बुधवार, 31 जुलाई 2013

राग गौड़ मल्‍हार के गीत

प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट

‘गरजत बरसत सावन आयो...’


राग गौड़ मल्हार पर आधारित फिल्मी गीत
                                               




आलेख : कृष्णमोहन मिश्र 

स्वर एवं प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन

रविवार, 28 जुलाई 2013

उस्ताद विलायत खाँ से सुनिए राग शंकरा


  
स्वरगोष्ठी – 130 में आज

भूले-बिसरे संगीतकार की कालजयी कृति – 10

राग शंकरा पर आधारित एक अनूठा गीत

‘बेमुरव्वत बेवफा बेगाना-ए-दिल आप हैं...’


इन दिनों आप ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘भूले-बिसरे संगीतकार की कालजयी कृति’ का रसास्वादन कर रहे हैं। इस लघु श्रृंखला की दसवीं और समापन कड़ी के साथ मैं कृष्णमोहन मिश्र आप सब संगीत-प्रेमियों की इस संगोष्ठी में उपस्थित हूँ और आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। इस श्रृंखला के अन्तर्गत अब तक हम आपको राग-आधारित कुछ ऐसे फिल्मी गीत सुनवा चुके हैं, जो छः दशक से भी पूर्व की अवधि के हैं। रागों के आधार के कारण ये आज भी सदाबहार गीत के रूप में हमारे बीच प्रतिष्ठित हैं। परन्तु इनके संगीतकार हमारी स्मृतियों में धूमिल हो गए हैं। इस श्रृंखला को प्रस्तुत करने का हमारा उद्देश्य यही है कि इन कालजयी, राग आधारित गीतों के माध्यम से हम उन भूले-बिसरे संगीतकारों को स्मरण करें। आज के अंक में हम आपको 1966 की फिल्म ‘सुशीला’ का राग शंकरा पर आधारित एक सदाबहार गीत सुनवाएँगे और इस गीत के संगीतकार सी. अर्जुन के बारे में आपको कुछ जानकारी देंगे। इसके साथ ही विश्वविख्यात सितार वादक उस्ताद विलायत खाँ का का बजाया राग शंकरा का एक आकर्षक गत भी सुनवाएँगे। 

सी. अर्जुन
र्ष 1966 में श्री विनायक चित्र द्वारा निर्मित और महेन्द्र प्राण द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सुशीला’ प्रदर्शित हुई थी। मधुर गीतों के कारण यह फिल्म अत्यन्त सफल हुई थी। फिल्म के संगीतकार थे सी. अर्जुन, जिनकी प्रतिभा का उचित मूल्यांकन फिल्म संगीत के क्षेत्र में नहीं हुआ। 1 सितम्बर, 1933 को सिन्ध (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्में सी. अर्जुन को संगीत अपने गायक पिता से विरासत में प्राप्त हुआ था। विभाजन के समय यह परिवार बड़ौदा आकर बस गया। सी. अर्जुन ने आरम्भ में कुछ समय तक रेलवे की नौकरी भी की, लेकिन संगीत के क्षेत्र में कुछ कर गुजरने के उद्देश्य से नौकरी छोड़ कर तत्कालीन बम्बई का रुख किया और यहाँ आकर संगीतकार बुलों सी. रानी के सहायक बन गए। उन दिनों गजलों के संगीत संयोजन में बुलों सी. रानी बड़े माहिर माने जाते थे। सी. अर्जुन ने गजल-संयोजन की कला उन्हीं से सीखी थी। स्वतंत्र संगीतकार के रूप में सी. अर्जुन की 1960 में प्रदर्शित प्रथम हिन्दी फिल्म ‘रोड नम्बर 303’ थी। इस फिल्म के गीत बेहद मोहक सिद्ध हुए। 1961 में प्रदर्शित फिल्म ‘मैं और मेरा भाई’ में सी. अर्जुन अपनी गजल-संयोजन की प्रतिभा को रेखांकित करने में सफल हुए।

