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Sunday, January 11, 2009

संगीत के रियल्टी शो में अब नही नज़र आयेंगें शान

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (8)

संगीत मददगार है केलास्ट्रोल कम करने में भी

अगर कोई बीमार व्यक्ति ३० मिनट प्रतिदिन अपनी पसंद का संगीत सुनने में लगाता है तो ये सिर्फ़ उसे मानसिक रूप से आराम नही देता, बल्कि शारीरिक रूप से भी बेहद फायदेमंद साबित होता है, ऐसा अमेरिका में हुए ताज़ा रिसर्च से प्राप्त परिणाम बताते हैं. संगीत आपके रुधिर धमनियों को साफ़ करने में भी मददगार साबित होता है. इन नतीजों के मुताबिक आपके मन का संगीत रुधिर धमनियों में नैट्रिक ऑक्साइड का संचार करता है जो रक्त ग्रथियाँ बनने से रोकने और हानिकारक केलास्ट्रोल को बनने से रोकने में सहायक साबित होते हैं. महँगी और नुकसानदायक दवाईयों से परेशान लोगों के लिए ये निश्चित ही अच्छी ख़बर है..वैसे अच्छा संगीत आपको आवाज़ पर भी सुनने को मिलता है.....तो चिंताओं को तज कर हमारे साथ संगीत का आनंद लें और स्वस्थ रहें.


खुश है अदनान

"मैं अपने सगीत में इस कदर व्यस्त रहा, कभी एक पियानिस्ट के तौर पर तो कभी बतौर गायक और संगीतकार, कभी अपनी एल्बम पर काम करने तो कभी उनकी मार्केटिंग आदि कामों ने मुझे कभी एक्टिंग के बारे में सोचने का मौका ही नही दिया. पर अब मैं अपने इस नए काम से बहुत संतुष्ट हूँ..." कहते हैं अदनान सामी, जिन्होंने अपने रोल के लिए अपना वज़न कई किलो घटा दिया. वैसे अदनान के लिए ये भी खुशी की बात है कि लंबे अन्तराल के बाद वो अभी हाल ही में अपने बेटे से मिले, दरअसल पत्नी जेबा बख्तियार (हिना फेम) से तलाक़ के बाद लगभग १० साल तक लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें अपने बेटे से मिलने की इजाज़त मिली है. अदनान इस मिलन का एक एक पल भरपूर जीना चाहते हैं...वैसे हमें भी आपकी फ़िल्म का इंतज़ार है अदनान...


कैलाश बंधेगें प्रणय सूत्र में...

अदनान की ही तरह हिंदुस्तान में सूफी गीतों के बेताज बादशाह कैलाश खेर भी आजकल बहुत खुश हैं. उनकी खुशी के दो कारण हैं, एक तो वो ग्लोबलफेस्ट २००९ के हिस्सा चुने गए हैं, दूसरा उनको अपना जीवन साथी आखिरकार मिल ही गया है, जी हाँ कैलाश फरवरी के अन्तिम सप्ताह में विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं, इस बाबत पूछे जाने पर कैलाश ने कहा कि वो इसे एक प्राइवेट अफेयर ही रखना चाहते हैं और इस सिलसिले में बहुत ज्यादा खुलासा नही करना चाहते. कोई बात नही कैलाश मुबारकबाद तो स्वीकार कर ही सकते हैं....


अलविदा रियलटी शोस को

७ सालों से संगीत रियलिटी शो का हिस्सा रहे शान अब छोटे परदे पर होस्टिंग करते नही नज़र आयेंगे. शान अपने गायन कैरियर को नई ऊँचाईयाँ देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों को अलविदा कहने का मन बना लिया है. उनका कहना है कि इन कार्यक्रमों में बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर बोलना पड़ता है जिससे आपका गला चोक हो जाता है और आपके गायन पर इसका असर साफ़ देखा जा सकता है. मेरा रियाज़ बिल्कुल छूट सा गया है....जो कि ग़लत है. मेरे लिए गायन अधिक महत्वपूर्ण है. मैंने पहले भी इसे छोड़ने का सोचा था, पर कुछ मजबूरियां ऐसी आ गई कि नही कर पाया...पर अब ये फैसला पक्का है....भाई हम तो यही कहेंगें कि शान आपका ये फैसला हमें तो बिल्कुल सही प्रतीत होता है...शायद हमारे श्रोता भी सहमत होंगें...


