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Thursday, February 25, 2010

'काव्यनाद' और 'सुनो कहानी' की बम्पर सफलता



हिन्द-युग्म ने 19वें विश्व पुस्तक मेले (जो 30 जनवरी से 7 फरवरी 2010 के दरम्यान प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित हुआ) में बहुत-सी गतिविधियों के अलावा दो नायाब उत्पादों का भी प्रदर्शन और विक्रय किया। वे थे प्रेमचंद की 15 कहानियों का ऑडियो एल्बम ‘सुनो कहानी’ और जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध स्वरूप का एल्बम ‘काव्यनाद’। ये दोनों एल्बम विश्व पुस्तक मेला में सर्वाधिक बिकने वाले उत्पादों में से थे। दोनों एल्बमों की 500 से भी अधिक प्रतियों को साहित्य प्रेमियों ने खरीदा। इस एल्बम के ज़ारी किये जाने से पहले हिन्द-युग्म के संचालकों को भी इसकी इस लोकप्रियता और सफलता का अंदाज़ा नहीं था। 1 फरवरी 2010 को प्रगति मैदान के सभागार में इन दोनों एल्बमों के विमोचन का भव्य समारोह भी आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ कवि अशोक बाजपेयी, प्रसिद्ध कथाकार विभूति नारायण राय और संगीत-विशेषज्ञ डॉ॰ मुकेश गर्ग ने भाग लिया। ‘काव्यनाद’ और ‘सुनो कहानी’ कहानी की इस सफलता के बाद ऑल इंडिया रेडियो के समाचार-प्रभाग के रितेश पाठक ने जब हिन्द-युग्म के प्रमुख संचालक शैलेश भारतवासी से प्रतिक्रिया माँगी तो शैलेश ने कहा-
लोग साहित्य के साथ हुए इन नये प्रयोगों को सराह रहे हैं। हमारे स्टॉल पर कई सारे ऐसे आगंतुक भी पधार रहे हैं जिन्होंने इन एल्बमों के बारे में अखबारों या वेबसाइटों पर पढ़ा और बिना ज्यादा पड़ताल के ही अपने और अपने मित्रों-सम्बंधियों के लिए ये एल्बम खरीद कर ले जा रहे हैं। हमारी पूरी टीम मेले के रेस्पॉन्स से बहुत खुश है।

इसके बाद हिन्द-युग्म से बहुत से स्कूलों-कॉलेजों ने ईमेल के द्वारा इन एल्बमों के सम्बंध में जानकारी माँगी है। कई विद्यालयों के प्राचार्यों ने यहाँ तक कहा कि ये अभिनव प्रयोग विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बहुत उपयोगी हैं और इन्हें हर विद्यार्थी और अभिभावक तक पहुँचाया जाना चाहिए। हिन्द-युग्म का मानना है कि साहित्य का तकनीक के साथ सकारात्मक ताल-मेल भी हो सकता है, बस हमारी दृष्टि साफ हो कि हमें साहित्य और भाषा को किस ओर लेकर जाना है।

कई ऐसे साहित्यप्रेमी भी मेले में हिन्द-युग्म के स्टॉल पर आये जिन्होंने पहले खरीदकर इन्हें सुना और फोन द्वारा या स्टॉल पर दुबारा आकर इनकी भूरी-भूरी प्रसंशा की। बहुत से लोगों ने नागार्जुन, धूमिल, मुक्तिबोध इत्यादि कवियों की कविताओं को संगीतबद्ध करने की सलाह दी। कइयों ने कहाँ कि ‘काव्यनाद’ जैसा प्रयोग ही किसी एक कवि की 10 या 10 से अधिक कविताओं को लेकर किये जाने की ज़रूरत है। वरिष्ठ कथाकार हिमांशु जोशी स्टॉल पर पधारे और कहा कि ऐसे कथाकारों की कहानियों को कथाकारों की ही आवाज़ में संरक्षित करने की ज़रूरत है जो बहुत वरिष्ठ हैं और जिनकी कहानियाँ महत्वपूर्ण हैं। हिन्द-युग्म ने पाठकों, श्रोताओं और साहित्यकारों को इस दिशा में नित नये प्रयोग करते रहने का विश्वास दिलाया।

