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Friday, October 24, 2014

‘ना रास्ता है ना कोई मंज़िल...’ : TAZA SUR TAAL : Roar - Tigers Of The Sundarban

ताज़ा सुर-ताल 

नई फिल्म रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरबन के क्लब डांस और रॉक पॉप गीत 

'खतरा है, इस बस्ती में, इसमें अब जो फँसा...' 



पने श्रोताओं / पाठकों को नई फिल्मों के संगीत से परिचित कराने के उद्देश्य से ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के स्तम्भ ‘ताज़ा सुर-ताल’ में हम प्रदर्शित होने वाली किसी फिल्म का गीत-संगीत आपको सुनवाते हैं। आज के अंक में हम आपको अगले सप्ताह 31 अक्तूबर, 2014 को प्रदर्शित होने वाली फिल्म, ‘रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरबन’ के दो गाने सुनवा रहे हैं। अबिस रिजवी द्वारा निर्मित और कमल सदाना द्वारा निर्देशित यह फिल्म आदमखोर बाघों से स्वयं को बचाने और बाघों के संरक्षण के संघर्ष की दास्तान है। फिल्म के प्रस्तुत दो गीतों में से पहले गीत का शीर्षक है ‘रूबरू’ और दूसरे गीत का शीर्षक ‘खतरा’ है। इन गीतों के गीतकार क्रमशः इरफान सिद्दीकी और कार्तिक चौधरी हैं। गीतों के संगीतकार रमोना एरेना हैं। पहला ‘रूबरू’ एक क्लब डांस गीत है, जिसे अदिति सिंह ने गाया है। दूसरा गीत ‘खतरा’ रॉक पॉप है, जिसे गायिका नीति मोहन ने आवाज़ दी है। लीजिए, फिल्म ‘रोर टाइगर ऑफ सुन्दरबन’ के इन दोनों गीतों को सुनिए और देखिए।



फिल्म – रोर – टाइगर ऑफ सुन्दरबन : ‘ना रास्ता है ना कोई मंज़िल...’ : गायिका – अदिति सिंह : संगीत – रमोना एरेना






फिल्म – रोर – टाइगर ऑफ सुन्दरबन : ‘खतरा है इस बस्ती में...’ : गायिका – नीति मोहन : संगीत – रमोना एरेना







आपको हमारी यह प्रस्तुति कैसी लगी? हमें अपने सुझाव और फरमाइश अवश्य लिखें। हमारा ई-मेल पता  radioplaybackindia@live.com है ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के कल के अंक ‘बातों बातों में’ में इस फिल्म के एक प्रमुख अभिनेता प्रणय दीक्षित से सुप्रसिद्ध स्तम्भकार सुजॉय चटर्जी की अन्तरंग बातचीत प्रस्तुत की जाएगी। कल शनिवार को सुबह 9 बजे से हम आपसे यहीं मिलेंगे।




अपना मनपसन्द स्तम्भ पढ़ने के लिए दीजिए अपनी राय



नए साल 2015 में शनिवार के नियमित स्तम्भ रूप में आप कौन सा स्तम्भ पढ़ना सबसे ज़्यादा पसन्द करेंगे?

1.  सिने पहेली (फ़िल्म सम्बन्धित पहेलियों की प्रतियोगिता)

2. एक गीत सौ कहानियाँ (फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया से जुड़े दिलचस्प क़िस्से)

3. स्मृतियों के स्वर (रेडियो (विविध भारती) साक्षात्कारों के अंश)

4. बातों बातों में (रेडियो प्लेबैक इण्डिया द्वारा लिये गए फ़िल्म व टीवी कलाकारों के साक्षात्कार)

5. बॉलीवुड विवाद (फ़िल्म जगत के मशहूर विवाद, वितर्क और मनमुटावों पर आधारित श्रृंखला)


अपनी राय नीचे टिप्पणी में अथवा cine.paheli@yahoo.com या radioplaybackindia@live.com पर अवश्य बताएँ।

Wednesday, June 4, 2014

एक चुराई हुई धुन के मोहताज़ हुए ज़रदोज़ी लम्हें

ताज़ा सुर ताल - ज़रदोज़ी लम्हें 

अक्सर हमारे संगीतकार विदेशी धुनों की चोरी करते हुए पकडे जाते हैं, पर आज जिक्र एक ऐसे नए गीत का जो लगभग २० साल पहले बना एक खूबसूरत मगर कमचर्चित गीत हिंदी गीत की ही हूबहू नक़ल है. 1996 में बाली सागू जो भारत में रेमिक्सिंग के गुरु माने जाते हैं, ने अपनी पहली मूल गीतों की एल्बम 'रायिसिंग फ्रॉम द ईस्ट' लेकर आये. संगीत प्रेमियों ने इस एल्बम को हाथों हाथ लिया, तुझ बिन जिया उदास, दिल चीज़ है क्या  और नच मलंगा  जैसे हिट गीतों के बीच उदित नारायण का गाया बन में आती थी एक लड़की  शायद कुछ कम सुना ही रह गया था, और इसी बात का फायदा उठाया आज के संगीतकार संजीव श्रीवास्तव ने और फिल्म रोवोल्वर रानी  में इसी तर्ज पर बना डाला ज़रदोज़ी लम्हें . लीजिये पहले सुनिए बाली सागू का बन में आती थी एक लड़की 



और अब सुनिए ये बेशर्म नक़ल, वैसे फिल्म रेवोल्वर रानी  में कुछ बेहद अच्छे गीत भी हैं, जिनकी चर्चा फिर कभी...
    

Wednesday, May 21, 2014

होंठों को मुस्कुराने और गुनगुनाने की वजह देती अरिजीत की आवाज़

ताज़ा सुर ताल - मुस्कुराने  (सिटी लाईट्स)

दोस्तों पिछले करीब २ सालों से हम सब इस युवा गायक के दीवाने हो रखे हैं, उस का हर नया गीत भीतर एक गहरी हलचल पैदा कर देता है और हम सब की छुपी या जाहिर आशिकी को जैसे आवाज़ मिल जाती है. रोमानियत को गहरे से आत्मसात करती ये आवाज़ है अरिजीत सिंह की. ताज़ा प्रस्तुति में आज फिर से अरिजीत का जादू महकेगा, गीत के बोल है..मुकुराने की वजह तुम हो... और इस गीत को वजह और वजूद दिया है जीत गांगुली ने. कभी प्रीतम के जोड़ीदार रहे जीत के लिए खुद प्रीतम ने एक बार कहा था कि जब लोग जीत की काबिलियत को समझेगें तो उसके दीवाने हो जायेगें, प्रीतम दा की ये बात एकदम सही लग रही है आज के सन्दर्भ में. धीरे धीरे श्रोता जीत की जादू भरी धुनों में डूब रहे हैं इन दिनों. फिल्म सिटी लाईट्स का है ये गीत. इस फिल्म में हमें दुबारा दिखेगा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित निर्देशक हंसल मेहता और अभिनेता राजकुमार राव की बेमिसाल जोड़ी का नया अंदाज़. आप में से जिन दर्शकों ने इनकी 'शाहिद' देखी हो उन्हें यक़ीनन इस फिल्म का बेहद बेसब्री से इंतज़ार होगा. फिल्म को महेश भट्ट लेकर आ रहे हैं और इसे वो अपनी सबसे बहतरीन कृतियों में से एक मान रहे हैं. ब्रिटिश फिल्म मेट्रो मनिला  पर आधारित इस फिल्म की चर्चा हम आगे भी जारी रखेगें, फिलहाल सुनते हैं ये गजब का गीत.... 

