Saturday, January 4, 2014

अभिनेता फ़ारूख़ शेख़ की पुण्य स्मृति को समर्पित है आज की 'सिने पहेली'

सिने पहेली –95



'सिने पहेली' के सभी चाहनेवालों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार! और साथ ही नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें! दोस्तों, पिछले दिनों छुट्टियों का मौसम रहा। साल का अन्तिम सप्ताह पर्यटन का सप्ताह होता है, और आप भी ज़रूर कहीं न कहीं घूम आये होंगे। लेकिन साल के उस अन्तिम सप्ताह में अभिनेता फ़ारूख़ शेख़ के देहान्त का समाचार सुन कर दिल ग़मगीन हो गया। फ़ारूख़ शेख़ एक लाजवाब अभिनेता थे, उनका अपना ही एक अन्दाज़ था, जो सबसे अलग, सबसे जुदा था। अभिनय में इतनी सहजता थी कि उनके द्वारा निभाया हुआ कर किरदार बिल्कुल सच्चा लगता था। शारीरिक गठन, चेहरा और अभिनय, कुल मिला कर उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके द्वारा निभाया किरदार हमारे परिवार का ही कोई सदस्य जैसा जान पड़ता था। और शायद यही वजह है कि फ़ारूख़ साहब हम सब के चहेते रहे। लगता ही नहीं कि वो आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं। आइए इस बेमिसाल फ़नकार की पुण्य स्मृति को समर्पित करते हैं आज की यह 'सिने पहेली'। 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की तरफ़ से फ़ारूख़ शेख़ को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि।


आज की पहेली : फ़ारूख़ शेख़ विशेष




फ़ारूख़ शेख़ को समर्पित आज की पहेली में हम आप से पूछ रहे हैं दो सवाल। नीचे फ़ारूख़ शेख़ अभिनीत दो फ़िल्मों की कहानियाँ दी गई हैं। इन कहानियों को पढ़ कर आपको इन फ़िल्मों को पहचानना होगा। 80 के दशक में दूरदर्शन पर आप ने इन फ़िल्मों को ज़रूर देखा होगा, इसलिए आज की यह पहेली ज़्यादा मुश्किल नहीं होनी चाहिये आपके लिए। है न? तो चलिए, पढ़िये इन कहानियों को झट से पहचान लीजिये इनकी फ़िल्मों को। (5 + 5 = 10 अंक)


1. ओमी और जय, दो युवक, लड़कियों को प्रभावित करने की प्रवृत्ति रखते हैं। जब उनके पड़ोस में एक नई लड़की नेहा आती है, तो उसे भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं पर बुरी तरह से असफल होते हैं। लेकिन ओमी और जय के साथ ही रूम शेअर करने वाले तीसरे युवक हैं सिद्धार्थ, जो काफ़ी शर्मीले स्वभाव का है और किताबों में डूबा रहता है। सिद्धार्थ और नेहा एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। ओमी और जय से यह सहन नहीं होता, और दोनों मिल कर सिद्धार्थ और नेहा को अलग करने की हास्यास्पद तरीके इख़्तियार करते हैं। बड़ी मज़ेदार फ़िल्म रही थी यह।


2. राजाराम पी. जोशी एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुख़ रखने वाला क्लर्क है जो बम्बई के एक चाल में रहते हैं। वो अपने पड़ोसी संध्या से मन ही मन प्यार करते हैं, पर अपने दिल की बात उससे कह नहीं पाते। राजाराम के बातूनी दोस्त वासुदेव उसके यहाँ रहने आते हैं। वासुदेव और संध्या को एक दूसरे से प्यार हो जाता है, और राजाराम के परिवार वाले दोनों की शादी भी तय कर देते हैं। राजाराम अब भी कुछ नहीं कह पाते। लेकिन वासुदेव और संध्या के मंगनी के दिन वासुदेव गायब हो जाते हैं और मंगनी रद्द हो जाती है। संध्या टूट जाती है। राजाराम संध्या से इस क़दर प्यार करता है कि वो उससे अब भी शादी करने को तैयार हो जाता है और अपने दिल की बात उसे कह देता है। पर संध्या उसे बताती है कि वो वासुदेव के बच्चे की माँ बनने वाली है। क्या राजाराम अब भी संध्या को अपनाते हैं, या फिर क्या वासुदेव वापस आता है, यही है इस फ़िल्म की कहानी।



