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Friday, June 25, 2010

एक नया अंदाज़ फिज़ा में बिखेरा "उड़न छूं" ने, जिसके माध्यम से वापसी कर रहे हैं बिश्वजीत और सुभोजित

Season 3 of new Music, Song # 11

दोस्तों, आवाज़ संगीत महोत्सव २०१० में आज का ताज़ा गीत है एक बेहद शोख, और चुलबुले अंदाज़ का, इसकी धुन कुछ ऐसी है कि हमारा दावा है कि आप एक बार सुन लेंगें तो पूरे दिन गुनगुनाते रहेंगें. इस गीत के साथ इस सत्र में लौट रहे हैं पुराने दिग्गज यानी हमारे नन्हें सुभोजित और गायक बिस्वजीत एक बार फिर, और साथ हैं हमारे चिर परिचित गीतकार विश्व दीपक तन्हा भी. जहाँ पिछले वर्ष परीक्षाओं के चलते सुभोजित संगीत में बहुत अधिक सक्रिय नहीं रह पाए वहीं बिस्वजीत ने करीब एक वर्ष तक गायन से दूर रह कर रियाज़ पर ध्यान देने का विचार बनाया था. मगर देखिये जैसे ही आवाज़ का ये नया सत्र शुरू हुआ और नए गानों की मधुरता ने उन्हें अपने फैसले पर फिर से मनन करने पर मजबूर कर दिया, अब कोई मछली को पानी से कब तक दूर रख सकता है भला. तो लीजिए, एक बार फिर सुनिए बिस्वजीत को, एक ऐसे अंदाज़ में जो अब तक उनकी तरफ़ से कभी सामने नहीं आया, और सुभो ने भी वी डी के चुलबुले शब्दों में पंजाबी बीट्स और वेस्टर्न अंदाज़ का खूब तडका लगाया है इस गीत में

गीत के बोल -


आते जाते
काटे रास्ता क्यूँ,
बड़ी जिद्दी है री तू
हो जा चल उड़न छूं..

आते जाते
काटे रास्ता क्यूँ,
बड़ी जिद्दी है री तू
हो जा उड़न छूं..

तोले मोले जो तू हर दफ़ा,
हौले हौले छीने हर नफ़ा,
क्या बुरा कि आनाकानी करके
तेरे से बच लूँ..

तोले मोले जो तू हर दफ़ा,
हौले हौले छीने हर नफ़ा,
क्या बुरा कि आनाकानी करके
तेरे से बच लूँ..

छोरी! तू है काँटों जैसी लू.

आते जाते
काटे रास्ता क्यूँ,
बड़ी जिद्दी है री तू
हो जा चल उड़न छूं..

आते जाते
काटे रास्ता क्यूँ,
बड़ी जिद्दी है री तू
हो जा उड़न छूं

झोंके धोखे हीं तू हर जगह,
तोड़े वादे सारे हर तरह,
ये बता कि आवाज़ाही तेरी
कैसे मैं रोकूँ..

झोंके धोखे हीं तू हर जगह,
तोड़े वादे सारे हर तरह,
ये बता कि आवाज़ाही तेरी
कैसे मैं रोकूँ..

छोरी! मैं ना जलना हो के धूँ..

आते जाते
काटे रास्ता क्यूँ,
बड़ी जिद्दी है री तू
हो जा चल उड़न छूं..

आते जाते
काटे रास्ता क्यूँ,
बड़ी जिद्दी है री तू
हो जा उड़न छूं



मेकिंग ऑफ़ "उड़न छू" - गीत की टीम द्वारा

बिस्वजीत: "उड़न-छूं" मेरे लिए एक नया अनुभव था। मैंने आज तक जितने भी गाने किए हैं ये गाना सबसे हटकर है। सुभोजित और विश्व दीपक ने जब यह गाना मुझे सुनाया तभी मैंने इसे गाने का निर्णय कर लिया क्योंकि यह मेरे "ज़ौनर" का नहीं था। इसके शब्द और इसका संगीत मुझे इतना पसंद आया कि "फ़ीलिंग" खुद-ब-खुद आ गए। उम्मीद करता हूँ कि श्रोताओं को भी यह गाना सुनते हुए बहुत मज़ा आएगा।

