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Monday, January 14, 2013

विशाल और गुलज़ार की जोड़ी है पूरे धूम में

प्लेबैक वाणी -29 -संगीत समीक्षामटरू की बिजली का मंडोला 



कहने की जरुरत नहीं कि जब भी गुलज़ार और विशाल एक साथ आते हैं, संगीत प्रेमियों की तो लॉटरी सी लग जाती है. इस बार ये साथ आये हैं मटरू की बिजली का मंडोला लेकर. अब जब नाम ही इतना अनूठा हो तो संगीत से उम्मीद क्यों न हों, तो चलिए देखते हैं माचिस से सात खून माफ तक लगातार उत्कृष्ट संगीत देने वाली इस जोड़ी की पोटली में अब नया क्या है...

एल्बम खुलता है शीर्षक गीत से, जिसके साथ एक लंबे समय बाद गायक सुखविंदर की वापसी हुई है. संगीत संयोजक रंजीत बारोट ने भी उनका साथ दिया है, पर ये गीत पूरी तरह सुखविंदर का ही है. रिदम जबरदस्त है और धुन इतनी सरल है कि सुनते ही जेहन में बस जाता है. गुलज़ार ऐसे गीतों में भी अपने शब्दों को खास अंदाज़ से पेश करने में माहिर हैं. गीत मास और क्लास दोनों को प्रभावित करने में सक्षम है.

अगला गीत खामखाँ यूँ तो एक प्रेम गीत है. जिसकी धुन बेहद मधुर है. संगीत संयोजन सरल और सुरीला है और विशाल की आवाज़ गीत पर पूरी तरह से दुरुस्त भी. कोई और संगीतकार होते तो शायद इस गीत को एक सरल प्रेम गीत ही बनाये रखते मगर विशाल ने गीत के दूसरे हिस्से में प्रेम देहाती के स्वर का इस्तेमाल किया है हरियाणवी लोक गीत अंदाज़ में जिसके आते ही गीत का मूड कुछ और देसी हो जाता है और अंत में एक शानदार फ्यूशन एफ्रो स्टाइल का. वाह क्या गीत है...साल की शुरुआत में ही इतना शानदार गीत सुनकर मन बाग बाग हो गया.

विशाल अपनी गायिका पत्नी रेखा भारद्वाज की आवाज़ को बहुत खूब पहचानते हैं यही वजह है कि वो सात खून माफ में रेखा से डार्लिंग भी गवाते हैं और येशु भी. प्रस्तुत एल्बम में भी जहाँ रेखा का बिंदास रूप दिखता है ओए बॉय चार्ली में तो वहीँ उनकी आवाज़ में बादल उठायो भी है. ओए बॉय की बात करें तो ये एक मस्त डांस नंबर है. जहाँ शंकर महादेवन ने जानलेवा रूप अख्तियार किया है, बंटी और बबली के कजरारे के बाद उनका ये रूप देखना सुखद लगा, साथ में मोहित चौहान भी हैं.

बादल उठायो में तो रेखा ने कमाल ही कर दिया है. शब्द हरियाणवी लहजे के हैं मगर रेखा कहाँ पीछे रहने वाली थी. उसपर संगीत संयोजन भी उत्कृष्ट है. एल्बम का एक और यादगार गीत.

लूटने वाले गीत एक बगावत का गीत है जहाँ किसान क्रूर जमींदारों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं. यहाँ सुखविंदर के साथ हैं मास्टर सलीम, जिनकी आवाज़ का फ्लेवर एकदम अनूठा ही है. गुलज़ार साहब के शब्दों में उफान भी है और बागी तेवर भी. लंबे समय तक याद रखे जाने वाला गीत.

इन गीतों के अलावा एल्बम में पंकज कपूर, इमरान खान और प्रेम देहाती की आवाजों में कुछ हरियाणवी लोक अंदाज़ के मिसरे हैं जिनमें भरपूर छेड़छाड़ है, कुछ रागणीयां भी है जो फिल्म के देसी कलेवर को और सुदृढ़ता देते हैं.

संगीत प्रेमियों के लिए नए साल का तोहफा है मटरू की बिजिली का मंडोला. इस एल्बम को रेडियो प्लेबैक दे रहा है ४.१ की रेटिंग.                   



