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Friday, October 22, 2010

गाँव से लायी एक सुरीला सपना रश्मि प्रभा और जिसे मिलकर संवार रहे हैं ऋषि, कुहू, श्रीराम और सुमन सिन्हा

दोस्तों, आपने गौर किया होगा कि एक दो शुक्रवारों से हम कोई नया गीत अपलोड नहीं कर रहे हैं. दरअसल बहुत से गीत हैं जिन पर काम चल रहा है, पर ऑनलाइन गठबंधन की कुछ अपनी मजबूरियां भी होती है, जिनके चलते बहुत से गीत अधर में फंस जाते हैं. पर हम आपको बता दें कि आवाज़ महोत्सव का तीसरा सत्र जारी है और अगला नया गीत आप जल्द ही सुनेंगें. इन सब नए गीतों के निर्माण के अलावा भी कुछ प्रोजेक्ट्स हैं जिन पर आवाज़ की टीम पूरी तन्मयता से काम कर रही है. ऐसे ही एक प्रोजेक्ट् से आईये आपका परिचय कराएँ आज.

युग्म से जुड़े सबसे पहले संगीतकार ऋषि एस एक बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार हैं, इस बात का अंदाजा, हर सत्र में प्रकाशित उनके गीतों को सुनकर अब तक हमारे सभी श्रोताओं को भी हो गया होगा. आमतौर पर आजकल संगीतकार धुन पहले रचते हैं, ऐसे में दिए हुए शब्दों को धुन पर बिठाना और उसमें जरूरी भाव भरना एक दुर्लभ गुण ही है, और उससे भी दुर्लभ है गुण, शुद्ध कविताओं को स्वरबद्ध करने का. अमूमन गीत एक खास खांचे में लिखे जाते हैं ताकि धुन आसानी से बिठाई जा सके, पर जब कवि कविता लिखता है तो वह इन सब बंधनों से दूर रहकर अपने मन को शब्दों में उंडेलता है. ऐसे में उन लिखे शब्दों उनके भाव अनुसार स्वरबद्ध करना एक चुनौती भरा काम ही है. यही कारण है कि जब हमने किसी कवि की कविताओं को इस प्रोजेक्ट के लिए संगीत में ढालने का मन बनाया तो बतौर संगीतकार ऋषि एस को ही चुना.

दरअसल ये सुझाव कवियित्री रश्मि प्रभा का था. आईये सुनें उनकी ही जुबानी कि ये ख़याल उन्हें कैसे आया.

रश्मि प्रभा - शब्दों के साथ चलते चलते एक दिन देखा कि कुछ शब्द सरगम की धुन में थिरक रहे हैं और हवा कह गई- ज़िन्दगी भावनाओं को गुनगुनाना चाहती है ' .... ऐसा महसूस होते मैंने धुन और स्वर को आवाज़ दी और पलक झपकते ऋषि, कुहू, श्रीराम इमानी का साथ मेरी यात्रा को संगीतमय बना गया,.... ज़िन्दगी के इंतज़ार को देखते हुए गाँव से सपना ले आने की बात सुनकर सुमन सिन्हा भी सहयात्री बने और हमने सोचा ज़िन्दगी की तलाश में हम सब जौहरी बनेंगे ...हर गीत में हमारे ख्वाब, हमारी कोशिशें, हमारे हकीकत हैं --- आइये हम साथ हो लें....

तो यूँ हुई शुरूआत इस प्रोजेक्ट की. जैसा कि उन्होंने बताया कि गायन के लिए कुहू और श्रीराम को चुना गया. दरअसल रश्मि जी कुहू की गायिकी की तभी से मुरीद हो चुकी थी जब से उन्होंने उनकी आवाज़ में "प्रभु जी" गीत सुना था. चूँकि ये गीत जिनके डेमो आप अभी सुनने जा रहे हैं, ये स्टूडियो में भी रिकॉर्ड होंगें बेहद अच्छे तरीके से, तो उस मामले में भी कुहू, श्रीराम और रश्मि जी का एक शहर में होना भी फायदेमंद होगा ऐसे हमें उम्मीद है. रश्मिजी की बातों में आपने एक नाम नया भी है, जिनसे आवाज़ के श्रोता वाकिफ नहीं होंगें शायद. ये हैं सुमन सिन्हा, सुमन जी इस प्रोजेक्ट के आधार बनेगें. ये आवाज़ के नए "महारथी" हैं जो हमारे साथ अब लंबे समय तक निभाने आये हैं. आने वाली बहुत सी ऐसी घोषणाओं में आप इनका जिक्र पढेंगें. सुमन जी मूल रूप से पटना बिहार के रहने वाले हैं और साहित्य संगीत और सिनेमा से इनका जुड़ाव पुराना है. इनके बारे में अधिक जानकारी हम आने वाले समय में आप तक पहुंचाएंगें. फिलहाल बढते हैं इस प्रोजेक्ट् की तरफ जिसके लिए अब तक ३ गीत तैयार हो चुके है. इन तीनों गीतों एक झलक आईये अब आपको सुनवाते हैं एक के बाद एक....



