Friday, November 5, 2010

शुभ दीपवाली - जब पूरा आवाज़ परिवार एक सुर हुआ रफ़ीक शेख के साथ आपको बधाई देने के लिए

आवाज़ महोत्सव ओरिजिनल संगीत में गीत # २१

दोस्तों, क्या आपने कभी महसूस किया है कि दीपावली के आते ही कैसे अपने आप ही हमारे अंदर एक नयी सी खुशी, नयी सी आशा का संचार हो जाता है. यही इन त्योहारों की खासियत है कि ये वातावरण में एक ऐसी सकरात्मक ऊर्जा को घोल देते हैं कि हर कोई खुश और मुस्कुराता नज़र आता है. दोस्तों यूँ तो आज आपका मोबाइल, ई मेल इन्बोक्स आदि शुभ संदेशों से भरे हुए होंगें, पर जिस अंदाज़ में आज आपको "आवाज़" शुभकामना सन्देश देने जा रहा है, वो सबसे अनूठा अनोखा है. हमने अपने पुराने साथी संगीतकार/गायक रफीक शेख के साथ मिलकर एक गीत खास आपके लिए बनाया है, दिवाली की बधाईयों वाला. शब्द पारंपरिक है और संगीत संयोजन खुद रफीक का है. तो इस गीत को सुनिए और मुस्कुरा कर इस पवन त्यौहार का आनंद लीजिए. इस बार जन्मी ये सकारात्मकता अब यूँहीं हम सब के अंग संग रहें. सुख समृधि और खुशियों से हम सबके जीवन सजे. एक बार फिर आप सबको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ.



रफ़ीक़ शेख
रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था। बम्पर हिट एल्बम 'काव्यनाद' में इनके 2 कम्पोजिशन संकलित हैं।

Awaaz Originals # 21 - Shubh Deepwali
Lyrics - Traditional
Music & Voice - Rafique Sheikh

Creative Commons License
shubh deepawali-original song by Rafique Sheikh & Hind Yugm is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivs 3.0 Unported License.

4 comments:

आशीष मिश्रा said...

आपको भी सपरिवार दिपोत्सव की शुभकामनाएँ

इंदु पुरी गोस्वामी said...

अपनी आवाज में एक आवाज मेरी भी है ...सुनो.
हा हा हा
बिना बुलाये,बिना कहे मैं तो शामिल हो गई इस परिवार में .दीपावली की शुभकामनाएं दूँ? क्यों भाई शुभकामनाओं के लिए किसी स्पेशल दिन का होना जरूरी है? मेरी शुभकामनाएं तो सदा आपके साथ है.इश्वर आप सभी को जीवन की सारी खुशियाँ दे.खुशियों के जितने उजाले 'उसके' पास है वो आपके जीवन के रास्तों को ज्ग्मागाये और कोई अँधेरा आपकी राह में ना आये.
मैं हूँ ना
यूँ नही कहती कि बहुत अच्छी औरत या इंसान हूँ पर...जिन्हें प्यार करती हूँ उनके दुःख,दर्द मुझे तडपा देने के लिए काफी हैं उनके आंसू मेरी आँखों से बहने लगते हैं.दुश्मन को बद दुआ नही दी.दिल से उसका बुरा भी कभी नही चाहा.आप तो मेरे अपने -से हो गए हैं.मेरे शब्द शब्दों से खेलना मात्र नही जो हम लेखक लोग बहुत अच्छी तरह करना जानते हैं.ये मेरे मन,मेरी असलियत का प्रतिबिम्ब है बाबा
!
सचमुच ऐसिच हूँ मैं...एक भावुक मूर्ख
प्यार
गीत कल सुनूंगी.

रोमेंद्र सागर said...

दीपों के इस प्रकाश उत्सव पर आपको तथा समस्त आवाज़ एवं हिंदी युग्म परिवार को मेरी हार्दिक शुभेच्छाएं < सागर >

Anonymous said...

badaa accha prayaas.
diwali ki shubhkaamnaayein :)
-Kuhoo

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