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Tuesday, June 15, 2010

कहीं "मादनो" की मिठास से तो कहीं "मैं कौन हूँ" के मर्मभेदी सवालों से भरा है "मिथुन" के "लम्हा" का संगीत

ताज़ा सुर ताल २२/२०१०

विश्व दीपक - ’ताज़ा सुर ताल' में हम सभी का स्वागत करते हैं। तो सुजॊय जी, पिछले हफ़्ते कोई फ़िल्म देखी आपने?

सुजॊय - हाँ, 'राजनीति' देखी, लेकिन सच पूछिए तो निराशा ही हाथ लगी। कुछ लोगों को यह फ़िल्म पसंद आई, लेकिन मुझे तो फ़िल्म बहुत ही अवास्तविक लगी। सिर्फ़ बड़ी स्टारकास्ट के अलावा कुछ भी ख़ास बात नहीं थी। कहानी भी बेहद साधारण। ख़ैर, पसंद अपनी अपनी, ख़याल अपना अपना।

विश्व दीपक - पसंद की अगर बात है तो आज हम 'टी.एस.टी' में जिस फ़िल्म के गानें लेकर हाज़िर हुए हैं, मुझे ऐसा लगता है कि इस फ़िल्म के गानें लोगों को पसंद आने वाले हैं। आज ज़िक्र फ़िल्म 'लम्हा' के गीतों का।

सुजॊय - 'लम्हा' बण्टी वालिया व जसप्रीत सिंह वालिया की फ़िल्म है जिसमें मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं संजय दत्त, बिपाशा बासु, कुणाल कपूर, अनुपम खेर ने। निर्देशक हैं राहुल ढोलकिया। संगीत दिया है मिथुन ने, और यह फ़िल्म परदर्शित होने वाली है १६ जुलाई के दिन, यानी कि ठीक एक महीने बाद। जैसा समझ में आ रहा है कि कश्मीर के पार्श्व पर यह फ़िल्म आधारित है। इस फ़िल्म का म्युज़िक लौम्च किया गया है मुंबई के ओबेरॊय मॊल में।

विश्व दीपक - तो चलिए पहला गीत सुना जाए, और शायद यही गीत फ़िल्म का सब से पसंदीदा गीत बनने वाला है, "मादनो", यह गीत जिसे क्षितिज तारे और चिनमयी ने गाया है। बहुत ही ख़ूबसूरत गीत है, सुनते हैं। और हाँ, इस गीत की अवधि है ८ मिनट २६ सेकण्ड्स। वैसे आजकल गीतों की अवधि ५ मिनट से कम ही हो गई है, लेकिन इस फ़िल्म के अधिकतर गीत ६ मिनट से उपर की अवधि के हैं।

गीत: मादनो


सुजॊय - सच में, बेहद सुकूनदायक गीत था, जिसे दूसरे शब्दों में सॊफ़्ट रोमांटिक गीत कहते हैं। कम शब्दों में बस इतना ही कहेंगे कि ऐल्बम की एक अच्छी शुरुआत हुई है इस गीत से। मिथुन सच में एक रिफ़्रेशिंग अंदाज़ में वापस आए हैं। आपको यह भी बता दूँ कि "मादनो" एक कश्मीरी लफ़्ज़ है, जिसका अर्थ होता है "प्रिय"/"प्रेयसी"। इस शब्द को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिली थी महजूर के लिखे गाने "रोज़ रोज़ बोज़ में ज़ार मादनो" से , जिसे गाया था "ग़ुलाम हसन सोफ़ी" ने।

विश्व दीपक - क्योंकि मिथुन ने बहुत ज़्यादा काम नहीं किया है, इसलिए ज़ाहिर है कि लोगों को उनके बनाए गीतों की याद कम ही रहती है। तो जिन लोगों को मिथुन के गानें इस वक़्त याद नहीं आ रहे हैं, उनके लिए हम बता दे कि मिथुन की शुरुआत महेश भट्ट कैम्प में हुई थी फ़िल्म 'ज़हर' में जिसमें उन्होने "वो लम्हे, वो बातें कोई ना जाने" गीत आतिफ़ असलम से गवाया था। उसके बाद महेश भट्ट की ही एक और चर्चित फ़िल्म 'कलयुग' में भी उन्होने आतिफ़ की आवाज़ का इस्तेमाल किया था "अब तो आदत सी है मुझको जीने में" गीत में। इस तरह से 'बस एक पल' और 'अनवर' जैसी फ़िल्मों में भी उन्होने अतिथि संगीतकार की हैसीयत से एक आध गानें काम्पोज़ किए। इन फ़िल्मों ने भले हीं बहुत ज़्यादा व्यापार ना किया हो, लेकिन मिथुन का स्वरबद्ध हर एक गीत लोगों को पसंद आया, और मिथुन की प्रतिभा को हर किसी ने सराहा।

सुजॊय - और यकीनन 'लम्हा' का संगीत भी लोग खुले दिल से स्वीकार करेंगे। बहरहाल हम आगे बढ़ते हैं और सुनते हैं इस फ़िल्म का दूसरा गीत जिसे गाया है अरुण दागा और मोहम्मद इरफ़ान ने। इस गीत की अवधि है ६ मिनट ५५ सेकण्ड्स।

गीत: सलाम ज़िंदगी


विश्व दीपक - पहले गीत से एक ख़ूबसूरत शुरुआत होने के बाद इस दूसरे गीत में भी एक नयापन है। बच्चों द्वारा गाए कश्मीरी बोलों को सुन कर एक तरफ़ फ़िल्म 'यहाँ' की याद आ जाती है तो कभी 'परिनीता' का "कस्तो मजा है" की भी झलक दिख जाती है।

सुजॊय - "जिस चीज़ को पाने की थी उम्मीद खो चुकी, उस चीज़ को पाकर बहुत दिल को ख़ुशी हुई, सलाम ज़िंदगी सलाम ज़िंदगी" - ये हैं गीत के बोल, और जैसा कि हम देख रहे है यह एक आशावादी गीत है और इस तरह के गानें बहुत बनें हैं, लेकिन इस गीत के अंदाज़ में नयापन है। पार्श्व में मोहम्मद इरफ़ान के शास्त्रीय अंदाज़ में गायन ने गीत को और ज़्यादा असरदार बनाया है। पहले गीत की तरफ़ हो सकता है कि यह गीत उतना अपील ना करे, लेकिन जो भी है, अच्छा गीत है।

विश्व दीपक - अब तीसरे गीत की बारी, और इस बार स्वर पलाश सेन का। बहुत दिनों से उनकी आवाज़ सुनाई नहीं दी थी। इस गीत के साथ वो वापस लौट रहे हैं। अमिताभ वर्मा के ख़ूबसूरत बोलों को पलाश ने असरदार तरीके से ही निभाया है। संगीत में सॊफ़्ट रॊक का इस्तेमाल हुआ है। यह गीत है "मैं कौन हूँ" और इस गीत का म्युज़िक भी रिफ़्रेशिंग है। इसमें कोई शक़ नहीं कि मिथुन अपनी अलग पहचान बनाने की राह पर चल पड़े हैं। अवधि ७ मिनट ११ सेकण्ड्स।

गीत: मैं कौन हूँ


सुजॊय - आजकल गायक मिका को कई हिट गीत गाने के मौके मिल रहे हैं। या फिर युं कहिए कि मिका के गाए गानें हिट हो रहे हैं। भले ही कुछ लोग उन्हे पसंद ना करें और विवादों से भी घिरे रहे कुछ समय के लिए, लेकिन यह ध्यान देने योग्य बात है कि मिका के गाए गानें हिट हो जाते हैं। "दिल में बजी गिटार", "गणपत चल दारू ला", "मौजा ही मौजा", "इबन-ए-बतुता", और भी कई गानें हैं मिका के जो ख़ूब चले। फ़िल्म 'लम्हा' में भी मिथुन ने मिका से एक गीत गवाया है। दरसल यह पहले गीत "मादनो" का ही दूसरा वर्ज़न है, और मिका के साथ चिनमयी की आवाज़ भी शामिल है।