ये तीन गीत हैं -
१. इंतज़ार
२. गाँव से रे
३. फितरत

याद रहे अभी ये संस्करण एक डेमो है, और होम स्टूडियो रेकॉर्डेड है...आपकी राय से हम इसे और बेहतर बना पायेंगें-


मेकिंग ऑफ़ "प्रोजेक्ट कविता ०१" - गीत की टीम द्वारा

श्रीराम ईमानी : I love working with this team. For starters Rishi’s compositions are a pleasure to sing. I like the level of detail that he goes to, particularly the additional vocals, and the emphasis he puts on how each word and line should sound. Rashmi ji’s lyrics are straight from the heart, and the imagery they bring to one’s mind are delightful! And finally, Kuhoo – with whom it has always been a pleasure to sing,both on stage and in the studio. We’ve worked together on several songs from our time together in IIT, and it has been an enjoyable and enriching experience as we grew with each song, and I hope this continues for several years to come. I admire every member of this wonderful team and hope. you all like these songs

कुहू गुप्ता : रश्मि जी की कविताओं में कुछ अलग बात है जो दिल को छू जाती है, शायद ज़िन्दगी की सच्चाई है ! और उस पर ऋषि जी संगीत रचना हो तो सोने पे सुहागा. मुझे ये गाने गाने में बहुत आनंद आया. श्रीराम के साथ मैंने ४-५ साल पहले कॉलेज के स्टेज पर गाया था, सोचा न था आज उसी के साथ मूल रचनाएँ भी गाऊँगी. आशा करती हूँ इस टीम का काम आप सब को पसंद आएगा !

ऋषि एस: The poetry for this set of songs have been hand picked by me from the writings of Rashmi ji. This is the first time I have worked with a female lyricist and the difference in the creative thought process is subtle at some places and apparent at the others. The melodies have been inspired from the thought provoking message and rhythmic structure of the poetry. The lyrical value and musical content have been taken to the next level of listening pleasure by vocalists Kuhoo Gupta and Sriram Emani, who have presented the songs with an apt mix of emotions and musicality. Thanks to the whole team for making these songs happen. Special thanks to hindyugm for showcasing independent musicians.


Creative Commons License
Zindagi by Rishi S is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivs 3.0 Unported License.

हमें उम्मीद है कि आप सब की शुभकामनाओं से हम इस और ऐसे सभी अन्य प्रोजेक्ट्स को बहुत कामियाबी से निभा पायेंगें, हमें आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा.

Friday, September 10, 2010

गीली आँखों के धुंधले मंजर में भी दिखी उम्मीद की लहर - बॉलीवुड अंदाज़ के जख्मों को हॉलीवुड अंदाज़ का मरहम

Season 3 of new Music, Song # 19

आज आवाज़ महोत्सव में पहली बार एक ऐसा गीत पेश होने जा रहा है, जिसमें रैप गायन है, जो दो पुरुष गायकों की आवाजों में है और जिसमें दो भाषाओं में शब्द लिखे गए हैं. "प्रभु जी" गीत की आपार सफलता के बाद श्रीनिवास पंडा फिर लौटे हैं इस सत्र में और जैसा हर बार होता है वो अपने श्रोताओं के लिए कुछ नया लेकर ही आये हैं. गीत दृभाषीय है, तो यहाँ हिंदी के शब्द सजीव सारथी ने लिखे है अंग्रेजी शब्द रचे हैं खुद रैपर आसिफ ने जो खुद को "रेग्गड स्कल" कहते हैं. श्रीराम की आवाज़ आप इससे पहले सूफी गीत "हुस्न-ए-इलाही" में सुन चुके है, आज के गीत में उनका अंदाज़ एकदम अलग है. ये एक एक्सपेरिमेंटल गीत है जिसमें संगीत के दो अलग अलग आयामों का मिश्रण करने की कोशिश की गयी है, हम उम्मीद करेंगें कि हमारे श्रोताओं को ये प्रयोग अच्छा लगेगा.

