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Thursday, October 22, 2009

शुक्रान अल्लाह वल हम्दुल्लाह....खुदा की नेमतों पर झुके सोनू निगम, श्रेया और सलीम के स्वर

ताजा सुर ताल TST (32)

दोस्तों, ताजा सुर ताल यानी TST पर आपके लिए है एक ख़ास मौका और एक नयी चुनौती भी. TST के हर एपिसोड में आपके लिए होंगें तीन नए गीत. और हर गीत के बाद हम आपको देंगें एक ट्रिविया यानी हर एपिसोड में होंगें ३ ट्रिविया, हर ट्रिविया के सही जवाब देने वाले हर पहले श्रोता की मिलेंगें 2 अंक. ये प्रतियोगिता दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक चलेगी, यानी 5 अक्टूबर से 14 दिसम्बर तक, यानी TST के 40 वें एपिसोड तक. जिसके समापन पर जिस श्रोता के होंगें सबसे अधिक अंक, वो चुनेगा आवाज़ की वार्षिक गीतमाला के 60 गीतों में से पहली 10 पायदानों पर बजने वाले गीत. इसके अलावा आवाज़ पर उस विजेता का एक ख़ास इंटरव्यू भी होगा जिसमें उनके संगीत और उनकी पसंद आदि पर विस्तार से चर्चा होगी. तो दोस्तों कमर कस लीजिये खेलने के लिए ये नया खेल- "कौन बनेगा TST ट्रिविया का सिकंदर"

TST ट्रिविया प्रतियोगिता में अब तक-

पिछले एपिसोड में फिर एक बार सीमा जी छाई रही, पर जवाब बस दो ही सही दिए उन्होंने, खैर आपका स्कोर हुआ 20. यदि किसी ने तीसरे जवाब के लिए कोशिश किया होता तो यकीनन दो अंक मिल सकते थे, तीसरे सवाल का सही जवाब है गीतकार प्रवीण भारद्वाज. अगले 9 एपिसोड में 18 सवाल और आयेंगें आपके सामने, उसके बाद विजेता कौन होगा ये तो हम अभी से नहीं कह सकते, पर ये तय है कि सीमा जी को टक्कर देना अब वाकई बहुत मुश्किल होगा. पर चुनौतियाँ आपको मजबूत बनाती है, तो कमर कसिये इन नयी चुनौतियों के लिए

सुजॉय - सजीव, आज TST में तरोताज़ा क्या सुनवाने जा रहे हैं?

सजीव - धर्मा प्रोडक्शन्स् की नवीन प्रस्तुति 'क़ुर्बान' फ़िल्म के गीत से आज हम शुरुआत कर रहे हैं। करण जोहर निर्मित, रेन्सिल डी'सिल्वा निर्देशित इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं सैफ़ अली ख़ान और करीना कपूर।

सुजॉय - मैने सुना है इस फ़िल्म की कहानी जिहाद पर आधारित है। आप ने सुना है कुछ इस बारे में?

सजीव - सुना तो मैने भी यही है। सैफ ने एक ताजा बयान में कहा है कि एक मुसलमान हो कर इस फिल्म को करने में उन्हें गर्व है और उनके साथ करीना का होना भी लोगों में दिलचस्पी पैदा करेगा. फ़िल्म के संगीत में सुफ़ियाना अंदाज़ है। पता है कौन हैं इस फ़िल्म के संगीतकार?

सुजॉय - हाँ, सलीम-सुलेमान की जोड़ी ने संगीत दिया है। इस फ़िल्म के कुल पाँच गीतों में से आज कौन सा गीत आप लेकर आए हैं?

सजीव - आज जो गीत हम सुनेंगे वो मेरे ख़याल से इस ऐल्बम का सब से अच्छा गीत है, "शुक्रां अल्लाह"। इस गीत को सुनते हुए तुम्हे फ़िल्म 'फ़ना' के गीत "सुभानल्लाह सुभानल्लाह" की शायद याद आए।

सुजॉय - एक मिनट सजीव, 'फ़ना' का बैकग्राउंड म्युज़िक सलीम-सुलेमान ने ही बनाया था न?