Wednesday, July 30, 2008

अलविदा इश्मित...

स्टार प्लस की संगीत प्रतियोगिता वायस आफ इंडिया के विजेता और पंजाबी के प्रसिद्ध गायक इश्मित सिंह की मंगलवार को डूबने से मौत हो गई, जिसके साथ ही हमने एक उभरती हुई आवाज़ को हमेशा के लिए खो दिया है.
उनके साथ बिताये लम्हों को याद कर रहे हैं, आवाज़ के लिए, लुधिआना से रिपोर्टर
जगदीप सिंह

ईश्वर का मीत हो गया इश्मीत
नाम-इश्मीत सिंह

जन्म-3 सितंबर 1989
उम्र-19 साल
एजूकेशन- बीकॉम, सेकेंड इयर, सीए अधूरी छोड़ी थी।
24 नवंबर 2007 को वॉयस ऑफ इंडिया बना, इसी दिन गुरु नानक देव जी का प्रकाशोत्सव था।
शौक-गायकी, कम्पयूटर इंटरनेट, स्पोट्र्स

आज मैं ऊपर, आसमां नीचे... यह गाना गाने वाला इश्मीत इतनी जल्दी आसमां के पार चला जाएगा, यकीन नहीं होता। हम जितना भी इस युवा गायक के बारे में सोचते हैं, उतनी ही मीठी यादें ताजा हो जाती हैं। 19 साल का यह फरिश्तों सा गायक जो खुद पानी की तरह था, जो हर हाल में खुद को ढाल लेता था, आखिर पानी की भेंट चढ़ गया। दूसरों के छोटे से दुख से उसकी आंखें छलक आती थीं। आज वह अपने चाहने वालों की आखों में ढेरों आंसू छोड़ गया।

सफर जिंदगी का

धर्म को समर्पित और एक कर्मठ परिवार में जन्मा इश्मीत बचपन से ही होनहार था। शास्त्री नगर स्थित घर के आसपास वह अपनी गायकी और रिज़र्व अंदाज़ के कारण बेहद मशहूर था.

बस जीतना था जुनून.

हर मैदान में जीतना उसका जुनून था। चाहे गायकी हो या पढ़ाई उसने हर जगह अच्छा प्रदर्शन किया। गुरु नानक पब्लिक स्कूल का स्टूडेंट रहा इश्मीत अपने दोस्तों में दोस्ती के साथ ही पढ़ाई में होशियारी के लिए भी जाना जाता था। यही वजह थी कि मुश्किल माने जाने वाले चार्टेड अकाउंटेंसी के कोर्स के शुरूआती एग्जाम उसने बहुत आराम से पास कर लिए थे। संस्थान के नियम बदलने की वजह से सीए न कर पाने का उसे अफसोस भी था। मुझे याद है कि एक निजी मुलाकात में उसने कहा था कि अब बीकॉम के साथ सीए नहीं कर पाऊंगा।

अधूरी रही महाराजा रणजीत सिंह बनने की चाहत.

इश्मीत की डील-डोल शख्सियत को देखकर बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता राज बब्बर ने उसे पंजाब के सबसे महान शहंशाह महाराजा रणजीत सिंह की किशोर अवस्था का रोल ऑफर किया था। साल के अंत में शुरू होने वाले सीरियल की शूटिंग उसने विदेश दौरे से लौट कर शुरू करनी थी। इश्मीत को बॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार उत्तम सिंह ने भी गाने का प्रस्ताव दिया था।