गीत के बोल -

सांसे चुभे सीने में जैसे खंजर,
गीली हैं ऑंखें धुंधला है सारा मंजर, (2)
मेरे पैरों हैं जमीं न सर पे आसमाँ है,
जब से वो खफा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

You should know nothin’ ever gonna last
But you dwellin’ on the past and you hurtin’ pretty bad
And I hate that I’m blunt but you gonna understand
In a week in, a month when you back up on the track
I can imagine what you going through I’ve been there
Cursin’ sometimes at the times that she been there
Lookin at her pictures reminiscing; it was rapture
The ones that hurt is the one with all the laughter [x2]
But the day will come when you gonna skip to another chapter
And then you gonna be smiling hereafter.

कोई कैसे मुस्कुराए, पलकों में छुपाये,
आंसू ओं का सैलाब,
कोई शम्मा न सितारा, दिल है बेसहारा,
मिटने को है बेताब,

खामोशियों में डूबी हर सदा है,
बेचैनियों का क्या ये सिलसिला है,
मेरे रूठे दो जहाँ हैं, टूटे सब गुमाँ है,
जब से वो जुदा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

I know at nights you be losin’ ya sleep
Bleedin inside from your wounds and it’s deep
Just breathe – hold it in for a second
Expellin’ all ya hurt, exhale the depression
Time waits for no man but heals all wounds
No time to waste thinkin it ended too soon
Never brood over love don’t be lost to the gloom
She ain’t know what she lost she ain’t got no clue
Remember the things that you loved in her dude
But you gotta live your life coz you’re worth one too
Gotta forget cuz I am sure that you through.

कोई कैसे भूल पाए, यादों से छुडाये,
लाये दिल को बहला,
कोई सपना वो नहीं था, अपना था यहीं था,
पल में जो है बदला,
कैसे सहें हम, गम जो ये मिला है,
चाक जिगर कब किसका सिला है,
उस पे सब कुछ मिटाके, जान-ओ-दिल लुटाके,
क्योंकर मैं फ़िदा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

Truth is you had something in your life
That most never find when they look all the time
And you stuck here waitin’ for the hurt to pass
But you can’t have the light without the dark it’s a fact
Move on – forget the past let it be
Where it be and you still got hope so believe
That you’ll find – someone more fine
With something more divine !!


यह गीत अब आर्टिस्ट एलोड़ पर बिक्री के लिए उपलब्ध है...जिसकी शर्तों के चलते इस पृष्ठ से निकाल दिया गया है, कृपया सुनने और खरीदने के लिए यहाँ जाएँ.

मेकिंग ऑफ़ "सांसें चुभे" - गीत की टीम द्वारा

श्रीनिवास पंडा: मैंने अपने बहुत से दोस्तों को अक्सर "ब्रेक अप" के बाद बेहद निराश और उदास होते देखा है. तो मन में ख्याल आया कि क्यों न एक गीत के माध्यम से उस दौर से गुजर रहे अपने साथियों कुछ प्रेरणा दूं. मैं इस गीत में रैप चाहता था, तो विचार आया कि इसे एक संवाद रूप में बनाया जाए, दो किरदारों के लिए अलग अलग स्वर लेकर. मैंने एक धुन बनायीं और सजीव जी से इस बारे में बात की. कुछ दिनों में ही उन्होंने इतना बढ़िया गाना उस धुन पर लिख भेजा कि मेरा भी अर्रेंज्मेंट करने का उत्साह बढ़ गया. इस गीत में सबसे बड़ी चुनौती थी, एक अच्छा रैपर ढूँढने की. इस काम में मित्र राहुल सोमन ने मदद की. हमें आसिफ जैसा रैपर ढूँढने में करीब ४ महीने लगे. अधिकतर रैपर अपने शब्द खुद लिखते हैं. आसिफ ने भी अपने लिखे शब्दों को गा कर मुझे भेजा अपनी तमाम व्यस्ताओं के बीच भी, वो भी मात्र एक माह में. इसी दौरान ऋषि के माध्यम से मुझे श्रीराम का परिचय मिला, उन्होंने भी गाने का निमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिए और इस तरह करीब ६ महीनों की मेहनत के बाद बन कर तैयार हुआ ये गीत.