अपने जवाब आप हमें cine.paheli@yahoo.com पर 9 जनवरी शाम 5 बजे तक ज़रूर भेज दीजिये।


पिछली पहेली का हल


1. "जॉन जॉनी जनार्दन..." (नसीब) -- चित्र में दिखाये गये अभिनेता इस गीत में नज़र आते हैं।

2. "गुणी जनो, भक्त जनो..." (आँसू और मुस्कान) -- चित्र में दिखाये गये अभिनेताओं के नाम इस गीत में आते हैं।

3. a) "मैं लगती हूँ श्रीदेवी लगती हूँ" (नाकाबन्दी) -- चित्र में दिखाये गये अभिनेत्रियों के नाम इस गीत में आते हैं।

3. b) "कभी तू छलिया लगता है" (पत्थर के फूल) -- चित्र में दिखाये गये अभिनेत्रियों द्वारा अभिनीत फ़िल्मों के नाम इस गीत में आते हैं।

4. "सुन सुन सुन मेरी श्रीदेवी" (हम फ़रिश्ते नहीं) -- चित्र में दिखाये गये अभिनेत्रियों के नाम इस गीत में आते हैं।

5. "देखो देखो है शाम बड़ी दीवानी" (ओम शान्ति ओम) -- चित्र में दिखाये गये अभिनेता इस गीत में नज़र आते हैं। 




पिछली पहेली के विजेता


इस बार केवल एक खिलाड़ी ने 100% सही जवाब भेजा है और आप हैं बीकानेर के श्री विजय कुमार व्यास। 'सरताज प्रतियोगी' बनने पर आपको बहुत बहुत बधाई। आपके अलावा प्रकाश गोविन्द और पंकज मुकेश ने 80% सही जवाब भेजे। चन्द्रकान्त जी ने हमें सूचित किया कि उनके लिए यह पहेली कठिन रही और इसका हल वो न कर सके। कोई बात नहीं चन्द्रकान्त जी, आज की पहेली को सुलझानी की कोशिश कीजिये ज़रा!
इस सेगमेण्ट का सम्मिलित स्कोर कार्ड कुछ इस तरह का बना...






और अब महाविजेता स्कोर-कार्ड पर भी एक नज़र डाल लेते हैं।





इस सेगमेण्ट की समाप्ति पर जिन पाँच प्रतियोगियों के 'महाविजेता स्कोर कार्ड' पर सबसे ज़्यादा अंक होंगे, वो ही पाँच खिलाड़ी केवल खेलेंगे 'सिने पहेली' का महामुकाबला और इसी महामुकाबले से निर्धारित होगा 'सिने पहेली महाविजेता'। 


एक ज़रूरी सूचना:


'महाविजेता स्कोर कार्ड' में नाम दर्ज होने वाले खिलाड़ियों में से कौछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो इस खेल को छोड़ चुके हैं, जैसे कि गौतम केवलिया, रीतेश खरे, क्षिति तिवारी, सलमन ख़ान, और महेश बसन्तनी। आप चारों से निवेदन है (आपको हम ईमेल से भी सूचित कर रहे हैं) कि आप इस प्रतियोगिता में वापस आकर महाविजेता बनने की जंग में शामिल हो जायें। इस सेगमेण्ट के अन्तिम कड़ी तक अगर आप वापस प्रतियोगिता में शामिल नहीं हुए तो महाविजेता स्कोर कार्ड से आपके नाम और अर्जित अंख निरस्त कर दिये जायेंगे और अन्य प्रतियोगियों को मौका दे दिया जायेगा।


तो आज बस इतना ही, नये साल में फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

Thursday, January 2, 2014

साल २०१३ के कुछ बहतरीन गीत रेडियो प्लेबैक की टीम द्वारा चुने हुए

रेडियो प्लेबैक इंडिया के टॉप २५ गीत एक साथ सुनें संज्ञा टंडन के साथ. एक बार फिर नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ 

Wednesday, January 1, 2014

स्वागत 2014



‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी पाठकों/श्रोताओं को 

नववर्ष की मंगलकामनाएँ 




मंगल ध्वनि : उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ : शहनाई : राग – वृन्दाबनी सारंग, एक ताल


Sunday, December 29, 2013

कुछ दिग्गज स्वर-शिल्पी, जिन्होने कबीर को गाया

  
स्वरगोष्ठी – 148 में आज

रागों में भक्तिरस – 16

‘चदरिया झीनी रे बीनी...’


‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ की सोलहवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-रसिकों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपके लिए भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और कुछ प्रमुख भक्तिरस कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उस भक्ति रचना के फिल्म में किये गए प्रयोग भी आपको सुनवा रहे हैं। श्रृंखला की पिछली दो कड़ियों में हमने सोलहवीं शताब्दी की भक्त कवयित्री मीरा के दो पदों पर आपके साथ चर्चा की थी। आज की कड़ी में हम पन्द्रहवीं शताब्दी के सन्त कवि कबीर के व्यक्तित्व और उनके एक पद- ‘चदरिया झीनी रे बीनी...’ पर चर्चा करेंगे। कबीर के इस पद को भारतीय संगीत की हर शैली में गाया गया है। आज के अंक में पहले हम आपको यह पद राग चारुकेशी में निबद्ध, ध्रुवपद गायक गुण्डेचा बन्धुओं के स्वरों में सुनवाएँगे। इसके बाद यही पद सुविख्यात भजन गायक अनूप जलोटा राग देश में और अन्त में लोक संगीत के जाने-माने गायक प्रह्लाद सिंह टिपणिया प्रस्तुत करेंगे। आप भी नादब्रह्म के माध्यम से निर्गुणब्रह्म की उपासना के साक्षी बनें। 


न्द्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी के जिन भक्त कवियों ने भारतीय जनमानस को सर्वाधिक प्रभावित किया उनमें कबीर अग्रगण्य हैं। उनके जन्म और जन्मतिथि के विषय में विद्वानों के कई मत हैं। एक मान्यता के अनुसार कबीर का जन्म 1398 ई. की ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को काशी (अब वाराणसी) के लहरतारा नामक स्थान पर हुआ था। जुलाहा परिवार में उनका पालन-पोषण हुआ। आगे चलकर वे सन्त रामानन्द के शिष्य बने और अलख जगाने लगे। कबीर विविध क्षेत्रों की मिली-जुली सधुक्कड़ी भाषा में किसी भी सम्प्रदाय और रूढ़ियों की परवाह किये बिना खरी बात कहते थे। कबीर ने हिन्दू और मुस्लिम, दोनों धर्मावलम्बियों के समाज में व्याप्त रूढ़िवाद तथा कट्टरवाद का मुखर विरोध किया। कबीर की वाणी, उनके मुखर उपदेश, उनकी साखी, रमैनी, बीजक, बावन-अक्षरी, उलटबासी आदि रूप में उपलब्ध हैं। गुरुग्रन्थ साहब में उनके 200 पद और 250 साखियाँ संकलित हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में चर्चा के लिए हमने कबीर का ही एक पद चुना है। यह कबीर के अत्यन्त लोकप्रिय पदों में से एक है। पहले आप इस पद की पंक्तियों पर दृष्टिपात कीजिए।