यदि आप इस समीक्षा को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:



Sunday, November 23, 2008

संगीत जगत की नई सुर्खियाँ

भारत-पाक रॉक बैंड समागम

हिंदुस्तान के हिन्दी रॉक बैंड "यूफोरिया" (धूम पिचक और माये री से मशहूर) ने पाकिस्तानी बैंड स्ट्रिंग्स के साथ जोड़ बनाने के बाद अब एक और पाकिस्तानी बैंड "नूरी" के साथ अपने नए एल्बम पर काम शुरू कर दिया है. पाकिस्तान में हुए एक सम्मान समारोह में यूफोरिया के सदस्य नूरी के अली नूर और अली हमजा बंधुओं से मिले थे. अगस्त में नूरी की टीम भारत दौरे पर भी आई थी. पाकिस्तान के इस बेहद मशहूर बैंड के साथ काम कर यूफोरिया के सदस्य काफ़ी उत्साहित हैं. एक गीत "वो क़समें" है जो आधा भारत और आधा पाकिस्तान में फिल्माया जाएगा. पहली बार पाकिस्तान की किसी बड़ी कंपनी द्वारा किसी हिन्दुस्तानी रॉक बैंड का एल्बम निकला जा रहा है, जो कि निश्चित ही एक अच्छी शुरुआत है.


जेथ्रो तुल और अनुष्का की बेजोड़ जुगलबंदी

मशहूर ब्रिटिश रॉक समूह जेथ्रो तुल अपने एक सप्ताह के भारत दौरे पर हैं, ३० नवम्बर को दिल्ली के प्रगति मैदान में सितार वादिका अनुष्का शर्मा के साथ जुगलबंदी के बाद ये ६ सदस्यया समूह कोलकत्ता, मुंबई, बंगलोरु और हैदराबाद की यात्रा करेगा. १९६७-६८ में गठित हुए इस समूह की खासियत इनके गायन के अंदाज़ के साथ साथ टीम प्रमुख इआन एंडरसन का बांसुरी वादन भी है. हालाँकि एंडरसन का ये पांचवां भारत दौरा है पर ये पहली बार है जब वो पंडित रवि शंकर की सुपुत्री के साथ ताल मिला रहे हैं. इससे पहले वो पंडित हरी प्रसाद चौरसिया जी के साथ भी मंच बाँट चुके हैं. यदि आप उपरोक्त शहरों में हैं तो इस अवसर को जाया मत होने दें.


बॉलीवुड अभिनेत्रियों की नई आवाज़

बॉलीवुड के ताज़ा हिट्स "ठा करके" (गोलमाल रिटर्न), "मेरी एक अदा शोला सी" (किड्नाप) और जोनी गद्दार और वेल्कम के शीर्षक गीत को अपनी आवाज़ देने वाली पार्श्व गायन् की दुनिया की नई सनसनी हैं आकृति ककर. टेलीविजन के एक टेलेंट प्रतियोगिता में जीतने के बाद भी आकृति के लिए बॉलीवुड के दरवाज़े नही खुले, पर परिवार का सहयोग निरंतर बना रहा. दीपल शाह पर फिल्माए गए "रंगीला रे" के रीमिक्स ने आकृति को थोडी बहुत पहचान जरूर दी पर वो ख़ुद मानती हैं कि रीमिक्स गाकर कोई भी अपने हुनर को भरपूर तरीके से पेश नही कर सकता. शंकर एहसान और लोय के लिए गाये गीत "छम से " ने उन्हें सही मौका मिला. कैटरिना कैफ के लिए आदर्श आवाज़ मानी जा रही आकृति अपनी इस शुरूआती सफलता से बेहद खुश है, आने वाली बिल्लू बार्बर, तो बात पक्की और लव हुआ जैसी फिल्मों में हम आकृति की आवाज़ का लुत्फ़ उठा सकेंगें, साथ ही आकृति शंकर महादेवन के साथ एक एल्बम पर भी काम कर रही है. ख़ुद अपने दम पर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में जुटी आकृति को हिंद युग्म आवाज़ की शुभकामनायें.


भव्य है युवराज का संगीत भी

देश भर में चुनावों की सरगर्मियाँ जोर पकड़ रही हैं. युवाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित करने के लिए इन दिनों ए आर रहमान के मशहूर गीत "पप्पू कांट डांस" की तर्ज पर एक पैरोडी गीत बना कर हर जगह बजाया जा रहा है, साथ ही चुनाव आयोग ए आर को व्यक्तिगत तौर पर भी आकर इस मुहीम में शामिल होने की फरमाइश कर चुका है. यूँ भी इन दिनों ए आर की नई फ़िल्म युवराज का संगीत, संगीत प्रेमियों पर जादू चला रहा है. शो-मैन सुभाष घई की इस फ़िल्म का आधार ही संगीत है.फ़िल्म के सभी प्रमुख किरदार किसी न किसी रूप में संगीत से जुड़े हुए दिखाए गए हैं और रहमान ने अपने संगीत से इन सभी किरदारों को अलग अलग रंग दिए हैं. दिल से और साथिया जैसी फिल्मों के बाद गुलज़ार -रहमान एक बार फ़िर अपनी सफलता को दोहराने में कामियाब हुए हैं. अपनी भव्यता और संगीत की मधुरता के लिए ये फ़िल्म देखी जा सकती है.

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