विश्व दीपक - ऐल्बम में इस गीत को "साजना" का शीर्षक दिया गया है। गीत को सुनने से पहले मिका का नाम देख कर मुझे लगा था कि कोई डान्स नंबर होगा, लेकिन काफ़ी आश्चर्य हुआ यह सुन कर कि मिका ने इस तरह का नर्मोनाज़ुक गीत गाया है। साधारणत: लोग मिका के जिस गायन शैली से वाक़ीफ़ हैं, उससे बिलकुल अलग हट के मिका लोगों को हैरत में डालने वाले हैं इस गीत के ज़रिए। यह तो भई वैसी ही बात है जैसी कि हाल ही में दलेर मेहन्दी ने फ़िल्म 'लाहौर' में "मुसाफ़िर" वाला गीत गाकर सब को चकित कर दिया था।

सुजॊय - इस पीढ़ी की अच्छी बात ही यह है कि वह प्रचलित धारा का रुख़ बदलने में विश्वास रखता है। पहले के ज़माने में जो गायक जिस तरह के गीत गाते थे, उनसे लगातार उसी तरह के गीत गवाए जाते थे। लेकिन आजकल कोशिश यही होती है हर कलाकार की कि कुछ नया किया जाए, नए प्रयोग किए जाएँ। चलिए यह गीत सुन लेते हैं। कुल ८ मिनट २५ सेकण्ड्स।

गीत: साजना


विश्व दीपक - अगला गीत क्षितिज तारे की आवाज़ मे है। कम से कम साज़ों का इस्तेमाल हुआ है। के.के के अंदाज़ का गाना है। वैसे क्षितिज ने कमाल का गाया है, लेकिन इसे के.के. की आवाज़ में सुन कर भी उतना ही अच्छा लगता ऐसा मेरा ख़याल है।

सुजॊय - विश्व दीपक जी, शायद आपने ध्यान न दिया हो कि क्षितिज मिथुन के पसंदीदा गायक हैं। मिथुन ने इनसे इस फिल्म से पहले भी कई सारे गीत गवाए हैं। मुझे "अनवर" का "तोसे नैना लागे" अभी भी याद है। क्या खूब गाया था "क्षितिज" और "शिल्पा राव" ने। जहाँ तक आज के इस गीत की बात है तो यह गीत पार्श्व संगीत की तरह प्रतीत होता है। सिचुएशनल गीत है और फ़िल्म को देखते हुए ही इस गीत का महत्व पता चल सकता है। ऒरकेस्ट्रेशन से एम.एम. क्रीम की याद भी आ जाती है, क्योंकि ग्रूप वायलिन्स का इस्तेमाल हुआ है।

गीत: ज़मीन-ओ-आसमान


विश्व दीपक - और अंतिम गीत में मिथुन ने अपनी गायकी का भी लोहा मनवाया है। आजकल 'पाक़ी-पॊप' संगीत का भी चलन है, और इस गीत में उसी की झलक है। याद है ना आपको मिथुन का गाया फ़िल्म 'दि ट्रेन' का गीत "वो अजनबी देखे जो दूर से"?

सुजॊय - अच्छा इसी फ़िल्म 'दि ट्रेन' में एक और गीत है "मौसम" जिसे लिखा है आतिफ़ असलम ने। तो ज़्यादातर लोग समझते हैं कि इस गीत को आतिफ़ ने ही गाया है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि इसे स्वरबद्ध किया और गाया मिथुन ने है। मिथुन ने फ़िल्म 'अगर' में गाया था "के बिन तेरे जीना नहीं" जिसे भी लोगों ने पसंद किया था। तो लीजिए आज एक लम्बे समय के बाद सुनिए मिथुन की आवाज़ और उनके साथ हैं मोहम्मद इरफ़ान।

गीत: रहमत ज़रा


"लम्हा" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****

मिथुन से हमेशा हीं उम्मीदें रहती है, और इस बार मिथुन उम्मीद पर खड़े उतरे हैं। चूँकि फिल्म कश्मीर पर आधारित है, इसलिए मिथुन को कहानी से भी सहायता मिली... अपनी तरह का संगीत देने में। फिल्म चाहे सफल या हो असफल , लेकिन हम लोगों से यही दरख्वास्त करेंगे कि गानों को नज़र-अंदाज़ न करें। एक बार जरूर सुनें, हमें यकीन है कि एक बार सुनने के बाद आप खुद-बखुद इन गानों से खुद को जुड़ा महसूस करेंगे। इन्हीं बातों के साथ अगली समीक्षा तक के लिए हम आपसे अलविदा कहते हैं।

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ६४- संगीतकार व गायक मिथुन के पिता एक जाने माने बैकग्राउण्ड स्कोरर थे जिन्होने २०० से उपर फ़िल्मों का पार्श संगीत तय्यार किया है। बताइए उनका नाम।

TST ट्रिविया # ६५- २००८ में मिथुन ने एक ऐसी फ़िल्म में संगीत दिया था जिस शीर्षक से एक हास्य फ़िल्म बनी थी जिसमें फ़ारूख़ शेख़ नायक थे और जिसमें येसुदास और हेमन्ती शुक्ला का गाया एक लोकप्रिय युगल गीत था।

TST ट्रिविया # ६६- आप एक मेडिकल डॊकटर हैं, और एक उम्दा गायक भी हैं, एक अभिनेता भी हैं। आपका जन्म बनारस में हुआ और पले बढ़े दिल्ली में। "फ़िल्हाल" दोस्तों, आप यह बताएँ कि हम किस शख़्स की बात कर र्हे हैं?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. हिमेश रेशम्मिया के पिता विपिन रेशम्मिया ने ख़य्याम साहब के ऒर्केस्ट्रा में काम करते हुए इस गीत की रिकार्डिंग में रीदम बॊक्स साज़ बजाया था।
२. 'दुल्हन हम ले जाएँगे' फ़िल्म का गीत "रात को आऊँगा मैं.... मुझसे शादी करोगी"।
३. सुधाकर शर्मा।

सीमा जी, इस बार आपने दो सवालों के जवाब दिए, जिनमें से एक हीं सही है। खैर.. इस बार के सवाल आपके सामने हैं।

Monday, January 18, 2010

"इश्किया" विशाल और गुलज़ार ने दिया नया संगीतमय तोहफा

ताज़ा सुर ताल ०३/ २०१०

सुजॊय - सजीव, यह इस साल के पहले महीने जनवरी का तीसरा 'ताज़ा सुर ताल' है। हमने अब तक इस महीने 'दुल्हा मिल गया', और वीर फ़िल्मों के संगीत की चर्चा की है। इनमें से 'दुल्हा मिल गया' रिलीज़ हो चुकी है, लेकिन फ़िल्म अब तक रफ़्तार नहीं पकड़ पाई है शाहरुख़ ख़ान के होने के बावजूद।

सजीव - और सुजॊय, इसी महीने 'प्यार इम्पॊसिबल' और 'चांस पे डांस' भी प्रदर्शित हो चुकी है, लेकिन बहुत ज़्यादा उम्मीदें इनमें भी नज़र नहीं आ रही। बता सकते हो क्या कारण हो सकता है?

सुजॊय - मुझे तो यही लगता है कि 'अवतार' और '३ इडियट्स' का नशा अभी तक लोगों के ज़हन से उतरा नहीं है। क्या होता है न कि हब कोई फ़िल्म बहुत ज़्यादा हिट हो जाती है, तो उसके ठीक बाद रिलीज़ होने वाली फ़िल्में कुछ हद तक उसकी चपेट में आ ही जाते हैं। अच्छा सजीव, इससे पहले कि हम आज के फ़िल्म की बातें शुरु करें, क्यों न आप जल्दी जल्दी 'प्यार इम्पॊसिबल' और 'चांस पे डांस' के म्युज़िक के बारे में हमारे पाठकों को एक हल्का सा आभास करा दें!