झीनी झीनी बीनी चदरिया।

काहे कै ताना काहे कै भरनी,

कौन तार से बीनी चदरिया।

ईडा पिङ्गला ताना भरनी,

सुखमन तार से बीनी चदरिया।

आठ कँवल दल चरखा डोलै,

पाँच तत्त्व गुन तीनी चदरिया।

वाको सियत मास दस लागे,

ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया।

सो चादर सुर नर मुनि ओढी,

ओढि कै मैली कीनी चदरिया।

दास कबीर जतन से ओढी,

ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया॥

इस पद में कबीर ने मानव के शरीर धारण करने, जीवन को संस्कारित करने और शरीर की सार्थकता से सम्बन्धित गूढ तत्त्वों को एक चादर के प्रतीक रूप में समझाने का प्रयास किया है। कबीर के शब्दों को भारतीय संगीत की प्रायः सभी शैलियों में स्वर मिला है। शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, सुगम, लोक और फिल्म संगीत के साथ-साथ सूफी संगीत और कव्वाली में भी कबीर गाये जाते है। आज के अंक में इस पद के गायन के तीन उदाहरण हम प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले यह पद ध्रुवपद अंग में सुनिए, जिसे सुप्रसिद्ध ध्रुवपद गायक गुण्डेचा बन्धुओं ने प्रस्तुत किया है। भारतीय संगीत की प्राचीन और शास्त्र-सम्मत शैली है- ध्रुवपद। इस शैली की गायकी में एक युगल गायक हैं- गुण्डेचा बन्धु (रमाकान्त और उमाकान्त गुण्डेचा), जिन्हें देश-विदेश में ध्रुवपद गायकी में भरपूर यश प्राप्त हुआ है। इनकी संगीत-शिक्षा उस्ताद जिया फरीदउद्दीन डागर और विख्यात रुद्रवीणा वादक उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर द्वारा हुई है। ध्रुवपद के ‘डागुरवाणी’ गायन में दीक्षित इन कलासाधकों ने कबीर का यह पद राग चारुकेशी के स्वरों में प्रस्तुत किया है। राग चारुकेशी के परिचय से पहले गुण्डेचा बन्धुओं से सुनिए कबीर का पद- ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया...’। मोहक पखावज वादन अखिलेश गुण्डेचा ने की है।


कबीर पद : ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया...’ : राग चारुकेशी : पं. रमाकान्त और उमाकान्त गुण्डेचा



कबीर का यह पद आप राग चारुकेशी के स्वरों में सुन रहे थे। यह राग मूलतः कर्नाटक संगीत पद्यति का है, जिसे उत्तर भारतीय संगीत पद्यति में भी मान्यता प्राप्त है। सम्पूर्ण-सम्पूर्ण जाति के इस राग के आरोह-अवरोह में धैवत और निषाद स्वर कोमल और शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते है। राग का वादी स्वर पंचम और संवादी स्वर षडज होता है। यह राग पूर्वांग में बिलावल और उत्तरांग में भैरवी का आभास कराता है। चारुकेशी के शुद्ध ऋषभ के स्थान पर यदि कोमल ऋषभ का प्रयोग किया जाए तो राग बसन्त मुखारी का और यदि कोमल निषाद के स्थान पर शुद्ध निषाद का प्रयोग किया जाए तो यह राग नट भैरव की अनुभूति कराता है। इस राग का गायन-वादन दिन के दूसरे प्रहर में अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है।

कबीर का यही पद अब हम चर्चित भजन गायक अनूप जलोटा के स्वरों में प्रस्तुत कर रहे हैं। अनूप जलोटा के पिता पुरुषोत्तमदास जलोटा स्वयं एक लोकप्रिय भजन गायक हैं। इनका परिवार पंजाब से लखनऊ आया था। परन्तु अनूप जलोटा का जन्म 29 जुलाई 1953 को नैनीताल में हुआ था। भजन गायन उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिला, जिसे उन्होने लखनऊ के भातखण्डे संगीत महाविद्यालय (अब विश्वविद्यालय) में सँवारा। बचपन से ही क्रिकेट और टेबिल टेनिस खेल के शौकीन अनूप जलोटा सूर, कबीर, तुलसी, मीरा आदि भक्त कवियों-कवयित्रियों के पदों को रागों का स्पर्श देकर देश-विदेश के श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हुए। आज हमारी चर्चा में कबीर का जो पद है, उसे अनूप जलोटा ने राग देश का स्पर्श दिया है। राग देश की रचना खमाज थाट के अन्तर्गत मानी गई है। इसमे कोमल और शुद्ध दोनों निषाद का प्रयोग होता है। आरोह में शुद्ध निषाद और अवरोह में कोमल निषाद का प्रयोग किया जाता है। आरोह में गान्धार स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता और अवरोह में सभी सात स्वर प्रयोग होते हैं। इस प्रकार यह औड़व-सम्पूर्ण जाति का राग है। इस राग का वादी स्वर ऋषभ और संवादी स्वर पंचम होता है। इसके गायन-वादन का उपयुक्त समय रात्रि का दूसरा प्रहर है। अब सुनिए, राग देश के स्वरों का सहारा लेकर, अनूप जलोटा की आवाज़ में कबीर का यही पद।