सजीव - बिल्कुल, और मैने तो यह भी सुना है कि "सुभानल्लाह" वाली धुन भी इसी जोड़ी ने बनाई थी जिसे जतिन-ललित ने इस्तेमाल की अपनी धुन "चाँद सिफ़ारिश जो करता हमारी" के साथ। यानी कि "सुभानल्लाह" वाली धुन सलीम-सुलेमान की थी और "चाँद सिफ़ारिश" वाली जगह जतीन-ललित की।

सुजॉय - सोनू निगम, श्रेया घोषाल और सलीम मर्चैंट ने गाया है 'कुर्बान' का यह गीत। ऐज़ युज़ुयल सोनू और श्रेया के नर्म और मासूम अंदाज़ इस गीत में भी सुनाई देती है। और सलीम ने इस गीत में जिस तरह से "शुक्रन अल्लाह" वाली जगह गाया है, एक पाक़ समां सा बंध जाता है।

सजीव - और गीतकार निरंजन अय्यंगर ने लिखा भी है बढ़िया इस गीत को। तो चलो सुनते हैं यह गीत

सुजॉय - चलते चलते बता दें कि "शुक्रां अल्लाह वल हम्दुल्लाह" का मतलब है है- खुदा तेरा शुक्रिया खुदा तेरा करम है....और श्रेय घोषाल अवश्य ही इन दिनों ये मंत्र दोहरा रही होंगी, कल राष्ट्रपति भवन में उन्हें तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ गायिका का सम्मान दिया गया, और उन्होंने वहां "ये इश्क हाय" गाकर सबको मन्त्र मुग्ध कर दिया, श्रेया को बधाई देते हुए सुनें उनका ये नया गीत.

शुक्रान अल्लाह (कुर्बान)
आवाज़ रेटिंग - ****1/2



TST ट्रिविया # 16- तुलिप जोशी अभिनीत किस "रियलिस्टिक" फिल्म में सलीम सुलेमान ने संगीत दिया था.?

सुजॉय - वाक़ई बहुत अच्छा गाना था। अब किस गीत की बारी?

सजीव - इस हफ़्ते रिलीज़ हुई है फ़िल्म 'ब्लू'। काफ़ी उत्सुकता से लोग इस फ़िल्म का इंतेज़ार कर रहे थे। तो क्यों ना इसी फ़िल्म से एक और गीत हम अपने श्रोताओं को सुनवाएँ!

सुजॉय - बिल्कुल सुनवाते हैं। लेकिन पहले यह बताइए कि आप ने यह फ़िल्म देखी है? मैने तो नहीं अभी नहीं देखी लेकिन मेरे दफ़्तर के दोस्तों ने देखी है और अफ़सोस की बात है कि लोगों को फ़िल्म कुछ ख़ास पसंद नहीं आ रही है।

सजीव - मैंने भी प्रशेन की समीक्षा पढ़ी तो मन ही नहीं हुआ फिल्म देखने का. यह वाक़ई अफ़सोस की बात है! बॉलीवुड की सब से महँगी फ़िल्म अगर पिट जाए तो अफ़सोस के साथ साथ हैरत भी होती है। लेकिन इस तरफ़ के हादसे पहले भी हुए हैं। याद है ९० के दशक में अनिल कपूर और श्रीदेवी की एक फ़िल्म आयी थी 'रूप की रानी चोरों का राजा', जो उस ज़माने की सब से महँगी फ़िल्म थी और कितनी बुरी से पिटी थी?