सजीव - ज़रूर! देखो सुजॊय, जहाँ तक 'चांस पे डांस' के म्युज़िक का सवाल है, करीब करीब सभी गानें वेस्टर्ण डांस और फ़्युज़न डांस को आधार बनाकर ही तैयार किए गए हैं। बहुत ज़्यादा फ़ूट टैपरिंग् नंबर्स हैं जो डिस्कोज़ में काफ़ी कामयाब रहेंगे। "ढैन टे नैन" के बाद अब बारी है "पें पें पेपें" के साथ झूमने की। लेकिन इस बार विशाल भारद्वाज नहीं, बल्कि प्रीतम हैं संगीतकार। इस गीत को लोग पसंद कर रहे हैं, शहनाई और पाश्चात्य संगीत का अच्छा फ़्युज़न है इस गीत में।

सुजॊय - सजीव, मेरे पास उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान साहब के शहनाई का एक कैसेट था किसी ज़माने में, उसमें यह धुन थी, और यह कैसेट उस ज़माने में शादियों के रिसेप्शन में अक्सर बजते रहते थे। अच्छा, 'प्यार इम्पॊसिबल' में "टेन ऒन टेन" और "प्यार इम्पॊसिबल" गीतों के अलावा तो कोई गीत सुनने को ही नहीं मिला कहीं पर। मेरा ख़याल है कि इस फ़िल्म के संगीत में चर्चा करने लायक कोई भी ख़ास बात नहीं है। उदय चोपड़ा और प्रियंका चोपड़ा की जोड़ी को भी लोग पचा नहीं पाए।

सजीव - ख़ैर, आओ अब आते हैं आज की फ़िल्म पर जिसके गानें हम सुनेंगे भी और चर्चा भी करेंगे। पहला गाना पहले सुनों और बताओ कि आज किस फ़िल्म के संगीत को लेकर मैं हाज़िर हुआ हूँ।

गीत: दिल तो बच्चा है...Dil to bachha hai (ishqiya)


सुजॊय - वाह वाह, आज आप 'इश्किया' लेकर आए हैं। मैं भी कल सोच ही रहा था कि कब हम इस फ़िल्म को शामिल करेंगे। बेहद ख़ास फ़िल्म होने वाली है यह। और जहाँ तक इस गीत का सवाल है, राहत फ़तेह अली ख़ान का गाया हुआ, एक अलग ही अंदाज़ का और लीग से हट कर गाना है। और हम इस मंच पर ख़ास तौर पे उन फ़िल्मों को ही शामिल करते हैं जिनके संगीत में कुछ अहम बात दिखाई दे, क्यों सजीव?

सजीव - बिल्कुल सही कहा। और पता है इस फ़िल्म के गानें क्यों लीग से हट के है? क्यों कि इन्हे लिखा है गुलज़ार साहब ने। उनके ग़ैर पारम्परिक लेखनी जारी है और "दिल तो बच्चा है जी" में भी उन्होने उसी अंदाज़ का परिचय दिया है।

सुजॊय - 'माचिस', 'ओमकारा', और 'कमीने' जैसी कामयाब फ़िल्मों के बाद गुलज़ार साहब और विशाल भारद्वाज एक बार फिर से गीतकार संगीतकार जोड़ी के रूप में इस फ़िल्म में सामने आए हैं। अच्छा अभी हाल के कुछ सालों में राहत फ़तेह अली ख़ान ने कई लोकप्रिय गानें गाए हैं, ख़ास कर प्रीतम और साजिद वाजिद जैसे संगीतकारों के लिए। अब देखिए इस फ़िल्म में विशाल ने भी उनसे गाना लिया और क्या ख़ूब सुफ़ीयाना अंदाज़ का प्रदर्शन किया है राहत साहब ने!

सजीव - इस गीत में जो गीटार का इस्तेमाल हुआ सुनाई देता है, उसमें एक स्पनिश फ़ील सी आई है, और विशाल साहब तो भली भांति जानते हैं कि किस तरह से भारतीय और वेस्टर्ण म्युज़िक को मिक्स किया जाता है। कुल मिलाकर एक बेहद फ़्रेश गीत सुना हमने। मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि यह गीत लोगों की जुबान से जल्द हटने वाला नहीं। हर कोई अपने दिल को बच्चा करार देने पर लगा है। चलो अब बारी है दूसरे गीत की। तो सुन लेते हैं यह गीत।

गीत: इब्न-ए-बतूता बगल में जूता...ibn-e-batuta (ishqkiya)


सुजॊय - फ़ुर्‍र्‍र्‍र‍र्‍र्‍ चुर्‍र्‍र्‍र‍र्‍र्‍ फ़ुर्‍र्‍र्‍र‍र्‍र्‍ चुर्‍र्‍र्‍र‍र्‍र्‍

सजीव - अरे अरे अरे ये क्या कर रहे हो?

सुजॊय - ओ हो सॊरी, गाना ख़तम हो गया? मैं तो बस गीत का मज़ा ले रहा था! बहुत दिनों के बाद कुछ अलग हट के गानें सुनने को मिले हैं ना तो इसलिए मैं उनमें बह सा गया था। जैसा संगीत भी मज़ेदार है, बोल तो और भी लाजवाब! गुलज़ार साहब अगैन ऐट हिज़ बेस्ट!

सजीव - बिल्कुल, और सुखविंदर सिंह और मिका की मस्ती भरी आवाज़ों ने और फ़ूट टैपरिंग् रीदम ने गाने को एक पेप्पी फ़ीलिंग् दी है। यह गीत ना हमें केवल किसी गाँव के खेतों की हरियाली में खींच ले जाते हैं, बल्कि एक हास्य रस का आभास भी कराते है। "थोड़ा आगे गतिरोधक है" जैसे बोल गुलज़ार साहब के कलम से ही निकलते रहे हैं।

सुजॊय - अब इससे पहले की अगले गीत की तरफ़ हम बढ़ें, आइए कुछ जानकारी हम अपने श्रोताओं व पाठकों को दे दें इस फ़िल्म के बारे में। विशाल भारद्वाज की फ़िल्म है और निर्देशक हैं अभिशेक चौबे। फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं नसीरुद्दिन शाह, अरशद वारसी और विद्या बालन प्रमुख। गीतकार संगीतकार तो बता ही चुके हैं। दरसल 'इश्किया' बॊलीवुड की कोई फ़ॊर्मुला फ़िल्म नहीं है। इस बात का अंदाज़ा तो कोई भी इस बात से लगा ही सकता है कि फ़िल्म में नसीरुद्दिन शाह मुख्य भूमिका में हैं। यह फ़िल्म है दो गैंग्स्टर्स (हूलीगन्स) और एक आकर्षक गाँव की लड़की की। अब इस फ़िल्म की कहानी के बारे में पहले से ही बताने की ग़ुस्ताख़ी मैं नहीं करूँगा, वरना अगली बार से पाठक हमें पढ़ना ही बंद कर देंगे।

सजीव- हाँ, और फ़िल्मों का मज़ा तो थियटर में जाकर ख़ुद देखने में ही है। चलो अब तीसरा गाना सुनते हैं रेखा भारद्वाज की आवाज़ में। और इसमें है गुलज़ार साहब की शायरी। इस ग़ज़ालनुमा गीत में रेखा जी ने एक बार फिर से साबित किया है कि आज की दौर में उनकी गायकी एक बहुत ही ख़ास मुक़ाम रखती है।

सुजॊय - यह गीत टूटे सपनों के बारे में है, जीवन के प्यास के बारे में है, क़रार के बारे में है। अब और ज़्यादा कहने की ज़रूरत नहीं, सीधे सुनते हैं इस गीत को।

गीत: अब मुझे कोई इंतज़ार कहाँ...Ab mujhe koi intezaar (ishiqiya)


सजीव- वाह! मज़ा आ गया है! और अब रेखा जी की ही आवाज़ में एक और गीत जो मेरा इस ऐल्बम का सब से फ़ेवरीट गीत है। "बड़ी धीरे जली रैना, धुआँ धुआँ नैना"। फ़िल्म 'वीर' में "कान्हा" गाने के बाद एक बार फिर से कुछ शास्त्रीय अंदाज़ में रेखा की आवाज़ इस गीत को एक अलग ही मुक़म तक लेके गई हैं। गीत तो वैसे फ़्युज़न ही है, बीट्स वेस्टर्ण है, लेकिन कुल मिलाकर यह गीत बिल्कुल इस मिट्टी से जुड़ा हुआ है। पर्क्युशन का सही इस्तेमाल किया है विशाल ने।