हिन्द-युग्म ने अपनी कार्ययोजना में यह भी जोड़ा है कि इन एल्बमों को दुनिया भर के उन स्कूलों में ज़रूर से ज़रूर पहुँचाना है जहाँ हिन्दी प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक या प्राच्य भाषा के तौर पर पढ़ाई जाती है। दक्षिण भारत से आये एक हिन्दी के अध्यापक ने प्रेमचंद की कहानियों के एल्बम को गैरहिन्दी भाषियों के लिए हिन्दी भाषा सीखने और समझने का एक उपकरण भी माना।

हिन्द-युग्म के ये एल्बम होली के बाद भारत के सभी हिन्दी प्रदेशों के प्रमुख म्यूजिक स्टोर पर उपलब्ध कराये जाने की योजना बनाई है। हिन्द-युग्म ने इन एल्बमों को ऑनलाइन बेचने का भी प्रबंध किया है और मूल्य केवल लागत मूल्य के बराबर रखा है।

हिन्द-युग्म की आवाज़-टीम अपनी इस सफलता से बहुत उत्साहित है और नये और पुराने कवियों की कविताओं के साथ एक साथ प्रयोग करना चाहती है। हिन्द-युग्म वर्ष 2010 में कविता पर लघु फिल्म बनाने की भी योजना बना रहा है। हिन्द-युग्म कुछ महान कविताओं पर फिल्म निर्माण के बाद उसे दुनिया के सभी लघु फिल्म समारोहों में प्रदर्शित करना चाहती है। ‘काव्यनाद’ की कुछ संगीतबद्ध कविताओं को लेकर भी हिन्दी भाषा पर एक डाक्यूमेंटरी फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

‘काव्यनाद’ के बनने की कहानी भी अपने आप में अभूतपूर्व है। शैलेश बताते हैं- ‘मई 2010 में डैलास, अमेरिका से साहित्यप्रेमी आदित्य प्रकाश का फोन आया, बातों-बातों में उन्होंने कहा कि शैलेश आपकी आवाज़ टीम वाले इतने सारे गीतों को कम्पोज करते हैं, कभी उनसे कविता को संगीतबद्ध करने को कहिए। और उसी समय मैंने उनके साथ मिलकर गीतकास्ट प्रतियोगिता को आयोजित करने की योजना बनाई। आदित्य प्रकाश ने अपनी ओर से विजेताओं को नगद इनाम भी देने का वचन दिया। जब इस प्रतियोगिता के पहले अंक के लिए (यानी जयशंकर प्रसाद की कविता ‘अरूण यह मधुमय देश हमारा’ के लिए) प्रविष्टियाँ आईं तो मेरे साथ-साथ आदित्य प्रकाश भी बहुत खुश हुए। उन्होंने इन प्रविष्टियों को रेडियो सलाम नमस्ते के ‘कवितांजलि’ कार्यक्रम में बजाया और पूरी दुनिया के साहित्य प्रेमियों ने इस प्रयोग को सर-आँखों पर बिठा लिया। उसी समय आदित्य प्रकाश के साथ मिलकर हमने यह तय किया के छायावादी युगीन चारों स्तम्भ कवियों की 1-1 कविताओं के साथ यह प्रयोग किया जाय। इसके लिए शेर बहादुर सिंह, डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह और अशोक कुमार से सहयोग मिला और इन्होंने पहले आयोजन से दोगुनी राशि को इनाम में देने का हमारा आवेदन स्वीकार कर लिया और श्रोताओं ने खुद सुना कि गीकास्ट प्रतियोगिता के हर नये अंक की प्रविष्टियाँ अपने पिछले अंक से बेहतर थीं।“

शैलेश ने आगे बताया कि जब हमने छायावादी युगीन कवियों तक इस प्रयोग को सफल बना लिया तो आदित्य प्रकाश के साथ यह तय किया कि आने वाले विश्व पुस्तक मेला में क्यों न इन कविताओं को एक एल्बम निकाला जाय। हमें लगा कि एल्बम निकाले जाने के लिए 4 कविताएँ कम हैं इसलिए कमल किशोर सिंह, दीपक चौरसिया 'मशाल', डॉ॰ शिरीष यकुन्डी, डॉ॰ प्रशांत कोले, डॉ॰ रघुराज प्रताप सिंह ठाकुर और शैलेश त्रिपाठी की मदद से रामधारी सिंह दिनकर और मैथिली शरण गुप्त की एक-एक कविता को संगीतबद्ध किये जाने की प्रतियोगिता रखी गई। लेकिन इतने मात्र से तो एल्बम की समाग्री ही बनी, एल्बम को बज़ार तक लाने के लिए भी धन की आवाश्यकता थी। लेकिन मैं आदित्य प्रकाश, ज्ञान प्रकाश सिंह और बिस्वजीत का धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने इस काम के लिए भी हमारी हर सम्भव मदद की।