मुबारक बेगम
इस फिल्म के गीतकार जाँनिसार अख्तर थे। गीतकार और संगीतकार की इस जोड़ी ने इसके बाद कई फिल्मों में आकर्षक और लोकप्रिय गज़लों से फिल्म संगीत को समृद्ध किया। फिल्म ‘मैं और मेरा भाई’ में जाँनिसार अख्तर की लिखी, आशा भोसले और मुकेश के स्वरों में गायी सदाबहार गजल- ‘मैं अभी गैर हूँ मुझको अभी अपना न कहो...’ ने सी. अर्जुन को अमर बना दिया। इस फिल्म के बाद उन्होने अपनी फिल्मों में स्तरीय गज़लों का सिलसिला जारी रखा। 1964 की फिल्म ‘पुनर्मिलन’ में- ‘पास बैठो तबीयत बहल जाएगी...’, 1965 की फिल्म ‘एक साल पहले’ में- ‘नज़र उठा कि ये रंगीं समाँ रहे न रहे...’ और 1966 में ‘चले हैं ससुराल’ जैसी कम बजट की फिल्म को भी उन्होने- ‘हमने तेरी वफ़ा का जफ़ा नाम रख दिया...’ जैसी लोकप्रिय गजल से सँवार कर अपनी प्रतिभा का रेखांकन किया। गज़लों के श्रेष्ठ संगीतकार के रूप में सी. अर्जुन की सबसे सफल और लोकप्रिय 1966 की ही फिल्म थी ‘सुशीला’। इस फिल्म में उन्हें एक बार फिर जाँनिसार अख्तर का साथ मिला। इस फिल्म के सभी गीतों को अपार ख्याति मिली। गायिका मुबारक बेगम की आवाज़ में फिल्म की एक गजल- ‘बेमुरव्वत बेवफा बेगाना-ए-दिल आप हैं...’ तो आज भी सदाबहार है। राग शंकरा पर आधारित यह गजल जाँनिसार अख्तर की शायरी और सी. अर्जुन के उत्कृष्ट संगीत के लिए सदा याद रखा जाएगा। लघु श्रृंखला ‘भूले-बिसरे संगीतकार की कालजयी कृति’ के आज के समापन अंक के लिए हमने राग शंकरा पर आधारित यही गीत चुना है। लीजिए, पहले आप यह गीत सुनिए।


राग शंकरा : फिल्म सुशीला : ‘बेमुरव्वत बेवफा बेगाना-ए-दिल आप हैं...’ : संगीत सी. अर्जुन 



उस्ताद विलायत खाँ
राग शंकरा भारतीय संगीत का एक गम्भीर प्रकृति का राग है। मयूर वीणा के सुविख्यात वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के अनुसार, यह राग मानव की अन्तर्व्यथा को आध्यात्म से जोड़ने वाले भावों की अभिव्यक्ति के लिए समर्थ होता है। औड़व-षाड़व जाति के राग शंकरा के आरोह में ऋषभ और मध्यम तथा अवरोह में मध्यम स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता। शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग होते हैं। उत्तरांग प्रधान इस राग का वादी स्वर पंचम और संवादी तार सप्तक का षडज स्वर होता है। रात्रि के दूसरे प्रहर में यह राग गाने-बजाने की परम्परा है। इस राग के स्वरूप के बारे में विद्वानो में कुछ मत-भिन्नता भी है। कुछ विद्वान इस राग को औड़व-औड़व जाति का मानते हैं, अर्थात आरोह और अवरोह, दोनों में ऋषभ और मध्यम स्वर का प्रयोग नहीं करते। एक अन्य मतानुसार केवल मध्यम स्वर ही वर्जित होता है। वर्तमान में राग शंकरा का औड़व-षाड़व जाति ही अधिक प्रचलित है। आइए, अब हम आपको तंत्रवाद्य सितार पर एक मोहक गत सुनवा रहे हैं। विश्वविख्यात सितार-वादक उस्ताद विलायत खाँ से सभी संगीत-प्रेमी परिचित हैं। राग शंकरा की तीनताल में निबद्ध यह रचना उन्हीं की कृति है। आप इस आकर्षक सितार-वादन की रसानुभूति कीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।


राग शंकरा : सितार पर तीनताल की गत : वादक उस्ताद विलायत खाँ 




आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 130वें अंक की पहेली में आज हम आपको सुषिर वाद्य पर एक रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। इस अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – वाद्य संगीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह भारतीय संगीत की कौन सी विधा अथवा शैली है?