सुजॊय - एक और ख़ास बात क्या है इन सभी गीतों में पता है? ये गानें अपने आप में इतने सशक्त हैं कि इन्हे सुनते हुए हम इस बात को अपने दिमाग़ में भी लाए कि ये गानें किन कलाकारों पर फ़िल्माए गए होंगे! ये ख़ुद ही अपनी पहचान रखते हैं और ये किसी तरह के फ़िल्मांकन की मोहताज नहीं बनेंगे, ऐसा मेरा ख़याल है। अब लग रहा है कि २०१० के दशक में फ़िल्म संगीत में क्रांति की नई लहर आएगी और एक अलग ही सुरीला दौर एक बार फिर से जी उठेगा। चलिए सुनते हैं यह गीत।

गीत: बड़ी धीरे जली रैना...badi dhiire jali (ishiqiya)


"इश्किया" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****१/२
इस जोड़ी से हमेशा ही उम्मीद रहती है, दिल तो बच्चा है के बोल बेहद मजेदार हैं, और धुन में राज कपूर एरा का रेट्रो अंदाज़ खूब जमता है, इब्ने-बतूता एकदम तरोताज़ा है और जिस अंदाज़ से "फुर्र्र" बोला जाता है देर तक कानों में गूंजता रह जाता है, रेखा के गाये दोनों ही गीत गुलज़ार की चिर परिचित ग्लूमी अंदाज़ के हैं, बड़ी धीरे जली में लाइव वाध्यों का सुन्दर इस्तेमाल हुआ है, अन्तरो के बीच बजते संगीत में गजब का आकर्षण है, इन्हें सुनते हुए आप पूरा दिन बिता सकते हैं फिर भी ऊब नहीं पायेगें...इस वर्ष की बहुत अच्छी संगीतमयी शुरुआत हुई है इशिकिया और कुछ हद तक वीर के संगीत के चलते...इश्किया को आवाज़ ने दिए साढ़े चार तारों की रेटिंग...

अब पेश है आज के तीन सवाल-

TST ट्रिविया # 07-सन् १९६२ में सम्पूरण सिंह एक मशहूर फ़िम निर्माता-निर्देशक के सहायक बने थे। बताइए उस निर्माता-निर्देशक का नाम।

TST ट्रिविया # 08-"दिल में ऐसे संभलते हैं ग़म जैसे कोई ज़ेवर संभालता है। टूट गए, नाराज़ हो गए, अंगूठी उतारी, वापस कर दिए। कंगन उतारे, सात फेरों के साथ वापस कर दिए। पर बाक़ी ज़ेवर जो दिल में रख लिए उनका क्या होगा?" ये अल्फ़ाज़ कहे थे गुलज़ार साहब ने विविध भारती के जयमाला कार्यक्रम में। इन अल्फ़ाज़ों को पढ़कर आपको क्या लगता है कि गुलज़ार साहब ने इसके बाद कौन सा अपना गाना बजाया होगा?

TST ट्रिविया # 09-'जुर्म और सज़ा' तथा 'ज़िंदगी और तूफ़ान' जैसी फ़िल्मों को आप विशाल भारद्वाज के साथ कैसे जोड़ सकते हैं?


TST ट्रिविया में अब तक -
सीमा जी एक बार आगे बड़ी चली जा रही हैं ३ में से २ सही जवाब देकर आपने कमाए ४ और अंक, बधाई...

Friday, September 5, 2008

कहने को हासिल सारा जहाँ था...

दूसरे सत्र के १० वें गीत और उसके विडियो का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

चलते चलते हम संगीत के इस नए सत्र की दसवीं कड़ी तक पहुँच गए, अब तक के हमारे इस आयोजन को श्रोताओं ने जिस तरह प्यार दिया है, उससे हमारे हौसले निश्चित रूप से बुलंद हुए है. तभी शायद हम इस दसवें गीत के साथ एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं, आज ये नया गीत न सिर्फ़ आप सुन पाएंगे, बल्कि देख भी पाएंगे, यानि "खुशमिजाज़ मिट्टी" युग्म का पहला गीत है जो ऑडियो और विडियो दोनों रूपों में आज ओपन हो रहा है.


सुबोध साठे की आवाज़ से हमारे, युग्म के श्रोता बखूबी परिचित हैं, लेकिन अब तक उन्होंने दूसरे संगीतकारों, जैसे ऋषि एस और सुभोजित आदि के लिए अपनी आवाज़ दी है, पर हम आपको बता दें, सुबोध ख़ुद भी एक संगीतकार हैं और अपनी वेब साईट पर दो हिन्दी और एक मराठी एल्बम ( बतौर संगीतकार/ गायक ) लॉन्च कर चुके हैं, युग्म के लिए ये उनका पहला स्वरबद्ध गीत है, जाहिर है आवाज़ भी उनकी अपनी है, संगीत संयोजन में उनका साथ निभाया है, पुणे के चैतन्य अड़कर ने. गीतकार हैं युग्म के एक और प्रतिष्टित कवि, गौरव सोलंकी, जिनका अंदाज़ अपने आप में सबसे जुदा है, तो आनंद लें इस ताजातरीन प्रस्तुति का, और अपने विचार टिप्पणियों के माध्यम से हम तक अवश्य पहुंचायें.


गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -





To listen to this brand new song, please click on the player below -




With this 10th song of the season, we are creating a new history, as this is the first song, which we are opening in audio and video format together. Subodh who sung many song for us before, this time handle the tough job of composing also, along with singing in his mesmerizing voice.


Song penned by another reputed poet from yugm family, Gaurav Solonki, while Chaitanya Adhker from Pune, helped with music arrangement. So now after hearing the audio watch here the video of "khushmizaz mitti".We hope you like this effort, feel free to post your comments about the song and its video so that we can better ourselves in accordance with your suggestions.

Other credits - (Regarding Video)

Video Direction - Subodh Sathe.
Camera - Navendu thosar, Pankaj Makhe.
Editing - Manoj Pidadi

Video of "khushmizaz mitti"



Lyrics - गीत के बोल


खुशमिजाज मिट्टी
पहले उदास थी
चाँदनी की चिट्ठी
अँधेरे के पास थी
सुस्त सुस्त शामें थीं,
सुबहें उनींदी
सूरज के होठों को उजाले की प्यास थी
कहने को हासिल सारा जहाँ था
तुम जो नहीं थे तो कुछ भी कहाँ था...

इधर था मोहल्ला नींदों का लेकिन
रातों में पागल सोता नहीं था
अजब सी थी हालत दिल की भी मेरे
हँसता नहीं था, रोता नहीं था
कहने को हासिल सारा जहाँ था
तुम जो नहीं थे तो कुछ भी कहाँ था...

बहुत डोर थी, बहुत थी पतंगें
मगर उड़ती कैसे, नहीं थी उमंगें
ऐसा हुआ था, दिल में कुँआ था
पानी का साया भी डूबा हुआ था
कहने को हासिल सारा जहाँ था
तुम जो नहीं थे तो कुछ भी कहाँ था...

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis



SONG # 10, SEASON # 02, "KHUSHMIZAZ MITTI" (Khushmizas Mitti), OPENED ON 05/09/2008, AWAAZ, HIND YUGM.Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

ब्लॉग/वेबसाइट/ऑरकुट स्क्रैपबुक/माईस्पैस/फेसबुक में 'खुशमिज़ाज मिट्टी' का पोस्टर लगाकर नये कलाकारों को प्रोत्साहित कीजिए

Friday, August 29, 2008

इस बार, नज़रों के वार, आर या पार...