Friday, May 9, 2014

दिल्ली और लाहौर के बीच बंटी संवेदनाएं

ताज़ा सुर ताल - जो दिखते हो 

लकीरें है तो रहने दो, किसी ने रूठ कर गुस्से में खींच दी थी..उन्हीं को अब बनाओ पाला आओ कबड्डी खेलते हैं...लकीरें है तो रहने दो....गुलज़ार साहब ने इन्हीं शब्दों के साथ इस फिल्म को आगाज़ दिया है. क्या दिल्ली क्या लाहौर  एक अलग तरह का अंदाज़े बयां है जो बंटवारे का दर्द बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है. अभिनेता विजय राज़ की ये पहली फिल्म है बतौर निर्देशक. फिल्म में विजय राज़ के साथ हैं अभिनेता मनु ऋषि जो फिल्म के संवाद लेखक भी हैं. वैसे फिल्म में गीत संगीत का पार्श्व संगीत की तरह ही इस्तेमाल हुआ है, पर जब गीत लिखे हों गुलज़ार साहब ने और संगीत हो सन्देश संदलिया का तो गीत की एक चर्चा तो बनती ही है. तो लीजिये आज सुनिए ताज़ा सुर ताल में इसी फिल्म का एक गीत जिसे गुलज़ार साहब ने इतने खूबसूरत अंदाज़ में लिखा है कि पूरी फिल्म का सार सिमट के आ जाता है इस नन्हें से गीत में, शफकत अमानत अली खान साहब की परिपक्व आवाज़ में सुनिए जो दिखते हो....

Wednesday, May 7, 2014

लम्बी जुदाई की विसिल और युवा श्रोफ का बाजा

ताज़ा सुर ताल - विसिल बाजा 

सुपर स्टार जैकी श्रोफ को फिल्मों में मौका दिया सदाबहार देव साहब ने, मगर उन्हें असली पहचान मिली सुभाष घई कृत हीरो  की जबरदस्त कमियाबी से. कौन इनकार कर सकता है कि फिल्म हीरो  की कामियाबी में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत का महत्वपूर्ण योगदान था. फिल्म का हर गीत आज तक श्रोताओं के दिलो जेहन में बसा हुआ है. बरसों बाद जब जैकी के सुपुत्र टाइगर को फिल्मों में लांच करने की बारी आई तो जैकी को याद आई फिर एक बार अपनी पहली हिट फिल्म के गीतों की. मरहूम रेशमा का गाया लम्बी जुदाई  गीत में एक बेहद खूबसूरत बांसुरी का पीस था. सालों बाद हीरोपंती  में अब उसी मधुर धुन को विसिल में बजाया गया है, और सच कहें तो यही इस गीत की सबसे बड़ी खूबी है. गीत में आगे पीछे क्या गाया जा रहा है इस पर ध्यान ही नहीं जाता बस इंतज़ार रहता है की कब ये धुन बजे. कहना गलत नहीं होगा की टाईगर इस गीत पर जम कर नाचे हैं, यक़ीनन उनमें एक भावी सुपर स्टार के सभी गुण दर्शित हो रहे हैं. मंजीत, निंदी और कौर रफ़्तार के गाये इस गीत में भरपूर पंजाबियत है, और भरपूर मौज मस्ती भी....लीजिये सुनिए ये कदम थिरकाता गीत आज के ताज़ा सुर ताल में...  

Wednesday, April 23, 2014

टूटे तारे उठा ले...उनसे चंदा बना ले...प्रेरणा के स्वर पोपोन की आवाज़ में

ताज़ा सुर ताल --2014-18

सुन री बावली तू अपने लिए, खुद ही मांग ले दुआ, कोई तेरा न होना... केश में सूरज खोंस के चलना, कभी कोई रात मिले न  .... ये हों वो ऊर्जामयी शब्द जो नागेश कुकनूर की मर्मस्पर्शी फिल्म लक्ष्मी  में नायिका की प्रेरणा बन जाता है. मनोज यादव के लिखे इस बेमिसाल गीत को अपनी आवाज़ और सशक्त अभिव्यक्ति से निखारा है आज के दौर के सबसे जबरदस्त गायकों में से एक अंगराग महंता ने जिसे हम सब पोपोन के नाम से अधिक जानते हैं. हम फिल्म की चर्चा पीछले हफ्ते भी कर चुके हैं, आपको बता दें कि एक सेंसर से चली एक लम्बी जंग के बाद अधिर्कार इस माह ये फिल्म प्रदर्शित हो ही गयी मगर केवल सीमित सिनेमा घरों में ही. फिल्म में नागेश ने खुद भी एक अहम् भूमिका की है, साथ ही सतीश कौशिक, राम कपूर और शेफाली छाया (शाह) भी हैं मगर शीर्षक भूमिका मोनाली ने कमाल का काम किया है, कभी मौका लगे तो देखिएगा इस फिल्म को. 

फिल्म के सभी गीत पार्श्व संगीत का हिस्सा अधिक हैं, और फिल्म का पार्श्व का पूरा जिम्मा तापस ने उठाया है. अहमदाबाद से मुंबई आये तापस रेलिया को सबसे पहले मौका दिया विधु विनोद चोपड़ा ने फिल्म फरारी की सवारी  में. नागेश कुकनूर के साथ भी तापस पहले काम कर चुके थे, यही वो कारण रहा उनके इस गठबंधन की सफलता का भी. सुन री बावली  देश की हर महिला के लिए एक एंथम सरीखा गीत है. लीजिये सुनिए और जोश से भर जाईये. 

Friday, April 18, 2014

दुल्हन को मैचिंग दूल्हा लाये हैं शंकर एहसान लॉय 'हुलारे' में

ताज़ा सुर ताल  -2014-17

करन जौहर और साजिद नाडियाडवाला लाये हैं चेतन भगत की कहानी पर आधारित 2 States. अलिया भट्ट और अर्जुन कपूर अभिनीत ये फिल्म आज यानी १८ अप्रैल को प्रदर्शन आरंभ कर रही है. फिल्म कैसी है ये आप लोग देख कर हमें बताएगें. फिलहाल हम इस फिल्म का एक और गीत आज सुनने जा रहे है, जो है पूरी तरह मस्ती से भरा और कदम थिरकाने वाला. 

फिल्म की संगीत जोड़ी है अमिताभ भट्टाचार्य और शंकर एहसान लोय की तिकड़ी का. शादी के माहौल का ये गीत एक बार फिर 'सेल' तिकड़ी की मशहूर छाप लिए हुए है. ढोल का सुन्दर प्रयोग है. पार्श्व गायन है खुद शंकर के साथ सिद्धार्थ महादेवन और रसिका शेखर का. तो लीजिये झूमने को कमर कस लें इस गीत के साथ. 