2 – संगीत के इस अंश में किन तालों का प्रयोग किया गया है?

आप अपने उत्तर केवल radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 130वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ के 128वें अंक की पहेली में हमने आपको खयाल अंग में आलाप का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग मियाँ की मल्हार और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- पण्डित राजन और साजन मिश्र। दोनों प्रश्नो के सही उत्तर लखनऊ के प्रकाश गोविन्द, जौनपुर के डॉ. पी.के. त्रिपाठी और जबलपुर की क्षिति तिवारी ने दिया है। तीनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘भूले-बिसरे संगीतकार की कालजयी कृति’ का यह समापन अंक था। आगामी अंक में हम आपसे भारतीय संगीत की एक ऐसी शैली पर चर्चा करेंगे जो उपशास्त्रीय संगीत और लोक संगीत के क्षेत्र में समान रूप से लोकप्रिय है। अगले अंक में इस नई लघु श्रृंखला की अगली कड़ी के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की प्रतीक्षा करेंगे।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 

शनिवार, 27 जुलाई 2013

सिने पहेली – 74- सवाल हमारे जवाब आपके!

सिने पहेली – 74


सवाल हमारे जवाब आपके!
  
सिने पहेली के 73 वें अंक में लगता है सवाल नम्बर 5 ने काफी लोगों को दुविधा में डाला और आवाज़ पहचानने के सवाल को तर्क संगत नहीं ठहराया. 

दोस्तों आप सबसे केवल एक बात कहना चाहता हूँ कि अगर पहेली प्रतियोगी की सुविधा अनुसार बनाई जाए तो फिर कैसी पहेली? 

ये तो कुछ उस तरह हो जाएगा कि स्कूल के विद्यार्थी कहें कि सवाल हमारी जानकारी के ही हिसाब से बनाये जाएँ. 

कृपया ध्यान दें कि सवाल हम लोग भी अपने आस पास से ही लेते हैं और सबको एक सप्ताह का समय दिया जाता है कि वो इन्टरनेट और बाकी श्रोतों से जवाब ढूंढें. 

अब पिछली पहेली को ही देख लीजिये प्रकाश गोविन्द जी और क्षिति तिवारी जी ने आवाज़ को पहचान लिया. 
फिर भी आप सबकी बातों को ध्यान में रखकर आप लोगों को कुछ हिंट देने की जरूर कोशिश करेंगे.

इस बार कोइ भी पूर्ण अंक प्राप्त नहीं कर पाया. प्रकाश जी जल्दीबाजी में गाने का नाम बतलाना ही भूल गए. बाकी सवाल नम्बर 2 के बाकी उत्तर उन्होंने सही दिए.

आज की पहेली के पाँच सवाल नीचे हैं , ध्यान से उत्तर दीजिये और पूरे अंक प्राप्त करने का मौका मत छोड़िये.

आज की पहेली के लिए आप सबको शुभकामनाएँ.

इस अंक से प्रतियोगिता में जुड़ने वाले नये खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए हम उन्हें यह भी बताना चाहेंगे कि अभी भी कुछ देर नहीं हुई है। आज से इस प्रतियोगिता में जुड़ कर भी आप महाविजेता बन सकते हैं। यही इस प्रतियोगिता की विशेषता है। इस प्रतियोगिता के नियमों का उल्लेख नीचे किया गया है, ध्यान दीजियेगा। 

तो  आइए, आरम्भ करते हैं, आज की पहेली का सिलसिला।


आज की पहेली

सवाल-1: गाना कौन सा? (4 अंक)


इस धुन को सुन कर बतलाइये कि यह किस गाने की धुन है (2 अंक). साथ ही आपको बतलाना है गीतकार का (1 अंक) और निर्देशक का नाम (1 अंक).