श्रीराम ईमनि: जब श्रीनि ने पहली बार मुझसे इस गीत की बात की तो उनकी बातों से लगा कि ये बहुत ही आसान सा गाना होगा. पर जब मैंने इसे सुना तो तो इसकी होंटिंग धुन और सोलफुल शब्दों ने मुझे डुबो ही दिया. उपर से रेग्गड़ स्कल के शानदार रैप इस पर चार चाँद लगा रहा था. मैंने फैसला किया कि मैं इस गीत को भरपूर समय दूँगा और जब तक पूरी तरह से रिहर्स न कर लूं अंतिम टेक नहीं लूँगा. धुन जो सुनने में सरल लगती है बहुत से उतार छडाव से भरी है, और दूसरी चुनौती ये थी कि अधिकतर पंक्तियाँ एक सांस में गाने वाली थी, तमाम शब्दों में छुपे भावों के ध्यान में रखकर. मुझे लगता है कि अंतिम परिणाम से श्रीनि भाई संतुष्ट होंगें. मैं रैपर रेग्गड़ स्कल को विशेष बधाई देना चाहूँगा, जब मैंने पहली बार सुना तो लगा कि किसी विदेशी फनकार ने किया होगा. यक़ीनन ये बहुत ही प्रो है. सजीव जी के शब्द और श्रीनिवास का अर्रेंज्मेंट ने इस गीत को एक अलग ही मुकाम दिया है, मेरे लिए इस गीत में काम करना एक संतोषजनक तजुर्बा रहा

सजीव सारथी: इस गीत में दो किरदार हैं और मेरा काम एक किरदार को शब्द देना था जो अपनी महबूबा या प्रेमिका के धोखे से बेहद दुखी और निराश है, उसकी सोच नकारात्मक है. काफी क्लीशे सिचुएशन था पर देखिये श्रीनि ने इसमें भी कितना नयापन प्रस्तुत कर दिखाया है. धुन का बहाव बहुत ही बढ़िया था, तो मुझे लगा कि यहाँ शब्दों को तोड़ तोड़ कर खेला जा सकता है. इस गीत पर काम करने में बहुत मज़ा आया, और श्रीराम को ख़ास आभार कि उन्होंने उन तोड़े हुए शब्दों को बेहद अच्छे से और भाव में डूब कर गाया. श्रीनि के साथ काम करना हमेशा ही एक सुखद अनुभव होता है, और मुझे ख़ुशी है कि उन्होंने इस अनूठे और दिलचस्प गीत का मुझे हिस्सा बनाया. राहुल और आसिफ को ख़ास धन्येवाद जिनके योगदान के बिना शायद ये संभव नहीं हो पाता.