सुजॉय - बिल्कुल याद है सजीव। लेकिन अभी 'ब्लू' के बारे में किसी निश्कर्ष पर पहुँचना जल्द बाज़ी होगी। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि फ़िल्म दूसरे या तीसरे सप्ताह से तेज़ी पकड़ लेती है और फिर हिट हो जाती है। वैसे खबर है कि इस फिल्म की टीम ने ब्लू का दूसरा भाग बनाने की योजना को भी अंतिम रूप दे दिया है, इसमें ज्यादा खतरनाक शार्क मछलियाँ होंगी, यानी बजट भी और खतरनाक... ख़ैर, अब बताइए कौन सा गीत हम बजा रहे हैं?

सजीव - यह है विजय प्रकाश और श्रेया घोषाल का गाया "फ़िक़राना होके हम जीयें"। ए. आर. रहमान ने काफ़ी इलेक्ट्रॊनिक्स का इस्तेमाल किया है।

सुजॉय - गाना बुरा नहीं है, लेकिन मुझे कहीं ऐसा लगता है कि ज़्यादा इलेक्ट्रॊनिक्स के इस्तेमाल से गीत में शार्पनेस तो आई है लेकिन गोलाई कहीं दूर चली गई है। बहुत ज़्यादा कृत्रिम सुनाई देता है।

सजीव - तुम्हारी बात सही है, लेकिन एक नयापन भी है गीत में। रहमान ने कम से कम अपने आप को उस वृत्त से बाहर निकालना चाहा जिसके अंदर वो कुछ सालों से फँस गए थे और एक ही तरह का संगीत उनकी तरफ़ से आ रहे थे। पर वाद्यों का शोर इस हद तक हावी है कि कई जगह तो शब्द समझ ही नहीं आते. वैसे धुन ऐसी है कि आप गुनगुना सकें.

सुजॉय - तो चलिए सुनते हैं यह गीत।

फिकराना (ब्लू)
आवाज़ रेटिंग - ***



TST ट्रिविया # 17- किस संगीत कंपनी ने "ब्लू" का एल्बम रीलिस किया है ?

सुजॉय - और अब आज के तीसरे और अंतिम गीत की बारी। कौन सा गीत है?

सजीव - फ़िल्म 'लंदन ड्रीम्स' के चार गानें हमने सुने हैं, आज इसी फ़िल्म के पाँचवे गीत की बारी। इस फ़िल्म में वैसे कुल ८ गानें हैं, और हर एक में कुछ ना कुछ बात ज़रूर है, और शायद इसी वजह से हम इस फ़िल्म के गानें सुनते और सुनवाते चले जा रहे हैं।

सुजॉय - फ़िल्म की कहानी भी शायद रॊक बैंड पर आधारित है। सलमान ख़ान और अजय देवगन की दोस्ती नज़र आएगी इस फ़िल्म में। 'हम दिल दे चुके सनम' के बाद शायद इसी फ़िल्म में ये दोनों साथ साथ नज़र आएँगे। अच्छा, आज किस गीत को आप चुन लाए हैं?

सजीव - "बरसो रे", जिसे गाया है विशाल दादलानी और रूप कुमार राठौड़ ने। याद दिला दूँ कि इस फ़िल्म में विशाल-शेखर का नहीं बल्कि शंकर अहसान लॉय का संगीत है।

सुजॉय - यह आप ने अच्छी बात की तरफ़ इशारा किया है। एक संगीतकार का किसी दूसरे संगीतकार से अपनी फ़िल्म में गानें गवाना बहुत बड़ी और स्पोर्टिंग्‍ स्पिरिट वाली बात होती है। विशाल से राजेश रोशन तक ने गानें गवाए हैं फ़िल्म 'क्रेज़ी फ़ोर' में।

सजीव - शायद इसी वजह से कि बहुत दम है विशाल की आवाज़ में। एक जो रॉक की फ़ील होती है न, उसे हर गायक नहीं निभा सकते। विशाल और के.के जैसे गायक आज के दौर में इस तरह के रॊक शैली के गीतों को बख़ूबी निभाते हैं। वैसे मैं व्यक्तिगत तौर पर इनकी आवाज़ का कायल नहीं हूँ, पर लगता है हमारे सभी संगीतकार उनके जबरदस्त फैन बन चुके हैं.