  

Wednesday, April 9, 2014

भूतों की पार्टी से गर्माया चुनावी मैदान तो उठी भीतर से ये पुकार

ताज़ा सुर ताल २०१४ -१४

दोस्तों लोक सभा के चुनाव शुरू हो चुके हैं, और कुछ ही दिनों में देश को उसका नया प्रधानमन्त्री मिल जाएगा. मगर ये तभी संभव होगा जब हम लोग जाती धर्म उंच नीच के दायरों से उठकर अपने अपने मतों का प्रयोग करें, साफ़ और सवच्छ छवि वाले, देश के हिट की सोचने वाले प्रतिनिधियों को चुनकर संसद में भेजें. ताकि देश तरक्की और अमन परस्ती की राह पर आगे बढ़ सके. चुनावी माहौल में हमें अपने मत का महत्त्व समझाती फिल्म है नितीश तिवारी  निर्देशित भूतनाथ रिटर्न्स  जो कुछ सालों पहले आई भूतनाथ का दृतीय संस्करण है. अमिताभ अभिनीत भूतनाथ  को बच्चों और बड़ों दोनों का भरपूर प्यार मिला था, आज भी जब ये फिल्म छोटे परदे पर आती है तो हर कोई इसे देखने के लिए मचल उठता है, ऐसे में इस दृतीय संस्करण से भी ढेरों उम्मीदें हैं. हालाँकि पहले संस्करण में संगीत पर अधिक जोर नहीं दिया गया था, पर इस बार इस कमी को भी पूरा कर दिया गया है. फिल्म के गीत पार्टी तो बनती है  और हर हर गंगे  खूब सुना जा रहा है. पर आज हम आपके लिए लाये हैं फिल्म का एक अन्य गीत. 

राम संपत का स्वरबद्ध और ऋतुराज के गाये इस गीत में एक प्रार्थना है...एक दरख्वास्त है उस परवरदिगार से कि चुनाव के दौरान और उसके बाद भी इस देश पर अपनी मेहर रखे. न आदमी की आदमी झेले गुलामियाँ, न आदमी से आदमी मांगें सलामियाँ .  जिन नुमायिन्दों को हम चुन कर भेजें, वो राजा के सामान नहीं बल्कि जनता का सेवक बन देश को सर्वोपरि रख काम करें. इमानदारी, इंसानियत और न्याय की कसौटी पर विवेकपूर्ण रूप से नेतृत्व करे. इस गीत को लिखा है मुन्ना धीमान ने. सूफी और शास्त्रीय रंगों से सजे इस गीत में गजब की कशिश है. लीजिये सुनिए फिल्म भूतनाथ रिटर्न  का ये गीत साहिब नज़र रखना .... फिर मिलेगे शुक्रवार को एक और नए गीत के साथ. 


                 

Friday, April 4, 2014

संगीत में उफान और शब्दों में कुछ उबलते सवाल

ताज़ा सुर ताल -2014 - 13

दोस्तों देश भर में चुनावी माहौल गरम है. हर नेता अपने लोकलुभावन नारों से मतदाताओं के दिल जीतने की जुगत में लगा है. गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, मुद्दे सभी वही पुराने हैं, बहुत कुछ बदला पर सोचो तो कुछ भी नहीं बदला, इतने विशाल और समृद्ध देश की संपत्ति पर आज भी बस चंद पूंजीपति फन जमाये बैठे हैं. समाज आज भी भेद भाव, छूत छात जैसी बीमारियों में कैद है. बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ है तो न्याय और सच्चाई की आवाज़ भी कहीं राख तले दबी सुनाई देती है. कितने गर्व से हम गाते आये हैं सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा... मगर वो सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान आज है कहाँ ? यही वो खौलता सा सवाल है जो गीतकार इरशद कामिल ने फिल्म कांची  के गीत में उठाया है. आज ताज़ा सुर ताल में है इसी गीत की बारी. एकदम नए कलाकारों को लेकर आये हैं दिग्गज निर्माता निर्देशक सुभाष घई. घई साहब अपनी फिल्मों में संगीत पक्ष पर ख़ास पकड़ रखते हैं, लम्बे समय तक उनके चेहेते रहे लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बक्शी. बख्शी साहब के साथ तो उनका काफी लम्बा साथ रहा, और उन्होंने रहमान से भी उनके लिखे गीतों को स्वरबद्ध करवाया. कांची  में उन्होंने लम्बे समय से नदारद इस्माईल दरबार को मौका दिया है. साथ ही चार गीत सलीम सुलेमान ने भी दिए हैं और सबसे दिलचस्प बात तो ये है की एक गीत खुद घई साहब ने भी स्वरबद्ध किया है एल्बम के लिए. प्रस्तुत गीत को सलीम सुलेमान ने रचा है और आवाजें हैं सुखविंदर, मोहित चौहान और राज पंडित की. तो चलिए मिलकर ढूंढते हैं अपने 'सारे जहाँ से अच्छे' हिंदुस्तान को. 


बात देश की समस्याओं पर हो रही है तो जिक्र आता है एक ऐसी समस्या का जो केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर के देशों के लिए चिंता का कारण है. पानी यानी जल के भरपूर स्रोत्र हमें कुदरत ने दिए हैं, पर इंसानों ने इन सोत्रों का जरुरत से अधिक दोहन कर इन अनमोल खजानों की थाली में छेद कर दिया है. अब समय चेतने का है. पानी के गहराते संकट की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए फिल्मकार भी अपने अपने तरीकों से जुड़े हुए हैं. कुछ समय पहले आई जलपरी  आपने अवश्य देखी होगी. इसी कड़ी में जल्दी ही आपके सामने होगी गिरीश मलिक की फिल्म जल. फिल्म का संगीत रचा है सोनू निगम ने, सोनू ने बतौर संगीतकार अभी कुछ दिनों पहले ही सिंह साहब दा ग्रेट  से अपने सफ़र की शुरुआत की थी, पर जल  के लिए उन्होंने साथ थामा है मशहूर तबला वादक बिक्रम घोष का. फिल्म की एल्बम में अधिकतर वाध्य रचनाएं हैं जो बेहद अनूठी है. पर आज हम आपके लिए लाये हैं शुभा मुदगल का गाया शीर्षक गीत, जिसे लिखा भी है सोनू निगम ने संजीव तिवारी के साथ मिलकर. शास्त्रीय सरंचना में बुने ऐसे गीत इन दिनों फिल्मों में बेहद कम ही सुनने को मिलते हैं. पर जाहिर है रेडियो प्लेबैक पर आप ऐसे अनमोल नगीनों को अवश्य ही सुन पायेगें. लीजिये सुनिए ये सुन्दर सुरीला नगमा.. 
     