जगजीत के बेटे की याद में मिला पहला सम्मान

चोटी के गजल गायक जगजीत सिंह के मरहूम बेटे विवेक सिंह की याद में स्थापित किया गया पहला अवार्ड इश्मीत को दिया गया था। लुधियाना में हुए कार्यक्रम के दौरान अवार्ड प्राप्त करते हुए जहां इश्मीत फफक-फफक कर रो पड़ा था, वहीं खुद जगजीत और चित्रा सिंह की छलकती आखें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। इश्मीत सिंह की जिंदगी का ये यादगार पल था।

कंपनियों का भी बना चहेता

वॉयस ऑफ इंडिया बनने से पहले ही इश्मीत काफी लोकप्रिय हो गया था। कंपनियां भी उसे अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाने के लिए रुचि दिखा रही थीं। फाइनल से पहली ही सोनाटा कंपनी ने अपनी युवा घडिय़ों की रेंज उसी से लांच करवाई थी। कीर्ति लाल ज्यूलर ने उसे हीरों से नवाजा था, तो पंजाब स्टेट लॉजरीज ने भी उसे अपनी लॉटरीज का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था।

दुनिया घूमने को था उत्साहित

वॉयस ऑफ इंडिया बनने के बाद जब उसे 50 देशों में शो करने का कार्यक्रम दिया गया तो वह काफी उत्साहित था। उसका कहना था कि दुनिया भर में अपना टैलेंट इस तरह दिखाना खास तजुर्बा रहेगा।

मुंबई में नहीं लगा था दिल.

तरक्की और शोहरत की खातिर मुंबई गए इश्मीत का दिल अपने शहर और दोस्तों में बसा था। एक निजी मुलाकात में उसने कहा था कि मुंबई में तो अपने लिए वक्त ही नहीं मिलता चौबीस घंटे बस काम ही काम।

पब्लिसिटी से दूर

लुधियाना आने पर अक्सर इश्मीत घर में आराम करने और अपने दोस्तों के साथ समय बिताने को तरजीह देता था। कई बार परिवार के लोग चाहते भी थे कि वह मीडिया से इंटरेक्ट करे तो इश्मीत टालने की कोशिश करता था।

विकलांगों के साथ बिताया दिन

संवेदनशील इश्मीत को आम लोगों का दर्द काफी भावुक कर देता था। विकलांग दिवस पर इश्मीत रखबाग में पिकनिक मना रहे मंदबुद्धि और विकलांग बच्चों के पास पहुंच गया। वहां पर उनके साथ वक्त बिताने के साथ ही उन्हें कुछ कर दिखाने को प्रोत्साहित किया।

तिरंगे पर नहीं दिया ऑटोग्राफ

गायकी का दीवाना इश्मीत देश-भक्ति से सराबोर था। जीतने के बाद लुधियाना में एक कार्यक्रम के दौरान एक नन्हे प्रशंसक ने जब छोटे से तिरंगे पर उससे ऑटोग्राफ देने को कहा तो इश्मीत ने बच्चे को समझाया कि राष्ट्रीय झंडे के सम्मान को बरकरार रखने के लिए ऐसा नहीं करते।

कंपनी को झुकाया

गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में अरदास में किए वादे के मुताबिक इश्मीत अपनी पहली धार्मिक एलबम निकालना चाहता था, लेकिन उसकी कामर्शियल एलबम लाना चाहती थी। आखिर इश्मीत की भावनाओं के आगे झुकते हुए बिग म्यूजिक ने उसकी धार्मिक एलबम को गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में रिलीज किया।

नहीं मनेगा जन्मदिन का जश्न

तीन सितंबर को इश्मीत के जन्मदिन को लेकर सभी दोस्त उत्साहित थे। वायस आफ इंडिया बनने के बाद सभी ने उसका जन्मदिन ·का जश्न मनाने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन अब सबके चहरों पर उदासी छा गई है।


जगदीप सिंह
रिपोर्टर, लुधिआना

दोस्तों, याद करें इश्मित को, VOICE OF INDIA में उनके गाये उनके इस भावपूर्ण गीत के साथ -


Ishmit (Ishmeet) Singh: An unforgotten young voice of Punjab

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