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चित्रकथा - 50: 2017 के सितंबर से दिसंबर तक के प्रदर्शित फ़िल्मों का संगीत

अंक - 50 2017 के सितंबर से दिसंबर तक के प्रदर्शित फ़िल्मों का संगीत "दिल दियां गल्लां..."  ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। 2017 में अब बस एक सप्ताह शेष बचा है। देखते देखते न जाने कितनी जल्दी बीत जाते हैं ये साल, और साल के अन्त में जब हम पीछे मुड़ कर देखते हैं तो न जाने कितनी यादें याद आ जाती हैं। फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत की अगर बात करें तो हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बहुत सी फ़िल्में बनी और इन फ़िल्मों के लिए बहुत सारे गाने भी बने। वर्ष के प्रथम आठ महीनों के फ़िल्म-संगीत की समीक्षा ’चित्रकथा’ में हम कर चुके हैं और आपने भी ज़रूर पढ़े होंगे। अब आज इस वर्ष के इस अन्तिम ’चित्रकथा’ में आइए आज जल्दी से नज़र दौड़ा लें सितंबर से लेकर दिसंबर तक के प्रदर्शित होने वाले महत्वपूर्ण फ़िल्मों के गीत-संगीत पर। ’चित्रकथा’ का यह स्वर्ण-जयन्ती अंक आज के दौर के प्रतिभाशाली युवा संगीत कलाकारों के नाम!  सि तंबर के पहले सप्ताह, या यूं कहें कि पहली ही तारीख़ को दो महत्वपूर्ण फ़िल्में रिलीज़ हुईं - ’बा

प्रेमचंद की कहानी "शूद्रा"

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा की कहानी यारी है ईमान उन्हीं के स्वर में सुनी थी। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की एक भावमय कथा शूद्रा जिसे स्वर दिया है समीर गोस्वामी ने। प्रवासी विमर्श से बहुत पहले लिखी गयी इस कथा में गोरे व्यापारियों द्वारा बहला फुसलाकर मॉरिशस ले जाये गये गिरमिटिया श्रमिकों का एक हृदयस्पर्शी चित्रण है। एक शताब्दी से हिन्दी (एवं उर्दू) साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का नाम एक सूर्य की तरह चमक रहा है। विशेषकर, ज़मीन से जुड़े एक कथाकार के रूप में उनकी अलग ही पहचान है। उनके पात्रों और कथाओं का क्षेत्र काफी विस्तृत है फिर भी उनकी अनेक कथाएँ भारत के ग्रामीण मानस का चित्रण करती हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे उर्दू में नवाब राय और हिन्दी में प्रेमचंद के नाम से लिखते रहे। आम आदमी की बेबसी हो या हृदयहीनों की अय्याशी, बचपन का आनंद हो या बुढ़ापे की जरावस्था, उनकी कहानियों में सभी अवस्थाएँ मिलेंगी और सभी भाव भी। उनकी कहानियों पर फिल्म

फिल्मी चक्र समीर गोस्वामी के साथ || एपिसोड 19 || राजेंद्र कृष्ण

Filmy Chakra With Sameer Goswami  Episode 19 Rajendra Krishan फ़िल्मी चक्र कार्यक्रम में आप सुनते हैं मशहूर फिल्म और संगीत से जुडी शख्सियतों के जीवन और फ़िल्मी सफ़र से जुडी दिलचस्प कहानियां समीर गोस्वामी के साथ, लीजिये आज इस कार्यक्रम के 19 वें एपिसोड में सुनिए कहानी राजेंद्र कृष्ण की...प्ले पर क्लिक करें और सुनें.... फिल्मी चक्र में सुनिए इन महान कलाकारों के सफ़र की कहानियां भी - किशोर कुमार शैलेन्द्र  संजीव कुमार  आनंद बक्षी सलिल चौधरी  नूतन  हृषिकेश मुखर्जी  मजरूह सुल्तानपुरी साधना  एस डी बर्मन राजेंद्र कुमार  शकील बदायुनी  जयकिशन गीता दत्त  चित्रगुप्त  आर डी बर्मन  मन्ना डे रविन्द्र जैन 

ठुमरी खमाज : SWARGOSHTHI – 348 : THUMARI KHAMAJ : पूरब अंग ठुमरी का रंग

स्वरगोष्ठी – 348 में आज फिल्मी गीतों में ठुमरी के तत्व – 5 : पूरब अंग ठुमरी का रंग लोकरस से सराबोर ठुमरी - "नज़र लागी राजा तोरे बंगले पर..." आशा भोसले ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला “फिल्मी गीतों में ठुमरी के तत्व” की इस पाँचवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र आप सभी संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। पिछली श्रृंखला में हमने आपके लिए फिल्मों में पारम्परिक ठुमरी के साथ-साथ उसके फिल्मी प्रयोग को भी रेखांकित किया था। इस श्रृंखला में भी हम केवल फिल्मी ठुमरियों की चर्चा कर रहे हैं, किन्तु ये ठुमरियाँ पारम्परिक हों, यह आवश्यक नहीं हैं। इन ठुमरी गीतों को फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकारों ने लिखा है और संगीतकारों ने इन्हें विभिन्न रागों में बाँध कर ठुमरी गायकी के तत्वों से अभिसिंचित किया है। हमारी इस श्रृंखला “फिल्मी गीतों में ठुमरी के तत्व” के शीर्षक से ही यह अनुमान हो गया होगा कि इस श्रृंखला का विषय फिल्मों में शामिल किये गए ऐसे गीत हैं जिनमे राग, भाव और रस की दृष्टि से उपशास्त्रीय गाय