Friday, March 28, 2014

यो यो और मीका भी बने मस्त कलंदर के दीवाने

ताज़ा सुर ताल 2014-11

दोस्तों नए गीतों की दुनिया में एक बार फिर से स्वागत है आप सबका। आज सबसे पहले बात हनी सिंह, जी हाँ वही 'यो यो' वाले।  यूं तो भारतीय श्रोताओं के लिए रैप गायन शैली को बहुत पहले ही बाबा सेहगल सरीखे गायक परोस चुके हैं, पर जो कामियाबी यो यो ने हासिल की उसका कोई सानी नहीं।  हनी सिंह ने बहुत से नए पंजाबी गायकों को हिट गीत दिए गाने के लिए और उनपर अपने रैप का जो तड़का लगाया उसे सुन युवा श्रोता झूम उठे।  उनके रैप के शब्द भी ऐसे जैसे इस दौर के युवाओं की बात हो रही हो बिना अलग लाग लपेट।  सबसे अच्छी खासियत उनकी ये रही कि समय के साथ साथ वो अपने संगीत में भी नए प्रयोग लाते रहे।  लुंगी डांस  के लिए रजनीकान्त का अंदाज़ चुरा लिया तो कभी गुलज़ार साहब के क्लास्सिक तेरे बिना ज़िन्दगी से  को रैप के सांचे में ढाल लिया।  उनका ताज़ा प्रयोग रहा हिंदी फ़िल्मी संगीत के आज के सबसे हिट गायक मिका सिंह के साथ जुगलबंदी करना। मिका और यो यो साथ आये हैं एक सूफियाना गीत के साथ. वैसे इस गीत दमा दम मस्त कलंदर का भी इतिहास पुराना है।  मूल रूप से अमीर खुसरो के रचे  इस इबादत को बाबा बुल्लेशाह ने अपने ख़ास अंदाज़ से संवारा। पीर शाहबाज़ कलंदर को समर्पित इस कव्वाली को नुसरत साहब, नूर जहाँ, आबिदा परवीन से लेकर रुना लैला तक ने अपने अपने मुक्तलिफ़ अंदाज़ में गाकर लोकप्रियता के चरम तक पहुंचाया। यहाँ तक कि रॉक  बैंड जूनून और आज के दौर के शंकर महादेवन और रेखा भारद्वाज भी इस कव्वाली की रूहानियत से बच नहीं पाये। मिका और हनी सिंह के गाये इस ताज़ा संस्करण में भी दोनों कलाकारों ने अपना सबसे बहतरीन काम किया है।  संगीत संयोजन भी उच्च स्तर  का है।  लीजिये आप भी सुनिये और झूमिए झूलेलाल का नाम लेकर 



गीतकार कौसर मुनीर का लिखा सय्यारा  गीत यक़ीनन आज भी श्रोताओं को उतना ही लुभाता है।  बहुत दिनों के बाद उनका लिखा एक नया गीत सामने आया है।  कौसर के शब्दों में एक ख़ास किस्म की ताज़गी मिलती है हर बार।  प्रस्तुत गीत को स्वरबद्ध किया है जीत गांगुली ने जो आशिकी  के बाद इन दिनों दिन बा दिन अपने  काम को निखारते जा रहे हैं। अरिजीत सिंह की आवाज़ का वही जादू भरा असर है इस रोमांटिक गीत में जो है फ़िल्म यंगिस्तान  से. सुनिये और दीजिये इज़ाज़त, मिलते हैं अगले सप्ताह।  
  

Friday, March 7, 2014

सरहदों की दूरियां संगीत से पाटते अली ज़फर और अमित त्रिवेदी

ताज़ा सुर ताल - 09 -2014

ताज़ा सुर ताल के एक और नए एपिसोड में आप सब का स्वागत है. आज हम आपको मिलवा रहे हैं सरहद पार से आये एक जबरदस्त फनकार से जो बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. पाकिस्तान के पॉप संशेशन अली ज़फर न सिर्फ एक बहतरीन गायक हैं बल्कि एक अच्छे अभिनेता, संगीतकार, और गीतकार भी हैं. आने वाली फिल्म टोटल सयापा  में अली इन सभी भूमिकाओं में नज़र आयेगें. बतौर गीतकार इस फिल्म में उन्होंने आशा  नाम का गीत लिखा है, फिल्म का काम पूरी तरह खत्म होने के बाद फिल्म के अपने साथी किरदार को जेहन में रख कर लिखा गया ये गीत, फिल्म का हिस्सा नहीं है पर एल्बम में अवश्य शामिल है. वैसे इस एल्बम में जिसे पूरी तरह से अली का ही एल्बम कहा जायेगा, मात्र एक ही युगल गीत है, जिसे आज हमने चुना है आपके लिए. अकील रूबी का लिखा ये गीत सदा लुभावन अरेबिक मिजाज़ का है, जिसमें रुबाब का सुन्दर इस्तेमाल हुआ है. फरिहा परवेज हैं अली के साथ इस गीत में. नहीं मालूम  निश्चित ही एक ऐसा गीत है जिसे आप बार बार सुनना चाहेगें. 


आज के एपिसोड का दूसरा गीत है, मेरे बेहद पसंदीदा संगीतकार अमित त्रिवेदी का. दोस्तों अक्सर हम लोगों से सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं मिलती जो पुराने दौर के गीतों में था. पर वास्तव में ऐसा नहीं है. आज के गीत आज की पीढ़ी को जेहन में रख कर लिखे बुने जाते हैं और हमें इस बात पर फक्र होना चाहिए कि आज के दौर के गीतकार संगीतकार आज भी हमारी धरोहर को संभाले रखे हुए हैं. इतनी सारी बातें मैंने इसलिए कही क्योंकि मुझे लगता है कि प्रस्तुत गीत को सुनकर आपको गुजर दौर का मर्म भी याद आएगा और आज के संगीत की झनक भी. खुद अमित का गाया हुआ ये गीत है बदरा बहार  जिसे बहुत बढ़िया लिखा है अनिवता दत्त ने. अमित का एक खास अंदाज़ है जो सबसे अल्हदा है. सबसे अच्छी बात ये है कि वो किसी से प्रभावित नहीं लगते वरन वो अपनी खुद की लीक पर चलते हैं. हर गीत में एक नया प्रयोग करते हुए, लीजिए सुनिए ये लाजवाब गीत...
    

Friday, February 28, 2014

मिष्टी दोई जैसी बप्पी दा की आवाज़ और "घंटी गीत" बना साल का पहला देशव्यापी हिट

ताज़ा सुर ताल - 2014 - 08 

बप्पी दा 
दोस्तों, साल 2014 के दो माह बीतने को हैं, और अब तक हम आपको 14 गीत सुनवा चुके हैं. आज हम आपको सुनवायेंगे दो ऐसे गीत जो लोकप्रियता के लिहाज से शीर्ष पायदानों पर विराजमान हैं, और ये दोनों ही गीत एक ही फिल्म से हैं. फिल्म "गुण्डे" के बारे में आपको बता दें कि ये फिल्म हिंदी के साथ साथ बांग्ला में भी बनी है. और इसका मशहूर घंटी गीत  बांग्ला में बप्पी दा ने गाया है. वैसे संगीतकार सोहैल सेन ने हिंदी संस्करण में भी बप्पी दा को क्रेडिट दिया है. हिंदी संस्करण आज पूरे भारत में धूम मचा रहा है, मगर हम आपको सुनवा रहे हैं गीत का बांग्ला संस्करण जिसे बप्पी दा से एकदम मस्त गाया है. सुनते सुनते झूमने लगो तो हमें दोष मत दीजियेगा...


नेहा बाशिन 
क्यों दोस्तों, मज़ा आया न...? चलिए अब बढते हैं गुण्डे  के एक और गीत की तरफ जो है एक कैब्रेट गीत. असलमे इश्कुम  फिल्माया गया है प्रियंका चोपडा पर और उनके लिए पार्श्व गायन किया है नेहा भासिन ने, जी हाँ वही जिनकी धुनकी  ने आपको दीवाना बना दिया था. नेहा आज की एक चर्चित आवाज़ का नाम है पर अपने आरंभिक दिनों को याद करते हुए एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि एक बार एक निर्माता के सामने ऑडिशन देते हुए उनसे पूछा गया कि कहीं आपकी आवाज़ बैठी हुई तो नहीं है, जवाब में नेहा डरते डरते बस यही कह पायी थी कि 'मेरी आवाज़ ही ऐसी है'...ये वो दौर था जब एक खास किस्म की आवाजें ही इंडस्ट्री में स्वीकार्य होती थी. दस साल में बहुत कुछ बदल चुका है, और नए अंदाज़ की आवाजें भी आज अपनी पहचान बना रही हैं. नेहा की सफलता इसका ही एक उदाहरण है. माईकल जेक्सन की मुरीद नेहा फिल्मों से इतर भी अपनी आवाज़ में गैर फिल्मों गीत रिलीस करती रहती हैं, और जल्दी ही उनका एक नया सिंगल भी आने वाला है. तो लीजिए फिलहाल सुनिए उनकी आवाज़ में इश्क को नशीला सलाम. 

