका शोभना चौरे की लघुकथा "करवा चौथ", माधवी चारुदत्ता की आवाज़ में।

शोभना चौरे की लघुकथा "करवा चौथ" का कुल प्रसारण समय 1 मिनट 56 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




वेदना तो हूँ पर संवेदना नहीं, सह तो हूँ पर अनुभूति नहीं, मौजूद तो हूँ पर एहसास नहीं, ज़िन्दगी तो हूँ पर जिंदादिल नहीं, मनुष्य तो हूँ पर मनुष्यता नहीं, विचार तो हूँ पर अभिव्यक्ति नहीं|

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

"चारो तरफ करवा चौथ की चकाचौंध मची है।"
(शोभना चौरे की लघुकथा "करवा चौथ" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
करवा चौथ MP3

#35th Story, Karva Chauth: Shobhana Chourey/Hindi Audio Book/2011/35. Voice: Madhavi Ganapule

रविवार, 10 नवंबर 2013

‘भयभंजना वन्दना सुन हमारी...’ : राग मियाँ की मल्हार में भक्तिरस


  
स्वरगोष्ठी – 143 में आज


रागों में भक्तिरस – 11


मन्ना डे को भावांजलि अर्पित है उन्हीं के गाये गीत से 


रेडियो प्लेबैक इण्डिया के साप्ताहिक स्तम्भ स्वरगोष्ठी के मंच पर जारी लघु श्रृंखला रागों में भक्तिरस की ग्यारहवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीतानुरागियों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, जारी श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपसे भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और उनमें निबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उस राग पर आधारित फिल्म संगीत के उदाहरण भी आपको सुनवा रहे हैं। श्रृंखला की आज की कड़ी में हम आपसे ऋतु प्रधान राग मियाँ की मल्हार में उपस्थित भक्तिरस पर चर्चा करेंगे। आपके समक्ष इस राग के भक्तिरस-पक्ष को स्पष्ट करने के लिए हम तीन भक्तिरस से पगी रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले हम 1956 में प्रदर्शित फिल्म बसन्त बहार का राग मियाँ की मल्हार पर आधारित एक वन्दना गीत सुर-गन्धर्व मन्ना डे की आवाज़ में प्रस्तुत कर उनकी स्मृतियों को भावांजली अर्पित करेंगे। आपको स्मरण ही होगा की बीते 24 अक्तूबर को बैंगलुरु में उनका निधन हो गया था। इसके बाद पण्डित विश्वमोहन भट्ट का मोहन वीणा पर बजाया राग मियाँ की मल्हार सुनेगे। अन्त में इसी राग के स्वरों में पिरोया एक मोहक भजन भी सुनेगे। 
  


फिल्म-संगीत-जगत में समय-समय पर कुछ ऐसे गीतों की रचना हुई है, जो आज हमारे लिए अनमोल धरोहर बन गए हैं। 1956 में प्रदर्शित फिल्म 'बसन्त बहार' में ऐसे ही अमर गीत रचे गए थे। यूँ तो इस फिल्म के सभी गीत अपने समय में हिट हुए थे, किन्तु फिल्म का एक गीत- 'केतकी गुलाब जूही चम्पक वन फूलें...' और दूसरा गीत- ‘भयभंजना वन्दना सुन हमारी...’ कई कारणों से फिल्म-संगीत-इतिहास के पृष्ठों में दर्ज़ हुआ। इन दोनों गीतों में पार्श्वगायक मन्ना डे की प्रतिभा को विस्तार मिला था। पहले गीत में पहली बार किसी वरिष्ठ शास्त्रीय गायक (पण्डित भीमसेन जोशी) और फिल्मी पार्श्वगायक (मन्ना डे) ने मिल कर एक ऐसा युगल गीत गाया, जो पूरी तरह राग बसन्त बहार के स्वरों में ढाला गया था। इसी प्रकार दूसरा गीत- ‘भयभंजना वन्दना सुन हमारी...’ मन्ना डे की एकल आवाज़ में राग मियाँ की मल्हार पर आधारित था। इस फिल्म से जुड़ा एक रेखांकन योग्य तथ्य यह भी है कि फिल्म के संगीतकार शंकर-जयकिशन राग आधारित मधुर गीतों के माध्यम से अपने उन आलोचकों को करारा जवाब देने में सफल हुए, जो उनके संगीत में शास्त्रीयता की कमी का आरोप लगाया करते थे।

