Monday, February 13, 2012

सिने-पहेली # 7

सिने-पहेली # 7 (13 फ़रवरी 2012)

रेडियो प्लेबैक इण्डिया के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार! दोस्तों, 'सिने-पहेली' की सातवीं कड़ी लेकर मैं हाज़िर हूँ। दोस्तों, 'सिने पहेली' के महाविजेता बनने की जो हमने योजना रखी है, उसमे थोड़ी तबदीली की ज़रूरत है, ऐसा हम सब महसूस कर रहे हैं। दरसल बात ऐसी है कि महाविजेता वही बनेगा जो ५०-वें अंक तक सबसे ज़्यादा अंक अर्जित करेगा। पर ज़रा सोचिए उन प्रतियोगियों का क्या जो २० या ४०-वे अंक से जुड़ने वाले होंगे। अब वो भला औरों के साथ कैसे कम्पीट करें? यानी कि ५० अंकों का जो सफ़र है महाविजेता बनने का, यह बहुत लम्बा है। इसलिए हमने यह निर्णय लिया है कि १० - १० अंकों में इस प्रतियोगिता को विभाजित कर दस अंकों के सेगमेण्ट्स बनाया जाए, और हर दसवें अंक के बाद उस सेगमेण्ट का विजेता घोषित कर दिया जाये। इस तरह से १००-वें अंक तक जो प्रतियोगी सबसे ज़्यादा सेगमेण्ट विजेता बना होगा, वही होगा 'सिने पहेली' का महाविजेता। आज सातवीं कड़ी है, देखते हैं दसवी कड़ी के बाद कौन बनता है इस पहले सेगमेण्ट का विनर? देखते हैं किसमे है दस का दम? चलिए शुरु किया जाए आज की 'सिने-पहेली'।


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सवाल-1: गोल्डन वॉयस

गोल्डन वॉयस में आज हम आपको सुनवाने जा रहे हैं हिन्दी फ़िल्मों के पहले दौर के एक जानेमाने गायक-अभिनेता की आवाज़। सुनिये गीत का यह अंश और पहचानिए गायक को।



सवाल-2: पहचान कौन!

दूसरे सवाल के रूप में आपको हल करने हैं एक चित्र पहेली का। नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए। चित्र देखकर आपको अंदाज़ा लगाना है गीत का। जी हाँ, बताइए यह किस गीत का दृश्य है? आपको बताने हैं गीत के बोल।



सवाल-3: सुनिये तो...


'सुनिये तो'.... में आज हम आपको सुनवा रहे हैं ९० के दशक के एक फ़िल्म के हिट गीत का शुरुआती संगीत। फ़िल्म में माधुरी दीक्षित ने अभिनय किया था। क्या आप बता सकते हैं यह कौन सा गीत है?



सवाल-4: बताइये ना!

और अब चौथा सवाल। हाल में "कोलावरी डी" ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया था। इस गीत का भावार्थ चाहे कुछ भी हो, क्या आप बता सकते हैं "कोलावरी डी" का क्या शाब्दिक अर्थ है? चलिए तीन ऑपशन्स आपको दे रहे हैं।
अ) प्रेम के लिए इतनी व्याकुलता क्यों है?
ब) हत्या करने के लिए इतना आक्रोश क्यों है?
स) हर तरफ़ जुदाई क्यों है?


सवाल-5: गीत अपना धुन पराई

और अब पाँचवा और आख़िरी सवाल। सुनिये इस विदेशी गीत को और बताइए कि वह कौन सा हिन्दी फ़िल्मी गीत है जिसकी धुन इस विदेशी लोक गीत की धुन से प्रेरीत है? और आपको यह भी बताना है कि मूल गीत किस देश का लोक गीत है। याद रहे दोनों जवाब सही होने पर ही अंक दिये जायेंगे।



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तो दोस्तों, हमने पूछ लिए हैं आज के पाँचों सवाल, और अब ये रहे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के कुछ आसान से नियम....

१. अगर आपको सभी पाँच सवालों के जवाब मालूम है, फिर तो बहुत अच्छी बात है, पर सभी जवाब अगर मालूम न भी हों, तो भी आप भाग ले सकते हैं, और जितने भी जवाब आप जानते हों, वो हमें लिख भेज सकते हैं।

२. जवाब भेजने के लिए आपको करना होगा एक ई-मेल cine.paheli@yahoo.com के ईमेल पते पर। 'टिप्पणी' में जवाब न कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे।

३. ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 7" अवश्य लिखें, और जवाबों के नीचे अपना नाम, स्थान और पेशा लिखें।

४. आपका ईमेल हमें शुक्रवार 17 फ़रवरी तक मिल जाने चाहिए।

है न बेहद आसान! तो अब देर किस बात की, लगाइए अपने दिमाग़ पे ज़ोर और जल्द से जल्द लिख भेजिए अपने जवाब। जैसा कि हमने शुरु में ही कहा है कि हर सप्ताह हम सही जवाब भेजने वालों के नाम घोषित किया करेंगे, और पचासवे अंक के बाद "महाविजेता" का नाम घोषित किया जाएगा।

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और अब 6 फ़रवरी को पूछे गए 'सिने-पहेली # 6' के सवालों के सही जवाब---

१. पहले सवाल 'गोल्डन वॉयस' में हमने आपको जो आवाज़ सुनवाई थी, वह आवाज़ थी गायिका उषा तिमोथी की।

२. 'चित्र-पहेली' में दिखाए गए चित्र में मुकेश के सामने की पंक्ति में उनके बायीं ओर खड़ी हैं लता मंगेशकर और दायीं ओर मीना कपूर।