 

सवाल-2: पहचानिए तो सही (4 अंक)


नीचे दिए गए कलाकारों को तो आप आसानी से पहचान गए होंगे. सवाल बहुत सरल है. आपको बतलाना है की यह दृश्य किस फिल्म का है (2 अंक) और इसके निर्देशक का नाम (2 अंक)



सवाल-3: बूझो तो जाने (5 अंक)


हम आपको सुनवा रहे हैं एक गाने की सिर्फ एक लाइन. आपको गाने को पहचानना है (1 अंक), गायिका की आवाज पहचाननी है (2 अंक), गीतकार का नाम (1 अंक) और साथ ही इस गाने में अभिनय करने वाली अभिनेत्री को (1 अंक) बताना है.



 

सवाल - 4: मैं कौन हूँ (4 अंक)


मैं एस. डी. बर्मन का पहला संगीत गुरु था.
मैं जन्मान्ध नहीं था फिर भी मेरी अपंगता मेरी राह में आड़े नहीं आयी. मैंने कई हिट गाने गाये , संगीत दिया और 25 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय करा.
मेरी विरासत को मेरे ही परिवार के एक अन्य सदस्य ने जारी रखा और हिन्दी संगीत में बहुत बड़ा योगदान दिया और अपना नाम कमाया. उस सदस्य के अनुसार मैं ही उनका प्रथम संगीत गुरु था. 

1. मेरा पूरा नाम बतलाइए (2 अंक) 
2. बतौर अभिनेता मेरी पहली फिल्म का नाम (1 अंक)
3. मैं ऊपर अपने किस पारिवारिक सदस्य के बारे में बात कर रहा हूँ. उनका असली नाम. (1 अंक) 

 

सवाल - 5: गोल्डन वॉयस (2 अंक)


इस आवाज़ को सुनकर आपको बतलाना है कि ये आवाज़ किसकी है. इस सवाल के पूरे 2 अंक हैं.

हिन्ट: ये अपने दौर के एक मशहूर खलनायक रह चुके हैं.



जवाब भेजने का तरीका


उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 74" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 1 अगस्त, शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।


पिछली पहेली का हल
 
प्रश्न 1: आगरे से घागरो मंगा दे रसिया, रविन्द्र जैन , अशोक रॉय
प्रश्न 2: महाभारत , बाबू भाई मिस्त्री
प्रश्न 3: कुछ और जमाना कहता है, गायिका :मीना कपूर , फिल्म का नाम : छोटी छोटी बातें
प्रश्न 4:हरीन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय, अशोक कुमार (रेल गाड़ी), फिल्म साहिब बीबी और गुलाम, निर्माता: गुरुदत्त, निर्देशक : अबरार अल्वी
प्रश्न 5: प्रदीप कुमार

पिछली पहेली के विजेता

सिने पहेली – 73 के विजेताओं के नाम और उनके प्राप्तांक निम्नवत हैं।


1- प्रकाश गोविन्द, लखनऊ – 18 अंक 

2- पंकज मुकेश, बैंगलुरु – 17 अंक

3- 
क्षिती तिवारी – 13 अंक

4- चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ  – 13 अंक

5- विजय कुमार व्यास, बीकानेर– 13 अंक

6 - इन्दू  पुरी - 10 अंक 


आठवें  सेगमेण्ट का  स्कोरकार्ड


नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।


कैसे बना जाए ‘सिने पहेली महाविजेता'

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। सातवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...