चित्रकथा - 49: फ़िल्मी गीतों में मुहावरों का प्रयोग

अंक - 49 फ़िल्मी गीतों में मुहावरों का प्रयोग "ये मुँह और मसूर की दाल..."  भाषा को सुन्दर बनाने के लिए, उसे अलंकृत करने के लिए कई उपाय हैं। विभिन्न अलंकारों, उपमाओं, कहावतों और मुहावरों से भाषा, काव्य और साहित्य की सुन्दरता बढ़ती है। इनसे हमारे फ़िल्मी गीत भी बच नहीं सके। ’चित्रकथा’ के पुराने एक अंक में हमने गुलज़ार के लिखे गीतों में विरोधाभास अलंकार की चर्चा की थी। आज हम लेकर आए हैं उन फ़िल्मी गीतों की बातें जिनमें हिन्दी के मुहावरों का प्रयोग हुआ है। हम यह दावा नहीं करते कि हमने सभी मुहावरों वाले गीतों को खोज निकाला है, पर हाँ, कोशिश ज़रूर की है ज़्यादा से ज़्यादा मुहावरों को चुनने की जिन्हें फ़िल्मी गीतों में जगह मिली है। और हमारे इस लेख को समृद्ध करने में सराहनीय योगदान मिला है श्री प्रकाश गोविन्द के ब्लॉग से, जिसमें इस तरह के मुहावरे वाले गीतों की एक फ़ेहरिस्त उन्होंने तैयार की है श्रीमती अल्पना वर्मा और श्रीमती इन्दु पुरी गोस्वामी के सहयोग से। तो प्रस्तुत है आज के ’चित्रकथा’ में लेख - ’फ़िल्मी गीतों में मुहावरों का प्रयोग’।

फिल्मी चक्र समीर गोस्वामी के साथ || एपिसोड 18 || रविन्द्र जैन

Filmy Chakra With Sameer Goswami  Episode 18 Ravindra Jain फ़िल्मी चक्र कार्यक्रम में आप सुनते हैं मशहूर फिल्म और संगीत से जुडी शख्सियतों के जीवन और फ़िल्मी सफ़र से जुडी दिलचस्प कहानियां समीर गोस्वामी के साथ, लीजिये आज इस कार्यक्रम के 18 वें एपिसोड में सुनिए कहानी रविन्द्र जैन की...प्ले पर क्लिक करें और सुनें.... फिल्मी चक्र में सुनिए इन महान कलाकारों के सफ़र की कहानियां भी - किशोर कुमार शैलेन्द्र  संजीव कुमार  आनंद बक्षी सलिल चौधरी  नूतन  हृषिकेश मुखर्जी  मजरूह सुल्तानपुरी साधना  एस डी बर्मन राजेंद्र कुमार  शकील बदायुनी  जयकिशन गीता दत्त  चित्रगुप्त  आर डी बर्मन  मन्ना डे  

ठुमरी भैरवी : SWARGOSHTHI – 347 : THUMARI BHAIRAVI : चुनरी रंग डारी श्याम...

स्वरगोष्ठी – 347 में आज फिल्मी गीतों में ठुमरी के तत्व – 4 : ठुमरी भैरवी “बाट चलत नई चुनरी रंग डारी श्याम...” – पछाही ठुमरी का एक उत्कृष्ट उदाहरण गीता दत्त  ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला “फिल्मी गीतों में ठुमरी के तत्व” की इस चौथी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र आप सभी संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। पिछली श्रृंखला में हमने आपके लिए फिल्मों में पारम्परिक ठुमरी के साथ-साथ उसके फिल्मी प्रयोग को भी रेखांकित किया था। इस श्रृंखला में भी हम केवल फिल्मी ठुमरियों की चर्चा कर रहे हैं, किन्तु ये ठुमरियाँ पारम्परिक हों, यह आवश्यक नहीं हैं। इन ठुमरी गीतों को फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकारों ने लिखा है और संगीतकारों ने इन्हें विभिन्न रागों में बाँध कर ठुमरी गायकी के तत्वों से अभिसिंचित किया है। हमारी इस श्रृंखला “फिल्मी गीतों में ठुमरी के तत्व” के शीर्षक से ही यह अनुमान हो गया होगा कि इस श्रृंखला का विषय फिल्मों में शामिल किये गए ऐसे गीत हैं जिनमे राग, भाव और रस की दृष्टि से उपशास्त्रीय गायन शैली