सुजॉय - हाँ, और इस गीत में भी वही रॉक अंदाज़ है। पर्काशन और माडर्न साज़ों का भरपूर इस्तेमाल हुआ है। पूरे जोश और ज़िंदादिली से इस गीत को हर एक कलाकार ने निभाया है। बेशक़ इस गीत को युवा पीढ़ी को आकृष्ट करने के लिए बनाया गया होगा। जैसे जैसे गीत आगे बढ़ती है, उसमें देसीपन बढ़ती चली जाती है। और तब देती है सुनाई रूप कुमार राठौड़ की आवाज़ और एक नाज़ुकी सी छा जाती है गीत में।

सजीव - और अंत में एक बार फिर से वही रॉक अंदाज़। रॉक होते हुए भी गीत समाप्त होता है "हनुमान की जय" के साथ। और यही अंतिम हिस्सा इस गीत एक साधारण गीत ख़ास बना देता है तो चलो सुनते हैं यह गीत। ये गानें हम पहली पहली बार सुन रहे हैं, इसलिए शायद एक ही बार में बहुत अच्छा ना लगे सुनने में, लेकिन धीरे धीरे हो सकता है कि हमारे कानों से होते हुए ये दिल में भी जगह बना लें। देखते हैं क्या होता है, फिलहाल सुनते हैं यह गीत

बरसो (लन्दन ड्रीम्स)
आवाज़ रेटिंग -****



TST ट्रिविया # 18- लन्दन ड्रीम्स के निर्देशक ने अपनी एक हिट फिल्म में एक मशहूर होली गीत फिल्माया था, कौनसा था ये गीत और कौन थे इस गीत के संगीतकार ?

आवाज़ की टीम ने इन गीतों को दी है अपनी रेटिंग. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसे लगे? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीतों को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

शुभकामनाएँ....



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Monday, September 28, 2009

जश्न है जीत का...सा रे गा मा चुनौती से नाबाद लौटे प्रोमिसिंग गायक अभिजीत घोषाल अपने "ड्रीम्स" लेकर अब पहुँच गए हैं "लन्दन"

ताजा सुर ताल (25)

ताजा सुर ताल में आज सुनिए उभरते हुए गायक अभिजीत घोषाल का "लन्दन ड्रीम्स"

सुजॉय- सजीव, क्या आपने एक बात पर ग़ौर किया है?

सजीव- कौन सी बात?

सुजॉय - यही कि आजकल जो भी फ़िल्में बन रही हैं, उनमें से ज़्यादातर के शीर्षक अंग्रेज़ी हैं। जैसे कि 'ब्लू', 'ऑल दि बेस्ट', 'वेक अप सिद', 'व्हट्स योर राशी?', 'वांटेड', 'थ्री', वगैरह वगैरह ।

सजीव- बात तो सही है तुम्हारी। तो क्या आज हम किसी ऐसी ही फ़िल्म का गीत सुनवाने जा रहे हैं जिसका शीर्षक अंग्रेज़ी में है?

सुजॉय - बिल्कुल ठीक समझे आप। आज हम चर्चा करेंगे 'लंदन ड्रीम्स‍' की और इस फ़िल्म का एक गीत भी बजाएँगे। इस फ़िल्म के निर्माता हैं आशिन शाह, निर्देशक हैं विपुल शाह, संगीत शंकर अहसान लोय का, गीतकार प्रसून जोशी, और इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं सलमान ख़ान, अजय देवगन, आसिन थोट्टुम्कल, रणविजय सिंह, बृंदा पारेस्ख, ओम पुरी, ख़ालिद आज़्मी और आदित्य रोय कपूर।

सजीव- यानी कि मल्टि-स्टारर फ़िल्म है यह। और ये जो रणविजय है, ये वही है ना MTV Roadies वाले?