आवाज़ के संचालक सजीव सारथी कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि हमारे इन सभी साहित्यानुरागियों का सहयोग पहले की तरह यथावत बना रहेगा और और हम जल्द ही कुछ और अभिनव और पहले से कई गुना बेहतर गुणवत्ता के प्रयोग करेंगे। हमने काव्यनाद की समीक्षा की भी शुरूआत की है। काव्यनाद की समीक्षा अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने सुजॉय के साथ मिलकर 'ताज़ा सुर ताल' में की है। भविष्य में अन्य संगीत विशेषज्ञों से भी हम इसकी समीक्षा करवायेंगे।

Tuesday, December 15, 2009

इस बार नर हो न निराश करो मन को संगीतबद्ध हुआ

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-6: नर हो न निराश करो मन को

आज हम हाज़िर हैं 6वीं गीतकास्ट प्रतियोगिता के परिणामों को लेकर और साथ में है एक खुशख़बरी। हिन्द-युग्म अब तक इस प्रतियोगिता के माध्यम से जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर और मैथिलीशरण गुप्त की एक-एक कविता संगीतबद्ध करा चुका है। इस प्रतियोगिता के आयोजित करने में हमें पूरी तरह से मदद मिली है अप्रवासी हिन्दी प्रेमियों की। खुशख़बरी यह कि ऐसे ही अप्रवासी हिन्दी प्रेमियों की मदद से हम इन 6 कविताओं की बेहतर रिकॉर्डिंगों को ऑडियो एल्बम की शक्ल दे रहे हैं और उसे लेकर आ रहे हैं 30 जनवरी 2010 से 7 फरवरी 2010 के मध्य नई दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले 19वें विश्व पुस्तक मेला में। इस माध्यम से हम इस कवियों की अमर कविताओं को कई लाख लोगों तक पहुँचा ही पायेंगे साथ ही साथ नव गायकों और संगीतकारों को भी एक वैश्विक मंच दे पायेंगे।

6वीं गीतकास्ट प्रतियोगिता में हमने मैथिली शरण गुप्त की प्रतिनिधि कविता 'नर हो न निराश करो मन को' को संगीतबद्ध करने की प्रतियोगिता रखी थी। इसमें हमें कुल 9 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई। लेकिन इस बार हमारे निर्णायकों ने अलग-अलग प्रविष्टियों पर अपनी मुहर लगाई। तो निश्चित रूप से नियंत्रक के लिए मुश्किल होनी थी। अतः हमने तीन प्रविष्टियों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित करने का निश्चय है। आइए मिलते हैं विजेताओं से और उनके हुनर से भी।


कृष्ण राज कुमार

कृष्ण राज कुमार ने इस प्रतियोगिता की हर कड़ी में भाग लिया है। जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्रथम पुरस्कार, सुमित्रा नंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए द्वितीय पुरस्कार, महादेवी वर्मा के लिए भी प्रथम पुरस्कार। निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' के लिए भी इनकी प्रविष्टि उल्लेखनीय थी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'कलम! आज उनकी जय बोल' के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। और इस बार भी इन्होंने पहला स्थान बनाया है। कृष्ण राज कुमार जो मात्र 22 वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले 14 सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-




रफ़ीक़ शेख़

रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था। गीतकास्ट प्रतियोगिता में ही रफ़ीक़ शेख़ ने निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' को संगीतबद्ध करके दूसरा स्थान बनाया था।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-


(संगीत संयोजन, मिक्सिंग और और रिकॉर्डिंग- अनिमेश श्रीवास्तव)