दूसरे सत्र के नवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

इन्टरनेट गठजोड़ का एक और ताज़ा उदाहरण है ये नया गीत, IIT खड़कपुर के छात्र ( आजकल पुणे में कार्यरत ), और हिंद युग्म के बेहद मशहूर कवि विश्व दीपक 'तनहा' ने अपना लिखा गीत भेजा, युग्म के सबसे युवा संगीतकार सुभोजित को, और जब गीत को आवाज़ दी दूर ब्रिस्टल (UK) में बैठे गायक बिस्वजीत ने, तो बना, सत्र का नवां गीत. "आवारा दिल", सुभोजित के ये दूसरा गीत है, वहीँ "जीत के गीत" गाते, बिस्वजीत अब युग्म के चेहेते गायक बन चुके हैं, तनहा का ये पहला गीत है, इस आयोजन में, जिनका कहना है -

"प्रेयसी सब को प्रिय होती है,परंतु जिसकी प्रेयसी हो हीं नहीं,उसके लिए तो प्रेयसी कुछ और हीं हो जाती है। यह गीत मुझ जैसे हीं एक अनजान प्रेमी की कहानी है,जो जानता नहीं कि उसकी प्रेयसी कहाँ है, लेकिन यह जानता है कि अगर उसकी प्रेयसी कहीं है तो वो उसका आग्रह अस्वीकार नहीं कर सकती। "सरकार" अपनी प्रजा का बुरा तो नहीं चाहेगी ना ;),वैसे भी वह दूर कैसे जा सकेगी, जबकि उस प्रेमी का हर कदम अपनी प्रेयसी की हीं ओर है।"

तो दोस्तों, इस दुआ के साथ की कि हमारे मित्र "तन्हा", की तनहायी जल्दी ही दूर हो, सुनते हैं ये ताज़ा तरीन गीत. आप अपने विचार टिप्पणियों के मध्यम से हम तक अवश्य पहुंचायें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -




Biswajith this time sung for the youngest composer of our Awaaz team, Subhojit, while the lyrics, penned for the first time by Vishwa Deepak 'Tanha', a well known poet from Hind Yugm.
This is what subhojit said about the song "This song, I composed is my best till date, according to me. Firstly, the lyrics was very good and romantic. Secondly, the music was made many times but ultimately this one was selected. Lastly Biswajit sung this song very well. Hope everyone will like this song".
Biswajith too hope the same here "When i heard Mere sarkaar for the first time, I fell in love with it. What really amazed me is the simplicity yet deep feelings the lyrics carries, hats off to Vishwa Deepakji. About the music of Shubhojit, I have only word - "Rocking".While singing this song, I had to really live the character and then it was easy for me to perform. I really enjoyed singing this beautiful song. It's always interesting to feel romantic and sing a song full of love and passion"
We hope our audience will also enjoy listening to this one, feel free to convey your thoughts to us through your valuable comments.

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सुभोजेतबिस्वजीत

Lyrics - गीत के बोल -

इस बार
मेरे सरकार
चलो तुम जिधर
चलूँ मैं यार।
इस बार
तेरी झंकार
सुनूँ मैं जिधर
मुड़ूँ मैं यार।

इस बार
नज़रों के वार,
आर या पार।

तुम ना जानो , इस शहर में
विश्व दीपक तन्हा


कोई भी तुम-सी नहीं,
बोल कर सब, कुछ ना कहे जो,
ऐसी कोई गुम-सी नहीं;
एक गज़ल है ये बदन तेरा,
तेरे रूख से जागे सवेरा।

मैं बेकरार , हूँ बेकरार,
इस बार
नज़रों के वार,
आर या पार।

जो कहे तू, तेरी खातिर,
सारी दुनिया छोड़ दूँ,
घर करूँ मैं, तेरे दिल में,
मेरे घर को तोड़ हीं दूँ;
होगा तब हीं ये प्यार जन्म,
एक रूह जो बन जाए हम।

मैं बेकरार , हूँ बेकरार,
इस बार
नज़रों के वार,
आर या पार।

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SONG # 09, SEASON # 02, "MERE SARKAAR", OPENED ON 29/08/2008, AWAAZ, HIND YUGM
Music @ Hind Yugm, where music is a passion

ब्लॉग/वेबसाइट/ऑरकुट स्क्रैपबुक/माईस्पैस/फेसबुक में 'मेरे सरकार' का पोस्टर लगाकर नये कलाकारों को प्रोत्साहित कीजिए

Friday, August 22, 2008

चले जाना कि रात अभी बाकी है...

दूसरे सत्र के आठवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

आठवीं पेशकश के रूप में हाज़िर है सत्र की दूसरी ग़ज़ल, "पहला सुर" में "ये ज़रूरी नही" ग़ज़ल गाकर और कविताओं का अपना स्वर देकर, रुपेश ऋषि, पहले ही एक जाना माना नाम बन चुके हैं युग्म के श्रोताओं के लिए. शायरा हैं एक बार फ़िर युग्म में बेहद सक्रिय शिवानी सिंह.

शिवानी मानती हैं, कि उनकी अपनी ग़ज़लों में ये ग़ज़ल उन्हें विशेषकर बहुत पसंद हैं, वहीँ रुपेश का भी कहना है -"शिवानी जी की ये ग़ज़ल मेरे लिए भी बहुत मायने रखती थी ,क्योंकि ये उनकी पसंदीदा ग़ज़ल थी और वो चाहती थी कि ये ग़ज़ल बहुत इत्मीनान के साथ गायी जाए, मुझे लगता है कि कुछ हद तक मैं, उनकी उम्मीद पर खरा उतर पाया हूँ, बाकी तो सुनने वाले ही बेहतर बता पाएंगे".

तो आनंद लें इस ग़ज़ल का और अपने विचारों से हमें अवगत करायें.

इस ताज़ी ग़ज़ल को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें-




The team of "ye zaroori nahi" from "pahla sur" is back again with a bang. Rupesh Rishi is once again excellent here with his rendering as well as composition, While Shivani Singh's lyrical expressions give it a romantic feel, so friends, just enjoy this beautiful ghazal here and let us know what you feel about it, feel free to give your valuable suggestions as your comments.

To listen to this brand new ghazal, click on the player below-



ग़ज़ल के बोल -


चले जाना कि रात अभी बाकी है,
ठहर जाना हर बात अभी बाकी है.

जिंदगी मेरी जो बीती तो युहीं बीत गयी,

जिंदगी मेरी जो बीती तो युहीं बीत गयी,
मगर पल दो पल का, साथ अभी बाकी है.
ठहर जाना....

कैसे भुलाऊं मैं उन चंद बातों को,
बेताब दिन वो मेरे बैचैन रातों को....उन चंद बातों को...

बीते दिनों की, याद बहुत आती है.
ठहर जाना...

मेरे ख्यालों में तुम रोज आते हो,
पलकों से मेरी क्यों नींदें चुराते हो,

तुम्हे भी मेरी याद कभी आती है...
ठहर जाना....


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SONG # 08, SEASON # 02, "CHALE JAANA", OPENED ON 22/08/2008, AWAAZ HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Friday, August 15, 2008

जीत के गीत संग, मनाएं जश्न -ऐ- आज़ादी

दूसरे सत्र के सातवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

सभी संगीत प्रेमियों को आज़ाद भारत की ६१ वीं सालगिरह मुबारक.

कुछ तो है बात जो, हस्ती मिटती नही हमारी,
सदियों रहा है दुश्मन, दौरे जहाँ हमारा.

महंगाई की मार से बेहाल, आतंकवादी हमलों से सहमे, सांप्रदायिक हिंसा से खौफ खाये, एक बेहद मुश्किल दौर से गुजरते आम आदमी के चेहरे पर तब मुस्कराहट लौट आती है जब दूर बीजिंग से ख़बर आती है, कि एक २४ वर्षीय युवा ने ओलंपिक में तिरंगा लहराया है. अपनी तमाम चिताएं, और परेशानियों को भूलकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर भारतीय फ़िर एक
बार भारतीय होने का गर्व महसूस करने लगता है. आज हमें एक नही, दो नही हजारों, करोड़ों अभिनव बिंद्रा चाहिए, जो असंख्य देश प्रेमियों की, अनगिनत कुर्बानियों की बदौलत मिले इस आज़ादी के तोहफे का मान रख सके. आज हिंद युग्म, देश के युवाओं से अपील करता है कि वो आगे बढ़ें और कमान संभालें, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें, अपने लिए सही राह चुनें, जीत के लक्ष्य को लेकर चलें, और अपने भीतर छुपे "अभिनव" को बाहर लेकर आयें. कुछ ऐसे ही भावों से ओत प्रेत है, हमारा आज के ये गीत भी. इस गीत के माध्यम से एक बार फ़िर हिंद युग्म अपनी एक और नई खोज, एक नई आवाज़ को विश्वमंच दे रहा हैं. ओडिसा की मिट्टी से उड़कर एक आवाज़ जो दूर UK में जाकर बस गयी थी,बिस्वजीत की,जिसे ढूंढ निकला हमारी टीम ने. संगीत है, ऋषि एस का और बोल लिखे हैं, सजीव सारथी ने. तो सुनिए ये ताज़ातरीन गीत और इस युवा गायक को अपना मार्गदर्शन देकर प्रोत्साहित कीजिये.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -




"Jeet Ke geet" is an inspirational song for people fighting for different purposes in life. This song is for motivating them to keep going ahead when they loose hopes at the times of failure. The uniqueness of the song is, it is a song of everyone as life is never complete without hurdles.