कबीर पद : ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया...’ : राग देश : भजन गायक अनूप जलोटा



कबीर का यह पद संगीत की विविध शैलियों में अनेक शीर्षस्थ कलासाधकों ने गाया है। ध्रुवपद और भजन गायकी में यह पद सुनवाने का बाद अब हम प्रस्तुत कर रहे हैं, यही पद मालवा की लोक संगीत शैली में। इसे मालवा अंचल की लोक संगीत शैली में प्रस्तुत कर रहे है, पद्मश्री सम्मान से विभूषित प्रह्लाद सिंह टिपणिया 7 सितम्बर, 1954 को उज्जैन (मध्यप्रदेश) के तरना कस्बे में जन्में श्री टिपणिया पेशे से शिक्षक हैं और मालवा के लोक संगीत में उनकी गहरी अभिरुचि थी। पारम्परिक लोक कलाकारों के बीच रह कर उन्होने इस अनूठी शैली का गहन अध्ययन किया और कबीर को ही गाने लगे। इस प्रकार की गायकी में स्वर और लय को साधने का प्रमुख वाद्य तम्बूरा होता है, जिसमें पाँच तार होते हैं। इसके अलावा करताल, ढोलक और मँजीरा भी सहायक वाद्य होते हैं। देश में आयोजित होने वाले प्रमुख संगीत समारोहों के सहभागी श्री टिपणिया अमेरिका और ब्रिटेन में भी कबीर को प्रस्तुत कर चुके हैं। कबीर के पद ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया...’ का मालवा की लोक संगीत शैली में गायन प्रस्तुत कर रहे हैं, प्रह्लाद सिंह टिपणिया और उनके साथी। आप कबीर के इस पद की रसानुभूति कीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।


कबीर पद : ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया...’ : लोक संगीत : प्रह्लाद सिंह टिपणिया और साथी




आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 148वें अंक की पहेली में आज हम आपको एक विख्यात गायक की आवाज़ में कबीर की भक्ति रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। यह पाँचवाँ और इस वर्ष का अन्तिम सेगमेंट है। 150वें अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – इस भक्ति रचना के अंश को सुन कर गायक को पहचानिए और हमे उनका नाम लिख भेजिए।

2 – इस रचना की प्रस्तुति में जिस ताल का प्रयोग हुआ है उसके मात्राओं की संख्या बताइए।

आप अपने उत्तर केवल radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 150वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ की 146वीं कड़ी में हमने आपको भक्त कवयित्री मीरा के एक पद का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग भैरवी और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- गायिका वाणी जयराम। इस अंक के दोनों प्रश्नो के सही उत्तर जबलपुर से क्षिति तिवारी और चंडीगढ़ से हरकीरत सिंह ने दिया है। दोनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का


   
मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ के अन्तर्गत आज के अंक में हमने आपको सन्त कबीर के एक पद का गायन ध्रुवपद शैली, भजन शैली और लोक संगीत शैली में प्रस्तुत किया। अगले अंक में इसी पद का गायन कुछ और शैलियों और कलासाधकों के स्वरों में हम प्रस्तुत करेंगे। अगले अंक में इस लघु श्रृंखला की सत्रहवीं कड़ी के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों की प्रतीक्षा करेंगे।



प्रस्तुति :कृष्णमोहन मिश्र 

Friday, December 27, 2013

रेडियो प्लेबैक की वार्षिक गीतमाला के शीर्ष ३ गीत : "तुम ही हो" को मिला सरताज गीत का खिताब

पायदान # ०३ - नगाड़े संग ढोल 
पायदान # ०२ - भाग मिल्खा भाग 
पायदान # ०१ (सरताज गीत) - तुम ही हो 

Thursday, December 26, 2013

'तितली' बन उड़ते मन की कुछ 'अनकही' सी बातें

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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