सुजॉय- हाँ बिल्कुल वही है।

सजीव- पिछले साल 'रॉक ऑन' ने मास और क्लास दोनों से तारीफ़ें लूटी थी, और फ़रहान अख़्तर की भी काफ़ी सराहना हुई। तो इसी के मद्देनज़र विपुल शाह ने तय किया कि वो भी इसी फोर्मुले को अपनाएँगे।

सुजॉय - कौन सा फार्मूला सजीव?

सजीव- यही बैंड्स+ म्युज़िक + ड्रामा, और क्या!

सुजॉय - अच्छा! और इसीलिए 'रॉक ऑन' वाले संगीतकार तिकड़ी को ही लिया गया है।

सजीव- हो सकता है, लेकिन मैने तो सुना है कि क्योंकि इस फ़िल्म का एक अहम पक्ष संगीत का रहेगा, इसीलिए निर्माता चाहते थे कि ए. आर. रहमान इसका म्युज़िक करें, लेकिन बात बन नहीं पायी।

सुजॉय - अच्छा, खैर शंकर एहसान लॉय भी निराश करने वालों में से नहीं हैं, मैंने भी इस अल्बम के सभी गीत सुनें हैं और मेरे ख्याल से ये इस साल की बेहतरीन अल्बम्स में से एक है, जिसमें में लगभग सभी गीत एक से बढ़कर एक हैं, पर ताज्जुब इस बात का है कि फिल्म के कुल ८ गीतों में से किसी में भी फीमेल स्वर नहीं है....सोचता हूँ कि आखिर आसीन कर क्या रही है फिल्म में :), हाँ एक बात और, बहुत से नए गायकों ने इन गीतों को अपनी आवाज़ दी है, धुरंधर शंकर, रूप कुमार राठोड और राहत फतह अली खान आदि के साथ साथ...

सजीव - हाँ और उन्हीं नए गायकों में से एक आज तुम्हारे और मेरे साथ इस कांफ्रेंस में जुड़ने भी वाले हैं ...जानते हो कौन हैं वो ?

सुजॉय - कहीं ये अभिजीत घोषाल तो नहीं... मैं जानता हूँ कि आपको उनका गाया "जश्न है जीत का..." इन दिनों बहुत भा रहा है... । वाकई ...यह एक 'पावर पैक्ड नंबर' है। इस गीत में आप इलेक्ट्रॊनिक और रॊक के साथ साथ अरबी संगीत की भी झलक पाएँगे। सजीव ये अभिजीत घोषाल वही हैं जो ज़ी टीवी के सा रे गा मा चैलेंज में लगातार १२ बार विजेयता बने थे। मेरे ख्याल से ये रिकॉर्ड अभी तक कोई तोड़ नहीं पाया है

सजीव - बिलकुल सुजॉय.....लीजिये आ गए हैं अभिजित....स्वागत है आपका...

अभिजित -शुक्रिया सुजॉय और सजीव आपका....मैं हिंद युग्म का हिस्सा तो पहले ही बन चुका हूँ....आप के इस कार्यक्रम की बदौलत आज मेरे इस ताजा गीत पर भी कुछ चर्चा हो जायेगी...

सजीव- अभिजीत सबसे पहले तो इस बड़ी फिल्म में इतने महत्वपूर्ण गीत के लिए बधाई....सा रे गा मा से लन्दन ड्रीम तक पहुँचने में काफी लम्बा समय लगा आपको...इस दौरान हुए संघर्ष के बारे में कुछ बताएं...