Friday, February 21, 2014

आईये घूम आयें बचपन की गलियों में इन ताज़ा गीतों के संग

ताज़ा सुर ताल - 2014 -07 - बचपन विशेष 

जेब (बाएं) और हनिया 
ताज़ा सुर ताल की एक और कड़ी में आपका स्वागत है, आज जो दो नए गीत हम चुनकर लाये हैं वो यक़ीनन आपको आपके बचपन में लौटा ले जायेगें. हाईवे  के संगीत की चर्चा हमने पिछले अंक में भी की थी, आज भी पहला गीत इसी फिल्म से. दोस्तों बचपन की सबसे खूबसूरत यादों में से एक होती है माँ की मीठी मीठी लोरियाँ जिसे सुनते हुए कब बरबस ही नींद आँखों में समा जाती थी पता भी नहीं चलता था. इन दिनों फिल्मों में लोरियाँ लौट सी आई है, तभी तो राऊडी राठोड  जैसी जबरदस्त व्यवसायिक फिल्मों में भी लोरियाँ सुनने को मिल जाती हैं. पर यकीन मानिये हाईवे की ये लोरी अब तक की सुनी हुई सब लोरियों से अल्हदा है, इस गीत में गीतकार इरशाद की मेहनत खास तौर पे कबीले तारीफ है. सुहा यानी लाल, और साहा यानी खरगोश, माँ अपने लाडले को लाल खरगोश कह कर संबोधित कर रही है, शब्दों का सुन्दर मेल इरशाद ने किया है उसका आनंद लेने के लिए आपको गीत बेहद ध्यान से सुनना पड़ेगा. रहमान की धुन ऐसी कि सुन कर उनके कट्टर आलोचक भी भी उनकी तारीफ किये बिना नहीं रह पायेगें. आखिर यूहीं तो नहीं उन्हें देश का सर्वश्रेष्ठ संगीतकार कहा जाता है. एक और आश्चर्य है अलिया भट्ट की मधुर आवाज़, ये नटखट सी दिखने वाली लड़की इतना सुरीला भी गा सकती है यकीन नहीं होता, वैसे गीत में प्रमुख आवाज़ है पाकिस्तानी गायिका जेब की. ज़बुनिषा बंगेश, हनिया असलम के साथ मिलकर एक संगीत बैंड चलाती है, और उनकी आवाज़ की खनक वाकई बेमिसाल है. मैंने तो जब से ये गीत सुना है मेरे मोबाईल पर यही गीत इन दिनों लूप में चलता रहता है, मुझे यकीन है कि आप को भी ये गीत बचपन की बाहों में ले जायेगा, जहाँ माँ की लोरी में दुनिया समाती थी और बेफिक्र नींदों पलकों पे तारी हो जाया करती थी. लीजिए सुनिए - सुहा साहा...  


प्रीतम 
चलिए आगे बढते हैं बचपन के सपनों की तरफ, जो कुछ चुलबुले से होते हैं तो कुछ बवाले से. शादी के साईड एफ्फेक्ट्स  में दो बहुत ही प्रतिभाशाली और लीक से अलग चलने वाले फरहान अख्तर और विध्या बालन एक साथ आ रहे हैं. फिल्म में संगीत है हिट मशीन प्रीतम दा का. गीत लिखे हैं स्वानंद किरकिरे ने. वैसे इस गीत का एक संस्करण मोहित चौहान की आवाज़ में भी है पर हम आपके लिए लेकर आये हैं नन्हीं गायिका डीवा का गाया ये बच्चों वाला संस्करण, जो बहुत ही प्यारा और मधुर है. गीतकार स्वानंद किरकिरे ने हाल में दिए एक साक्षात्कार में बताया है कि इस गीत को लिखते हुए वो खुद भी रो पड़े थे. वैसे स्वानंद और सपनों का रिश्ता यूँ भी पुराना है. बावरा मन फिर से  चला सपने देखने  ... तो लीजिए आनंद लीजिए इस ताज़ा गीत का भी.  

Friday, February 14, 2014

बॉलीवुड में उतरी नूरां बहनें तो शेखर रव्जिवानी भी पहुंचें माईक के पीछे

ताज़ा सुर ताल # 2014-06


खुद गायक सोनू निगम मानते हैं कि संगीतकार विशाल ओर शेखर न सिर्फ एक बहतरीन संगीतकार जोड़ी है बल्कि दोनों ही बहुत बढ़िया गायक भी है. विशाल तो अन्य बड़े संगीतकारों जैसे शंकर एहसान लॉय और विशाल भारद्वाज के लिए भी गायन कर चुके हैं. आज हम सुनेगें, इस जोड़ी के दूसरे संगीतकार की रूमानी गायिकी. दोस्तों क्या आप जानते हैं कि विशाल दादलानी और शेखर रव्जिवानी को प्यार में कभी कभी  के लिए अलग अलग तौर पर संगीतकार चुना गया था, चूँकि दोनों एक दूसरे से परिचित थे तो इन्होने अपनी अपनी धुनों को एक दूसरे के साथ बांटा और इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वो मिलकर कुछ बड़ा धमाल कर सकते हैं. यहीं से शुरुआत हुई विशाल शेखर की ये जोड़ी. ओम शान्ति ओम  के बाद वो शाहरुख के पसंदीदा संगीतकारों में आ गए, और पिछले ही साल चेन्नई एक्सप्रेस  की कामियाबी ने इस समीकरण को और मजबूत कर दिया. शाहरुख के साथ साथ निर्देशक करण जौहर भी उनके खास मुरीद रहे हैं, करण द्वारा निर्मित बहुत सी फिल्मों में विशाल शेखर सुरों का जादू चला चुके हैं. इसी कड़ी की ताज़ा पेशकश है हँसी तो फँसी  जहाँ विशाल शेखर के साथ जुड़े हैं गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य. शेखर ने इस रोमांटिक गीत के लिए अमिताभ से एक कैची शब्द की फरमाईश की. अमिताभ ने उन्हें शब्द दिया बेतहाशा, मगर तभी उन्हें एक और शब्द भी याद आया जहेनसीब , इस शब्द के आस पास जब शेखर ने धुन संवारी तो उन्होंने बेतहाशा को भी मुखड़े में रखा, क्योंकि अमिताभ का सुझाया ये पहला शब्द भी उन्हें बेहद पसंद आया था. तो लीजिए सुनिए जेहनसीब जिसे गाया है खुद शेखर ने, साथ दिया है चिन्मई श्रीपदा ने.
     