1949 में बनी फिल्म 'बरसात' से अपनी हलकी-फुलकी और आसानी से गुनगुनाने वाली सरल धुनों के बल पर सफलता के झण्डे गाड़ने वाले शंकर-जयकिशन को जब 1956 की फिल्म 'बसन्त बहार' का प्रस्ताव मिला तो उन्होने इस शर्त के साथ इसे तुरन्त स्वीकार कर लिया कि फिल्म के राग आधारित गीतों के गायक मन्ना डे ही होंगे। मन्ना डे की प्रतिभा से यह संगीतकार जोड़ी, विशेष रूप से शंकर, बहुत प्रभावित थे। 'बूट पालिश' के बाद शंकर-जयकिशन के साथ मन्ना डे नें अनेक यादगार गाने गाये थे। इससे पूर्व शंकर-जयकिशन के संगीत पर मन्ना डे फिल्म 'सीमा' का सर्वप्रिय भक्तिगीत- "तू प्यार का सागर है, तेरी एक बूँद के प्यासे हम...." गाकर संगीत-प्रेमियों को प्रभावित कर चुके थे। ऐसे ही कुछ गीतों को गाकर मन्ना डे नें शंकर को इतना प्रभावित कर दिया कि आगे चल कर शंकर उनके सबसे बड़े शुभचिन्तक बन गए। फिल्म के नायक भारतभूषण के भाई शशिभूषण सभी गीत मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे। शंकर-जयकिशन ने फिल्म 'बसन्त बहार' में मन्ना डे के स्थान पर किसी और पार्श्वगायक को लेने से मना कर दिया। फिल्म के निर्देशक राजा नवाथे मुकेश की आवाज़ को पसन्द करते थे, परन्तु वो इस विवाद में तटस्थ बने रहे। निर्माता आर. चन्द्रा भी पशोपेश में थे। मन्ना डे को हटाने का दबाव जब अधिक हो गया तब शंकर-जयकिशन को फिल्म छोड़ देने की धमकी देनी पड़ी। अन्ततः मन्ना डे के नाम पर सहमति बनी। फिल्म 'बसन्त बहार' में शंकर-जयकिशन ने 9 गीत शामिल किये थे, जिनमें से दो गीत- 'बड़ी देर भई...' और 'दुनिया न भाए मोहे...' मोहम्मद रफी के एकल स्वर में गवा कर उन्होने शशिभूषण की बात भी रख ली। इसके अलावा उन्होने मन्ना डे से चार गीत गवाए। राग मियाँ की मल्हार पर आधारित एकल गीत- 'भयभंजना वन्दना सुन हमारी...’, राग पीलू पर आधारित- 'सुर ना सजे...’, लता मंगेशकर के साथ युगल गीत- 'नैन मिले चैन कहाँ...’ और राग बसन्त बहार के स्वरों में पिरोया- 'केतकी गुलाब जूही...’ जिसे मन्ना डे के साथ पण्डित भीमसेन जोशी ने गाया था। आज के अंक में हम आपको शैलेन्द्र का लिखा, शंकर-जयकिशन का झपताल में संगीतबद्ध किया, मन्ना डे का गाया, राग मियाँ की मल्हार पर आधारित भक्तिरस से सराबोर वही गीत सुनवाते हैं।


राग मियाँ की मल्हार : ‘भयभंजना वंदना सुन हमारी...’ : मन्ना डे : फिल्म – बसन्त बहार



पं. विश्वमोहन भट्ट
राग मियाँ की मल्हार, वर्षा ऋतु की चरम अवस्था के सौन्दर्य की अनुभूति कराने पूर्ण समर्थ है। यह राग वर्तमान में वर्षा ऋतु के रागों में सर्वाधिक प्रचलित और लोकप्रिय है। सुप्रसिद्ध इसराज और मयूर वीणा वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के अनुसार- राग मियाँ की मल्हार की सशक्त स्वरात्मक परमाणु शक्ति, बादलों के परमाणुओं को प्रभावित करने में समर्थ है वहीं दूसरी ओर कोमल निषाद के साथ मध्यम और पंचम स्वरों का योग विनय भाव की अभिव्यक्ति करने में सक्षम है। कोमल गान्धार के साथ मध्यम और ऋषभ की संगति और कान्हड़ा अंग से संचालित होने के कारण भक्तिरस की अनुपम सृष्टि होती है। राग मियाँ की मल्हार तानसेन के प्रिय रागों में से एक है। कुछ विद्वानों का मत है कि तानसेन ने कोमल गान्धार तथा शुद्ध और कोमल निषाद का प्रयोग कर इस राग का सृजन किया था। अकबर के दरबार में तानसेन को सम्मान देने के लिए उन्हें ‘मियाँ तानसेन’ नाम से सम्बोधित किया जाता था। इस राग से उनके जुड़ाव के कारण ही मल्हार के इस प्रकार को ‘मियाँ की मल्हार’ कहा जाने लगा। यह राग काफी थाट के अन्तर्गत माना जाता है। आरोह और अवरोह में दोनों निषाद का प्रयोग किया जाता है। राग मियाँ की मल्हार के स्वरों का ढाँचा कुछ इस प्रकार बनता है कि कोमल निषाद एक श्रुति ऊपर लगने लगता है। इसी प्रकार कोमल गान्धार, ऋषभ से लगभग ढाई श्रुति ऊपर की अनुभूति कराता है। इस राग में गान्धार स्वर का प्रयोग अत्यन्त सावधानी से करना पड़ता है।