आसिफ अकबर (Ragged Skull): जब श्रीनिवास ने पहले मुझे ये गीत सुनाया तो मुझे लगा कि ये मेरे लिए एक नयी जमीं पर खुदाई करने जैसा होगा. दरअसल मैं रोजमर्रा के जीवन पर अपनी कलम चलाता था, पर पहले कभी इस तरह के किसी विषय पर लिखने का नहीं सोचा, क्योंकि मैं जानता हूँ कि यादें कभी मरती नहीं हैं, वो छुपी रहती है, और जब कोई कुरेदे तो फिर जाग उठती हैं, तो यक़ीनन आसान नहीं है कहना कि भूल जाओ...श्रीनिवास की धुन में गीत के थीम के सभी भाव थे मुझे बस उसके बीट पकड़ने थे अपने शब्दों के लिए, सजीव ने जो लिखा उसने निश्चित ही मुझे प्रेरणा दी. ये मेरे पहले के सभी प्रोजेक्ट्स से अलग था, क्योंकि श्रीनिवास के जेहन में बिलकुल साफ़ था कि वो क्या चाहते हैं. अंतिम शब्द सरंचना से पहले हमारे बीच बहुत सी चर्चाएं हुई. मैं अपने काम से बेहद संतुष्ट हूँ और श्रीनिवास, सजीव और श्रीराम के साथ और भी इस तरह के विचारोत्तेजक गीतों में काम करना चाहूँगा.
श्रीराम ईमनि
मुम्बई में जन्मे और पले-बढे श्रीराम गायन के क्षेत्र में महज़ ७ साल की उम्र से सक्रिय हैं। ये लगभग एक दशक से कर्नाटक संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। आई०आई०टी० बम्बे से स्नातक करने के बाद इन्होंने कुछ दिनों तक एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी में काम किया और आज-कल नेशनल सेंटर फॉर द परफ़ोर्मिंग आर्ट्स (एन०सी०पी०ए०) में बिज़नेस डेवलपेंट मैनेज़र के तौर पर कार्यरत हैं। श्रीराम ने अपने स्कूल और आई०आई०टी० बम्बे के दिनों में कई सारे स्टेज़ परफोरमेंश दिए थे और कई सारे पुरस्कार भी जीते थे। ये आई०आई०टी० के दो सबसे बड़े म्युज़िकल नाईट्स "सुरबहार" और "स्वर संध्या" के लीड सिंगर रह चुके हैं। श्रीराम हर ज़ौनर का गाना गाना पसंद करते हैं, फिर चाहे वो शास्त्रीय रागों पर आधारित गाना हो या फिर कोई तड़कता-फड़कता बालीवुड नंबर। इनका मानना है कि कर्नाटक संगीत में ली जा रही शिक्षा के कारण हीं इनकी गायकी को आधार प्राप्त हुआ है। ये हर गायक के लिए शास्त्रीय शिक्षा जरूरी मानते हैं। हिन्द-युग्म (आवाज़) पर यह इनका दूसरा गाना है।

श्रीनिवास पंडा
तेलगू, उड़िया और हिंदी गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पंडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों मुंबई में हैं और बैंक ऑफ अमेरिका में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार चार बार विजेता रह चुके हैं। 'काव्यनाद' एल्बम में इनके 3 गीत संकलित हैं। पेशे से तकनीककर्मी श्रीनिवास हर गीत को एक नया ट्रीटमेंट देने के लिए जाने जाते हैं

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।

आसिफ (रेग्गड़ स्कल)
आसिफ एक रैपर हैं जो त्रिचूर केरल में रहते है, बहुत से व्यावसायिक विज्ञापनों के लिए गा चुके हैं, मलयालम फिल्म "अनवर" के लिए भी गायन कर चुके हैं. हिंद युग्म के ये पहले रैपर हैं. अभी अंग्रेजी में गाते हैं, पर हमें उम्मीद है कि हिंद युग्म इनसे कभी हिंदी रैप भी गवा लेगा
Song - Sansen Chubhe (Tears and Hope)
Vocals - Sreeram Emaani & Asif (Ragged Skull)
Music - Srinvias Panda
Lyrics - Sajeev Sarathie (hindi)
rap lyrics - Asif (Ragged Skull)
Graphics - Prashen's media


Song # 19, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Friday, August 20, 2010