आज के एपिसोड का दूसरा गीत वो है जिसका बहुत दिनों से इन्तेज़ार था, तब से, जब से इरशाद कामिल ने फेसबुक पर इस गीत की रिकॉर्डिंग की खबर दी और नूरां बहनों की तारीफ की थी. नूरां बहनें यानी ज्योति और सुल्ताना नाम की दो कमसिन उम्र गायिकाएं, जिनकी आवाज़ और अदायगी बड़े बड़े सूफी गायकों को भी हैरत में डाल चुकी है. ऐसा लगता है जैसे ये आवाजें कई जन्मों से खलाओं में गूँज रही थी, और सदियों का रियाज़ इन्हें कुदरती तौर पर नसीब हो गया हो. एम् टी वी पर जुगनी  गाकर मशहूर हुई नूरां बहनें सीधे ही रहमान के स्टूडियो में दाखिल हुई और पटखा गुडिये  जैसा अनूठा गीत श्रोताओं के लिए तैयार हो गया. ये है फिल्म हाईवे  के लिए रहमान और इरशाद कामिल का तोहफा. वैसे आपको बताते चलें कि पहले इम्तियाज़ अली की इस नई फिल्म के लिए संगीत के नाम पर सिर्फ पार्श्व संगीत तक सीमित रहने का ही इरादा था, पर सौभाग्य से फिल्म की टीम ने इस फैसले को बदल दिया और अब इस एल्बम में है ९ एकदम ताज़े गीत, जिनका जिक्र हम आगे भी करेगें, फिलहाल सुनिए सूफी संगीत का ये जादू. 


Friday, February 7, 2014

कोई इश्क की नामुरादी को रोया तो वफ़ा की तलाश में खोया

ताज़ा सुर ताल - 2014 - 05 : शब्द प्रधान गीत विशेष 

ताज़ा सुर ताल के इस अंक में आपका एक बार फिर से स्वागत है दोस्तों, आज का ये अंक है शब्द प्रधान गीत विशेष. आजकल गीतों में शब्दों के नाम पर ध्यान आकर्षित करने वाले जुमलों की भरमार होती है, संगीतकार अपने हर गीत को बस तुरंत फुरंत में हिट बना देना चाहते हैं, अक्सर ऐसे गीत चार छे हफ़्तों के बाद श्रोताओं के जेहन से उतर जाते हैं. ऐसे में कुछ ऐसे गीतों का आना बेहद सुखद लगता है जिन पर शाब्दिक महत्त्व का असर अधिक हो, आज के अंक में हम ऐसे ही दो गीत चुन कर लाये हैं आपके लिए. पहले गीत के रचनाकार हैं शायर अराफात महमूद ओर इसे सुरों से सजाया है संगीतकार गौरव डगाउंकर ने. गायक के नाम का आप अंदाजा लगा ही सकते हैं, जी हाँ अरिजीत सिंह...उत्सव  से अभिनय की शुरुआत कर शेखर सुमन ने फिल्म ओर टेलीविज़न की दुनिया में अपना एक खास मुकाम बनाया है. हार्टलेस  बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म है जिसमें अभिनय कर रहे हैं उनके सुपुत्र अध्यायन सुमन. चलिए अब बिना देर किये हम आपको सुनवाते हैं ये खूबसूरत गज़ल नुमा गीत. 
मैं ढूँढने को ज़माने में जब वफ़ा निकला 
पता चला कि गलत लेके मैं पता निकला....वाह 
     

डेढ़ इश्किया  से हम आपका परिचय पहले ही करा चुके हैं, अब ऐसा कैसे मुमकिन है कि जिस फिल्म में शेरों-शायरी की खास भूमिका हो, लखनवी अंदाज़ का तडका हो, गुलज़ार साहब जैसा शायर हो गीतकार की भूमिका में ओर कोई नायाब सी गज़ल न हो. राहत साहब की नशीली आवाज़ ओर विशाल भारद्वाज की सटीक धुन. एक बेमिसाल पेशकश. सुनें ओर हमने दें इज़ाज़त, मिलेंगें अगले सप्ताह फिर से दो नए गीतों के साथ.
लगे तो फिर यूँ ये रोग लागे, न साँस आये न साँस जाए, 
ये इश्क है नामुराद ऐसा, कि जान लेवे तभी टले है.....क्या कहने

Friday, January 31, 2014

रेखा भारद्वाज का स्नेह निमंत्रण ओर अरिजीत की रुमानियत भरी नई गुहार

ताज़ा सुर ताल - 2014 -04 

हमें फिल्म संगीत का आभार मानना चाहिए कि समय समय पर हमारे संगीतकार हमारी भूली हुई विरासत ओर नई पीढ़ी के बीच की दूरी को कुछ इस तरह पाट देते हैं कि समय का लंबा अंतराल भी जैसे सिमट गया सा लगता है. मेरी उम्र के बहुत से श्रोताओं ने इस ठुमरी को बेगम अख्तर की आवाज़ में अवश्य सुना होगा, पर यक़ीनन उनसे पहले भी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के दरबार से निकली इस अवधी ठुमरी को बहुत से गुणी कलाकारों ने अपनी आवाज़ में ढाला होगा. लीजिए २०१४ में स्वागत कीजिये इसके एक ओर नए संस्करण का जिसे तराशा संवारा है विशाल -गुलज़ार के अनुभवी हाथों ने ओर आवाज़ के सुरमे से महकाया है रेखा भारद्वाज की सुरमई आवाज़ ने. मशहूर अभिनेत्री ओर कत्थक में निपुण माधुरी दीक्षित नेने एक बार फिर इस फिल्म से वापसी कर रही हैं रुपहले परदे पर. जी हाँ आपने सही पहचाना, देढ इश्किया  का ये गीत फिर एक बार ठुमरी को सिने संगीत में लौटा लाया है, हिंदी फिल्मों के ठुमरी गीतों पर कृष्णमोहन जी रचित पूरी सीरीस का आनंद हमारे श्रोता उठा चुके हैं. आईये सुनते हैं रेखा का ये खास अंदाज़....शब्द देखिये आजा गिलौरी खिलाय दूँ खिमामी, लाल पे लाली तनिक हो जाए....


काफी समय तक संघर्ष करने के बाद संगीतकार सोहेल सेन की काबिलियत पर भरोसा दिखाया सलमान खान ने ओर बने "एक था टाईगर" के हिट गीत, आज आलम ये है कि सोहेल को पूरी फिल्म का दायित्व भी भरोसे के साथ सौंपा जा रहा है. यश राज की आने वाली फिल्म "गुण्डे" में सोहेल ने जोड़ी बनायीं है इरशाद कामिल के साथ. यानी शब्द यक़ीनन बढ़िया ही होंगें. रामलीला की सफलता के बाद अभिनेता रणबीर सिंह पूरे फॉर्म में है, फिल्म में उनके साथ हैं अर्जुन कपूर ओर प्रियंका चोपड़ा. फिल्म का संगीत पक्ष बहुत ही बढ़िया है. सभी गीत अलग अलग जोनर के हैं ओर श्रोताओं को पसंद आ रहे हैं, विशेषकर ये गीत जो आज हम आपको सुना रहे हैं बेहद खास है. रोमानियत के पर्याय बन चुके अरिजीत सिंह की इश्को-मोहब्बत में डूबी आवाज़ में है ये गीत. जिसका संगीत संयोजन भी बेहद जबरदस्त है. धीमी धीमी रिदम से उठकर ये गीत जब सुर ओर स्वर के सही मिश्रण पर पहुँचता है तो एक नशा सा तारी हो जाता है जो गीत खत्म होने के बाद भी श्रोताओं को अपनी कसावट में बांधे रखता है. लीजिए आनंद लीजिए जिया  मैं न जिया  का ओर दीजिए हमें इज़ाज़त.    