सुभोजित: हिंद युग्म के लिए मैं २००८ से संगीत का काम कर रहा हूँ. बिस्वजीत और विश्व दीपक के साथ पहले भी बहुत से प्रोजेक्ट कर चुका हूं. ये गाना पहले से सोचकर तो नहीं बनाया था. बस अचानक यूहीं दिमाग में आया, और ट्रेक बना डाला, फिर मैंने विश्व दीपक को दिया इसे शब्द लिखने के लिए और फिर हमने बिस्वजीत को भेजा. अंतिम परिणाम हम सबके लिए बेहद संतोष जनक रहा.

विश्व दीपक: सुभोजित के लिए मैंने "मेरे सरकार" लिखा था, उसके बाद से सुभोजित के साथ जितने भी गाने किए (अमूमन ४-५ तो कर हीं लिए हैं) कोई भी रीलिज नहीं हो पाया, किसी न किसी वज़ह से गाने बीच में हीं अटक जा रहे थे। फिर एक दिन सुभोजित ने मुझे यह ट्युन भेजा.. ट्युन मुझे बेहद पसंद आया (इसमें सुभोजित की छाप नज़र आ रही थी) तो मैंने कह दिया कि यह गाना पेंडिंग में नहीं जाना चाहिए। अच्छी बात है कि उसी दौरान बिस्वजीत सक्रिय हो उठे और हमें पूरा यकीन हो गया कि यह गाना तो पूरा होगा हीं। मैंने इस तरह का गाना पहले कभी नहीं लिखा, जिसमें नायक नायिका से दूर हटने को कह रहा है (मैं तो प्यार-मोहब्बत के गाने लिखने में यकीन रखता हूँ :) ), लेकिन यह ट्युन सुनकर मुझे लगा कि छेड़-छाड़ भरा गाना लिखा जा सकता है। गाना पूरा होने और फिर बिस्वजीत की आवाज़ में इसे सुन लेने के बाद मुझे लगा कि मैं सफल हुआ हूँ.. कितना हुआ हूँ, यह तो आप सब हीं बताएँगे।

बिस्वजीत
बिस्वजीत युग्म पर पिछले 1 साल से सक्रिय हैं। हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।

सुभोजित
संगीतकार सुभोजित स्नातक के प्रथम वर्ष के छात्र हैं, युग्म के दूसरे सत्र में इनका धमाकेदार आगमन हुआ था हिट गीत "आवारा दिल" के साथ, जब मात्र १८ वर्षीया सुभोजित ने अपने उत्कृष्ट संगीत संयोजन से संबको हैरान कर दिया था. उसके बाद "ओ साहिबा" भी आया इनका और बिस्वजीत के साथ ही "मेरे सरकार" वर्ष २००९ में दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत बना. अपनी बारहवीं की परीक्षाओं के बाद कोलकत्ता का ये हुनरमंद संगीतकार लौटा है पहली बार इस तीसरे सत्र में इस नए गीत के साथ

विश्व दीपक 'तन्हा'
विश्व दीपक हिन्द-युग्म की शुरूआत से ही हिन्द-युग्म से जुड़े हैं। आई आई टी, खड़गपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी॰टेक॰ विश्व दीपक इन दिनों पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अपनी विशेष कहन शैली के लिए हिन्द-युग्म के कविताप्रेमियों के बीच लोकप्रिय विश्व दीपक आवाज़ का चर्चित स्तम्भ 'महफिल-ए-ग़ज़ल' के स्तम्भकार हैं। विश्व दीपक ने दूसरे संगीतबद्ध सत्र में दो गीतों की रचना की। इसके अलावा दुनिया भर की माँओं के लिए एक गीत को लिखा जो काफी पसंद किया गया।

Song - Udan Chhoo
Voice - Biswajith Nanda
Music - Subhojit
Lyrics - Vishwa Deepak
Graphics - Prashen's media


Song # 11, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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