4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम।


'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी cine.paheli@yahoo.com पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार।
  


प्रस्तुति : अमित तिवारी 


शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

चिन्मयी और SPB की आवाजें लौटी है आपका दिल चुराने 'चेन्नई एक्सप्रेस' में सवार होकर

दोस्तों ताज़ा प्रकाशित संगीत एल्बमों में क्या नया है और क्या है घिसा पिटा, आपके लिए इसी जानकारी को लेकर हम हर सप्ताह उपस्थित होते हैं आपके प्रिय स्तंभ 'ताज़ा सुर ताल' में. आधा साल बीत चुका है और  अब तक काफी अच्छा रहा है ये साल संगीत के लिहाज से. इसी श्रृंखला को आगे बढते हैं आज चेन्नई एक्सप्रेस  की संगीत चर्चा के साथ. ये भी एक अजीब इत्तेफाक ही है इस साल की शुरुआत हमने राजधानी एक्सप्रेस  के संगीत से की थी, और साल के इस द्रितीय हिस्से की शुरुआत भी एक ट्रेन के नाम पर बनी फिल्म के संगीत के साथ करने जा रहे हैं. चेन्नई एक्सप्रेस  एक बहुप्रतीक्षित फिल्म है जिसमें इंडस्ट्री में नए दौर के सबसे सफल निर्देशक रोहित शेट्टी पहली बार टीम अप कर रहे हैं बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के साथ. रोहित शेट्टी एक ज़माने में बॉलीवुड के सबसे क्रूर और खतरनाक दिखने वाले खलनायक 'शेट्टी' के सुपत्र हैं. पर उन्होंने अभिनय के स्थान पर निर्देशन की राह चुनी, और एक के बाद एक जबरदस्त हिट फिल्मों की लड़ी सी लगा दी. चेन्नई एक्सप्रेस  कई मामलों में उनकी अब तक की फिल्मों से अलग नज़र आती है. इस फिल्म के लिए उन्होंने अपने पसंदीदा संगीतकार 'प्रीतम' के स्थान पर शाहरुख के चेहते विशाल शेखर पर दाव खेला है. चलिए देखते हैं उनका ये फैसला कितना सार्थक सिद्ध हुआ है....

पहला  गीत वन टू थ्री फॉर  पूरी तरह ऊर्जा से भरा एक डांस नंबर है जिसकी शुरुआत तमिल शब्दों से होती है जिसके बाद एक संवाद आता है कि तमिल तिरीइल्ला (तमिल नहीं आती) तो हंसिका की आवाज़ में गीत का हिंदी रूपांतरण शुरू होता है. विशाल की आवाज़ हर बार की तरह ऊर्जा से भरपूर रही है. गीत के रिदम में सामान्य तमिल गीतों की ही तरह एक अनूठी मस्ती है. अमिताभ के शब्द गीत को जरूरी पंच देते हैं. नाचने के लिए बढ़िया है गीत. 

अगले गीत में एक जादू भरी आवाज़ सुनाई दी है एक लंबे अरसे बाद. रोजा  में उनके गाए दिल है छोटा सा  को भला कौन भूल सकता है. जी हाँ सही पहचाना आपने. चिन्मयी श्रीपदा की आवाज़ में आज भी वही मासूमियत सुनने को मिलती है जो लगभग दो दशक पहले थी. हालाँकि अभी हाल ही में उनकी आवाज़ में राँझना  का एक युगल गीत भी आया था, पर इस एल्बम के गीत तितली  ने हमें उसी पुरानी चिन्मयी मिलाया है जिसके लिए विशाल शेखर का आभार. बहुत ही सुरीली और मधुर है धुन जिसपर अमिताभ के शब्द भी कमाल के रहे हैं. अंतरों की प्रमुख आवाज़ गोपी सुन्दर की है पर गीत का प्रमुख आकर्षण चिन्मयी ही है. एल्बम का सबसे बढ़िया गीत बना है तितली.