जब हुस्न-ए-इलाही बेपर्दा हुआ वी डी, ऋषि और नए गायक श्रीराम के रूबरू

Season 3 of new Music, Song # 17

सूफी गीतों का चलन इन दिनों इंडस्ट्री में काफी बढ़ गया है. लगभग हर फिल्म में एक सूफियाना गीत अवश्य होता है. ऐसे में हमारे संगीतकर्मी भी भला कैसे पीछे रह सकते हैं. सूफी संगीत की रूहानियत एक अलग ही किस्म का आनंद लेकर आती है श्रोताओं के लिए, खास तौर पे जब बात हुस्न-ए-इलाही की तो कहने ही क्या. जिगर मुरादाबादी के कलाम को विस्तार दिया है विश्व दीपक तन्हा ने. दोस्तों गुलज़ार साहब इंडस्ट्री में इस फन के माहिर समझे जाते हैं. ग़ालिब, मीर आदि उस्ताद शायरों के शेरों को मुखड़े की तरह इस्तेमाल कर आगे एक मुक्कमल गीत में ढाल देने का काम बेहद खूबसूरती से अंजाम देते रहे हैं वो. हम ये दावे के साथ कह सकते हैं इस बार हमारे गीतकार उनसे इक्कीस नहीं तो उन्नीस भी नहीं हैं यहाँ. ऋषि ने पारंपरिक वाद्यों का इस्तेमाल कर सुर रचे हैं तो गर्व के साथ हम लाये हैं एक नए गायक श्रीराम को आपके सामने जो दक्षिण भारतीय होते हुए भी उर्दू के शब्दों को बेहद उ्म्दा अंदाज़ में निभाने का मुश्किल काम कर गए हैं इस गीत में. साथ में हैं श्रीविद्या, जो इससे पहले "आवारगी का रक्स" गा चुकी हैं हमारे लिए. तो एक बार सूफियाना रंग में रंग जाईये, और डूब जाईये इस ताज़ा गीत के नशे में.

गीत के बोल -


इश्क़.. इश्क़
मौला का करम
इश्क़... इश्क़
आशिक का धरम

हम कहीं जाने वाले हैं दामन-ए-इश्क़ छोड़कर,
ज़ीस्त तेरे हुज़ूर में, मौत तेरे दयार में.....

हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही
हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही

हम ने जिगर की
बातें सुनी हैं
मीलों आँखें रखके
रातें सुनी हैं
एक हीं जिकर है
सब की जुबां पे
साँसें सारी जड़ दे
शाहे-खुबां पे

सालों ढूँढा खुद में जो रेहां
हमने पाया तुझमें वो निहां..

खुल्द पूरा हीं वार दें, हम तो तेरे क़रार पे....

हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही...
हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही...

मोहब्बत काबा-काशी
मोहब्बत कासा-कलगी
मोहब्बत सूफ़ी- साकी,
मोहब्बत हर्फ़े-हस्ती..

एक तेरे इश्क़ में डूबकर हमें मौत की कमी न थी,
पर जी गए तुझे देखकर, हमें ज़िंदगी अच्छी लगी।



मेकिंग ऑफ़ "हुस्न-ए-इलाही" - गीत की टीम द्वारा

श्रीराम: मैं सूफ़ी गानों का हमेशा से हीं प्रशंसक रहा हूँ, इसलिए जब ऋषि ने मुझसे यह पूछा कि क्या मैं "हुस्न-ए-इलाही" गाना चाहूँगा, तो मैंने बिना कुछ सोचे फटाफट हाँ कह दिया। इस गाने की धुन और बोल इतने खूबसूरत हैं कि पहली मर्तबा सुनने पर हीं मैं इसका आदी हो चुका था। गाने की धुन साधारण लग सकती है, लेकिन गायक के लिए इसमें भी कई सारे रोचक चैलेंजेज थे/हैं। ऋषि चाहते थे कि कि "सालों ढूँढा खुद में जो रेहां" पंक्ति को एक हीं साँस में गाया जाए। अब चूँकि यह पंक्ति बड़ी हीं खूबसूरत है तो मुझे हर लफ़्ज़ में जरूरी इमोशन्स और एक्सप्रेसन्स भी डालने थे और बिना साँस तोड़े हुए (जो कि असल में टूटी भी) यह करना लगभग नामुमकिन था। मैं उम्मीद करता हूँ कि मैंने इस पंक्ति के साथ पूरा न्याय किया होगा। इस गाने में कुछ शब्द ऐसे भी हैं, जिन्हें पूरे जोश में गाया जाना था और साथ हीं साथ गाने की स्मूथनेस भी बरकरार रखनी थी, इसलिए आवाज़ के ऊपर पूरा नियंत्रण रखना जरूरी हो गया था। विशेषकर गाने की पहली पंक्ति, जो हाई-पिच पर है.. इसे ऋषि ने गाने में तब जोड़ा जब पूरे गाने की रिकार्डिंग हो चुकी थी। चूँकि यह मेरा पहला ओरिजिनल है, इसलिए मेरी पूरी कोशिश थी कि यह गाना वैसा हीं बनकर निकले, जैसा ऋषि चाहते थे। मैं यह कहना चाहूँगा कि इसे गाने का मेरा अनुभव शानदार रहा। साथ हीं मैं श्रीविद्या की तारीफ़ करना चाहूँगा। उनकी मधुर मेलोडियस आवाज़ ने इस गाने में चार चाँद लगा दिए हैं। और अंत में मैं ऋषि और विश्व दीपक को इस खूबसूरत गाने के लिए बधाई देना चाहूँगा।

