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Friday, February 24, 2012

बोलती कहानियाँ - आखिर बेटा हूँ तेरा

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में प्रसिद्ध कथाकार पंकज सुबीर की कहानी "एक रात" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं समीर लाल की कहानी "आखिर बेटा हूं तेरा", जिसको स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

 कहानी "आखिर बेटा हूँ तेरा" का कुल प्रसारण समय 4 मिनट 48 सेकंड है। इस बार हमने इस प्रसारण  में कुछ नये प्रयोग किये हैं। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

 यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


ऐसा नहीं कि मेरे पास शब्द न थे मगर बेहतर शब्दों की तलाश में भटकता रहा और लोग रचते चले गये।  मेरे भाव किसी और की कलम से शब्द पा गये।
 ~  समीर लाल

हर शुक्रवार को सुनें एक नयी कहानी

उसे 5 बजे बसुआ को उठाकर चाय नाश्ता देना होता था। फिर उसके लिये दोपहर का भोजन बनाकर घर से निकलती।
 (समीर लाल की "आखिर बेटा हूं तेरा" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.

 यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3
#Seventh Story, Akhir Beta Hoon Tera: Sameer Lal/Hindi Audio Book/2012/7. Voice: Archana Chaoji

Tuesday, January 31, 2012

ब्लोग्गर्स चोईस में आज रश्मि प्रभा के साथ हैं उड़न तश्तरी वाले समीर लाल

चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है मशहूर ब्लौगर, सहज व्यक्तित्व वाले समीर जी. भारत से कनाडा, कनाडा से भारत - जीने की अदभुत क्षमता है इनमें. नेट एक नशा है लोगों के लिए... इनके लिए है नेट भारत से जुड़े रहने का सुखद एहसास. मित्रों की भरमार, हितैषियों की भरमार, चाहनेवालों की भरमार. बहुत कुछ कहती है इनकी कलम, आज इनकी पसंद के गीत बहुत कुछ कहेंगे ... ५ गीतों का चयन लाखों गीतों में से आसान तो नहीं ही है...आसान बस इतना है कि जो पहले कौंध जाए. कौंधने में भी जीवन के हर मुकाम हैं -

आइये बैठ जाइये घेरकर, सुनते हैं समीर जी की पसंद ..............


जिन्दगी के अलग अलग अनुभवों से गुजरते, समय बेसमय तरह तरह के आयाम उस वक्त विशेष से एक गीत को पसंद करवाते रहे और आज उन्हीं प्यारे नगमों को सुन उन वक्तों और लम्हों को याद करना दिल को खठ्ठी मीठी यादों की तराई में ले जाकर एक अहसास छोड़ जाता है. जिन्दगी यूँ भी कभी खुशी कभी गम है...मगर ये मुए गम, देर तक भुलाये नहीं भूलते और छा जाते हैं खुशियों भरी यादों पर कोहरा बन कर......यही तो खेल है असल जिन्दगी का. लीजिये सुनिए मेरी ५ पसंद -


शर्म आती है मगर आज ये कहना होगा...
अब हमें आपके पहलू में ही रहना होगा...


-फिल्म ’पड़ोसन’


जाईये आप कहाँ जायेंगे, ये नजर लौट के फ़िर आयेगी

दूर तक आप के पीछे, पीछे

मेरी आवाज चली जायेगी...

फ़िल्म :ये रात फिर ना आएगी


नीला आसमान सो गया.....
आँसूओं में रात भीगी....
फिल्म ’सिलसिला’ अमिताभ बच्चन


"युं ही तुम मुझसे बात करती हो
या कोई प्यार का इरादा है
, ....फिल्म ’सच्चा झूठा’ लता जी/रफी साः..


गंगा बहती हो क्यूँ....भूपेन हजारीका


-समीर लाल ’समीर’

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