क्या आप जानते हैं कि गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य इंडस्ट्री में गायक बनने आये थे, पर संयोगवश गीतकार बन बैठे. ये भी संयोग ही है कि जब वो गायक बनने के लिए हाथ पैर मार रहे थे तो उन्होंने अपनी आवाज़ विशाल शेखर और अन्य बहुत से बड़े संगीतकारों तक पहुंचाई थी, पर कामियाबी हाथ नहीं लगी. पर अब जब अमित त्रिवेदी ने उनके इस हुनर को भी बखूबी श्रोताओं के सामने रखा, पहले अय्या  में और अभी हाल ही में लूटेरा  के दो गीत उनसे गवाकर, तो अन्य संगीतकार भी अब उनकी आवाज़ पर भरोसा करने लगे हैं. इस एल्बम का अगला गीत भी उन्हीं का गाया हुआ है तेरा रास्ता छोडूँ न  में उनके साथ अनुषा मणि की भी आवाज़ है. गीत कुछ दर्द भरा है मगर कहने का अंदाज़ यहाँ भी चुलबुला ही है. धीमें धीमे असर करने वाला गीत है ये. 

मस्ती  का अंदाज़ लौटता है अगले गीत कश्मीर मैं तू कन्या कुमारी  में. आज के सबसे हॉट गायक अरिजीत सिंह यहाँ जोड़ी जमाए हैं मस्ती का पर्याय कहे जाने वाली आवाज़ की मालकिन सुनिधि के साथ. वास्तव में ये गीत फिल्म के थीम को बखूबी दर्शाता है जहाँ दो मुक्तलिफ़ संस्कृति के लोग कैसे एक दूजे से अलग होकर भी एक सांचे में ढल जाते हैं. शाब्दिक तुकबंदी कहीं कहीं कुछ खटकती है पर धुन की सरलता गीत को लोकप्रियता देगा. 

रेडी स्टेडी पो  शायद फिल्म के ओपनिंग या एंड शीर्षकों में दर्शकों के मनोरजन के लिए है. ऐसे गीतों से कुछ ज्यादा उम्मीद यूँ भी नहीं रहती. गीत का रिदम और गायकों की जोरदार गायिकी गीत को डिस्को पार्टियों में लोकप्रिय बना सकती है. रैप का तडका अच्छा है (लकड़ी ?? का राज क्या है जानने के लिए फिल्म के आने का इन्तेज़ार करना पड़ेगा).

कुछ देर पहले हमने चिन्मयी का जिक्र किया था. लीजिए एल्बम में आपके लिए है एक और बीते दौर की आवाज़. किसी ज़माने में ये सलमान खान की आवाज़ हुआ करते थे. तमिल फिल्म इंडस्ट्री के इस सबसे सफल गायक को आप निश्चित ही पहचान गए होंगें. जी हाँ आजा शाम होने आई  के गायक एस पी बाल्सुब्रमनियम. वाह, आज भी SPB को सुनना उतना ही जबरदस्त लगता है. बीच बीच में उनके संवाद बोलने का अंदाज़ तो कमाल ही है. इस गीत की धुन भी खासी कैची है, निश्चित ही ये गीत एक चार्टबस्टर साबित होगा. और हाँ एक बार फिर विशाल शेखर का खास आभार SPB को फिर से माइक के पीछे लाने के लिए. 

चेन्नई एक्सप्रेस  के गीत फिल्म के अनुरूप हैं, यानी धमाल और मस्ती का भरपूर आयोजन है इन ६ गीतों में. फिर जब गीत फिल्माए जा रहे हों शाहरुख और दीपिका जैसे सितारों पर तो इनकी लोकप्रियता लगभग तय ही मानिए. पर व्यक्तिगत रूप से मैं विशाल शेखर का जबरदस्त फैन हूँ, तो मुझे उनसे कुछ अधिक ही उम्मीद रहती है. एल्बम अच्छी है पर एक बार फिल्म का नशा उतर जाने के बाद इन गीतों को याद रखा जायेगा ऐसी उम्मीद कम ही है, हाँ तितली  को आप एक अपवाद मानिये.

एल्बम  के सबसे बहतरीन गीत - तितली, चेन्नई एक्सप्रेस, .कश्मीर मैं तू कन्याकुमारी, और वन टू थ्री फॉर.
एल्बम  को हमारी रेटिंग - ३.९  

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी  
 

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