श्रीविद्या:मेर हिसाब से हर गीत कुछ न कुछ आपको सिखा जाता है. इस गीत में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया इसकी धुन ने जो सूफी अंदाज़ की गायिकी मांगती है. हालाँकि मेरा रोल गीत में बेहद कम है पर फिर भी मैं खुश हूँ कि मैं इस गीत का हिस्सा हूँ. ये ऋषि के साथ मेरा दूसरा प्रोजेक्ट है और मुझे ख़ुशी है विश्व दीपक और श्रीराम जैसे पतिभाशाली कलाकारों के साथ ऋषि ने मुझे इस गीत के माध्यम से काम करने का मौका दिया

ऋषि एस: "हुस्न-ए-इलाही" गाने का मुखड़ा "जिगर मुरादाबादी" का है.. मेरे हिसाब से मुखड़ा जितना खूबसूरत है, उतनी हीं खूबसूरती से वी डी जी ने इसके आस-पास शब्द डाले हैं और अंतरा लिखा है। आजकल की तकनीकी ध्वनियों (टेक्नो साउंड्स) के बीच मुझे लगा कि एक पारंपरिक तबला, ढोलक , डफ़्फ़ वाला गाना होना चाहिए, और यही ख्याल में रखकर मैंने इस गाने को संगीतबद्ध किया है। मुंबई के श्रीराम का यह पहला ओरिज़िनल गाना है। उन्होंने इस गाने के लिए काफ़ी मेहनत की है और अपने धैर्य का भी परिचय दिया है। मैंने उनसे इस गाने के कई सारे ड्राफ़्ट्स करवाए, लेकिन वे कभी भी मजबूरी बताकर पीछे नहीं हटे। उनकी यह मेहनत इस गाने में खुलकर झलकती है। आउटपुट कैसा रहा, यह तो आप गाना सुनकर हीं जान पाएँगें। इस गाने में फीमेल लाइन्स बहुत हीं कम हैं, फिर भी श्रीविद्या जी ने अपनी आवाज़ देकर गाने की खूबसूरती बढा दी है। इस गाने को साकार करने के लिए मैं पूरी टीम का तह-ए-दिल से आभारी हूँ।

विश्व दीपक: आवाज़ पर महफ़िल-ए-ग़ज़ल लिखते-लिखते न जाने मैंने कितना कुछ जाना, कितना कुछ सीखा और कितना कुछ पाया.. यह गाना भी उसी महफ़िल-ए-ग़ज़ल की देन है। जिगर मुरादाबादी पर महफ़िल सजाने के लिए मैंने उनकी कितनी ग़ज़लें खंगाल डाली थी, उसी दौरान एक शेर पर मेरी नज़र गई। शेर अच्छा लगा तो मैंने उसे अपना स्टेटस मैसेज बना लिया। अब इत्तेफ़ाक देखिए कि उस शेर पर ऋषि जी की नज़र गई और उन्होंने उस शेर को मेरा शेर समझकर एक गाने का मुखरा गढ डाला। आगे की कहानी यह सूफ़ियाना नज़्म है| जहाँ तक इस नज़्म में गायिकी की बात है, तो पहले हम इसे पुरूष एकल (मेल सिंगल) हीं बनाना चाहते थे, लेकिन हमें सही मेल सिंगर मिल नहीं रहा था। हमने यह गाना श्रीराम से पहले और दो लोगों को दिया था। एक ने पूरा रिकार्ड कर भेज भी दिया, लेकिन हमें उसकी गायिकी में कुछ कमी-सी लगी। तब तक हमारा काफ़ी समय जा चुका था। ऋषि इस गाने को जल्द हीं रिकार्ड करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने मुझसे पूछा कि हमारे पास फीमेल सिंगर्स हैं, क्या हम इसे फीमेल सॉंग बना सकते हैं। मुझे कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन ऋषि को हीं लगा कि गाने का मूड और गाने का थीम मेल सिंगर को ज्यादा सूट करता है। इस मुद्दे पर सोच-विचार करने के बाद आखिरकार हमने इसे दो-गाना (डुएट) बनाने का निर्णय लिया। श्रीविद्या ने अपनी रिकार्डिंग हमें लगभग एक महीने पहले हीं भेज दी थी। उनकी मीठी आवाज़ में आलाप और "इश्क़ इश्क़" सुनकर हमें अपना गाना सफल होता दिखने लगा। लेकिन गाना तभी पूरा हो सकता था, जब हमें एक सही मेल सिंगर मिल जाता। इस मामले में मैं कुहू जी का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा, जिन्होंने ऋषि को श्रीराम का नाम सुझाया। श्रीराम की आवाज़ में यह गाना सुन लेने के बाद हमें यह पक्का यकीन हो चला था कि गाना लोगों को पसंद आएगा। मुज़िबु पर इस गाने को लोगों ने हाथों-हाथ लिया है, आशा करता हूँ कि हमारे आवाज़ के श्रोता भी इसे उतना हीं प्यार देंगे।