This has been rendered by Biswajit, the newest Hind Yugm discovery presently working in Bristol,UK for whom singing is his life. About making of this song, he states-
"The major challenge in this song was to have an inspirational voice while singing. So, I was remembering how my father used to inspire when I was not doing well in the exams. How he was sounding at that time. That really helped”.

Composer Rishi S. put the experience in these words -

कुछ गाने ऐसे होते हैं जो मैं अपने ख़ुद के लिये बनाता हूँ ."जीत के गीत" ऐसा ही एक गाना है. बिस्वजीत जी का यह पहला गाना है युग्म के लिए. मैंने तस्वीर बनाई तो, सजीव जी ने उसमें रंग भर दिए और बिस्वजीत जी की आवाज़ ने उसमें जान फूंक दी जैसे. अगर धुन बनाते समय यह पता होता कि इस गाने के बोल और आवाज़ इतनी बढ़िया होगी तो शायद इससे बेहतर कुछ बना लेता ! Thanks to Sajeev and Biswajith

Like earlier songs of Hind Yugm, this song also has been made through
the internet jamming ( This time it was between India, US and UK ). Hope this song is going to inspire the listeners to achieve their dreams.

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Lyrics - गीत के बोल

बहते बहते धारे,
कहते तुझसे सारे,
चलना है राही ये जीवन,
छाए बादल कारे,
डूबे चन्दा तारे,
डूबे न साथी तेरा मन,
साँस में आस के सुर,
दिल में मंजिल की धुन,
जीत के गीत गा रे ....
बहते बहते धारे,
कहते तुझसे सारे,
चलना है साथी ये जीवन,

माना राहें तेरी,
इस पल हैं अँधेरी,
ढलने ही वाली है ये रात,
बदलेगा ये मौसम,
कल ये सारा आलम,
समझेगा तेरे दिल की बात,
थम ना जाना, बीच सफर राही,
है किनारा, तेरा, आज भंवर साथी,
तूफानों से तू लड़ता चल...
बहते बहते....

पर्वत सा इरादा,
कर ले ख़ुद से वादा,
हारेगा न तू हौसला,
निश्चल तेरा मन हो,
सच्ची जो लगन हो,
तो फ़िर है क्या ये फासला,
मन के हारे, हार है साथी
मन के जीते, बढ़ते, जाते राही,
सच की डगर तू चलता चल...
बहते बहते...

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SONG # 07, SEASON # 02, "JEET KE GEET" OPENED ON 15/08/2008 @ HINDYUGM AWAAZ.
Music @ Hind Yung, where music is a passion

Friday, August 8, 2008

वो पीपल का पत्ता, है अब भी अकेला...

दूसरे सत्र के छठे गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

आज हम अपने संगीत प्रेमियों के समक्ष लेकर आए हैं, एक और ताज़ी आवाज़, सुदीप यशराज की, ये युग्म के संगीत इतिहास में दूसरी बार है, जब किसी भी गीत के समस्त पक्ष को एक ही कलाकार ने संभाला है. सुदीप ने यह गीत ख़ुद ही लिखा, स्वरबद्ध किया और गाया है, उनका संगीत ताजगी भरा है और हमें यकीं हैं कि नयेपन की कमी जो हमारे कुछ श्रोताओं को महसूस हुई है अब तक, वो इस गीत के साथ दूर हो जायेगी. तो सुनें ये ताज़ा गीत, और अपने विचारों से सुदीप का प्रोत्साहन/मार्गदर्शन करें.

गीत सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें.




This Friday, we are introducing another very talented upcoming composer and singer, Sudeep Yashraaj to you. Sudeep is here with a new genre of sound, this song has a fresh new feel to it. With a very new way of writing and singing we are sure that he will steal your heart with his "beinteha pyar...". So enjoy this brand new song and do leave your comments as well.

To listen to the song, please click on the player



Lyrics:

Vo o o o o, Beinteha pyar
Vo o o o o, Beinteha pyar
Dooba hua hun, barso se, teri aankho mein, hoooo

Sagar meri zindagi, zindagi hai
Mainey boond boond bhari hai apney aansu se

Meri majboori hai jo ab tak lab hai siley
Aur uspey ek tum jo ab tak chup ho khadey
Kya yeh zaarori hai, ke main izhar karun
Jaana tum samajh bhi jao mai tumsey pyar karun

Vo o o o o, Beinteha pyar
Vo o o o o, Beinteha pyar

Who bachpan ki galtiyaan, Tera woh rona
Mere dil ki dhadkan kaa har aansu pe khona
Woh pipal ke ped ke niche bhooke hi sona

Woh pipal ka patta hai ab bhi akela
Woh toofaan si baarish, Akeley hi jhela
Yehi zindagi hai, akele hi jeena, akele hi jaana

Wo o o o o o o
Vo o o o o, Beinteha pyar
Vo o o o o, Beinteha pyar

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SONG # 06, SEASON # 02, "Beintehaa pyaar...",OPENED ON 08/08/2008 ON AWAAZ,HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion

Friday, August 1, 2008

एक चांदनी का झरना बन जाती मैं...

दूसरे सत्र के पांचवे गीत का विश्व व्यापी उदघाटन आज.

दोस्तो,
प्रस्तुत है पांचवा गीत, संगीतकार हैं एक बार फ़िर ऋषि एस, जिनका भी संयोगवश ये पांचवा ही गीत है युग्म के संगीत संग्रह के लिए, साथ में हैं उनके जोडीदार गीतकार सजीव सारथी. ये नए सत्र का पहला फिमेल सोलो गीत है और आवाज़ है मानसी पिम्पले की, जो इससे पहले "बढ़े चलो" में अपनी उपस्थिति बखूबी दर्ज करा चुकी है. तो सुनें और बताएं कैसा लगा आपको ये ताज़ा गीत.

गीत को सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें



Friends, here we bring another fresh song made through the internet jamming, like many of our earlier songs. This is the first female solo song for this new season, rendered by Mansi Pimpley, composed by Rishi.S and written by Sajeev Sarathie. "Mein nadi..".is essentially a "feel good" song. A song that is intended to make the listener feel natural and playful about life. It reminds people to be happy in life. It reflects this mood through the character of a playful girl. So guys listen to this brand new song and have your comments as well.

To listen to the song, please click on the player



गीत के बोल - ( Lyrics )

मैं नदी , मैं पवन, हूँ धरा या गगन,
मैं बहूँ या उडूं, बेखुदी में मगन,
मैं यहाँ , मैं वहाँ, मुसाफिर मेरा मन...
मैं नदी.....

शाखों से झांकूं,
किरणों की मानिंद,
भोर की धुन में बाजूं,
बांसुरी सी,
मोरनी बन के नाचूं,
कोयल की तान में गाऊं,
देख बदरी मैं झूमूं,
बावरी सी,
महकी महकी,
है सारी गलियाँ,
छू लूँ मैं तो,
खिलती है कलियाँ,

खोले झरोखे अम्बर,
तारों के सारे मंज़र,
बस जाता चन्दा भी यूं,
मेरी आँखों के अंदर,
एक चांदनी का झरना
बन जाती मैं,
मुझसे बातें करती हैं रातें,
देकर सपनों की सौगातें,



चित्र (बायें से दायें) - ऋषि एस, सजीव सारथी, मानसी पिम्पले

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SONG # 05, SEASON # 02, "MAIN NADI...", OPENED ON AWAAZ, HINDYUGM ON 01/08/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Friday, July 25, 2008

तेरे चेहरे पे, एक खामोशी नज़र आती है...

