Showing posts with label sudha chandran. Show all posts
Showing posts with label sudha chandran. Show all posts

Saturday, July 11, 2015

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी - 04 - सुधा चन्द्रन्


तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी - 04

 
सुधा चन्द्रन्



’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी दोस्तों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार। दोस्तों, किसी ने सच ही कहा है कि यह ज़िन्दगी एक पहेली है जिसे समझ पाना नामुमकिन है। कब किसकी ज़िन्दगी में क्या घट जाए कोई नहीं कह सकता। लेकिन कभी-कभी कुछ लोगों के जीवन में ऐसी दुर्घटना घट जाती है या कोई ऐसी विपदा आन पड़ती है कि एक पल के लिए ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ख़त्म हो गया। पर निरन्तर चलते रहना ही जीवन-धर्म का निचोड़ है। और जिसने इस बात को समझ लिया, उसी ने ज़िन्दगी का सही अर्थ समझा, और उसी के लिए ज़िन्दगी ख़ुद कहती है कि 'तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी'। इसी शीर्षक के अन्तर्गत इस नई श्रृंखला में हम ज़िक्र करेंगे उन फ़नकारों का जिन्होंने ज़िन्दगी के क्रूर प्रहारों को झेलते हुए जीवन में सफलता प्राप्त किये हैं, और हर किसी के लिए मिसाल बन गए हैं। आज का यह अंक समर्पित है मशहूर नृत्यांगना व अभिनेत्री सुधा चन्द्रन् को। 


21 सितंबर 1964 को सुधा का जन्म हुआ था। सुधा जब मात्र पाँच वर्ष की थी, तभी से नृत्य सीखना शुरू कर दिया था बम्बई के कला सदन में। पढ़ाई और नृत्य दोनो साथ-साथ करती गईं और 17 वर्ष की आयु होते होते वो लगभग 75 स्टेज शोज़ कर चुकी थीं। अन्य पुरस्कारों के साथ-साथ दो मुख्य पुरस्कार ’नृत्य मयूरी’ और ’नवज्योति’ प्राप्त कर चुकी थीं। नृत्य में ही अपना करीअर बनाने का निर्णय ले चुकी थीं सुधा अन्द इस राह पर वो निरन्तर अग्रसर होती चली जा रही थीं बहुत लगन और निष्ठा के साथ। पर भाग्य ने एक बहुत भयानक और गंदा मज़ाक कर दिया उनके साथ। 2 मई 1981 की बात है। सुधा अपने माता-पिता के साथ तमिलनाडु के एक मन्दिर में जा रही थीं एक बस में। और वह बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना इतनी घातक थी कि सुधा के पैरों को गहरी चोट लगी। दायें पैर का चोट बहुत ज़्यादा था, उस पर शुरुआती डॉक्टर ने इलाज में गड़बड़ी कर दी जिसकी वजह से गैंगरीन हो गया, और उनकी दायीं टांग को शरीर से अलग कर देना पड़ा उनकी जान को बचाने के लिए। एक नृत्यांगना के लिए पैर की क्या अहमियत होती है, यह शायद अलग से बताने की ज़रूरत नहीं। पलक झपकते सबकुछ मानो ख़त्म हो गया, सब तहस-नहस हो गया। एक नृत्यांगना बनने का सपना मानो पल भर में दम तोड़ दिया। जान बच गई, बस यही एक अच्छी बात थी।


कुछ दिनों के इलाज के बाद सुधा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सुधा अब भी यह स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं कि उनका एक पैर उनसे अलग हो गया है। यहाँ तक कि वो व्हील-चेअर पर भी बैठने के लिए तैयार नहीं हुईं और सामान्य रूप से चलने-फिरने की हर संभव कोशिशें करने लगीं। ऐम्प्युटेशन के 6 महीने बाद सुधा ने एक मैगज़ीन में ’रमन मैगससे अवार्ड’ विजेता, जयपुर के डॉ. सेठी के बारे में पढ़ा जो कृत्रिम अंग विशेषज्ञ थे। उनसे बात करने के बाद सुधा में फिर से आत्मविश्वास के अंकुर फूटने लगे, उन्हें आभास होने लगा कि शायद वो फिर से नृत्य कर सकती हैं। डॉ. सेठी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी और उनके नृत्य के लिए प्रयोग करने लायक एक कृत्रिम पैर की रचना की। 28 जनवरी 1984 को सुधा चन्द्रन् ने बम्बई में एक स्टेज शो किया जो बेहद सफल रहा और रातों रात सुधा एक स्टार बन गईं। उस नृत्य प्रदर्शन को देखने वालों में निर्माता रामोजी राव भी थे जिन्होंने सुधा के जीवन की कहानी को लेकर एक फ़िल्म बनाने का निर्णय भी ले लिया। ’मयूरी’ नामक इस तेलुगू फ़िल्म में नायिका की भूमिका सुधा चन्द्रन् ने ही निभाई और इसके लिए राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह से ’सिल्वर लोटस’ का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। 1986 में इस फ़िल्म को हिन्दी में ’नाचे मयूरी’ के नाम से बनाया गया और इसमें भी सुधा चन्द्रन् ही नज़र आईं। फिर इसके बाद सुधा चन्द्रन् ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। फ़िल्मों और नृत्य मंचों के अलावा सुधा चन्द्रन् छोटे परदे पर भी बेहद कामयाब रहीं। सुधा चन्द्रन् के जीवन की कहानी को पढ़ने के बाद उन्हें झुक कर सलाम करने को जी चाहता है। ज़िन्दगी ने उन्हें हताश करने की कोई कसर नहीं छोड़ी थी, पर उन्होंने ज़िन्दगी को ही जैसे जीना सिखा दिया, और ज़िन्दगी ख़ुद उनसे जैसे कह रही हो कि सुधा, तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी!! 

आपको हमारी यह प्रस्तुति कैसी लगी, हमे अवश्य लिखिए। हमारा यह स्तम्भ प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को प्रकाशित होता है। यदि आपके पास भी इस प्रकार की किसी घटना की जानकारी हो तो हमें पर अपने पूरे परिचय के साथ cine.paheli@yahoo.com मेल कर दें। हम उसे आपके नाम के साथ प्रकाशित करने का प्रयास करेंगे। आप अपने सुझाव भी ऊपर दिये गए ई-मेल पर भेज सकते हैं। आज बस इतना ही। अगले शनिवार को फिर आपसे भेंट होगी। तब तक के लिए नमस्कार। 


खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी  



The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