श्रीराम ऐमनी
मुम्बई में जन्मे और पले-बढे श्रीराम गायन के क्षेत्र में महज़ ७ साल की उम्र से सक्रिय हैं। ये लगभग एक दशक से कर्नाटक संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। आई०आई०टी० बम्बे से स्नातक करने के बाद इन्होंने कुछ दिनों तक एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी में काम किया और आज-कल नेशनल सेंटर फॉर द परफ़ोर्मिंग आर्ट्स (एन०सी०पी०ए०) में बिज़नेस डेवलपेंट मैनेज़र के तौर पर कार्यरत हैं। श्रीराम ने अपने स्कूल और आई०आई०टी० बम्बे के दिनों में कई सारे स्टेज़ परफोरमेंश दिए थे और कई सारे पुरस्कार भी जीते थे। ये आई०आई०टी० के दो सबसे बड़े म्युज़िकल नाईट्स "सुरबहार" और "स्वर संध्या" के लीड सिंगर रह चुके हैं। श्रीराम हर ज़ौनर का गाना गाना पसंद करते हैं, फिर चाहे वो शास्त्रीय रागों पर आधारित गाना हो या फिर कोई तड़कता-फड़कता बालीवुड नंबर। इनका मानना है कि कर्नाटक संगीत में ली जा रही शिक्षा के कारण हीं इनकी गायकी को आधार प्राप्त हुआ है। ये हर गायक के लिए शास्त्रीय शिक्षा जरूरी मानते हैं। हिन्द-युग्म (आवाज़) पर यह इनका पहला गाना है।

श्रीविद्या कस्तूरी
कर्णाटक संगीत की शिक्षा बचपन में ले चुकी विद्या को पुराने हिंदी फ़िल्मी गीतों का खास शौक है, ये भी मुजीबु पे सक्रिय सदस्या हैं. ये इनका दूसरा मूल हिंदी गीत है। हिन्द-युग्म पर इनकी दस्तक सजीव सारथी के लिखे और ऋषि द्वारा संगीतबद्ध गीत "आवारगी का रक्स" के साथ हुई थी।

ऋषि एस
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

विश्व दीपक 'तन्हा'
विश्व दीपक हिन्द-युग्म की शुरूआत से ही हिन्द-युग्म से जुड़े हैं। आई आई टी, खड़गपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी॰टेक॰ विश्व दीपक इन दिनों पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अपनी विशेष कहन शैली के लिए हिन्द-युग्म के कविताप्रेमियों के बीच लोकप्रिय विश्व दीपक आवाज़ का चर्चित स्तम्भ 'महफिल-ए-ग़ज़ल' के स्तम्भकार हैं। विश्व दीपक ने दूसरे संगीतबद्ध सत्र में दो गीतों की रचना की। इसके अलावा दुनिया भर की माँओं के लिए एक गीत को लिखा जो काफी पसंद किया गया।

Song - Husn-E-Ilaahi
Voice - Sriraam and Srividya
Music - Rishi S
Lyrics - Vishwa Deepak
Graphics - Prashen's media


Song # 16, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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