Friday, January 24, 2014

धूम मचाती कमली ओर यारियाँ का अल्लाह वारियाँ

ताज़ा सुर ताल - 2014 -03 

ताज़ा सुर ताल की नई कड़ी में आप सब का स्वागत है, नए साल के पहले महीने में भी धूम ३ की धूम जारी है. कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म की सफलता में इसके संगीत की भी जबरदस्त भूमिका रही है. धूम ३ से एक ओर धमाकेदार गीत लेकर आज हम हाज़िर हैं. सुनिधि चौहान के क्या कहने, आईटम गीतों के लिए तो वो संगीत निर्देशकों की पहली पसंद मानी जा सकती हैं. यूँ धूम ३ के इस गीत को पूरी तरह एक आईटम गीत भी नहीं कहा जा सकता, पर सुनिधि ने गीत में जो ऊर्जा फूंकी है वो अविश्वसनीय है. गीत की आरंभिक पक्तियों से ही वो श्रोताओं को अपने साथ जोड़ लेती है ओर अगले ४ मिनट तक उस पकड़ में कहीं कोई लचक नहीं छूटती. इस गीत का जिक्र हो ओर प्रीतम दा के अद्भुत संगीत संयोजन की तारीफ न हो ये संभव नहीं है. ये गीत वेस्टर्न रिदम पर शुद्ध भारतीय वाद्यों की जबरदस्त जुगलबंदी करता है. गीत के प्रिल्यूड में ओर इंटरल्यूड में सितार का प्रयोग तो लाजवाब है. सुनिए ये दमदार गीत जिसे लिखा है समीर साहब ने. 

  


नए साल की पहली हिट फिल्म है टीनएज लव की दास्ताँ कहती टी सीरीस की यारियाँ. इस फिल्म के गीत भी खासा पसंद किये जा रहे है इन दिनों. एल्बम के एक गीत बारिश का जिक्र हम पहले ही कर चुके है, आज सुनते हैं पाकिस्तान के मशहूर गायक शफकत अमानत अली खान की रूह को छूती आवाज़ में, अल्लाह वारियाँ. इस आवाज़ में गजब का जादू है दोस्तों, ये गीत एक दर्द भरा सूफियाना अंदाज़ का गीत है जिसे रचा है अर्को प्रवो मुखर्जी ने. अर्को भी टी सिरिस की गुड बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं, और इस गीत की कामयाबी उन्हें नई ऊंचाईयां देगी यक़ीनन. लीजिए आनंद लें इस गीत का भी.


Friday, January 17, 2014

बॉलीवुड के खान'दान की संगीतमयी भिडंत

ताज़ा सुर ताल - 2014 - 02

ताज़ा सुर ताल के नए अंक में आपका स्वागत है. आज हम आमने सामने ला रहे हैं बॉलीवुड के दो बड़े 'खान' को. २०१३ के अंत में आई धूम ३ ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. सबसे अधिक कमाई करने वाली इस फिल्म का संगीत भी श्रोताओं को बहुत रास आया है. प्रीतम ने एक बार फिर से साबित किया है ऐसी बड़ी फिल्मों की बागडोर सँभालने में उनसे बेहतर कोई नहीं है. समीर के शब्दों में सूफी रंग बहुत खूब जचा है. भाग मिल्खा भाग  के गीतों से अपनी दमदार उपस्तिथि दर्ज करने के बाद सिद्धार्थ महादेवन ने एक बार फिर अपनी सशक्त आवाज़ से पूरे गीत पर अपनी पकड़ बनाये रखी है, गीत का एक चौंकाने वाला पक्ष रहा शिल्पा राव की आवाज़. अमित त्रिवेदी की टीम का अहम अंग रही शिल्पा ने पिछले साल ही मुरब्बा  ओर मनमर्जियाँ  जैसे गहरे गीत गाए थे, पर मलंग  में उनका एक नया ही सुखद अंदाज़ सुनने को मिला है. कहा जाता है ये बॉलीवुड में अब तक का सबसे महंगा गीत है. देश विदेश से बड़े बड़े जिमनास्टिकों की पूरी फ़ौज है इसमें ओर इस गीत में लगभग ५ करोड का खर्चा आया है. बहरहाल गीत को परदे पर देखना वाकई सुखद है. एक ओर जानकारी आपको देते चलें कि ऑडियो में इस गीत का केवल एक पैरा ही है, जबकि फिल्म में एक ओर पैरा जोड़ा गया है, ओर गीत की स्क्रीन लम्बाई ६ मिनट से अधिक है. लीजिए सुनिए मलंग  का रूहानी अंदाज़     
शाहरुख की चेन्नई एक्सप्रेस  का रिकॉर्ड तोडा धूम ३ ,तो क्या अब सलमान खान की जय हो  ,धूम ३ का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी ये देखने वाला होगा. सलमान की ये नई फिल्म फिर एक बार एक दक्षिण की हिट फिल्म का रिमेक है. प्रस्तुत गीत शायद इस फिल्म का सबसे सुरीला गीत है, जिसे रचा है सलमान के लिए हिट गीतों को रचती आई गीतकार-संगीतकार जोड़ी समीर ओर साजिद वाजिद ने. शान ओर श्रेया की भरोसेमंद आवाजों में ये गीत बेशक कुछ नया ऑफर नहीं करता मगर सुनने में बेहद सुरीला अवश्य है. डब्बू मलिक के बेटे अरमान मलिक भी इस एल्बम के साथ अपनी शुरुआत कर रहे हैं. उन्हें हमारी शुभकामनाएँ. सुनिए तेरे नैना बड़े कातिल मार ही डालेंगें .....    

Friday, November 29, 2013

नए साल पर टी सीरीस का एक संगीतमय तोहफा : "आई लव न्यू ईयर"

टी सीरीस के भूषण कुमार संगीतमयी रोमांटिक फिल्मों के सफल निर्माता रहे हैं. चूँकि इन फिल्मों का संगीत भी दमदार रहता है तो उनके लिए दोहरे फायदे का सौदा साबित होता है. इस साल आशिकी २ और नौटंकी साला की जबरदस्त सफलता के बाद वो हैट्रिक लगाने की तैयारी में थे आई लव न्यू ईयर के साथ. मगर फिल्म की प्रदर्शन तिथि, एक के बाद एक कारणों से टलती चली गयी. पहले यमला पगला दीवाना २ के प्रमोशन के चलते फिल्म का प्रदर्शन अप्रैल-मई से टल कर सितम्बर कर दिया गया. फिर भूषण और फिल्म के नायक सन्नी देओल के बीच कुछ धन राशि के भुगतान को लेकर मामला छिड़ गया. अब जाकर फिल्म को दिसंबर के अंतिम सप्ताह में जारी करने की सहमती बनी है. फिल्म के शीर्षक के लिहाज से भी ये एक सही कदम है. पर अभी तक फिल्म का प्रचार ठंडा ही दिखाई दे रहा है. बहरहाल हम फिल्म के संगीत की चर्चा तो कर ही सकते हैं. 

फिल्म में प्रीतम प्रमुख संगीतकार हैं, मगर एक एक गीत फलक शबीर (नौटंकी साला वाले), और अनुपम अमोद के हिस्से भी आया है, साथ ही पंचम द के एक पुराने हिट गीत को भी एल्बम में जोड़ा गया है. गीत मयूर पुरी, सईद कादरी और फलक शबीर ने लिखे हैं. फिल्म के निर्देशक राधिका राव और विनय सप्रू हैं जिनकी पहली फिल्म लकी - नो टाईम फॉर लव बॉक्स ऑफिस पर भी लकी साबित हुई थी, जिसमें सलमान खान की लोकप्रियता और अदनान सामी के संगीत का बड़ा योगदान था. यानी इस निर्देशक जोड़ी को अच्छे संगीत की पहचान निश्चित ही है और जब साथ हो टी सीरीस जैसे बैनर का तो उम्मीदें बढ़ ही जाती है, आईये देखें कि कैसा है आई लव न्यू ईयर  के संगीत एल्बम का हाल.