आवाज़ पर संगीत के दूसरे सत्र के, चौथे गीत का विश्व व्यापी उदघाटन आज.
संगीत प्रेमियो,
इस शुक्रवार, बारी है एक और नए गीत की, और एक बार फ़िर संगीत पटल पर दस्तक दे रहे हैं एक और युवा संगीतकार अनुरूप, जो अपने साथ लेकर आए हैं, ग़ज़ल-गायन में तेज़ी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराती एक आवाज़ निशांत अक्षर . ग़ज़लकार है युग्म के छायाचित्रकार कवि मनुज मेहता.
"पहला सुर" की दो ग़ज़लों के कलमकार, निखिल आनंद गिरि का आल इंडिया रेडियो पर साक्षात्कार सुनकर, अनुरूप ने युग्म से जुड़ने की इच्छा जताई और शुरू हुआ संगीत का एक नया सिलसिला. मनुज के बोल और निशांत से स्वर मिलें तो बनी, नए सत्र की यह पहली ग़ज़ल -"तेरे चेहरे पे". तो दोस्तो, आनंद लीजिये इस ताजातरीन प्रस्तुति का, और अपनी मूल्यवान टिप्पणियों से इस नई टीम का मार्गदर्शन / प्रोत्साहन करें.

ग़ज़ल को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -



Hind Yugm, once again proudly present another, very young ( just 18 yrs old ) and talented composer, Anuroop from New Delhi, for whom composing ghazal is just natural, this ghazal here has been made keeping in mind the intricacies of a beloved away from his loved one due to some mistake which had taken place in their life. Penned by Maunj Mehta, and rendered by a very talented upcoming ghazal singer Nishant Akshar, enjoy this very first ghazal of this new season, and do leave your valuable comments, and help this new team to perform even better in the coming assignments.

To listen to this ghazal, click on the player below -



ग़ज़ल के बोल -

तेरे चेहरे पे, एक खामोशी नज़र आती है,
जिंदगी और भी, यास अफ्रीं नज़र आती है,

जितना भी रूठता हूँ जिंदगी से मैं,
उतना ही ये मुझे मनाती नज़र आती है.

तुम्ही बताओ कहाँ ढूँढू, किसी आगाह को,
हर तरफ़ मुझको, गर्द -ऐ-राह नज़र आती है.

LYRICS -

Tere chehre pe ek khamoshi nazar aati hai,
zindagi aur bhi *yaas aafreen nazar aati hai.


Jitna bhi ruthta hoon zindagi se main,
utna hi yeh, mujhey manati nazar aati hai.



tumhi batao, kahan dhundoon kisi *aagah ko,
har taraf mujhko gard-e-raah hi nazar aati hai.


*Yaas Aafreen- Na-umeed se bhari hui
*Aagah- Friend/ loved one

चित्र- अनुरूप (ऊपर), निशांत अक्षर (मध्य) और मनुज मेहता (नीचे)

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SONG # 04, SEASON # 02, " Tere Chehare Pe ", opened on 25/07/2008 on Awaaz, Hind Yugm.
Music @ Hind Yugm, where music is a passion

Friday, July 18, 2008

कोलकत्ता से उड़ता उड़ता आया " आवारा दिल " - दूसरे सत्र के, तीसरे नए गीत का, विश्व व्यापी उदघाटन आज

इस शुक्रवार आवाज़ पर हैं, १६ वर्षीय युवा संगीतकार. कोलकत्ता के सुभोजेत का, स्वरबद्ध किया गीत " आवारा दिल ", यह गीत भी बिल्कुल वैसे ही बना है, जैसे अब तक, युग्म के अधिकतर गीत बने हैं, अर्थात अलग अलग, तीन शहरों में बैठे गीतकार, संगीतकार और गायक ने, व्यक्तिगत रूप से बिना मिले, इन्टरनेट के माध्यम से टीम बना कर मुक्कमल किया है, यह गीत भी. यहाँ कोलकत्ता के सुभोजेत को साथ मिला, दिल्ली के गीतकार सजीव सारथी का, और नागपुर के गायक, सुबोध साठे का. सजीव का युग्म के लिए यह आठवां सोलो गीत है, और सुबोध ने यहाँ चौथी बार अपनी गायकी का जौहर दिखाया है.
अपना पहला गीत सुभोजेत ने, उन आवारा क़दमों को समर्पित किया हैं, जो जीवन नाम के सफर में, हर पल को भरपूर जीते हैं, सुख-दुःख, धूप-छांव, हर मुकाम से हँस कर गुजरते हैं, और जहाँ जाते हैं बस खुशियाँ बाँटते हैं.
तो सुनिए मस्ती भरा, यह गीत, और अपनी बेबाक समीक्षा से इस टीम का मार्गदर्शन करें.

"आवारा दिल" को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें.



This 16 years old composer, from Dumdum Cantt, Kolkatta, is the youngest of the bunch we have, Subhojet is really a found, for Hind Yugm. teamed with Sajeev Sarathie and Subodh Sathe, here we bring his first ever song for you - Awaara Dil. This song is all about the fullness of life, where one enjoy every moment, in all its beauty, without complaining, but singing and dreaming,all the time, with all the hopes in heart and a smile on face, even while walking through, the tough roads of life journey.
So friends, enjoy this song, and leave your fair comments, we hope that you will surely enjoy this presentation.

To listen to "Awaara Dil" please click on the player



चित्र - संगीतकार सुभोजेत (ऊपर), और अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करते सुबोध साठे (नीचे )

गीत के बोल - आवारा दिल

उड़ता उड़ता मैं फिरूं दीवाना,
ख़ुद से, जग से, सब से बेगाना,
ये हवा ये फिजा, ये हवा ये फिजा,
है ये साथी मेरे, हमसफ़र-
है ये साथी मेरे, हमसफ़र-
आवारा दिल .... आवारा दिल....
आवारा दिल....आवारा दिल....

धूप में छाँव में ,
चलूँ सदा झूमता,
और बरसातों में,
फिरता हूँ भीगता,
साहिल की रेत पे बैठ कभी.
आती जाती लहरों को ताकता रहूँ,
मस्त बहारों में लेट कभी,
भंवरों के गीतों की शोखी सुनूँ,
आवारा दिल.....

रास्तों पे बेवजह,
ढूंडू मैं उसका पता,
जाने किस मोड़ पर,
मिले वो सुबह,
पलकों पे सपनों की झालर लिए,
आशा के रंगों में ढलता रहूँ,
जन्मों की चाहत को मन में लिए,
पथिरीली राहों पे चलता चलूँ,
आवारा दिल....

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




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SONG # 03, SEASON # 02, " AWAARA DIL " ( RELEASED ON 18/07/2008 ) @ AWAAZ (PODCAST)
MUSIC @ HIND YUGM, WHERE MUSIC IS A PASSION

Tuesday, July 8, 2008

ए आर रहमान और हरिहरन के दीवाने हैं - निखिल

आवाज़ पर इस हफ्ते के सितारे हैं, निखिल वर्गीस राजन. १७ वर्षीया निखिल मूल रूप से एक संगीतकार और गायक हैं, जिनकी मात्रभाषा मलयालम है. की बोर्ड और तबला इनका प्रिय वाद्य-यन्त्र है, अरूधंती राय की पुस्तकें पढ़ना इन्हें पसंद हैं और क्रिकेट और फुटबाल खेलने का भी शौक रखते हैं, संगीतकारों/गायकों में इन्हें ए आर रहमान और हरिहरन सबसे अधिक भाते हैं, केरल के कोठाराकरा में इनका घर है, मगर आज कल अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं कोयम्बतूर, तमिल नाडू के करुणया महाविद्यालय से, इनका पहला गीत जो इन्होने युग्म के लिए किया वो है " संगीत दिलों का उत्सव है ", जिसमें इनका काम बेहद सराहा गया, जब उनसे हिंद युग्म की टीम ने पूछा कि कैसा रहा, उनका अनुभव हिंद युग्म के लिए इस गीत को बनाने में तो उन्होंने अपनी बात इस तरह रखी, पढ़िए उन्हीं की ज़ुबानी -