अभिजित- सजीव मैं आज आपको कुछ ऐसा बताता हूँ जो कभी मैंने किसी को नहीं बताया...जिन दिनों मैं सा रे गा मा के चैलेन्ज राउंड में लगातार ११ बार जीतने के बाद स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले चुका था, कई लोगों ने सोचा कि शायद चैनल वालों ने इन पर दबाब डाला होगा, पर ऐसा नहीं था. जब मैं अपनी ८ वीं चुनौती पार कर चुका था तब मेरी माँ की तबियत अचानक खराब हो गयी.....पर मुझे घरवालों ने यह बात मालूम नहीं होने दी, बाद में जब मुझे अपने दोस्त के माध्यम से उनकी नाज़ुक हालत की खबर मिली, तब मुझे तुंरत इलाहाबाद के लिए कूच करना पड़ा...आप शायद जानते होंगें कि मैं मूल रूप से इलाहाबाद का रहने वाला हूँ, बाद में हम लोग माँ के इलाज के लिए मुंबई आ गए.....आप यकीन नहीं करेंगें, मैं सुबह बिना किसी को बताये माँ को अस्पताल पहुंचा कर वहां उनके लिए पर्याप्त इंतजाम कर स्टूडियो पहुँचता था गाने के लिए, पर कभी किसी से मैंने इन सब का जिक्र नहीं किया....आप शायद यकीन नहीं करेंगें, सा रे गा मा के वो ११ एपिसोड जिसमें मैं जीता था उनमें से मैंने मात्र २ एपिसोडस का प्रसारण ही टी वी पर देख पाया, वो भी घर पर नहीं....एक एपिसोड तो मैंने लखनऊ के एक छोटे से ढाबे में रात का खाना खाते वक़्त देखा....वहां बैठे हुए लोग मेरी शक्ल देख कर कहने लगे - "अरे भाई साहब ये तो आपकी तरह लगता है", मैंने भी जवाब में बस इतना ही कहा -"हाँ मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है...", उस छोटे से ढाबे में बैठकर आप इससे ज्यादा क्या कह सकते थे...

सुजॉय - और अब माँ...?

अभिजीत - अभी इसी साल मार्च में मैंने उन्हें सदा के लिए खो दिया. उस हादसे के बाद लगभग ५ साल वो जीवित रही...मैं कभी भी ५ दिन से अधिक घर से दूर नहीं रहा...यही वजह है कि मैंने कभी USA का टूर नहीं किया, क्योंकि वहां जाने के लिए मुझे कम से कम १० दिन तक दूर रहना पड़ता...आप समझ सकते हैं ..ये सब मेरे लिए कितना मुश्किल था ...घर का एक कमरा अस्पताल सरीखा था ...माँ को निरंतर देखबाल की आवश्यकता थी...

सजीव - बिलकुल अभिजीत हम लोग समझ सकते हैं, आप अपने दुःख में हमें भी शरीक मानें...ये शायद आपकी माँ का आशीर्वाद ही है जो आज आप इस बड़ी फिल्म का हिस्सा हैं..

अभिजीत - हाँ बिलकुल, माँ को हमेशा ये लगता था कि मैं उनकी वजह से पीछे रह गया हूँ, हालाँकि ऐसा नहीं था, क्योंकि लगतार मैं काम कर रहा था. लुईस बैंक के साथ ढेरों प्रोजेक्ट का मैं हिस्सा रहा हूँ, उस्ताद विलायत राम जी, शिव जी, जैसे गुरुओं का हमेशा ही आशीर्वाद मिला मुझे, और अब तो मुझे लगता है जैसे माँ ने स्वर्ग में जाकर मेरी तकदीर के बचे कुचे दोष भी दूर हटा दिए हैं, तभी तो पहले किसान में "झूमो रे" मिला और अब ये लन्दन ड्रीम्स, ख़ुशी हुई जानकार कि आप सब को ये गीत पसंद आया है, मैं आपको बता दूं भारत में ही नहीं विदेशों से भी अल्बम को काफी अच्छे रीव्यूस मिल रहे हैं...