गुड नाल इश्क मीठा एक पारंपरिक पंजाबी गीत है जो शादी ब्याह और संगीत के मौकों पर अक्सर गाया बजाया जाता है. इसी पारंपरिक धुन को संगीतकार अनुपम अमोद ने बेहद अच्छे टेक्नो रिदम में डाल कर पेश किया है एल्बम के पहले गीत में, और उतने ही मस्त मौजी अंदाज़ में गाया है बेहद प्रतिभाशाली तोचि रैना ने जिनकी आवाज़ को अलग से पहचाना जा सकता है. आज के दौर में जहाँ नए गायकों की भरमार है ये एक बड़ी उपलब्धि है. गीत निश्चित ही कदम थिरकाने वाला है. मयूर पुरी ने 'पंच' को वैसा ही रखा है और उसके आप पास अच्छे शब्द रचे हैं.

तुलसी कुमार और सोनू निगम साथ आये हैं अगले गीत जाने न क्यों/आओ न में. धीमी शुरुआत के बाद गीत अच्छी उड़ान भरता है और एक बार श्रोताओं को अपनी जद में लेने के बाद अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने देता. रिदम में तबले का सुन्दर प्रयोग है अंतरे से पहले सेक्सोफोन का पीस भी शानदार है. सोनू पूरे फॉर्म में हैं और तुलसी की आवाज़ भी उनका साथ बखूबी देती है. सैयद कादरी के शब्द बेहद अच्छे हैं. बहुत ही खूबसूरत युगल गीत है जो कहीं कहीं प्रीतम के जब वी मेट दिनों की यादें ताज़ा कर देती हैं.

फलक शबीर के बारे में हम पहले भी काफी कुछ कह चुके हैं. उनका लिखा, स्वरबद्ध किया और बहतरीन अंदाज़ में गाया गीत जुदाई एल्बम का खास आकर्षण है. धुन में कुछ खास नयेपन के अभाव में भी गीत टीस से भर देता है. इसे एक ब्रेक अप गीत माना जा सकता है. और शायद एक ब्रेक अप सिचुएशन पर पहली बार कोई गीत बना है. गीत सुनते हुए आप महसूस कर सकते हैं दो छूटते हुए हाथ, चार नम ऑंखें और बहुत सा दर्द. गीत का एक अनप्लग्ड संस्करण भी है जो सुनने लायक है.

तुलसी कुमार एक बार फिर सुनाई देती है, इस बार शान के साथ गीत हल्की हल्की में. ये एक हंसी मजाक वाला गीत है. वास्तव में इस एल्बम के सभी गीत मेरे लिए एक सुखद आश्चर्य ही हैं. हर गीत को सुनने से पहले मेरी उम्मीदें बिलकुल शून्य थी, मगर हर गीत को सुनना एक हैरान करने वाला अनुभव साबित हुआ हर बार. ये भी एक बेहद सुरीला गीत है, जहाँ संयोजन में सधी हुई सटीकता है. दोनों गायकों की परफेक्ट ट्यूनिंग जानदार है और मयूर पुरी के शब्द भी ठीक ठाक है.

पंचम ने फिल्म सागर में जो थीम पीस रचा था, टी सीरिस ने उसी धुन को लेकर एस पी बालासुब्रमण्यम से गवाया था बरसों पहले आज मेरी जान का नाद. इसी रचना को एक बार फिर से जिंदा किया गया है एल्बम में. मौली दवे की नशीली आवाज़ में इस रचना को सुनना पंचम की सुर गंगा में एक बार फिर उतरने जैसा है. खुशी की बात है कि गीत की मूल सरंचना से अधिक छेड छाड नहीं की गयी है.

आई लव न्यू ईयर एक अच्छी एल्बम है जहाँ कोई भी गीत निराश नहीं करता. ये गीत धीरे धीरे आपके दिल में उतर जायगें और लंबे समय तक वहीँ घर बना लेंगें.

एल्बम के बहतरीन गीत - गुड नाल इश्क, जुदाई, आओ न, आजा मेरी जान 
हमारी रेटिंग - ४.४  .   

  

Friday, September 6, 2013

सब कुछ पुराना ही है नई जंजीर में

भी कभी समझना मुश्किल हो जाता है कि एक ऐसी फिल्म जिसे अपने मूल रूप में आज भी बड़े आनंद से देखा जा सकता है, उसका रिमेक क्यों बनाया जाता है. खैर रेमेकों की फेहरिश्त में एक नया जुड़ाव है जंजीर , वो फिल्म जिसने इंडस्ट्री को एंग्री यंग मैन के रूप अमिताभ बच्चन का तोहफा दिया था ७० के दशक में. जहाँ तक फिल्म के प्रोमोस् दिखे हैं नई जंजीर अपने पुराने संस्करण से हर मामले में अलग दिख रही है. ऐसे में इसके संगीत को भी अलग नज़रिए से सुना समझा जाना चाहिए. अल्बम में चार सगीत्कारों का योगदान है. चित्रान्तन भट्ट, आनंद राज आनंद, मीत ब्रोस अनजान और अंकित के सुरों से संवरी इस ताज़ा एल्बम में क्या कुछ है आईये एक नज़र दौडाएं.

मिका  की जोशीली आवाज़ में खुलता है एल्बम का पहला गीत मुम्बई के हीरो . बीच के कुछ संवाद तो बच्चन साहब की आवाज़ में है...भाई अगर उन्हीं की आवाज़ चाहिए थी तो फिर रिमेक की क्या ज़रूरत थी ये मेरी समझ से तो बाहर है.

एक बोरिंग गीत के बाद एक और जबरदस्ती का आईटम गीत सामने आ जाता है. ममता शर्मा की आवाज़ में पिंकी  अब तक सुनाई दिए आईटम गीतों से न तो कुछ अलग है न बेहतर. शब्द घिसे पिटे और धुन भी रूटीन है. एक और ठंडा गीत.

श्रीराम और श्यामली की युवा युगल आवाजों में ये लम्हा तेरा मेरा  सुनकर आखिरकार एल्बम से कुछ उम्मीदें जाग जाती है. बहुत ही सुरीला गीत जिसके साथ दोनों गायक कलाकारों ने भरपूर न्याय किया है.

अगला गीत एक कव्वाली है (पुराने संस्करण के क्लास्सिक यारी है ईमान मेरा  जैसा). मैं तुलना तो नहीं करूँगा पर सुनने में बुरा हरगिज़ नहीं है ये गीत भी. सुखविंदर की आवाज़ में जोश भरपूर है.

श्वेता पंडित का गाया कातिलाना  एक क्लब गीत है जिसकी धुन एक बार पुराने संस्करण के दिल जलों का दिल जला कर  से सीधी उठा ली गयी है. हंसी आती है ऐसे बेतुके प्रयागों पर.

अंतिम  गीत में श्रेया की सुरीली आवाज़ है शकीला बानो हिट हो गयी... शकीला का तो पता नहीं पर एल्बम केवल गीत संगीत के दम पर हिट हो जाए तो चमत्कार ही होगा. एल्बम निराश ही करती है.

सुनने लायक गीत  -  ये लम्हा तेरा मेरा
हमारी  रेटिंग - २ / ५

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