hi, namaskaar…..I am Nikhil Varghese Rajan, the composer of this song. I am doing my B-Tech in Karunya Univesity ,Coimbatore.I am very happy that you guys gave a good response for my first song. My whole hearted thanks for this encouragement. I am very proud to say that all those involved in this song are amateurs. First of all I am thanking Sajeev Sarathie(Delhi) for giving an awesome lyrics for my song and for giving me an opportunity to put my music through this blog. Through Charles Finny I met Sajeev bhai through Orkut from a community of lyricists and we asked him to write lyrics for me. He did that and send us a beautiful lyrics which is the main stanza of this song and within one day I composed a tone for this lyrics and send to him. He liked the tone and send us a full fledged lyrics of this song. He gave us an opportunity to submit this song to this blog. I faced a lot of barrier before creating this song in to a full fledged one. I had only a little time to spend for this song due to my University exams, internals and projects and also I have only less support from my parents because they were afraid that whether it will affect in my studies. I faced a difficulty in finding a Female singer who is having a good pronunciation in Hindi in south India. Atlast we met Mithila Kanugo, through our guitarist Vishal. She was enough talented than what I expected and also one drawback was that she got only a little time to practice this song. From this short time practice she made it awesome and still I believe that she could make her part more better if she had got enough time to practice. Her mother Rohini aunty who is also a good singer ,gave a very good guidance during the recording. It took almost five days to complete this song. I got an excellent support from my friends especially from my best friend Mathew Livingston who helped me a lot during recording and who is the sound engineer of this song gave a good guidance in composing the track of this song and Charles made a good role in orchestration of this music, Vishal is the guitarist of this song and he helped for composing guitar chords. The percussion instrument Tabla was handled by me. With the help of these guys I completed my song successfully. I humbly request everybody's support and cooperation for my future contribution to the music. I once again thank u all for giving me a good response for my song. For any further information please may contact through phone or e-mail.

Phone.No- +919790604549 (Tamil Nadu)
+919961571294 (Kerela)

E-Mail : niky2k2004enator@gmail.com
niky2k2004@rediffmail.com

so guys, this was nikhil for you, please listen to his song here and have your comments as well...

सुनिए एक बार फ़िर " संगीत दिलों का उत्सव है " और इस उभरते हुए संगीतकार को अपना प्रोत्साहन दें....

Friday, July 4, 2008

संगीत दिलों का उत्सव है - संगीत के नए सत्र की पहली सौगात

मित्रों,
आज से आवाज़ पर शुरू हो रहा है, संगीत का एक नया उत्सव,"पहला सुर" के कामियाब प्रयोग के बाद संगीत का ये नया सत्र शुरू करते हुए, हिंद युग्म उम्मीद करता है कि इस सत्र में प्रस्तुत होने वाले सभी गीत आपको और अधिक पसंद आयेंगे, जो संगीतकार हमारे साथ पहली एल्बम में जुड़े थे उनके भी संगीत में आप गजब की परिपक्वता देंखेंगे और उससे भी ज्यादा खुशी की बात यह है कि जो नए संगीतकार इस बार जुड़े हैं, सभी नौजवान हैं और बेहद गुणी हैं अपने फन में.
संयोगवश जिस गीत को हमने इस सत्र की शुरुवात करने के लिए चुना है, वो भी दस्तक है एक नए युवा संगीतकार जोड़ी की, जो दूर केरल के दो प्रान्तों में रहते हैं और कोयम्बतूर के करुणया महाविद्यालय से b-tech की पढ़ाई कर रहे हैं, इनके नाम है निखिल और चार्ल्स, निखिल के संगीत में जहाँ बारिश में भीगी मिटटी की सौंधी सौंधी महक मिलेगी आपको, तो चार्ल्स के गायन में किसी निर्झर सा प्रवाह, एक और आवाज़ है इस गीत में, गायिका मिथिला की, जिन्होंने बाखूबी साथ दिया है इस जोड़ी का, इस गीत को और खूबसूरत बनाने में, सजीव सारथी के लिखे, इस गीत को अपने एक दोस्त के होम स्टूडियो में दो दिन लगातार १०- १० घंटे काम कर मुक्कमल किया है-निखिल और चार्ल्स की टीम ने, इनकी मेहनत कहाँ तक सफल हुई है, सुन कर बताएं, और कोई सुधार की गंजाइश बता कर आप इन्हें मार्गदर्शन दें, तो प्रस्तुत है समीक्षा के लिए, आपके समुख हिंद युग्म का यह पहला नज़राना

Friends,
After the glorious success of Hind Yugm's debut album Pahla Sur, we are happy to announce the beginning of a new season of music @ Hindyugm, Where Music is a Passion, we wish all our existing and new composers a very happy music year ahead.
From today onwards,till December 31st, we will release a new song every Friday, so all you music lovers, mark your Fridays as music Fridays, from now on. We will surly give your ears a grand musical treat.

We are proudly opening this season from a song called " Sangeet Dilon Ka Utsav Hai ", composed by a composer duo from south Nikhil and Charles, and penned by Sajeev Sarathie, this song speaks about the magic of music,which make our lives so colourful. This song completed after 10-10 long hours of jammng for 2 complete days by the team, and very beautifully rendered by Charles and Mithila. So enjoy this soulful melody and leave your comments. so friends, Here comes THE FIRST SONG OF THE SEASON for you – LISTEN AND ENJOY



गीत के बोल -

जब सुर खनकते हैं,
बेजान साजों से,
आवाज़ के पंखों पर उड़ने लगता है कोई गीत जब,
झूम झूम लहराते हैं ये दिल क्योंकि..
संगीत दिलों का उत्सव है,
संगीत दिलों का उत्सव है...उत्सव है.....

गीतों के रंग न हो तो, नीरस है ये जीवन,
सरगम के सुर न छिड़े तो, सूना है मन आंगन,
हवाओं में संगीत है,
लहरों में संगीत है,
संगीत है बारिश की रिमझिम में,
धड़कन में संगीत है,
सांसों में संगीत है,
संगीत है कुदरत के कण कण में,
जब ताल से उठे,
दिल की सदा कोई,
हौले से ख्वाबों को सहला जाता है कोई गीत जब,
घूम घूम बलखाते हैं ये दिल क्योंकि...
संगीत दिलों का उत्सव है,
संगीत दिलों का उत्सव है...उत्सव है.....

गहरे ये रिश्ते हैं, संग रोते हँसते हैं,
सुख दुःख के सब मौसम, गीतों में बसते हैं,
कभी गूंजे बांसुरी,
वीणा की धुन कभी,
कभी ढोल मंजीरे बजते हैं,
तबले की थाप पर,
कभी नाचता है मन,
कभी सुर सितार के बहते हैं,
जब ताल से उठे,
दिल की सदा कोई,
धीमे से यादों को धड़का जाता है कोई गीत जब,
साथ साथ गुनुगुनाते हैं ये दिल क्योंकि ...
संगीत दिलों का उत्सव है,
संगीत दिलों का उत्सव है...उत्सव है.....

जब सुर खनकते हैं.....

Lyrics

jab sur khankte hain,
bezaan sajon se,
awaaz ke pankhon par udne lagta hai koi geet jab,
jhoom jhoom lehrate hain ye dil kyonki...
sangeet dilon ka utsav hai,
sangeet dilon ka utsav hai.... utsav hai....

geeton ke rang na ho to, neeras hai ye jeevan,
sargam ke sur na chide to, sunaa hai man aangan,
hawavon men sangeet hai,
lehron men sangeet hai,
sangeet hai barish ki rimjhim men,
dhadkan men sangeet hai,
sanson men sangeet hai,
sangeet hai kudrat ke kan kan men,
jab taal se uthe,
dil ki sada koi,
haule se khwabon ko sahla jaata hai koi geet jab,
ghoom ghoom balkhate hain ye dil kyonki...
sangeet dilon ka utsav hai,
sangeet dilon ka utsav hai.... utsav hai....


gahre ye rishte hain, sang rote hanste hain,
sukh dukh ke sab mausam, geeton men baste hain,
kabhi gunje bansuri,
veena ki dhun kabhi,
kabhi dhol manjeere bajte hain,
tablee ki thaap par,
kabhi nachta hai man,
kabhi sur sitaar ke bahte hain,
jab taal se uthe,
dil ki sada koi,
dheeme se yadon ko dhadka jaata hai koi geet jab,
saath saath gungunate hain ye dil kyonki...
sangeet dilon ka utsav hai,
sangeet dilon ka utsav hai.... utsav hai....

jab sur khankte hain......


You can download the song according to your prefrence from here -

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SANGEET DILON KA UTSAV HAI

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