प्रोफेसर शैलेन्द्र गोस्वामी
राग मियाँ की मल्हार को गाते-बजाते समय राग बहार से बचाना पड़ता है। परन्तु कोमल गान्धार का सही प्रयोग किया जाए तो इस दुविधा से मुक्त हुआ जा सकता है। इन दोनों रागों को एक के बाद दूसरे का गायन-वादन कठिन होता है, किन्तु उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ ने एक बार यह प्रयोग कर श्रोताओं को चमत्कृत कर दिया था। इस राग में गमक की तानें बहुत अच्छी लगती है। वर्षा ऋतु के प्राकृतिक सौन्दर्य को स्वरों के माध्यम से अभिव्यक्त करने के साथ ही भक्तिरस के सृजन के लिए भी यह राग सार्थक होता है। इस राग के दोनों रूपों की भावपूर्ण अनुभूति कराने के लिए हम आपको दो रचनाएँ सुनवाते है। पहले आप सुनेंगे विश्वविख्यात संगीतज्ञ पण्डित विश्वमोहन भट्ट द्वारा ‘मोहन वीणा’ पर बजाया राग ‘मियाँ की मल्हार’ में एक मोहक रचना। पाश्चात्य संगीत का "हवाइयन गिटार" वैदिककालीन वाद्य "विचित्र वीणा" का सरलीकृत रूप है। वर्तमान में "मोहन वीणा" के नाम से जिस वाद्ययंत्र को हम पहचानते हैं, वह पश्चिम के 'हवाइयन गिटार' या 'साइड गिटार' का भारतीय संगीत के अनुकूल परिष्कृत रूप है। "मोहन वीणा" के प्रवर्तक हैं, सुप्रसिद्ध संगीत-साधक पं. विश्वमोहन भट्ट, जिन्होंने अपने इस अनूठे वाद्य से समूचे विश्व को सम्मोहित किया है। श्री भट्ट के मोहन वीणा वादन के बाद राग मियाँ की मल्हार में पिरोया एक भजन भी आप सुनेगे। यह भजन प्रस्तुत कर रहे हैं, प्रोफेसर शैलेन्द्र गोस्वामी। इनके साथ तबला संगति पं. सुधीर पाण्डेय ने और हारमोनियम संगति महमूद धौलपुरी ने की है। आप राग मियाँ की मल्हार में भक्तिरस के तत्त्व का प्रत्यक्ष अनुभव कीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।


राग मियाँ की मल्हार : तंत्रवाद्य मोहन वीणा पर आलाप और तीनताल की गत : पं. विश्वमोहन भट्ट




राग मियाँ की मल्हार : भजन : ‘रीझत ग्वाल रिझावत श्याम...’ : डॉ. शैलेन्द्र गोस्वामी




आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ की 143वीं संगीत पहेली में हम आपको एक जुगलबन्दी रचना का अंश सुनवा रहे हैं। इसे सुन कर आपको निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 150वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – संगीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि इस रचना में किस राग की झलक है?

2 – यह रचना किस ताल में प्रस्तुत की गई है?

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 145वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ की 141वीं संगीत पहेली में हमने आपको युवा कलासाधक विकास भारद्वाज के सितारवादन का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग बागेश्री और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- तीनताल। इस अंक के दोनों प्रश्नो के सही उत्तर जौनपुर से डॉ. पी.के. त्रिपाठी और जबलपुर की क्षिति तिवारी ने दिया है। दोनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का


मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी है, लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’, जिसके अन्तर्गत हमने आज की कड़ी में आपसे राग मियाँ की मल्हार में भक्तिरस के तत्त्व विषयक चर्चा की। अगले अंक में हम आपको एक अत्यधिक प्रचलित राग में गूँथी रचनाएँ सुनवाएँगे जिनमें भक्तिरस की रचनाएँ प्रस्तुत की जाती हैं। इस श्रृंखला की आगामी कड़ियों के लिए आप अपनी पसन्द के भक्तिरस प्रधान रागों या रचनाओं की फरमाइश कर सकते हैं। हम आपके सुझावों और फरमाइशों का स्वागत करते हैं। अगले अंक में रविवार को प्रातः 9 बजे ‘स्वरगोष्ठी’ के इस मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की हमें प्रतीक्षा रहेगी।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 

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