३. 'सुनिये तो' में जिस गीत का अंतरा सुनवाया गया था, उसका मुखड़ा है "जानेमन जानेजान"। यह १९८३ की अप्रदर्शित फ़िल्म 'चोर मंडली' का गीत है जिसे मुकेश ने किशोर कुमार और दिलराज कौर के साथ मिलकर गाया था।

४. 'भूले-बिसरे' में हमारा सवाल था कि मुकेश और लता मंगेशकर को साथ में किस संगीतकार ने सर्वप्रथम गवाया था। सही जवाब फ़िल्म 'मजबूर' के लिए मास्टर ग़ुलाम हैदर।

५. 'गीत अपना धुन पराई' में जो विदेशी गीत सुनवाया था, उससे प्रेरीत हिन्दी गीत है फ़िल्म 'जिस देश में गंगा बहती है' का "आ अब लौट चलें"।

और अब 'सिने पहेली # 6' के विजेताओं के नाम ये रहे -----

1. प्रदीप शर्मा, दिली --- 5 अंक
2. पंकज मुकेश, बेंगलुरू --- 5 अंक
3. प्रकाश गोविन्द, लखनऊ --- 5 अंक
4. रीतेश खरे --- 2 अंक
5. क्षिति तिवारी, इन्दौर --- 1 अंक


आप सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई। अंक सम्बंधित अगर आप को किसी तरह की कोई शिकायत हो, तो cine.paheli@yahoo.com के पते पर हमें अवश्य सूचित करें। जिन पाठकों नें इसमें भाग लिया पर सही जवाब न दे सके, उनका भी हम शुक्रिया अदा करते हैं और अनुरोध करते हैं कि अगली पहेली में भी ज़रूर भाग लीजिएगा। तो आज बस इतना ही, अगले सप्ताह आपसे इसी स्तंभ में दोबारा मुलाक़ात होगी, तब तक के लिए सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, और अनुमति दीजिए अपने इस ई-दोस्त सुजॉय चटर्जी को, नमस्कार!

2 comments:

कृष्णमोहन said...

अरे वह! पहली बार पाँच अंक के तीन विजेता! सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई।

PANKAJ MUKESH said...

मैं! सिने पहेली को बहुत tah - ए - दिल से पसंद करता हूं और सुजॉय जी को धन्यवाद ​​भी deta हूँ, jinhone मेरी फरमाइश तथा सुझाव को स्वीकार किया. पार्श्वगायक मुकेश मेरे लिए जीवन के प्रेरणा है,उनके गीत हर किसी को पसंद आते हैं. मगर उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है की unhone अपनी ज़िंदगी को जिस अंदाज़ से जिया,जो मुझे लगता है की धरती के हर इंसान को ऐसे जीना चाहिए! आवारा हूं जैसा विश्व प्रसिद्ध गीत गा कर भी उनकी ज़िंदगी में unhone अनेक कठिनाइयों का सामना किया, मगर कभी भी इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहरया. kahte they मुझसे बहुत बेहतर गाने waale हैं, मुझमें ही कोई कमी होगी, mere काम में ही कोई कमी होगी. अपने दिन कितने ही Gardish में क्यों na हो मगर, जिस किसी से milte they मुस्कुरा कर! और खुश करके ही वे chhodte. कोई अजनबी भी मिला to दोस्त बना lete. कोई स्वाभिमान नहीं, naye kalakaaron को बढ़ावा देना, हर pareshan आदमी की मदद करना. मानवता क्या होती है? iske अटूट mishaal they श्री मुकेश चंद माथुर. मुकेश, अपने आखिरी दिन जब ताश के खेल में बाज़ी हार गए to कहे कल main ISSEY ज़्यादा जीत जाऊँगा! कभी हिम्मत नहीं haarna. अपने घर के पीछे गरीब लोगों की बस्ती में कंबल दान करना(ठंड के दिनों में). Maryaada poorshottam प्रभु राम की उपासना करना. हर सुबह ब्राह्मण moohurt में उठा कर स्नान कर रामायण का पाठ और आरती करना, फिर बगीचे में 5-10 मिनट फूल पत्ते से पक्षियों से बातें करना, उनकी भक्ति भाव तथा प्रकृति प्रेम को darshata है. कितनी अजीब बात है, unhone तुलसी रामायण ko record karwana 1973 में प्रारंभ किया मगर बीच में अधूरा राह गया फिर शेष (रामायण कांड) को पूरा किया 1976 में, यहाँ तक की अपनी जीवन की कुछ आखिरी दिनों (2 महीने) पहले पूर्ण किया. मुझे लगता है की iss कलियुग mein मुकेश भगवान के awtaar they, Jinhe picchle जन्म में कोई shaap की वजह से dhartee par आना पाडा, अपने shaap से मुक्त हो कर/ iss महान कार्य को पूर्ण कर तथा sabhi manaw जाती को jeewan की paribhasha शिखा है कर चले गए. tabhi to रामायण ke संपूर्ण hote hi agle महीने उनका swargwas हो गया. Doctoron ne कितना मन किया था की आपका gaanaa gaanaa hanikaarka हो sakta है / आपको aaraam की sakhata jarurat है, मगर unhone कहा नही prabandhkon का becharon का nuksan हो jayega और कनाडा / Amerika की bharteey जनता को main niraash karna नहीं chahata ... मेरा प्रयास केवल इतना था और आगे भी रहेगा की भारत का हर इंसान मुकेश jaisee ज़िंदगी jiye. मुकेश हम सब में है. बस jaroorat है to bas उनके dikhaye raston का paalan करने का. dhanyawaad!!

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