सुजॉय- आपने बंगला सा रे गा मा प् होस्ट भी किया....सोनू निगम, शान जैसे बड़े गायकों ने भी होस्टिंग के काम को बेहद मुश्किल करार दिया....आपका अनुभव कैसा रहा....

अभिजीत- मेरा तो बहुत बढ़िया रहा सुजॉय... ये एक ऐसा काम था जिसे मैंने बहुत एन्जॉय किया, उसकी वजह एक ये भी है कि मैं बच्चों से बहुत जल्दी खुद को जोड़ लेता हूँ, और बच्चे भी मुझसे बहुत जल्दी घुल मिल जाते हैं, यहाँ तक कि जब मेरी पहली एल्बम जो की बांगला में थी, उसमें मैंने उस कार्यक्रम के दो सबसे प्रोमिसिंग बच्चों से ओरिजनल गाने गवाए थे...आज भी वो सब मुझसे जुड़े हुए हैं और अपनी हर बात मुझसे शेयर करते हैं...

सजीव - अभिजीत, आप इलाहाबाद से हैं और अभी हाल ही में इस शहर पर एक गाना भी बना है....इलाहाबाद में बीते अपने शुरूआती दिनों पर कुछ हमारे श्रोताओं को बताईये...

अभिजीत - सजीव स रे गा मा में आने से पहले मैं एक बैंकर था, acedamically भी मेरा background बहुत स्टोंग रहा, मेरा दायरा हमेशा से ही ज़रा बुद्दी संपन्न लोगों का रहा, आप देखिये मेरे यदि १०० दोस्त होंगे तो उनमें से कम से कम ९० जन आई ऐ अस अधिकारी होंगे....मैं भी उन्हीं में से एक होता....अब ये मेरी खुशकिस्मती है कि मैं आज वो काम कर पा रहा हूँ जिसमें मेरी खुद की रूचि है, अभी ३ साल पहले ही मैंने नौकरी छोड़ी है, मैं हालाँकि बहुत जिम्मेदारी से काम को अंजाम देने वाला अधिकारी रहा, जब तक भी नौकरी की पर आप जानते हैं रचनात्मक लोग बहुत दिनों तक ९ से ५ के ढाँचे में बंध कर नहीं रह सकते...

सुजॉय - शंकर एहसान लॉय तक कैसे पहुंचना हुआ ?

अभिजीत - शंकर से लुईस के माध्यम से ही मिलना हुआ था, लुईस शंकर और शिव मणि का एक ग्रुप हुआ करता था आपको याद होगा "सिल्क" नाम का...शंकर जब पहली बार मिले तो खुद ही बोले..."अरे अभिजित आप तो वही....अरे क्या गाते हो भाई....". वो बहुत बड़े कलाकार हैं. आप जानते हैं कि इंडस्ट्री में निर्माताओं को विश्वास दिलाना बहुत मुश्किल होता है. पर विपुल जी को जब शंकर ने मेरा गीत सुनाया तो भाग्यवश उन्हें भी पसंद आ गया...

सजीव - इस फिल्म में दो बड़े स्टार हैं आपका गीत इस पर फिल्माया गया है....

अभिजीत - सच कहूँ तो मुझे भी अभी तक पक्का नहीं पता, पर शायद ये गीत अजय देवगन पर होना चाहिए....फिल्म की कहानी के हिसाब से....

सुजॉय - जब गीत रिकॉर्ड हो रहा था, तब कैसा मौहौल था स्टूडियो में उस बारे में कुछ बताईये....शंकर ने क्या टिपण्णी की जब गीत ख़तम हुआ.....क्या गीतकार प्रसून भी वहां मौजूद थे..