श्रीनिवास / शम्पक चक्रवर्ती

श्रीनिवास

शम्पक
संगीतकार श्रीनिवास पांडा बहुत ही मेहनती संगीतकार हैं। हर बार किसी नये गायक को अपने कम्पोजिशन से जोड़ते हैं और उसे एक बड़ा मंच देते हैं। इस बार भी इन्होंने शम्पक चक्रवर्ती नामक युवा गायक को हिन्द-युग्म से जोड़ा है। शम्पक कोलकाता से ताल्लुक रखते हैं। 24 वर्षीय शम्पक के संगीत का शौक रखते हैं। बचपन से ही गा रहे हैं और मानते हैं कि यह कला उन्हें ईश्वरीय वरदान के रूप में मिली है।

मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार चार बार विजेता रह चुके हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-


इनके अतिरिक्त हम प्रतीक खरे, प्रो॰ (डॉ॰) एन॰ पाण्डेय, मधुबाला श्रीवास्तव, शरद तैलंग, सुषमा श्रीवास्तव, ब्रजेश दाधीच इत्यादि के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है।


इस कड़ी के प्रायोजक आयरलैंड के क्विन्स विश्वविद्यालय के शोधछात्र दीपक मशाल और उनके कुछ साथी हैं। यह हिन्द-युग्म का सौभाग्य है कि इस प्रतियोगिता के आयोजन में ऐसे ही हिन्दी प्रेमियों की वजह से इस प्रतियोगिता के आयोजन में कभी कोई बाधा नहीं आई।

Thursday, October 29, 2009

'नर हो न निराश करो मन को' को संगीतबद्ध कीजिए और जीतिए रु 7000 के नगद पुरस्कार

पिछले महीने हमने गीतकास्ट प्रतियोगिता में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'कलम, आज उनकी जय बोल' को संगीतबद्ध कविता करने की प्रतियोगिता आयोजित की थी। छठवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता के आयोजन की उद्‍घोषणा करने में हमें लगभग 20 दिनों का विलम्ब हुआ क्योंकि कोई प्रायोजक नहीं मिल पाया था। परंतु जहाँ चाह है, वहाँ राह है। दुनिया में साहित्य और भाषा प्रेमियों की कमी नहीं है। जब हमने छठवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता का प्रायोजक बनने का प्रस्ताव उत्तरी आयरलैण्ड के क्वीन'स विश्वविद्यालय के शोधार्थी दीपक मशाल के समक्ष रखा तो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इन्होंने यह ज़रूर कहा कि रु 7000 की धनराशि एक विद्यार्थी के लिए जुटाना थोड़ा मुश्किल है, तो ये अपने दो अन्य शोधार्थी मित्रों को इस आयोजन के प्रायोजकों में जोड़ना चाहेंगे। हमने इन तीन शोधार्थी मित्रों के साथ मिलकर छठवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'नर हो न निराश करो मन को' का निश्चय किया है।

दीपक मशाल एक कवि भी हैं और सितम्बर 2009 के यूनिकवि घोषित किये गये हैं। दीपक के अनुसार इनके दादाजी राम बिहारी चौरसिया 'बिहारी दद्दा' मैथिली शरण गुप्त के बहुत करीबी थे। बिहारी दद्दा दीपक मशाल को मैथिली शरण गुप्त से जुड़े बहुत-से संस्मरण सुनाते रहते हैं। दीपक मानते हैं कि इनके अंदर कविता का बीजारोपण इनके बिहारी दद्दा और इनके गुरू वैदेही शरण लोहकर 'जोगी' ने ही किया है।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 15 नवम्बर 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को क्वीन्स विश्वविद्यालय की ओर से क्रमशः रु 4000, रु 1500 और रु 1500 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन फन एशिया के कार्यक्रमों में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश रेडियो के किसी कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

मैथिली शरण गुप्त की कविता 'नर हो न निराश करो मन को'

नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रह के निज नाम करो।

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो!
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को।

सँभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना।
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को।।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे।
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे।
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को।।

Sunday, January 25, 2009

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन - जनवरी २००९

पॉडकास्टिंग की मदद से बना एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन


Doctor Mridul Kirti - image courtesy: www.mridulkirti.com
डॉक्टर मृदुल कीर्ति
कविता प्रेमी श्रोताओं के लिए प्रत्येक मास के अन्तिम रविवार का अर्थ है पॉडकास्ट कवि सम्मेलन। आवाज़ के तत्त्वावधान में इस बार हम लेकर आए हैं सातवाँ ऑनलाइन कवि सम्मेलन। आवाज़ के सभी श्रोताओं और पाठकों को नव वर्ष की शुभ-कामनाओं के साथ प्रस्तुत है २००९ का पहला पॉडकास्ट कवि सम्मलेन। इस बार भी इस ऑनलाइन आयोजन का संयोजन किया है हैरिसबर्ग, अमेरिका से डॉक्टर मृदुल कीर्ति ने।

आवाज़ की ओर से हर महीने प्रस्तुत किए जा रहे इस प्रयास में गहरी दिलचस्पी, सहयोग और आपके प्रेम के लिए हम आपके आभारी हैं। हमें अत्यधिक संख्या में कवितायें प्राप्त हुईं और हमें आशा है कि आप अपना सहयोग इसी प्रकार बनाए रखेंगे। इस बार भी हम बहुत सी कविताओं को उनकी उत्कृष्टता के बावजूद इस माह के कार्यक्रम में शामिल नहीं कर सके हैं और इसके लिए क्षमाप्रार्थी है। कुछ कवितायें अपनी श्रेष्ठता के बावजूद ख़राब रिकार्डिंग के कारण शामिल न हो सकीं। उनके छूट जाने से हमें भी दुःख हुआ है इसलिए हम एक बार फ़िर आपसे अनुरोध करेंगे कि कवितायें भेजते समय कृपया समय-सीमा का ध्यान रखें और यह भी ध्यान रखें कि वे १२८ kbps स्टीरेओ mp3 फॉर्मेट में हों और पृष्ठभूमि में कोई संगीत न हो। ऑडियो फाइल के साथ अपना पूरा नाम, नगर और संक्षिप्त परिचय भी भेजना न भूलें क्योंकि हमारे कार्यक्रम के श्रोता अच्छे कवियों के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं।

प्रबुद्ध श्रोताओं की मांग पर सितम्बर २००८ के सम्मेलन से हमने एक नया खंड शुरू किया है जिसमें हम हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य कवियों का संक्षिप्त परिचय और उनकी एक रचना को आप तक लाने का प्रयास करते हैं। जनवरी मास में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिन और राष्ट्र के गणतंत्र दिवस के अवसर पर इसी प्रयास के अंतर्गत इस बार हम सुना रहे हैं एक ऐसे कवि को जिन्हें कई मायनों में हिन्दी की खड़ी बोली के अग्रगण्य कवियों में गिना जाता है। जी हाँ, इस बार आपके सामने हैं तेजस्वी राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त। इनकी रचनाएं हिन्दी-भाषियों में समस्त विश्व में पढी और गाई जाती हैं। उनकी सुमधुर रचनाओं का आनंद उठाईये।

पिछले सम्मेलनों की सफलता के बाद हमने आपकी बढ़ी हुई अपेक्षाओं को ध्यान में रखा है। हमें आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि इस बार का सम्मलेन आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा और आपका सहयोग हमें इसी जोरशोर से मिलता रहेगा। यदि आप हमारे आने वाले पॉडकास्ट कवि सम्मलेन में भाग लेना चाहते हैं तो अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। कवितायें भेजते समय कृपया ध्यान रखें कि वे १२८ kbps स्टीरेओ mp3 फॉर्मेट में हों और पृष्ठभूमि में कोई संगीत न हो। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। पॉडकास्ट कवि सम्मेलन के अगले अंक का प्रसारण २२ फरवरी २००९ को किया जायेगा और इसमें भाग लेने के लिए रिकॉर्डिंग भेजने की अन्तिम तिथि है १५ फरवरी २००९

नीचे के प्लेयर से सुनें:


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)
VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis

हम सभी कवियों से यह अनुरोध करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे।

रिकॉर्डिंग करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। हिन्द-युग्म के नियंत्रक शैलेश भारतवासी ने इसी बावत एक पोस्ट लिखी है, उसकी मदद से आप सहज ही रिकॉर्डिंग कर सकेंगे।

अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 7. Month: January 2009.
कॉपीराइट सूचना: हिंद-युग्म और उसके सभी सह-संस्थानों पर प्रकाशित और प्रसारित रचनाओं, सामग्रियों पर रचनाकार और हिन्द-युग्म का सर्वाधिकार सुरक्षित है.

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