अभिजीत- नहीं प्रसून तो मौजूद नहीं थे....पर उनका लिखा हुआ मैंने पढ़ा...और बस करीब २० मिनट में गाना रिकॉर्ड हो गया...शंकर भाई ने रिकॉर्डिंग के बाद कहा कि अभिजीत तुमने बहुत ही अच्छा गाया.....मैंने भी उनसे कहा....कि गीत ये पंक्तियाँ देखिये.....

छाले कई, तलवों में चुभे
भाले कई, जलती हुई कहीं थी जमींन,
ताले कई, दर्द संभाले कई,
हौंसलों में नहीं थी कमी,
हम अभी अड़ गए, आँधियों से लड़ गए,
मैंने धकेल के अँधेरे, छीन के ले ली रोशिनी,
मेरे हिस्से के थे सवेरे, मेरे हिस्से की जिन्दगी....

बिलकुल मुझे अपने जीवन की कहानी लगी...गाते हुए भी, और मेरे ही क्या आपकी भी...मेरा मतलब जो जो हम जैसे संघर्षशील कलाकार हैं उन सब का है ये गीत....

सजीव - बिलकुल सही है अभिजीत...अच्छा...इस फिल्म में आपके अलावा भी कुछ नए गायकों ने अपनी आवाज़ मिलायी है, जैसे "खानाबदोश" मोहन की आवाज़ में बहुत खूब जमा है, पंजाबी गायक फिरोज़ खान का भी एक गीत. खुद शंकर ने गाया है गीत "ख्वाब" जिसकी कुछ पंक्तियाँ भी आपको बहुत पसंद है ....

अभिजीत - हाँ ये पंक्तियाँ इस फिल्म का भी सार है और कुछ कुछ मेरी अपनी सोच भी इनसे मिलती है. आप भी देखिये -

मंजिलों पे त्यौहार है,
लेकिन वो हार है, क्या ख़ुशी अपनों के बिन,
है अधूरी हर जीत भी सरगम संगीत भी
अधूरा है अपनों के बिन,
ख्वाबों के बादल छाने दो लेकिन,
रिश्तों की धूप बचा के बरसना,
कहती है हवाएं, चूम ले गगन को,
पंखों को खोल दो छोड़ दो गरजना.....


सुजॉय -वाह क्या बात है अभिजीत...और कौन कौन सी फिल्में हैं आने वाली जिसमें हमें आपकी आवाज़ सुनने को मिलेगी

अभिजित - प्रोजेक्ट तो बहुत से हैं पर जब तक मुक्कमल न हो जाएँ उनके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता....हाँ पर मैं आपको बता दूं की बहुत जल्दी यानी कि दिसम्बर जनवरी के आस पास मैं और आप एक बड़े प्रोजेक्ट पर यहाँ बैठे बात कर रहे होंगें.

सजीव - अभिजीत उन दिनों जब आप सा रे गा मा में परफोर्म करते थे तब हम भी उन श्रोताओं में से थे जो आपकी जीत के लिए SMS किया करते थे....आप आपको इस बड़ी फिल्म के लिए गाते हुए देखकर बहुत अधिक ख़ुशी हो रही है....आने वाला वक़्त हिंदी सिनेमा के शीर्ष गायकों की श्रेणी में आपका भी नाम जोड़े....स्वीकार करें मेरी सुजॉय और तमाम हिंद युग्म टीम की तरफ से ढेरों शुभकामनाएँ...

अभिजीत - शुक्रिया सजीव और सुजॉय....मेरी तरफ से भी हिंद युग्म परिवार के सभी सदस्यों को ढेर सारा प्यार

सुजॉय - तो दोस्तों सुनिए लन्दन ड्रीम्स से अभिजीत घोषाल का गाया ये शानदार गीत, "जश्न है जीत का", याद रखिये ये सिर्फ एक डेमो उद्देश्य से मात्र ३२ kbps की क्वालिटी पर आपके लिए बजाय जा रहा है, उच्च क्वालिटी में सुनने के लिए ओरिजनल एल्बम ही खरीदें.



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 4 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

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